मैं एक जुनूनी घुमक्कड़ हूं जो हर रास्ते में कहानी ढूंढता है, हर मंज़िल में जादू देखता है, और हर अनुभव को यादों में बदल देता है। प्रकृति, संस्कृति और अनजानी जगहों का अन्वेषण ही मेरा असली जुनून है। आप भी चलिये हिमालय की इस यात्रा पर Himalaya Premi के साथ।
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Himalaya Premi
17800 Ft. की ऊंचाई पर ट्रांस हिमालय की वो रहस्यमयी झील जहाँ देवता दिव्य स्नान के लिए आतें हैं video coming on 29 Nov. 2025 Saturday 6.30 PM.
1 month ago (edited) | [YT] | 36
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Himalaya Premi
जंगल के मध्य में, पहाड़ की चोटी पर — एक ऐसा स्थान जहाँ बादल आपके पड़ोसी हैं! अगर आप वास्तव में हिमालय को महसूस करना चाहते हैं, तो एक बार जरूर आएं — KMVN बिनसर टूरिस्ट रेस्ट हाउस, जो घने बांज और बुरांश के जंगलों के बीच, एक पहाड़ की ऊंची चोटी पर बसा है। यहाँ से दिखती हैं — नंदा देवी, त्रिशूल, नंदाघुंगटी और पंचाचूली जैसी महान हिमाच्छादित चोटियाँ, जो सुबह-सुबह सुनहरी किरणों में नहाकर अद्भुत दृश्य रचती हैं। यह स्थान सिर्फ एक रेस्ट हाउस नहीं, बल्कि सुकून का एक आश्रय है — जहाँ पक्षियों की आवाजें आपकी सुबह जगाती हैं, और शाम का सूर्यास्त आसमान को आग के रंगों से भर देता है। अगर आप भी शहर की भीड़ से दूर, प्रकृति के संग कुछ पल जीना चाहते हैं, तो बिनसर आपका इंतजार कर रहा है... जहाँ हर खिड़की से दिखता है स्वर्ग से सुंदर नजारा।।
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https://youtu.be/WEexy09CXvU?si=OM7qZ...
2 months ago (edited) | [YT] | 38
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Himalaya Premi
उत्तराखंड की लोकगाथाओं में 'सिध्वा बिध्वा रमोला' की कहानी एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह कहानी 'गंगू रमोला' और उनके दो वीर पुत्रों सिध्वा और बिध्वा की है।
गंगू रमोला टिहरी गढ़वाल की रमोली पट्टी का एक शक्तिशाली, समृद्ध और घमंडी राजा था। वह ईश्वर को नहीं मानता था।
जन्म और बचपन: गंगू रमोला की पत्नी मैनावती भगवान कृष्ण की भक्त थीं। उन्हीं के आशीर्वाद से सिध्वा और बिध्वा नामक दो पराक्रमी जुड़वां पुत्रों का जन्म हुआ।
कृष्ण की लीला: गंगू के अहंकार को तोड़ने और उसे धर्म के मार्ग पर लाने के लिए, भगवान कृष्ण ब्राह्मण का रूप धारण कर रामोलीहाट पहुंचे। उन्होंने गंगू से ढाई गज जमीन मांगी, जिसे गंगू ने ठुकरा दिया।
राक्षसी का वध: कृष्ण ने गंगू को बताया कि उसके राज में एक राक्षसी (हेराम्बा) है जो लोगों को परेशान करती है। कृष्ण ने झूले की लीला से उस राक्षसी का वध किया। इस घटना से गंगू का घमंड टूटा और वह कृष्ण भक्त बन गया।
सेममुखेम स्थापना: पश्चाताप में गंगू रमोला ने भगवान कृष्ण को समर्पित प्रसिद्ध 'सेममुखेम नागराजा' तीर्थ की स्थापना की।
सिध्वा-बिध्वा की वीरता: सिध्वा और बिध्वा, जिन्हें नागवंशी राजाओं से संबंधित माना जाता है, बड़े होकर वीर और धार्मिक बने। लोकगाथाओं में उन्हें भेड़पालक और न्यायप्रिय देवता के रूप में पूजा जाता है। वे अपने पिता की तरह नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के लिए खड़े हुए।
लोक देवता: आज उत्तराखंड में सिध्वा-बिध्वा को लोक देवता के रूप में पूजा जाता है और उनकी वीरता और न्याय की गाथाएँ 'जागर' (पारंपरिक लोक गायन) के रूप में गाई जाती हैं।
यह गाथा गंगू रमोला के अहंकार के पतन, धार्मिक परिवर्तन और उनके वीर पुत्रों की कहानी है, जिन्हें आज भी न्याय और धर्म के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।
2 months ago (edited) | [YT] | 2
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Himalaya Premi
जिस तरह हिमालय की ऊँचाइयों पर सूर्योदय पहली किरण से पूरी घाटी को आलोकित कर देता है,
उसी तरह आपके जीवन में भी हर दिन नई उम्मीद, नई ऊर्जा और नई रोशनी भर जाए।
आपके घर-आँगन में दीप जलें,
मन में शांति बसे,
और जीवन में सदैव प्रेम, करुणा व समृद्धि का उजाला बना रहे। दीपावली की आप सभी दोस्तों को शुभकामनाएं।
2 months ago | [YT] | 28
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Himalaya Premi
आज हमारा YouTube परिवार 50,000 के इस खूबसूरत पड़ाव पर पहुँच गया है। यह सफर आप सबके प्यार, सहयोग और विश्वास के बिना कभी संभव नहीं होता। ❤️
हर एक लाइक, कमेंट, शेयर और सब्सक्रिप्शन मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। आप सबका साथ ही मेरी असली ताकत है।
दिल की गहराइयों से आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया 🙏
आगे भी ऐसे ही अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें। 🌸
3 months ago | [YT] | 49
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Himalaya Premi
हिमालय में स्थित पंच केदारों में चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ जी के कपाट 17 अक्टूबर 2025 को पूजा अर्चना के बाद बंद किए जाएंगे।। आगामी 6 माह रूद्रनाथ जी की पूजा शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मन्दिर गोपेश्वर में सम्पन्न होगी।।
3 months ago | [YT] | 9
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Himalaya Premi
हिमालय की गोद में जब मैंने रूद्रनाथ की ओर कदम बढ़ाए, तो यह यात्रा केवल पहाड़ों की नहीं, बल्कि आत्मा से शिवत्व की ओर एक साधना थी।
पहला दिन – सगर से पुंग बुग्याल तक
यात्रा का आरंभ सगर गाँव से हुआ। घने जंगलों से गुजरते हुए जब पगडंडी ऊपर चढ़ी तो लगा जैसे हर वृक्ष पर शिव की छाया है। संध्या होते-होते मैं पुंग बुग्याल पहुँचा। बादलों से ढका आकाश और धरती पर फैली हरी घास – मानो शिव का विशाल आसन हो। रात का सन्नाटा और तारों का झिलमिलाता आकाश, मुझे भीतर गहरे ध्यान में ले गया।
दूसरा दिन – पुंग बुग्याल से ल्वीटी तक
सुबह आगे बढ़ा तो रास्ते में गिमगिमा पानी मिला। उसकी हर बूँद मानो शिव का अमृत प्रसाद था। मैंने उस जल को भरकर अपने साथ लिया और आगे चल पड़ा।
जंगल में पंछियों की मधुर ध्वनि सुनाई दी, जो ऐसे लगती थी जैसे वे शिव का भजन कर रहे हों।
रास्ते भर बादल मेरे साथी बने रहे – कभी वर्षा बनकर मेरे ऊपर बरसते, तो कभी छांव बनकर मुझे विश्राम देते। ठंडी हवा कानों में आकर फुसफुसाती कहती
“शिवोऽहम्… शिवोऽहम्…”
इस दिव्य अनुभूति ने भीतर शिवत्व की ज्योति प्रज्वलित कर दी।
ल्वीटी पहुँचते-पहुँचते मन पूरी तरह शांत था और आत्मा गहन ध्यान में डूबी हुई।
तीसरा दिन – ल्वीटी से शिवधाम रूद्रनाथ
अगले दिन जब रूद्रनाथ की ओर बढ़ा, तो हर मोड़, हर चढ़ाई शिव की ओर एक कदम था। बुग्यालों की विशालता और शिखरों की भव्यता मन को शिव के विराट स्वरूप का अनुभव कराती रही।
अंततः रूद्रनाथ धाम पहुँचा। वहाँ का वातावरण अलौकिक था – मंदिर की शांति, गूंजते मंत्र और चारों ओर फैली हिमालय की गोद ने मुझे शिव की चेतना से भर दिया।
यह केवल मंदिर तक पहुँचने की यात्रा नहीं थी, यह अपने भीतर बसे शिवत्व तक पहुँचने की साधना थी।
ईस यात्रा ने मुझे यह अनुभूति दी कि –
प्रकृति ही शिव है और शिव में ही प्रकृति है
शिवोऽहम्। शिवोहम।।
Video coming - 20 Sept.2025 1.30PM
3 months ago (edited) | [YT] | 81
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Himalaya Premi
हिमालय सदियों से साधकों, ऋषियों और प्रकृति-प्रेमियों के लिए दिव्यता और अलौकिक शांति का स्रोत रहा है। हर शिखर, हर झरना और हर घाटी अपने भीतर एक अनकही गाथा समेटे हुए है। इन्हीं गाथाओं में एक है सतोपंथ स्वर्गारोहिणी यात्रा, जिसे हिमालय का सबसे रहस्यमय और पावन मार्ग माना जाता है।
सतोपंथ यानी “सत्य का पथ” – यह वही पावन धाम है जहाँ महाभारत काल में पांडवों ने स्वर्गारोहण की अंतिम यात्रा तय की थी। बद्रीनाथ धाम से आगे अलकनंदा के तटों पर चलते हुए, मानो हर कदम पर आत्मा बोझिल शरीर से मुक्त होकर शांति का स्पर्श महसूस करने लगती है।
इस मार्ग पर चलते हुए मुझे नीलकंठ पर्वत की सुनहरी आभा,चक्रतीर्थ की अद्भुत हिमानी छटा,और सतोपंथ झील का पारदर्शी जल
एक अलौकिक संसार का अनुभव कराते हैं।
यात्रा का चरम क्षण तब आता है जब स्वर्गारोहिणी पर्वत श्रृंखला सामने प्रकट होती है। मानो आकाश तक जाती सीढ़ियाँ हों और मनुष्य को उसकी अंतिम मंज़िल की ओर बुला रही हों। यहाँ पहुँचकर हृदय में यही भाव जागता है कि यह सिर्फ़ पर्वतारोहण नहीं, बल्कि आत्मा की दिव्य यात्रा है।
अगर आपने मेरा ये वीडियो नहीं देखा तो डिजिटल माध्यम से आप भी चलिए हिमालय की इस दिव्य यात्रा पर हिमालय प्रेमी के साथ।।
https://youtu.be/F7uvpNFwQUw
4 months ago | [YT] | 100
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Himalaya Premi
कल्पना कीजिए… सुबह-सुबह बादलों के बीच से झाँकती केदारनाथ की हिमाच्छादित चोटियाँ, घाटी में गूंजते मंत्रों और मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि, और चेहरे को छूती हिमालयी ठंडी सुगन्धित पवन।
चारों ओर सीढ़ीनुमा हरे-भरे खेत, सामने बहती मंदाकिनी की निर्मल धारा, और बिलकुल पास में भगवान केदारनाथ का शीतकालीन आवास – ओम्कारेश्वर मंदिर।
यहाँ हर सूर्योदय एक चित्रकला है, हर शाम एक प्रार्थना।
आइए, GMVN उखीमठ में… जहाँ प्रकृति, शांति और आध्यात्मिकता मिलकर आपके दिल पर अमिट छाप छोड़ते हैं।
"उखीमठ सिर्फ एक जगह नहीं… यह एक अनुभव है, जिसे महसूस करना पड़ता है।"
See Full video -
https://youtu.be/2tC7itywq0U?si=iQ-lT...
4 months ago | [YT] | 85
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Himalaya Premi
Coming Soon: A Premium Property Nestled in the Heart of Uttarakhand’s Most Scenic Landscape.
5 months ago | [YT] | 58
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