Dr.Samadhan Patil

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Dr.Samadhan Patil

धनतेरस की सभी को बहुत शुभकामनाएं

1 year ago | [YT] | 3

Dr.Samadhan Patil

सिजेरियन डिलीवरी या सी-सेक्शन, एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें पेट के निचले हिस्से में चीरा लगाकर बच्चे को जन्म दिया जाता है. 

यह प्रक्रिया तब की जाती है जब मां के लिए योनि से बच्चे को जन्म देना सुरक्षित या संभव न हो. सिजेरियन डिलीवरी की प्रक्रिया इस प्रकार है:
सिजेरियन डिलीवरी या सी-सेक्शन क्या होता है?

किसी भी हॉस्पिटल में बच्चे के जन्म के लिए सर्जरी करना है या नहीं, यह कई मामलों में या पूरी तरह से डॉक्टर के उपर निर्भर करता है। मतलब सामान्य तौर पर डॉक्टर सिजेरियन डिलेवरी करने की सलाह तब देते हैं जब उन्हें पता चल जाता है कि नॉर्मल डिलीवरी से मां या बच्चे या दोनों के जान को खतरा हो सकता है।

सिजेरियन डिलीवरी के ऑपरेशन को सी-सेक्शन कहा जाता है। इसमें डिलीवरी के लिए महिला के पेट यानी गर्भाशय पर कट लगाकर बच्चे को बाहर निकाला जाता है। फिर बच्चे को बाहर निकालने के बाद पेट के कट को टांका लगाकर बंद कर दिया जाता है, जो बाद में समय के साथ शरीर में घुल जाता है

सिजेरियन डिलीवरी कब किया जाता है?

जब नॉर्मल डिलीवरी होने में किसी तरह की कठीनाई आ रही हो, तो सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी जाती है। सिजेरियन डिलीवरी करने के कारण निम्नलिखित है:-

• जब पेट में बच्चे की पोजीशन सही नहीं हो।
• शिशु के गले में कॉर्ड यानी नाल उलझ गई हो।
• नवजात के दिल की धड़कन असामान्य हो।
• बच्चे को विकास संबंधी समस्या हो।
• पेट में दो या दो से ज्यादा बच्चे हो।
• पेट में शिशु को ऑक्सीजन की कमी हो रही हो।
• पहले से सिजेरियन या कोई बड़ा ऑपरेशन हुआ हो।
• शिशु का सिर बर्थ कैनाल से बड़ा हो।
• प्रि-मैच्योर डिलीवरी, जब शिशु सात या आठ महिने का हो।
• महिला को स्वास्थ्य संबंधी कोई बीमारी हो, जैसे- बीपी,
थायरॉइड,या हार्ट रोग, इत्यादि

सिजेरियन डिलीवरी के फायदे

सिजेरियन डिलीवरी को चिकित्सा की दुनिया का वरदान कहा जाता है, जहां मां और बच्चे को नया जीवनदान मिलता है। लेकिन समय के साथ मेडिकल क्षेत्र में प्रगती हुई और आज यह बड़ी चीज आम बात हो गई है। जिस तरह हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, मतलब कुछ निगेटिव तो कुछ पोजिटिव। उसी प्रकार सिजेरियन डिलीवरी के भी कुछ सकारात्मक तो कुछ नकारात्मक पहलू हैं। आइए देखते हैं, सिजेरियन डिलीवरी कितनी

सुरक्षित है और कितनी नुकसानदायकः-
• सामान्य प्रसव के दौरान यदि मां-बच्चे को किसी तरह की परेशानी या खतरा हो, तो सिजेरियन डिलीवरी से अच्छा कुछ नहीं होता है।

• किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या जैसे- थायरॉइड, हृदय संबंधी बीमारी, ब्ल्ड प्रेशर के मामलों में सिजेरियन अच्छा विकल्प होता है।

• प्रि-मैच्योर डिलीवरी के दौरान सिजेरियन बहुत फायदेमंद साबित होता है

• सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को मूत्र असंयमिता जैसी समस्या नहीं होती है

• सिजेरियन डिलीवरी में पैल्विक प्रोलैप्स का खतरा कम होता है।

• सिजेरियन डिलीवरी अब ट्रेंड में आ रही है। ऐसे में लोग डिलीवरी का दिन-समय इत्यादि पहले ही तय कर लेते हैं

सिजेरियन डिलीवरी के नुकसान :-

प्रसव के दौरान सिजेरियन के मुकाबले नॉर्मल डिलीवरी के फायदे बहुत ज्यादा हैं। यदि नॉर्मल डिलीवरी की संभावना होती है तो सिजेरियन का विकल्प चुनना सही नहीं है। डॉक्टर भी सिजेरियन डिलीवरी का सुझाव तब ही देते हैं जब नॉर्मल डिलीवरी से मां-बच्चे के जान को खतरा होता है

देखें, सिजेरियन डिलीवरी से होने वाले नुकसान के बारे में:-

• सिजेरियन डिलीवरी में रिकवरी का समय ज्यादा लगता है
• इस डिलीवरी में महिलाओं के शरीर में खून की कमी हो सकती है
• नॉर्मल डिलीवरी के मुकाबले सिजेरियन डिलीवरी में खर्चा बहुत ज्यादा होता है
• यदि महिला की पहली डिलीवरी सिजेरियन होती है तो दूसरे में भी सिजेरियन का ही खतरा होता है
• सिजेरियन डिलीवरी के मामले में नवजात को कभी-कभी जॉन्डिस का खतरा हो सकता है
• सिजेरियन डिलीवरी के बाद कमजोरी का खतरा ज्यादा होता है।
• सिजेरियन डिलीवरी में महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस का खतरा ज्यादा होता है
• ऐसे में महिलाओं में डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा होता है।
• नॉर्मल डिलीवरी की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी से शरीर में ज्यादा बदलाव होता है। इससे शरीर में बदलाव के कारण बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है

सिजेरियन के बाद की सावधानी और कुछ महत्वपूर्ण बातें:-

1. सिजेरियन डिलीवरी के बाद टांके में दर्द होना कोई बड़ी बात नहीं है। यह उपचार द्वारा समय के साथ ठीक हो जाता है। आमतौर पर सिजेरियन टांके चार से सात दिन में ठीक हो जाते हैं। लेकिन पूरी तरह से ठीक होने में इन्हें एक महीने तक का समय लग सकता है

2. क्या आप जानते हैं सिजेरियन डिलीवरी कितनी बार हो सकती है? माना जाता है कि यदि किसी महिला की पहली डिलीवरी सिजेरियन होती है तो बाकी डिलीवरी भी सिजेरियन ही होगी। डॉक्टर की मानें तो सिर्फ तीन सिजेरियन डिलीवरी को ही सुरक्षित माना जाता है

3. सिजेरियन डिलीवरी के तुरंत बाद संबंध नहीं बनाना चाहिए। सिजेरियन डिलीवरी के बाद संबंध बनाने से टांको के टूटने का खतरा होता है और शरीर पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में डिलीवरी के बाद जब तक टांके पूरी तरह से सूख नहीं जाते तब तक अपने पार्टनर से दूरी बना कर रहें

4. सिजेरियन डिलीवरी के बाद गर्भाशय पहले की तरह होने के लिए सिकुड़ना शुरू करता है और तब आपको ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसा आपको 6 सप्ताह तक हो सकता है

5. टांको को अच्छे से ठीक होने और ब्लीडिंग को रूक जानें के बाद ही स्नान करें

6. सार्वजनिक स्विमिंग पूल में नहाने से बचें।
7. डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही एक्सरसाइज शुरू करें।

1 year ago | [YT] | 0

Dr.Samadhan Patil

कैसे काम करती है पीरियड्स की डेट आगे बढ़ाने वाली दवा, जानिए इसके साइड इफेक्ट
Periods की डेट आगे बढ़ाने वाली दवाएं हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ली जाती हैं जो जरूरत और शरीर के हिसाब से दवा देते हैं. लेकिन जब तक बहुत ज्यादा जरूरी नहीं हो, इस तरह की दवाओं को लेने से बचना चाहिए.

माहवारी, मासिक धर्म या Periods महिलाओं में हर महीने होने वाली ब्लीडिंग को कहते हैं. सामान्यतः 10-15 वर्ष की आयु में लड़कियों में मासिक धर्म होना शुरू होते हैं. वैसे तो माहवारी एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसके अनुभव हर लड़की में अलग होते हैं. कई बार कुछ ज़रूरी परिस्थितियों या मजबूरी में पीरियड की तारीख आगे बढ़ानी पड़ती है, जिसके लिए कई दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं. लेकिन इनका सेवन कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए वरना इसके कई साइड इफेक्ट हो सकते हैं.

कैसे काम करती है यह दवा-
पीरियड की तारीख आगे बढ़ाने वाली दवाएं एक तरह से हार्मोन बैलेंस करने का काम करती हैं. इनमें नॉर-एथिस्टेरोन (Norethisterone) पाया जाता है, जिसमें प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) की दवाएं होती हैं. प्रोजेस्टेरोन एक तरह का फीमेल-हॉर्मोन है जो इन दवाओं के सहारे बढ़ जाता है. इसका लेवल बढ़ने के साथ ही गर्भाशय (Uterus) की परत गिरने से रुकती है, इस परत के न गिरने से पीरियड्स नहीं आते हैं. दवा का सेवन बंद करने के बाद शरीर में हॉर्मोन के लेवल को सामान्य होने में वक्त लगता है. हालांकि दवा बंद करने के 3-4 दिन बाद माहवारी आ जाती है,लेकिन अलग-अलग लोगों पर इस दवा का असर भी अलग-अलग होता है.

कब ली जाती है यह दवा-

ये दवाएं हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ली जाती हैं जो जरूरत,परिस्थितियों और शरीर के हिसाब से दवा देते हैं. ज्यादातर मामलों में यह दवा पीरियड की अपेक्षित तारीख से तीन दिन पहले ली जाती है.
माहवारी की तारीख आगे बढ़ाने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट्स-

अधिकतर मामलों में पीरियड की डेट आगे बढ़ाने वाली दवाएं प्रभावी पाई जाती हैं और उन्हें लेने से ज्यादा परेशानी भी नहीं होती है. लेकिन जब तक बहुत ज्यादा जरूरी नहीं हो, इस तरह की दवाओं को लेने से बचना चाहिए. इनके इस्तेमाल से शरीर पर कई तरह के साइड इफेक्ट हो सकते हैं.

1) ये दवाएं शरीर के नेचुरल हार्मोन फ्लो को बिगाड़ देती हैं जिससे माहवारी अनियमित हो जाती है.
2) इन दवाओं से त्वचा पर रैशेज़, मुहांसे हो सकते हैं.
3) इसके सेवन से चक्कर आना,सिरदर्द, माइग्रेन की दिक्कत हो सकती है.
4) इससे हार्मोन असुंतलन, मूड स्विंग्स की समस्या हो जाती है.
5) इन दवाओं के इस्तेमाल से वजन बढ़ सकता है.

1 year ago (edited) | [YT] | 3

Dr.Samadhan Patil

Question - DICYCLOMINE HYDROCHLORIDE का इस्तमाल किस Conditions में किया जाता है ? Tab Mefetal Forte use Condition Use And Benefits

1 year ago | [YT] | 1

Dr.Samadhan Patil

Which Of The Following Medicine Is Used To Treatment Diarrhea ?

इनमे से कौन सी टैबलेट दस्त को ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाता है ?

1 year ago | [YT] | 0

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Question - Doxycycline 100 Mg Capsule का इस्तेमाल किस Condistion में किया जाता है?

1 year ago | [YT] | 0

Dr.Samadhan Patil

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1 year ago | [YT] | 2

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1 year ago | [YT] | 0