कोटा में राठौर सोशल ग्रुप सोसायटी द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सहभागिता का अवसर मिला। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर यह आयोजन नवजीवन और शुभ परिवर्तन का सुंदर प्रतीक है। विवाह सूत्र में बंधे सभी नवदंपतियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। इस सराहनीय आयोजन के लिए संस्थान के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का अभिनंदन तथा नवविवाहित जोड़ों के सुखद और समृद्ध दांपत्य जीवन की मंगलकामना।
कोटा के दशहरा मैदान में हैहय क्षत्रिय कलाल संस्थान द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सहभागिता का अवसर मिला। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर यह आयोजन नए जीवन की शुरुआत और सामाजिक एकता का सुंदर प्रतीक है। विवाह सूत्र में बंधे सभी नवदंपतियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ सरस्वती की कृपा से उनके जीवन में विद्या, विवेक, संस्कार और सुख-समृद्धि बनी रहे, यही कामना है।
हैहय क्षत्रिय कलाल समाज ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, समानता के विस्तार और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में सराहनीय भूमिका निभाई है। शिक्षा, सेवा और सामाजिक सुधार के माध्यम से समाज का यह प्रयास प्रेरणादायी है। मेरा विश्वास है कि संगठित समाज ही राष्ट्र की प्रगति का सशक्त आधार बनता है। इस सफल आयोजन के लिए संस्थान के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सभी सहयोगियों को बधाई तथा नवदंपतियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना।
वीणावादिनी, हंसवाहिनी, शब्द-बुद्धि की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती के पवित्र उपासना-पर्व बसंत पंचमी की समस्त देशवासियों को हृदय से शुभकामनाएँ।
ऋतुराज बसंत का यह मधुर आगमन ग्रन्थों में वर्णित ऋतु-सौन्दर्य का अनुपम स्मरण कराता है, जब धरती पीताम्बर पहनकर नवजीवन की रश्मियाँ बिखेरती है और प्रकृति स्वयं एक जीवंत काव्य बनकर उमंग, उत्साह और नवीन सृजन की प्रेरणा देती है। कालिदास की काव्य-वर्षा, विद्यापति की भाव-सुरभि, महाप्राण निराला की सजीव पंक्तियाँ सभी ने बसंत को आनंद, ऊर्जा और नवजीवन का सेतु बताया है। प्रकृति का यह मधुर बसंतोत्सव नई उमंग, नया उत्साह और नव-सृजन की प्रेरणा लेकर हमारे जीवन में उतरता है, जो हमें नवीन ऊर्जा, सृजनशीलता और आनंद से परिपूर्ण कर देता है। इन्हीं अनुपम अनुभूतियों के मध्य माँ सरस्वती के चरण-कमलों में नमन, जिनकी कृपा ज्ञान, कला और विवेक की ज्योति से समस्त जगत् को आलोकित करती है। कामना हैं कि, उनकी करुणा से प्रत्येक हृदय में सृजन की शक्ति, विचारों में परिष्कार और जीवन में मंगल की छटा सदा प्रस्फुटित होती रहे।
कोटा में श्री राम धर्मार्थ चिकित्सालय के 31वें वार्षिकोत्सव में सम्मिलत हुआ। प्रभु श्रीराम का जीवन सेवा, मर्यादा, नैतिकता और समर्पण का प्रतीक है, और वही भाव इस चिकित्सालय की कार्यप्रणाली में भी स्पष्ट दिखाई देता है। बीते तीन दशकों से यह संस्थान मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानकर निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर रहा है। जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर हर जरूरतमंद तक उपचार और संवेदना पहुंचाना इसकी पहचान रही है। इस पुनीत कार्य से जुड़े ट्रस्ट पदाधिकारियों, चिकित्सकों और सभी सेवाभावी साथियों को हृदय से साधुवाद।
कोविड जैसे कठिन दौर में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने जिस समर्पण और साहस के साथ लोगों के जीवन की रक्षा की, वही हमारी मानवीय शक्ति का सच्चा स्वरूप है। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में कोटा चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में और सशक्त रूप से उभरेगा। सरकार, समाज और संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से स्वास्थ्य सुविधाएँ निरंतर बेहतर हो रही हैं और जरूरतमंदों तक सहायता पहुँच रही है। प्रभु श्रीराम की प्रेरणा से मानव सेवा का यह संकल्प और अधिक विस्तार पाए, यही कामना है।
संसदीय क्षेत्र कोटा स्थित कार्यालय में क्षेत्रवासियों से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना। प्राप्त विषयों के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संवाद ही ऐसा माध्यम है जिससे आमजन की बात प्रशासन तक सीधे पहुंचती है और समाधान की प्रक्रिया को गति मिलती है। यह प्रयास निरंतर रहेगा कि प्रत्येक नागरिक की समस्या का समयबद्ध निराकरण हो और जनता का विश्वास व्यवस्था में और अधिक सुदृढ़ बने।
उत्तर प्रदेश विधान भवन में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।
लोकतंत्र की आत्मा तभी सशक्त रहती है, जब सदन संवाद, मर्यादा और निष्पक्षता की भावना से संचालित हो। विधायिका जनता के भीतर इस भरोसे को और सशक्त करें कि उनकी आवाज यहां तक पहुँचेगी और समाधान का मार्ग भी इसी मंच से निकलेगा। आज तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड, पेपरलेस प्रक्रिया और AI ने हमारे विधानमंडलों को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाया है। विधायकों की क्षमता-वृद्धि, समितियों के सशक्तिकरण, बहुभाषी सुविधा और जनसहभागिता आधुनिक विधायिका की मुख्य आवश्यकताएं हैं।
86वें AIPOC में यह संकल्प लिया गया कि राज्य विधानमंडलों में वर्ष में न्यूनतम 30 बैठकें हों, ताकि जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं की अधिक से अधिक अभिव्यक्ति सदन के माध्यम से हो सकें। साथ ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक, तकनीक-सक्षम विधायिका, जनप्रतिनिधियों की क्षमता-वृद्धि और एक National Legislative Index बनाने का भी संकल्प लिया गया, जिससे विभिन्न विधानमंडलों के मध्य उत्तरदायित्व और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सके।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में हुआ सार्थक मंथन हमारी विधायिका को और अधिक आधुनिक, उत्तरदायी एवं जनकेंद्रित बनाने की दिशा में नए मार्ग प्रशस्त करेगा।
लखनऊ में 86वें AIPOC के दौरान उत्तर प्रदेश के लोकाचार को दर्शाते सांस्कृतिक कार्यक्रम में पीठासीन अधिकारियों और माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के साथ सम्मिलित हुए।
उत्तर प्रदेश विधान भवन में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। संसदीय लोकतंत्र को सफल, प्रभावी और सुदृढ़ बनाने की अत्यंत महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी पीठासीन अधिकारियों पर होती है। स्वतंत्रता के पश्चात् हमारे देश एवं इसके विभिन्न प्रदेशों के पीठासीन अधिकारियों ने अपने आचरण, व्यवहार और निष्पक्ष भूमिका के माध्यम से विश्व के सम्मुख यह सिद्ध किया है कि संवाद, विमर्श और मर्यादा पर आधारित संसदीय लोकतंत्र ही लोकतंत्र की सर्वोत्तम और सर्वाधिक सशक्त परंपरा है।
सदन का अध्यक्ष किसी भी राजनीतिक दल से निर्वाचित होकर आए, किंतु पीठासीन अधिकारी के रूप में उसका आचरण पूर्णतः न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और संतुलित होना चाहिए, ताकि सदन की गरिमा और विश्वास अक्षुण्ण बना रहे।
विधायिका के माध्यम से ही जनता की आवाज़ शासन तक पहुँचती है और जनसमस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है। ऐसे में राज्य विधानमंडलों में चर्चा और कार्यवाही के समय का निरंतर कम होना हम सभी के लिए विचार का विषय है। राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही के लिए पर्याप्त और सुनिश्चित समय निर्धारित होना आवश्यक है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि तीन दिवसीय इस सम्मेलन के दौरान इन महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा और इस दिशा में एक दृढ़ तथा सकारात्मक मत स्थापित किया जाएगा। सम्मेलन के लिए देश के विभिन्न राज्यों से सहभागी सभी माननीय पीठासीन अधिकारियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
Om Birla
कोटा में राठौर सोशल ग्रुप सोसायटी द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सहभागिता का अवसर मिला। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर यह आयोजन नवजीवन और शुभ परिवर्तन का सुंदर प्रतीक है। विवाह सूत्र में बंधे सभी नवदंपतियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। इस सराहनीय आयोजन के लिए संस्थान के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का अभिनंदन तथा नवविवाहित जोड़ों के सुखद और समृद्ध दांपत्य जीवन की मंगलकामना।
#kota
1 day ago | [YT] | 22
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Om Birla
कोटा के दशहरा मैदान में हैहय क्षत्रिय कलाल संस्थान द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सहभागिता का अवसर मिला। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर यह आयोजन नए जीवन की शुरुआत और सामाजिक एकता का सुंदर प्रतीक है। विवाह सूत्र में बंधे सभी नवदंपतियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। माँ सरस्वती की कृपा से उनके जीवन में विद्या, विवेक, संस्कार और सुख-समृद्धि बनी रहे, यही कामना है।
हैहय क्षत्रिय कलाल समाज ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, समानता के विस्तार और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में सराहनीय भूमिका निभाई है। शिक्षा, सेवा और सामाजिक सुधार के माध्यम से समाज का यह प्रयास प्रेरणादायी है। मेरा विश्वास है कि संगठित समाज ही राष्ट्र की प्रगति का सशक्त आधार बनता है। इस सफल आयोजन के लिए संस्थान के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सभी सहयोगियों को बधाई तथा नवदंपतियों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना।
#kota
1 day ago | [YT] | 21
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Om Birla
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमाम् आद्यां जगद् व्यापिनीम्
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् ।।
वीणावादिनी, हंसवाहिनी, शब्द-बुद्धि की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती के पवित्र उपासना-पर्व बसंत पंचमी की समस्त देशवासियों को हृदय से शुभकामनाएँ।
ऋतुराज बसंत का यह मधुर आगमन ग्रन्थों में वर्णित ऋतु-सौन्दर्य का अनुपम स्मरण कराता है, जब धरती पीताम्बर पहनकर नवजीवन की रश्मियाँ बिखेरती है और प्रकृति स्वयं एक जीवंत काव्य बनकर उमंग, उत्साह और नवीन सृजन की प्रेरणा देती है।
कालिदास की काव्य-वर्षा, विद्यापति की भाव-सुरभि, महाप्राण निराला की सजीव पंक्तियाँ सभी ने बसंत को आनंद, ऊर्जा और नवजीवन का सेतु बताया है।
प्रकृति का यह मधुर बसंतोत्सव नई उमंग, नया उत्साह और नव-सृजन की प्रेरणा लेकर हमारे जीवन में उतरता है, जो हमें नवीन ऊर्जा, सृजनशीलता और आनंद से परिपूर्ण कर देता है।
इन्हीं अनुपम अनुभूतियों के मध्य माँ सरस्वती के चरण-कमलों में नमन, जिनकी कृपा ज्ञान, कला और विवेक की ज्योति से समस्त जगत् को आलोकित करती है।
कामना हैं कि, उनकी करुणा से प्रत्येक हृदय में सृजन की शक्ति, विचारों में परिष्कार और जीवन में मंगल की छटा सदा प्रस्फुटित होती रहे।
1 day ago | [YT] | 35
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Om Birla
कोटा में श्री राम धर्मार्थ चिकित्सालय के 31वें वार्षिकोत्सव में सम्मिलत हुआ। प्रभु श्रीराम का जीवन सेवा, मर्यादा, नैतिकता और समर्पण का प्रतीक है, और वही भाव इस चिकित्सालय की कार्यप्रणाली में भी स्पष्ट दिखाई देता है। बीते तीन दशकों से यह संस्थान मानव सेवा को ईश्वर सेवा मानकर निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर रहा है। जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर हर जरूरतमंद तक उपचार और संवेदना पहुंचाना इसकी पहचान रही है। इस पुनीत कार्य से जुड़े ट्रस्ट पदाधिकारियों, चिकित्सकों और सभी सेवाभावी साथियों को हृदय से साधुवाद।
कोविड जैसे कठिन दौर में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने जिस समर्पण और साहस के साथ लोगों के जीवन की रक्षा की, वही हमारी मानवीय शक्ति का सच्चा स्वरूप है। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में कोटा चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में और सशक्त रूप से उभरेगा। सरकार, समाज और संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से स्वास्थ्य सुविधाएँ निरंतर बेहतर हो रही हैं और जरूरतमंदों तक सहायता पहुँच रही है। प्रभु श्रीराम की प्रेरणा से मानव सेवा का यह संकल्प और अधिक विस्तार पाए, यही कामना है।
जय श्रीराम।
#kota
#bundi
1 day ago | [YT] | 22
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Om Birla
संसदीय क्षेत्र कोटा स्थित कार्यालय में क्षेत्रवासियों से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना। प्राप्त विषयों के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संवाद ही ऐसा माध्यम है जिससे आमजन की बात प्रशासन तक सीधे पहुंचती है और समाधान की प्रक्रिया को गति मिलती है। यह प्रयास निरंतर रहेगा कि प्रत्येक नागरिक की समस्या का समयबद्ध निराकरण हो और जनता का विश्वास व्यवस्था में और अधिक सुदृढ़ बने।
#Kota
2 days ago | [YT] | 31
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Om Birla
उत्तर प्रदेश विधान भवन में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।
लोकतंत्र की आत्मा तभी सशक्त रहती है, जब सदन संवाद, मर्यादा और निष्पक्षता की भावना से संचालित हो। विधायिका जनता के भीतर इस भरोसे को और सशक्त करें कि उनकी आवाज यहां तक पहुँचेगी और समाधान का मार्ग भी इसी मंच से निकलेगा।
आज तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड, पेपरलेस प्रक्रिया और AI ने हमारे विधानमंडलों को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाया है। विधायकों की क्षमता-वृद्धि, समितियों के सशक्तिकरण, बहुभाषी सुविधा और जनसहभागिता आधुनिक विधायिका की मुख्य आवश्यकताएं हैं।
86वें AIPOC में यह संकल्प लिया गया कि राज्य विधानमंडलों में वर्ष में न्यूनतम 30 बैठकें हों, ताकि जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं की अधिक से अधिक अभिव्यक्ति सदन के माध्यम से हो सकें।
साथ ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आधुनिक, तकनीक-सक्षम विधायिका, जनप्रतिनिधियों की क्षमता-वृद्धि और एक National Legislative Index बनाने का भी संकल्प लिया गया, जिससे विभिन्न विधानमंडलों के मध्य उत्तरदायित्व और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सके।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन में हुआ सार्थक मंथन हमारी विधायिका को और अधिक आधुनिक, उत्तरदायी एवं जनकेंद्रित बनाने की दिशा में नए मार्ग प्रशस्त करेगा।
#AIPOC2026
3 days ago | [YT] | 36
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Om Birla
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से आज लखनऊ स्थित उनके सरकारी आवास पर भेंट हुई।
@myogiadityanath
3 days ago | [YT] | 35
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Om Birla
लखनऊ में 86वें AIPOC के दौरान उत्तर प्रदेश के लोकाचार को दर्शाते सांस्कृतिक कार्यक्रम में पीठासीन अधिकारियों और माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के साथ सम्मिलित हुए।
3 days ago | [YT] | 30
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Om Birla
लखनऊ स्थित लोकभवन में प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी से सौहार्दपूर्ण भेंट की।
5 days ago (edited) | [YT] | 40
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Om Birla
उत्तर प्रदेश विधान भवन में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
संसदीय लोकतंत्र को सफल, प्रभावी और सुदृढ़ बनाने की अत्यंत महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी पीठासीन अधिकारियों पर होती है। स्वतंत्रता के पश्चात् हमारे देश एवं इसके विभिन्न प्रदेशों के पीठासीन अधिकारियों ने अपने आचरण, व्यवहार और निष्पक्ष भूमिका के माध्यम से विश्व के सम्मुख यह सिद्ध किया है कि संवाद, विमर्श और मर्यादा पर आधारित संसदीय लोकतंत्र ही लोकतंत्र की सर्वोत्तम और सर्वाधिक सशक्त परंपरा है।
सदन का अध्यक्ष किसी भी राजनीतिक दल से निर्वाचित होकर आए, किंतु पीठासीन अधिकारी के रूप में उसका आचरण पूर्णतः न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और संतुलित होना चाहिए, ताकि सदन की गरिमा और विश्वास अक्षुण्ण बना रहे।
विधायिका के माध्यम से ही जनता की आवाज़ शासन तक पहुँचती है और जनसमस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है। ऐसे में राज्य विधानमंडलों में चर्चा और कार्यवाही के समय का निरंतर कम होना हम सभी के लिए विचार का विषय है। राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही के लिए पर्याप्त और सुनिश्चित समय निर्धारित होना आवश्यक है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि तीन दिवसीय इस सम्मेलन के दौरान इन महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा और इस दिशा में एक दृढ़ तथा सकारात्मक मत स्थापित किया जाएगा। सम्मेलन के लिए देश के विभिन्न राज्यों से सहभागी सभी माननीय पीठासीन अधिकारियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
#AIPOC2026
5 days ago | [YT] | 24
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