सामाजिक समरसता का अनुपम और बेजोड़ उदाहरण वीर दुर्गादास जी मारावाड़ के अन्तिम उतराधिकारी,अजीत सिंह जी को औरंगजेब की कैद से छुड़ाकर लाए। पुष्करणा ब्राह्मण बोहरा निम्बो जी की पत्नी ने अपना दूध पिलाकर लालन पालन किया। और मेगवाल समाज के वीर मंजालिया बलाई ने दिनरात एक कर अंगरक्षक बन कर दीवार की मानिंद खड़े रहे। कोटि कोटि नमन उन वीरो और विरांगना को जिन्होंने मारवाड़ को उतराधिकारी की रक्षा और लालन पालन किया। उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करने का अवसर मिला है। इस अवसर को नहीं गवा कर हमारे गौरवशाली इतिहास को पुनः जीवन्त करें। 22 नवम्बर 2022 समय प्रातः 11बजे स्थान :- नाथ का मगरा मलार नेनेऊ वीर शिरोमणि दुर्गादास जी राठोड़ 304वी पुण्य तिथी समारोह
फलोदी गुलाब सागर तालाब पर पुष्करणा ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ जनों की एक बैठक रखी गई जिसमें, नाथ का मगरा फलोदी में आगामी 22नवम्बर वीर दुर्गादास राठौड़ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजन के लिए चिंतन मनन हुआ । इस बैठक मैं भी सहभागी बना । मारवाड़ के महानायक वीर दुर्गादास राठौड़ का फलोदी से विशेष लगाव रहा है ।जैमला फलोदी वीर दुर्गादास राठौड़ का ननिहाल रहा है बचपन में फलोदी की पावन धरा पर अठखेलियां की इसी धरा पर धर्म, राष्ट्र भक्ति,स्वामी भक्ति स्वाभिमान, निडरता व स्वदेश व स्वधर्म के चारित्रिक गुणों की शिक्षा भटियाणी नेतकंवर द्वारा फलोदी की पावन धरा पर ही दी इन्ही भटियाणी नेतकंवर द्वारा दिये संस्कारों के कारण ही आज वीर दुर्गादास राठौड़ का मारवाड़ के इतिहास में एक उजज्वल इतिहास का पन्ना लिखा गया । जैमला की पावन धरा जहां नेतकंवर भटियाणी का जन्म हुआ हम सबके पुरे मारवाड़ के लिए वंदनीय है वहां के पावन रजकण शिरोधार्य है। नाथ का मगरा ऐतिहासिक स्थल निडरता से वीर दुर्गादास राठौड़ ने महाराजा जसवंतसिंह को अफगानिस्तान में मरणासन्न अवस्था में दिये वचन पालन कि मारवाड़ के ताज की सुरक्षा करुंगा तथा मारवाड़ के उत्तराधिकारी की ताजपोशी करुंगा इस वचनपालन की कठीन घड़ी में शिशु राजकुमार अजीतसिंह को औरंगजेब की षड़यंत्रकारी कैद से मुक्त कर मारवाड़ आये सालवा में मारवाड़ के जागीरदारों ठिकानेदारो के बीच मारवाड़ के उत्तराधिकारी के रूप में विश्वास कायम करने के लिए उनका राज्याभिषेक एक सितंबर सौलह सौ उन्यासी को कर मारवाड़ के आमजन में विश्वास कायम किया कि मारवाड़ का धणी सुरक्षित है क्योकि जसवंतसिंह के अफगानिस्तान में देहांत के बाद औरंगजेब ने मारवाड़ रियासत को खालसा घोषित कर अपनी हुकुमत कायम करने के प्रयास शुरू किए इसी कड़ी में मारवाड़ के राठौड़ो में फूट डालने के लिए नागोर के इंद्रसिंह को जोधपुर का प्रशासक बना कर भेजा जोधपुर में आधिपत्य के लिए वीर दुर्गादास राठौड़ ओर इंद्र सिंह की सैना के बीच अक्टूम्बर माह में खेतासर ओसियां के पास भयंकर युद्ध हुआ जिसमें मारवाड़ के कई वीर वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन विजय वीर दुर्गादास राठौड़ की हुई। सुरक्षा की दृष्टि से अजीतसिंह को सालवा से फलोदी ले गये वहा फलोदी से बीस किमी उत्तर में मलार गांव के तालाब पर सुनसान जगह पर रखा जो सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षित था जोधपुर से दूर औरंगजेब के गुप्तचरों की नज़र दूर तथा अपने ननिहाल जैमला के पास ताकि अपने विश्वस्त सहयोगियों के साथ शिशु राजकुमार अजीतसिंह की सुरक्षा के लिए आश्वत रहने हुए मारवाड़ के स्वतंत्रता अभियान की योजना के लिए प्रयास जारी रहे । मारवाड़ के लिए वो समय बहुत विकट समय था एक तरफ चार लाख की विशाल मुगल सैना का मुकाबला बिना किसी साधन सहायता के दर्जन भर मारवाड़ के आजादी के परवानों का स्वदेश ओर स्वधर्म के लिए एक संकल्प जिनके पास न सैना न साधन न हथियार ओर न कोई औरंगजेब के भय से सहायता देने के लिए तैयार ऐसे विकट स्थिति में छः सात माह के बिना मां बच्चे का पालन-पोषण एक अग्नि परीक्षा से कम नहीं था लेकिन मारवाड़ के महानायक वीर दुर्गादास राठौड़ का आत्मविश्वास और धैर्य हिमालय पर्वत से भी ऊंचा था जिसके बल पर उन कठीन दिनों में भी मारवाड़ के ताज को सुरक्षित रखने के जतन जारी रखे सहयोगी मिलते रहे ओर आतताई औरंगजेब के चंगुल से शिशु राजकुमार अजीतसिंह को बचाने के जतन करते रहे और आखिर दृढ इच्छा शक्ति ओर आत्मविश्वास की विजय हुई ओर महाराजा जसवंतसिंह को दिया वचन तीस साल के संघर्ष के बाद पुरा हुआ इस स्वतंत्रता अभियान में मारवाड़ के अनेकों सपूतों को बलिदान देना पड़ा हजारों लोग मारवाड़ के महानायक वीर दुर्गादास राठौड़ के सहयोगी बने जिसमें फलोदी मलार के पुष्करणा ब्राह्मण समाज के निम्बोजी बोहरा का भी शिशु राजकुमार अजीतसिंह का उस विकट समय में पालन पोषण करना उनका मारवाड़ की माटी के लिए समर्पित भाव आज हम सब के लिए प्रेरणा स्रोत हैं । फलोदी के नाथ का मगरा में रहते समय वीर दुर्गादास राठौड़ औरंगजेब के गुप्तचरों से बचने के लिए साधु वेश में रहे इसलिए मलार का ये तालाब आज भी नाथ के मगरा के नाम से जाना जाता है ।वीर दुर्गादास राठौड़ के मारवाड़ के आजादी के आरम्भिक चार पांच साल नाथ का मगरा में साधना के साथ बीते इसी जगह अजीतसिंह को सुरक्षित रखकर औरंगजेब से संघर्ष के लिए राठौड़ सरदारों को संगठित करना, मेवाड़ राजघराने को मारवाड़ की मदद के लिए तैयार करना मारवाड़ की आमजन में विश्वास कायम करने की योजना बना कर अपने आपको मजबूत करने का काम किया इसलिए वीर दुर्गादास राठौड़ के तीस साल के संघर्ष में नाथ का मगरा ऐतिहासिक स्थल महत्वपूर्ण है अतः जन्म स्थान सालवा के बाद इस स्थल का संरक्षण वीर दुर्गादास राठौड़ को आदर्श मानने वाले हम सब के लिए जरूरी है । आगामी 22नवम्बर को नाथ का मगरा फलोदी में वीर दुर्गादास राठौड़ की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने का कार्यक्रम पुष्करणा समाज व हम सबकी सहभागिता से संत सानिध्य में आयोजित होगा यथा शक्ति समय का समर्पण कर मारवाड़ के महानायक वीर दुर्गादास राठौड़ ओर सहयोगी निम्बोजी बोहरा को श्रद्धा सुमन अर्पित कर अपने आप को गौरवान्वित करें। भक्ति और शक्ति का केंद्र पश्चिम की काशी में मारवाड़ के गौरव केंद्र नाथ का मगरा की पावन रजकण को शिरोधार्य कर अपने आप को गौरवान्वित करने का सुअवसर 22नवम्बर 2022को संतसानिध्य में 11बजे पधारो नाथ का मगरा फलोदी।
Phalodi Tourister
Sunset at Phalodi Jheel ❤️
2 weeks ago | [YT] | 8
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Phalodi Tourister
Kurja - The Migratory Cranes of khichan ❤️
#phalodi #phaloditourister #kurja #kurjakhichan #khichanbirdsanctuary
1 month ago | [YT] | 7
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Phalodi Tourister
Khichan Bird Scentuary ❤️
1 month ago | [YT] | 4
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Phalodi Tourister
थार रेगिस्तान के अंगूर 😍
7 months ago | [YT] | 4
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Phalodi Tourister
Thankyou Everyone for your unconditional love & support ❣️
2 years ago | [YT] | 7
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Phalodi Tourister
Birthday 🎈🎂
2 years ago | [YT] | 14
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Phalodi Tourister
हर हर महादेव🙏🙏
2 years ago | [YT] | 10
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Phalodi Tourister
The Poetry in Stone
When the rest of the world didn't even know F's of fashion, our forefathers were making grand fashion statements.....!
Folks, these mesmerizing brackets of women's carvings in Belur temple complex depict more than 60 types of hairstyle patterns.....!
The Chennakeshava Temples at Belur and Halebidu, Karnataka are known for their amazing architectural sculpture by the Hoysala dynasty.....!
The value of each of its artwork can go somewhere 1000 times in front of Leonardo da Vinci's famous painting "Monalisa".
Jayatu Bharat
#sculpture #sanatandharma #karnataka #india #architecturephotography #art #travel #architecture #sculpture #hinduism #temple #belur #Chennakesava #Temple #karnatakatourism
3 years ago | [YT] | 3
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Phalodi Tourister
सामाजिक समरसता का अनुपम और बेजोड़ उदाहरण वीर दुर्गादास जी मारावाड़ के अन्तिम उतराधिकारी,अजीत सिंह जी को औरंगजेब की कैद से छुड़ाकर लाए। पुष्करणा ब्राह्मण बोहरा निम्बो जी की पत्नी ने अपना दूध पिलाकर लालन पालन किया। और मेगवाल समाज के वीर मंजालिया बलाई ने दिनरात एक कर अंगरक्षक बन कर दीवार की मानिंद खड़े रहे।
कोटि कोटि नमन उन वीरो और विरांगना को जिन्होंने मारवाड़ को उतराधिकारी की रक्षा और लालन पालन किया। उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करने का अवसर मिला है। इस अवसर को नहीं गवा कर हमारे गौरवशाली इतिहास को पुनः जीवन्त करें।
22 नवम्बर 2022
समय प्रातः 11बजे
स्थान :- नाथ का मगरा मलार नेनेऊ
वीर शिरोमणि दुर्गादास जी राठोड़ 304वी पुण्य तिथी समारोह
3 years ago | [YT] | 11
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Phalodi Tourister
#मलार_के_निम्बोजी_बोहरा_ने_की_थी_वीर_दुर्गादास_राठौड़_की_सहायता
फलोदी गुलाब सागर तालाब पर पुष्करणा ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ जनों की एक बैठक रखी गई जिसमें, नाथ का मगरा फलोदी में आगामी 22नवम्बर वीर दुर्गादास राठौड़ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजन के लिए चिंतन मनन हुआ । इस बैठक मैं भी सहभागी बना ।
मारवाड़ के महानायक वीर दुर्गादास राठौड़ का फलोदी से विशेष लगाव रहा है ।जैमला फलोदी वीर दुर्गादास राठौड़ का ननिहाल रहा है बचपन में फलोदी की पावन धरा पर अठखेलियां की इसी धरा पर धर्म, राष्ट्र भक्ति,स्वामी भक्ति स्वाभिमान, निडरता व स्वदेश व स्वधर्म के चारित्रिक गुणों की शिक्षा भटियाणी नेतकंवर द्वारा फलोदी की पावन धरा पर ही दी इन्ही भटियाणी नेतकंवर द्वारा दिये संस्कारों के कारण ही आज वीर दुर्गादास राठौड़ का मारवाड़ के इतिहास में एक उजज्वल इतिहास का पन्ना लिखा गया । जैमला की पावन धरा जहां नेतकंवर भटियाणी का जन्म हुआ हम सबके पुरे मारवाड़ के लिए वंदनीय है वहां के पावन रजकण शिरोधार्य है।
नाथ का मगरा ऐतिहासिक स्थल निडरता से वीर दुर्गादास राठौड़ ने महाराजा जसवंतसिंह को अफगानिस्तान में मरणासन्न अवस्था में दिये वचन पालन कि मारवाड़ के ताज की सुरक्षा करुंगा तथा मारवाड़ के उत्तराधिकारी की ताजपोशी करुंगा इस वचनपालन की कठीन घड़ी में शिशु राजकुमार अजीतसिंह को औरंगजेब की षड़यंत्रकारी कैद से मुक्त कर मारवाड़ आये सालवा में मारवाड़ के जागीरदारों ठिकानेदारो के बीच मारवाड़ के उत्तराधिकारी के रूप में विश्वास कायम करने के लिए उनका राज्याभिषेक एक सितंबर सौलह सौ उन्यासी को कर मारवाड़ के आमजन में विश्वास कायम किया कि मारवाड़ का धणी सुरक्षित है क्योकि जसवंतसिंह के अफगानिस्तान में देहांत के बाद औरंगजेब ने मारवाड़ रियासत को खालसा घोषित कर अपनी हुकुमत कायम करने के प्रयास शुरू किए इसी कड़ी में मारवाड़ के राठौड़ो में फूट डालने के लिए नागोर के इंद्रसिंह को जोधपुर का प्रशासक बना कर भेजा जोधपुर में आधिपत्य के लिए वीर दुर्गादास राठौड़ ओर इंद्र सिंह की सैना के बीच अक्टूम्बर माह में खेतासर ओसियां के पास भयंकर युद्ध हुआ जिसमें मारवाड़ के कई वीर वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन विजय वीर दुर्गादास राठौड़ की हुई।
सुरक्षा की दृष्टि से अजीतसिंह को सालवा से फलोदी ले गये वहा फलोदी से बीस किमी उत्तर में मलार गांव के तालाब पर सुनसान जगह पर रखा जो सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षित था जोधपुर से दूर औरंगजेब के गुप्तचरों की नज़र दूर तथा अपने ननिहाल जैमला के पास ताकि अपने विश्वस्त सहयोगियों के साथ शिशु राजकुमार अजीतसिंह की सुरक्षा के लिए आश्वत रहने हुए मारवाड़ के स्वतंत्रता अभियान की योजना के लिए प्रयास जारी रहे । मारवाड़ के लिए वो समय बहुत विकट समय था एक तरफ चार लाख की विशाल मुगल सैना का मुकाबला बिना किसी साधन सहायता के दर्जन भर मारवाड़ के आजादी के परवानों का स्वदेश ओर स्वधर्म के लिए एक संकल्प जिनके पास न सैना न साधन न हथियार ओर न कोई औरंगजेब के भय से सहायता देने के लिए तैयार ऐसे विकट स्थिति में छः सात माह के बिना मां बच्चे का पालन-पोषण एक अग्नि परीक्षा से कम नहीं था लेकिन मारवाड़ के महानायक वीर दुर्गादास राठौड़ का आत्मविश्वास और धैर्य हिमालय पर्वत से भी ऊंचा था जिसके बल पर उन कठीन दिनों में भी मारवाड़ के ताज को सुरक्षित रखने के जतन जारी रखे सहयोगी मिलते रहे ओर आतताई औरंगजेब के चंगुल से शिशु राजकुमार अजीतसिंह को बचाने के जतन करते रहे और आखिर दृढ इच्छा शक्ति ओर आत्मविश्वास की विजय हुई ओर महाराजा जसवंतसिंह को दिया वचन तीस साल के संघर्ष के बाद पुरा हुआ इस स्वतंत्रता अभियान में मारवाड़ के अनेकों सपूतों को बलिदान देना पड़ा हजारों लोग मारवाड़ के महानायक वीर दुर्गादास राठौड़ के सहयोगी बने जिसमें फलोदी मलार के पुष्करणा ब्राह्मण समाज के निम्बोजी बोहरा का भी शिशु राजकुमार अजीतसिंह का उस विकट समय में पालन पोषण करना उनका मारवाड़ की माटी के लिए समर्पित भाव आज हम सब के लिए प्रेरणा स्रोत हैं । फलोदी के नाथ का मगरा में रहते समय वीर दुर्गादास राठौड़ औरंगजेब के गुप्तचरों से बचने के लिए साधु वेश में रहे इसलिए मलार का ये तालाब आज भी नाथ के मगरा के नाम से जाना जाता है ।वीर दुर्गादास राठौड़ के मारवाड़ के आजादी के आरम्भिक चार पांच साल नाथ का मगरा में साधना के साथ बीते इसी जगह अजीतसिंह को सुरक्षित रखकर औरंगजेब से संघर्ष के लिए राठौड़ सरदारों को संगठित करना, मेवाड़ राजघराने को मारवाड़ की मदद के लिए तैयार करना मारवाड़ की आमजन में विश्वास कायम करने की योजना बना कर अपने आपको मजबूत करने का काम किया इसलिए वीर दुर्गादास राठौड़ के तीस साल के संघर्ष में नाथ का मगरा ऐतिहासिक स्थल महत्वपूर्ण है अतः जन्म स्थान सालवा के बाद इस स्थल का संरक्षण वीर दुर्गादास राठौड़ को आदर्श मानने वाले हम सब के लिए जरूरी है ।
आगामी 22नवम्बर को नाथ का मगरा फलोदी में वीर दुर्गादास राठौड़ की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने का कार्यक्रम पुष्करणा समाज व हम सबकी सहभागिता से संत सानिध्य में आयोजित होगा यथा शक्ति समय का समर्पण कर मारवाड़ के महानायक वीर दुर्गादास राठौड़ ओर सहयोगी निम्बोजी बोहरा को श्रद्धा सुमन अर्पित कर अपने आप को गौरवान्वित करें।
भक्ति और शक्ति का केंद्र पश्चिम की काशी में मारवाड़ के गौरव केंद्र नाथ का मगरा की पावन रजकण को शिरोधार्य कर अपने आप को गौरवान्वित करने का सुअवसर 22नवम्बर 2022को संतसानिध्य में 11बजे पधारो नाथ का मगरा फलोदी।
3 years ago | [YT] | 10
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