Prateekvastu (Narsi)

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Prateekvastu (Narsi)

चंद्रमा से 12वाँ भाव आपका:
• कर्मिक कर्ज
• भावनात्मक विष
• अवचेतन शुद्धिकरण क्षेत्र

है।

जो इसे पी लेता है,
वही अंततः सोम का असली आनंद पाता है।
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4 days ago | [YT] | 193

Prateekvastu (Narsi)

केतु “छूटने की प्रक्रिया” है,
मोक्ष “छूट जाने की अवस्था” है।
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2 weeks ago | [YT] | 211

Prateekvastu (Narsi)

Check cancer and Scorpio ♏️ sign placement in your birth chart #Scorpio #cancer♋️ #vedicastrology #jyotish #prateekvastu

2 months ago | [YT] | 110

Prateekvastu (Narsi)

एक आसान सा ज्योतिष सूत्र #learnastrology

2 months ago | [YT] | 199

Prateekvastu (Narsi)

छठा भाव कर्मफल, ऋण, रोग, शत्रु और सेवा से संबंधित होता है। यह “कर्म का युद्धक्षेत्र” है — जहाँ जीवन हमें बताता है कि हमें किन कठिनाइयों से लड़ना है और कौन-सी सेवाएँ करनी हैं।

अब समझिए कि यहाँ कौन-सी राशि बैठी है, उससे इस युद्धक्षेत्र की प्रकृति समझ आती है. #jyotish #enemy #astrologytips #jyotishpost #vedicastrology #astrosutra #prateekvastu #zodiacsigns

3 months ago | [YT] | 98

Prateekvastu (Narsi)

जन्म कुंडली का दूसरा भाव (2nd House) को “धन भाव” कहा जाता है और यह आपकी वास्तविक (real) और भौतिक (materialistic) संपत्ति दोनों का संकेत देता है।

इसका सरल अर्थ है —

“जिस ग्रह की स्थिति दूसरे भाव में है, वही ग्रह आपको वास्तविक धन देने की क्षमता रखता है — और उसी के स्वभाव के अनुसार धन प्राप्ति का तरीका भी तय होता है।”

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4 months ago | [YT] | 94

Prateekvastu (Narsi)

कर्क राशि जिस भाव में हो वहाँ से जुड़ी चीज़ों में व्यक्ति स्वाभाविक रूप से “फ्लो” चाहता है। अगर उस भाव की ऊर्जा रोकी जाए, तो समस्याएँ, बेचैनी या “जमाव” (stagnation) जैसा असर होता है। इसका सीधा संकेत है कि जातक को उस भाव की गतिविधियों में रुकावट या दमन से परेशानी होगी।

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4 months ago | [YT] | 81

Prateekvastu (Narsi)

महर्षि पराशर और ग्रहों का रहस्य

बहुत समय पहले… जब मानव सभ्यता अभी अपनी जड़ों को तलाश रही थी, तब हिमालय की शांति में एक महान ऋषि तपस्या में लीन थे। उनका नाम था – महर्षि पराशर। वे न केवल वेदव्यास के पिता थे, बल्कि वशिष्ठ ऋषि की परंपरा के तेजस्वी उत्तराधिकारी भी थे। उनके ध्यान और साधना से ऐसा ज्ञान प्रवाहित हुआ, जो आज भी ज्योतिष का आधार है।

प्रकाशित ग्रह ✨

पराशर जी ने सबसे पहले उन ग्रहों की बात की, जो हम सभी देख सकते हैं, जिनकी रोशनी हमारी आँखों को छूती है।
उन्होंने कहा –
“ये सात ग्रह – सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि – प्रकाशित ग्रह हैं।
इनकी किरणें मनुष्य के जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं। इनसे ही हम दिन-रात, ऋतु-परिवर्तन और जीवन की ऊर्जा का अनुभव करते हैं।”

छाया ग्रह 🌑

फिर उन्होंने बताया कि आकाश में ऐसे भी ग्रह हैं जिन्हें हम आँखों से नहीं देख सकते, लेकिन उनका प्रभाव किसी छाया की तरह होता है।
ये हैं – राहु और केतु।
उन्होंने कहा –
“ये ग्रह प्रकाशित नहीं हैं, परन्तु जब ये किसी राशि या भाव में आते हैं तो जैसे सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण होता है, वैसे ही जीवन में भी अदृश्य शक्ति से परिवर्तन लाते हैं।”

अप्रकाशित ग्रह 🌫

इसके बाद महर्षि ने रहस्य की परत खोली –
“आकाश में ऐसे पाँच बिंदु भी हैं जिन्हें हम सामान्य दृष्टि से नहीं देख सकते – धूम, व्यतिपात, परिवेष, इन्द्रचाप और शिखी।
ये केवल तब प्रभाव डालते हैं जब सूर्य, चंद्र या लग्न के समीप हों। अन्यथा ये मौन रहते हैं, जैसे महासागर की गहराई में छिपे मोती।”

अल्पप्रकाशित ग्रह 🌌

पराशर जी ने तब वह ज्ञान साझा किया जिसे आधुनिक विज्ञान ने हज़ारों साल बाद खोजा –
उन्होंने कहा –
“तीन ग्रह हैं जो बहुत दूर हैं, और उनका प्रकाश मनुष्य तक बहुत ही अल्प मात्रा में पहुँचता है। इन्हें कहते हैं – अरुण, वरुण और यम।
आज इन्हें पश्चिमी विज्ञान Uranus (हर्षल), Neptune (वरुण) और Pluto (यम) कहता है।
इनका प्रभाव सूक्ष्म है, लेकिन समय आने पर ये युगों की दिशा बदल सकते हैं।”

उपग्रह 🌍

अंत में उन्होंने दो विशेष बिंदुओं की चर्चा की – गुलिक और मांदि।
उन्होंने कहा –
“ये किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज, पूरे वातावरण को प्रभावित करते हैं। जब गुलिक या मांदि सक्रिय होते हैं, तो वातावरण में सामूहिक असर दिखाई देता है – जैसे महामारी, युद्ध या मौसम का बड़ा बदलाव।”


पराशर ने जो कहा, उसका अर्थ यह है कि मानव जीवन केवल सात प्रकाशित ग्रहों से ही नहीं, बल्कि अदृश्य शक्तियों, छाया और सामूहिक प्रभावों से भी संचालित होता है।

सोचिए… कलियुग शुरू होने से पहले ही हमारे ऋषियों को हर्षल, वरुण और यम (Uranus, Neptune, Pluto) का ज्ञान था, जबकि आधुनिक विज्ञान ने इन्हें बहुत बाद में खोजा।

यही दर्शाता है कि भारतीय ऋषियों का ज्योतिष केवल आकाश देखने का विज्ञान नहीं था, बल्कि समग्र ब्रह्मांड का दिव्य रहस्य था। #astrology #jyotish #vedicastrology #learnastrology

4 months ago | [YT] | 48

Prateekvastu (Narsi)

• दशरथ का अर्थ है – “दस रथों के स्वामी” (इन्द्रिय विजय और नियंत्रण का प्रतीक)।
• दशानन (रावण) का अर्थ है – “दस सिर वाला” (ज्ञान, दिशा और शक्ति का प्रतीक, परंतु अहंकार से दूषित)।
👉 दोनों ही “दस” से जुड़े हैं – एक ने इन्द्रियों पर विजय पाई, दूसरे को इन्द्रियों ने पराजित किया।

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4 months ago | [YT] | 34

Prateekvastu (Narsi)

बुध ग्रह और वाणी- क्यों बुध को शक्ति की संज्ञा दी जाती है #vedicastrology #jyotish #mercuryplanet

5 months ago | [YT] | 88