Rajni Ayush hospital,Singhana (jhunjhunu) गुर्दे की पथरी बवासीर चर्म रोग यौन रोग मस्से पुराना नजला बालों का झड़ना बच्चों की समस्या स्त्री रोग किसी भी प्रकार का दर्द इत्यादि सभी रोगों का का संपूर्णत का जड़ से इलाज किया जाता है...Like share and subscribe
Rajni Ayush hospital Singhana
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1 year ago | [YT] | 1
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1 year ago | [YT] | 3
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1 year ago | [YT] | 2
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मंगवाने के लिए संपर्क करें “शूल प्रसन्म महा कषाय” (शूलप्रशमन महाकषाय) आयुर्वेद में उन विशेष औषधीय संयोजनों में से एक है, जो शूल (दौर्द्र्य / दर्द / कोलिक / स्पास्म) को शांत करने के लिए प्रयुक्त होती है। “महाकषाय” का तात्पर्य है — बड़े दर्जे का कषाय रूपी इलाज (कड़वा-रस प्रधान) — और “शूलप्रशमन” का अर्थ है दर्द निवारक / दर्द शांत करने वाला।
नीचे इसकी सम्पूर्ण जानकारी (संभावित द्रव्य, गुण, उपयोग, सावधानी) दी गयी है:
📜 परिभाषा एवं स्रोत
“शूलं प्रशमयतीत त शीतप्रशमनम्” — वह द्रव्य जो शूल (दर्द / पीड़ा) को शांत करे।
यह “दशेमातन” महाकषायों (दस प्रमुख गण) में आता है।
शूलप्रशमन महाकषाय वगर्म (उष्ण-गुर्म) समूह के अंतर्गत आता है।
🌿 प्रमुख द्रव्य (सामग्री)
नीचे वे मुख्य जड़ी-बूटियाँ / द्रव्य हैं, जिन्हें शूलप्रशमन महाकषाय में शामिल माना जाता है:
नाम जाति / विन्यास गुण / उपयोग
पिप्पली (Piper longum) फल / बीज वात-कफ दोष नाशक, शूल निवारक
पिप्पली मूल मूल भाग पेट व कोलिक दर्दों में उपयोगी
चव्य (Piper chaba) तना / डाल दर्द-शमन, स्पास्मोलिटिक प्रभाव
चत्रक (Plumbago zeylanica) शिलादि जड़ी कोलिक, पेट दर्द उपचार में
शृंगवेर (अदरक / Zingiber) जड़ तापमान संतुलन, पाचन सहेजना
मरीच (Piper nigrum) काली मिर्च कटु व उष्ण गुण देता है
अजमोद (Trachyspermum roxburghianum) बीज पेट व गैस संबंधी शूल में उपयोगी
अजगन्धा (Gynandropsis gynandra) पत्तियाँ / जड़ दर्द-शमन, वात / कफ में सहायक
अजाजी (Cuminum cyminum) जीरा पाचन, वायु शमन
गांडीरा (Euphorbia antiquorum) रस / तना तिक्त-कटु गुण, दर्द निवारक
ये द्रव्य सामान्यतः काढ़ा, क्वाथ या अभ्यंग / लेप आदि रूपों में प्रयुक्त होते हैं।
🧪 गुण, रस, विपाक, तासीर
गुण: लघु, तीक्ष्ण, उष्ण (उष्णता होती है)
रस: कटु / तीक्ष्ण प्रधान (कुछ मधुर तत्व आधारित)
विपाक: कटु (अंत में कटु रस उत्पन्न)
तासीर: उष्ण (उष्ण प्रकृति)
इन गुणों के कारण यह शूल (दर्द) को कम करने, वायवीय अवरोध खोलने, वात-कफ दोषों का शमन करने में सहायक माना जाता है।
1 year ago (edited) | [YT] | 1
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Rajni Ayush hospital Singhana
Sab bhai log Baat Ko Jarur samjhe
1 year ago | [YT] | 1
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Rajni Ayush hospital Singhana
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1 year ago | [YT] | 0
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प्रोटीन एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है जो हमारे शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है। यहाँ कुछ कारण हैं जिनकी वजह से प्रोटीन की जरूरत होती है:
1. _मांसपेशियों का निर्माण और मरम्मत_: प्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण और मरम्मत में मदद करता है, जिससे शारीरिक गतिविधि और व्यायाम के बाद मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
2. _शरीर की वृद्धि और विकास_: प्रोटीन शरीर की वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर बच्चों और किशोरों में।
3. _इम्यून सिस्टम का समर्थन_: प्रोटीन इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है।
4. _हार्मोन और एंजाइम का निर्माण_: प्रोटीन हार्मोन और एंजाइम के निर्माण में मदद करता है, जो शरीर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अब, शाकाहारी भोजन से प्रोटीन की बात करते हैं:
1. _दालें_: दालें जैसे कि चना, मूंग, मसूर, और राजमा प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
2. _सोयाबीन_: सोयाबीन और इससे बने उत्पाद जैसे कि टोफू और सोया दूध प्रोटीन से भरपूर होते हैं।
3. _नट्स और बीज_: नट्स और बीज जैसे कि बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, और अलसी के बीज प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
4. _साबुत अनाज_: साबुत अनाज जैसे कि क्विनोआ, ब्राउन राइस, और ओट्स प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
5. _शाकाहारी प्रोटीन पाउडर_: शाकाहारी प्रोटीन पाउडर जैसे कि मटर प्रोटीन, चना प्रोटीन, और सोयाबीन प्रोटीन भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
कुछ विशिष्ट शाकाहारी भोजन जो ज्यादा प्रोटीन प्रदान करते हैं:
1. सोयाबीन (29-30 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम)
2. चना (19-20 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम)
3. मूंग (24-25 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम)
4. बादाम (21-22 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम)
5. क्विनोआ (8-9 ग्राम प्रोटीन प्रति 100 ग्राम)
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रोटीन की जरूरत व्यक्ति की उम्र, लिंग, और शारीरिक गतिविधि के स्तर पर निर्भर करती है। एक संतुलित आहार जिसमें विविधता हो, वह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर सकता है।
1 year ago | [YT] | 0
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फाइबर एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है जो हमारे शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है। यहाँ कुछ कारण हैं जिनकी वजह से फाइबर की जरूरत होती है:
1. _पाचन तंत्र का स्वास्थ्य_: फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है, जिससे मल त्याग नियमित होता है और कब्ज की समस्या नहीं होती।
2. _वजन प्रबंधन_: फाइबर युक्त भोजन वजन कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह पेट को भर देता है और अधिक खाने की इच्छा को कम करता है।
3. _ब्लड शुगर नियंत्रण_: फाइबर ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, जिससे मधुमेह के रोगियों के लिए यह फायदेमंद होता है।
4. _कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण_: फाइबर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे हृदय रोग के खतरे को कम किया जा सकता है।
अब, ज्यादातर फाइबर किस भोजन से मिलता है, इसकी बात करते हैं:
1. _फल_: फल जैसे कि आम, सेब, केला, और बेरी फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
2. _सब्जियां_: सब्जियां जैसे कि ब्रोकोली, गाजर, और शिमला मिर्च फाइबर से भरपूर होती हैं।
3. _अनाज_: साबुत अनाज जैसे कि ब्राउन राइस, क्विनोआ, और ओट्स फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
4. _दालें_: दालें जैसे कि चना, मूंग, और मसूर फाइबर से भरपूर होती हैं।
5. _नट्स और बीज_: नट्स और बीज जैसे कि बादाम, अखरोट, और चिया सीड्स फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
कुछ विशिष्ट भोजन जो ज्यादातर फाइबर प्रदान करते हैं:
1. चिया सीड्स (35-40 ग्राम फाइबर प्रति 100 ग्राम)
2. अलसी के बीज (25-30 ग्राम फाइबर प्रति 100 ग्राम)
3. बादाम (12-15 ग्राम फाइबर प्रति 100 ग्राम)
4. ब्रोकली (5-6 ग्राम फाइबर प्रति 100 ग्राम)
5. क्विनोआ (5-6 ग्राम फाइबर प्रति 100 ग्राम)
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फाइबर की जरूरत व्यक्ति की उम्र, लिंग, और शारीरिक गतिविधि के स्तर पर निर्भर करती है। एक संतुलित आहार जिसमें विविधता हो, वह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर सकता है।
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पीएच स्तर के आधार पर, खाद्य पदार्थों को एसिडिक, न्यूट्रल, या अल्कलाइन में वर्गीकृत किया जा सकता है। यहाँ कुछ खाद्य पदार्थ हैं जिनका पीएच स्तर 7 से ज्यादा होता है, जो उन्हें अल्कलाइन बनाता है:
1. फल:
- तरबूज (पीएच 8-9)
- खरबूजा (पीएच 8-9)
- आम (पीएच 8)
- पपीता (पीएच 8)
- अंजीर (पीएच 8)
2. सब्जियां:
- पालक (पीएच 9-10)
- ब्रोकोली (पीएच 8-9)
- गाजर (पीएच 8)
- शिमला मिर्च (पीएच 8)
- ककड़ी (पीएच 8)
3. अन्य:
- बादाम का दूध (पीएच 8-9)
- सोया दूध (पीएच 8-9)
- ओट्स (पीएच 8)
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि खाद्य पदार्थों का पीएच स्तर उनके पकाने के तरीके, भंडारण की स्थिति, और अन्य कारकों पर निर्भर करता है। एक संतुलित आहार जिसमें विविधता हो, वह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर सकता है।
1 year ago | [YT] | 1
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Rajni Ayush hospital Singhana
ऑनलाइन ऑर्डर एवं मंगवाने हेतु संपर्क करें कॉल या व्हाट्सएप्प 9001 604930
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