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Pahadi On Road
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
जनपद रुद्रप्रयाग
देवभूमि उत्तराखंड
विश्वनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी में स्थित है।
यह मंदिर केदारनाथ यात्रा मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
ऐसा माना जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों से छिपने के लिए भगवान शिव ने इसी स्थान को चुना था, इसलिए इस स्थान का नाम 'गुप्तकाशी' पड़ा।
यह मंदिर स्थानीय पत्थरों से नागर शैली में बनाया गया है और इसकी वास्तुकला केदारनाथ मंदिर से मिलती-जुलती है।
मंदिर परिसर के पास प्रसिद्ध मणिकर्णिका कुंड भी है, जहां यह माना जाता है कि गंगा और अलकनंदा नदियाँ मिलती हैं।
इस मंदिर को वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के समान महत्वपूर्ण माना जाता है. केदारनाथ की चढ़ाई से पहले तीर्थयात्री अक्सर यहां भगवान विश्वनाथ का आशीर्वाद लेते हैं।
2 days ago | [YT] | 9
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2 days ago | [YT] | 27
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सोने से पहले एक हाजिरी मां धारी देवी के चरणों में 🙏 जय मां धारी देवी 🙏🚩 #maaderidevi #goodnight #viralpost #facebook #followers #socialmedia
3 days ago | [YT] | 50
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Punch Paryag Sangam
3 days ago | [YT] | 13
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Vrindavan
4 days ago | [YT] | 20
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बद्रीनाथ के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. बद्रीनाथ मंदिर (Badrinath Temple)
यह भगवान विष्णु को समर्पित मुख्य मंदिर है और भारत के चार धामों में से एक है। अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है।
2. तप्त कुंड (Tapt Kund)
यह मंदिर के पास स्थित एक प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड है। मंदिर में प्रवेश करने से पहले भक्त यहाँ स्नान करते हैं। माना जाता है कि इसमें स्नान करने से कई त्वचा रोग दूर हो जाते हैं।
3. अलकनंदा नदी (Alaknanda River)
यह बद्रीनाथ के पास से बहने वाली पवित्र नदी है। बद्रीनाथ मंदिर इसी नदी के तट पर स्थित है। यह नदी आगे चलकर देवप्रयाग में भागीरथी से मिलकर 'गंगा' बनती है।
4. माणा गाँव (Mana Village)
इसे 'भारत का आखिरी गाँव' (अब 'भारत का प्रथम गाँव') कहा जाता है। यह बद्रीनाथ से मात्र 3 किमी की दूरी पर है। यह गाँव अपनी सांस्कृतिक विरासत और तिब्बत सीमा के पास होने के कारण प्रसिद्ध है।
5. नीलकंठ शिखर (Neelkanth Peak)
इसे 'गढ़वाल की रानी' भी कहा जाता है। बर्फ से ढकी यह चोटी बद्रीनाथ मंदिर के ठीक पीछे पिरामिड की तरह खड़ी दिखाई देती है। सूर्योदय के समय इस पर पड़ने वाली पहली किरण इसे सोने की तरह चमका देती है।
6. वसुधारा जलप्रपात (Vasudhara Falls)
यह माणा गाँव से लगभग 5 किमी की पैदल दूरी पर है। यहाँ पानी लगभग 400 फीट की ऊँचाई से गिरता है। ऐसी मान्यता है कि इस झरने का पानी उन लोगों पर नहीं गिरता जो पापी होते हैं।
7. भीम पुल (Bheem Pul)
यह माणा गाँव में सरस्वती नदी के ऊपर बना एक विशाल प्राकृतिक पत्थर का पुल है। माना जाता है कि पांडवों के स्वर्ग जाते समय, भीम ने द्रौपदी के नदी पार करने के लिए इस विशाल पत्थर को रखा था।
8. नीति घाटी (Niti Valley)
यह बद्रीनाथ के पास स्थित एक बहुत ही शांत और सुंदर घाटी है। यह भारत-चीन सीमा के काफी करीब है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जानी जाती है।
क्या आप इनमें से किसी जगह की यात्रा की योजना बना रहे हैं? मैं आपको वहाँ पहुँचने के रास्ते या सही समय के बारे में भी बता सकता हूँ।
1 week ago | [YT] | 6
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भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि इन स्थानों पर भगवान शिव स्वयं ज्योति के रूप में प्रकट हुए थे।
यहाँ भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों की सूची और उनके बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है:
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
यह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। इसे पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। चन्द्रदेव ने स्वयं यहाँ शिव की उपासना की थी।
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश)
आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है। यहाँ शिव और पार्वती (मल्ल्किा और अर्जुन) दोनों का संयुक्त रूप निवास करता है। इसे 'दक्षिण का कैलाश' भी कहा जाता है।
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)
उज्जैन (अवंतिका) में स्थित यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहाँ की 'भस्म आरती' पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)
यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच एक द्वीप पर स्थित है। इस द्वीप का आकार 'ॐ' (ओम) जैसा है, इसलिए इसका नाम ओंकारेश्वर पड़ा।
5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड)
हिमालय की गोद में स्थित यह सबसे ऊंचाई पर स्थित ज्योतिर्लिंग है। यह चार धाम यात्रा का भी हिस्सा है। यह मंदिर साल में केवल 6 महीने (अप्रैल से नवंबर) ही खुलता है।
6. भीमशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
यह महाराष्ट्र के पुणे के पास सह्याद्रि पर्वत पर स्थित है। इसे भीमाशंकर इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ से भीमा नदी का उद्गम होता है।
7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तर प्रदेश)
उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में स्थित यह ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म का सबसे पवित्र केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है।
8. त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
नासिक के पास स्थित इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यहाँ के लिंग में तीन छोटे लिंग हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के प्रतीक माने जाते हैं। यहाँ से गोदावरी नदी निकलती है।
9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (झारखंड)
झारखंड के देवघर में स्थित इस मंदिर को 'रावणेश्वर धाम' भी कहा जाता है, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण ने यहाँ शिव की तपस्या की थी।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
यह गुजरात के द्वारका के पास स्थित है। 'नागेश्वर' का अर्थ है 'नागों का ईश्वर'। यह दारुकावन क्षेत्र में आता है।
11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु)
यह दक्षिण भारत के तमिलनाडु में स्थित है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले यहाँ स्वयं अपने हाथों से शिवलिंग की स्थापना की थी।
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
औरंगाबाद (संभाजीनगर) के पास एलोरा की गुफाओं के निकट स्थित है। यह 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
विशेष नोट: इन 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन मात्र से मनुष्य के सभी पाप कट जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
क्या आप इनमें से किसी विशिष्ट ज्योतिर्लिंग के इतिहास या वहां जाने के रास्ते के बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे?
1 week ago | [YT] | 4
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मां वैष्णो देवी भारत के सबसे पवित्र और प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है, जो जम्मू-कश्मीर में त्रिकूट पर्वत की गोद में स्थित है। यह पवित्र धाम माता महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के संयुक्त स्वरूप को समर्पित है। यहाँ माता की प्रतिमा के रूप में कोई मूर्ति नहीं, बल्कि तीन पिंडियों की पूजा की जाती है, जो शक्ति के तीन रूपों का प्रतीक हैं।
माता वैष्णो देवी की यात्रा कटरा से आरंभ होती है। मार्ग में बाणगंगा, चरण पादुका, अर्धकुंवारी गुफा और भैरों घाटी जैसे पवित्र स्थल आते हैं। मान्यता है कि अर्धकुंवारी गुफा में माता ने नौ माह तक तपस्या की थी। यात्रा पूर्ण करने के बाद भैरोंनाथ मंदिर के दर्शन को आवश्यक माना जाता है, तभी यात्रा संपूर्ण मानी जाती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार माता वैष्णो देवी ने भक्तों की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए यहाँ निवास किया। कहा जाता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से “जय माता दी” का जयघोष करते हुए इस कठिन यात्रा को पूर्ण करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पवित्र धाम के दर्शन के लिए आते हैं, जिससे यह भारत की सबसे अधिक यात्रित धार्मिक यात्राओं में से एक बन चुकी है।
1 week ago | [YT] | 18
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गंगा नदी प्रणाली भारत की सबसे विशाल और महत्वपूर्ण जल-निकास (Drainage) प्रणाली है। गंगा नदी का उद्गम गंगोत्री हिमनद (गोमुख) से होता है, जहाँ से इसे भागीरथी कहा जाता है। आगे चलकर देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा नदियों के संगम के बाद यह गंगा कहलाती है। यही स्थान गंगा के वास्तविक प्रवाह की शुरुआत माना जाता है।
देवप्रयाग से गंगा हिमालयी क्षेत्र से निकलकर ऋषिकेश और हरिद्वार से होती हुई मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है। इसके बाद यह उत्तर भारत के उपजाऊ मैदानों से होकर कानपुर, प्रयागराज (इलाहाबाद), वाराणसी, पटना और कोलकाता जैसे प्रमुख नगरों से गुजरती है। प्रयागराज में गंगा का यमुना नदी से संगम होता है, जिसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष है।
गंगा नदी में अनेक बड़ी सहायक नदियाँ मिलती हैं, जिनमें यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी और सोन प्रमुख हैं। ये नदियाँ गंगा की जलधारा को सशक्त बनाती हैं और इसके विस्तृत जलग्रहण क्षेत्र का निर्माण करती हैं। अंत में गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में गिरते हुए गंगा–ब्रह्मपुत्र डेल्टा का निर्माण करती है, जो विश्व के सबसे बड़े और उपजाऊ डेल्टाओं में से एक है।
गंगा नदी प्रणाली न केवल कृषि, पेयजल और परिवहन के लिए जीवनरेखा है, बल्कि यह भारत की आस्था, संस्कृति और सभ्यता का भी केंद्र रही है। सदियों से गंगा को माँ के रूप में पूजा जाता है और इसके तटों पर असंख्य धार्मिक, सामाजिक और ऐतिहासिक नगर विकसित हुए हैं।
🙏 गंगा नदी प्रणाली वास्तव में भारत की भौगोलिक, आर्थिक और आध्यात्मिक रीढ़ है।
1 week ago | [YT] | 3
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ऋषिकेश उत्तराखंड का एक प्रमुख आध्यात्मिक, योग और साहसिक पर्यटन स्थल है, जिसे “योग नगरी” और “गंगा द्वार” के नाम से भी जाना जाता है। यह पवित्र नगर गंगा नदी के तट पर हिमालय की तलहटी में स्थित है, जहाँ प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। रिषिकेश के प्रमुख आकर्षणों में लक्ष्मण झूला, राम झूला, त्रिवेणी घाट, परमार्थ निकेतन और बीटल्स आश्रम प्रमुख हैं।
यहाँ प्रतिदिन होने वाली गंगा आरती, आश्रमों में योग-ध्यान, और आसपास की पहाड़ियों से दिखने वाले मनोहारी दृश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। साथ ही, रिवर राफ्टिंग, ट्रेकिंग और कैंपिंग जैसी साहसिक गतिविधियाँ रिषिकेश को आध्यात्म और रोमांच—दोनों का केंद्र बनाती हैं। यही कारण है कि रिषिकेश न केवल तीर्थयात्रियों बल्कि देश-विदेश से आने वाले साधकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
1 week ago | [YT] | 4
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