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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
कितना ही दुराचारी क्यों न हो, जीव के कल्याण के लिए उपदेश करना ही आचार्यों का धर्म है – जगद्गुरु श्रीरामानुजाचार्य स्वामिश्री राघवाचार्य
5 days ago | [YT] | 8
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
श्री कृष्ण वैभव जी के सौजन्य से:
श्रीकृष्ण जन्माष्टमीव्रत संपूर्ण पूजन विधि । सामान्य जनों के लिए । अगर आप दीक्षीत है तो अपने संप्रदाय अनुसार पूजन आदि करें । शुद्र वर्ण, स्त्री, और जिनका यज्ञोपवीत संस्कार नहीं हुआ हो , अथवा जो वर्ण धर्म से पतित हो चुके हो उनके लिए विशेष सरल शास्त्रोक्त विधि है । कृपया इसे खरीदें और बेचें नहीं । श्रद्धालु भक्तों तक शेयर करें ताकि उन्हें कुछ मार्गदर्शन मिल सके । सही विधि मिल सके ।
जय श्रीमन्नारायण । जय श्री कृष्ण । हर हर महादेव । भगवान श्री कृष्ण संपूर्ण विश्व का कल्याण करें मंगल करें । #जन्माष्टमी
#श्रीकृष्ण #पूजा #पाठ
इस लिंक पर क्लिक करके आप सम्पूर्ण पूजा विधि प्राप्त कर सकते हैं।
drive.google.com/file/d/1eO162kJ-Y6vfQeyUbVe0oSgJD…
6 days ago | [YT] | 148
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
सच्चिदानंदरुपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे।
तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नुमः।। 🙇
समस्त स्वधर्मनिष्ठ सज्जनों को वर्णाश्रम वैदिक धर्म और गो-द्विजादि सनातन मानबिंदुओं के संरक्षण हेतु अवतरित परमात्मा श्रीकृष्णचन्द्र भगवान् के 5253वें प्राकट्य दिवस की आत्मीय शुभकामनाएं ...
भगवत्कृपा से आप सभी की स्वधर्मनिष्ठा बनी रहे .....
जय श्री कृष्ण 🚩🙏
6 days ago | [YT] | 154
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
हिन्दू हिन्दू सब एक है। असली नकली सब एक है। अद्भुत दर्शन कीजिए असली नकली सन्त का भेद समाप्त करते हुए 2500 वर्ष की अकाट्य परम्परा के काशीरत्न डॉ दिव्यस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज (जटा बाबा) सतुए के दिव्य सान्निध्य में
😏
1 week ago | [YT] | 75
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
दुर्लभं त्रयमेवैतद्देवानुग्रहहेतुकम् ।
मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरुषसंश्रयः ॥
✍️ रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य (ग्रंथ: विवेकचूडामणि)
अर्थ: संसार में यह 3 चीजें सबसे दुर्लभ हैं और केवल ईश्वर की कृपा से ही मिलती हैं:
1️⃣ मनुष्यत्वम् — मानव जीवन
2️⃣ मुमुक्षुत्वम् — मुक्ति या आत्मज्ञान की तीव्र इच्छा
3️⃣ महापुरुषसंश्रयः — सच्चे गुरु या महापुरुष की शरण
#AdiShankaracharya #Vivekachudamani #SanatanDharma #Spirituality #Shlok #YouTubeCommunity #DailyWisdom #Motivation #आदि_शंकराचार्य #सनातन_धर्म
1 week ago | [YT] | 149
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
परमहंस परिव्राजकाचार्य १००८ श्री वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी महाभाग इनकी जयंती के उपलक्ष्य में श्री शृङ्गेरी शारदा पीठ का चलचित्र
श्री गुरुदेव दत्त 🚩🚩
youtube.com/shorts/0G-wNKuJNs...
1 week ago | [YT] | 23
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
📢 महत्वपूर्ण सूचना: कार्यक्रम स्थगन
(Important Announcement)
🙏 जय श्री राम 🙏
समस्त श्रद्धालुओं एवं सनातन धर्मवलंबियों को सूचित किया जाता है कि स्वास्थ्य कारणों (Health Reasons) के चलते, पूज्य श्रीमज्जगद्गुरु निग्रहाचार्य महास्वामी जी के सितंबर २०२६ माह में होने वाले सभी आगामी कार्यक्रम, सम्मेलन एवं प्रवास निरस्त (Cancel) कर दिए गए हैं। ❌
इसके अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित राज्यों के दौरे स्थगित रहेंगे:
📍 पश्चिम बंगाल (West Bengal)
📍 बिहार (Bihar)
📍 छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)
🩺 पूज्य महाराज जी वर्तमान में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। हम सभी ईश्वर से उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की मंगल कामना करते हैं। 🙏❤️🩹
🗓️ आगामी कार्यक्रमों की नई तिथियां महाराज जी के पूर्णतः स्वस्थ होने के पश्चात् यथासमय घोषित की जाएंगी।
1 week ago (edited) | [YT] | 146
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
पुरी पीठ द्वारा आर्य आक्रमण सिद्धांत को मान्यता।
पुरी पीठ द्वारा आधिकारिक रूप से प्रकाशित ग्रन्थ में उल्लेख किया गया है।
अनुवाद के अनुसार,
1) "दैता" भगवान जगन्नाथ के मूल सेवक जो लकड़ी की मूर्ति की पूजा करते थे वास्तव में द्रविड़ थे। आर्य लोग द्रविड़ों को 'दैत्य' (राक्षस) कहते थे और यही 'दैत्य' शब्द बिगड़कर 'दैता' बन गया।
2) और जब ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की दारु (लकड़ी) मूर्ति की पूजा शुरू हुई, तब तक "आर्यों ने ओडिशा में प्रवास/आक्रमण नहीं किया था"।
1 week ago | [YT] | 87
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
भगवान् श्रीराम जी के द्वारा भगवान् महादेव की उपासना के प्रमाण:
इतिहास और पुराण में जहा भेद हो वहा इतिहास को प्रबल प्रमाण माना जाता है। इतिहास मतलब क्या केवल वाल्मीकि रामायण?
और वाल्मीकि रामायण में केवल उतना ही जितना हमको मानना है?
इतिहास में मतलब घटना क्रम में बात लागु होती है क्या?
घटना क्रम में पुराण और इतिहास में मतभेद होने पर किसको प्रमाण माना जाता है?
घटना क्रम में दोनों ही प्रमाण माने जाते है। और जब शब्द-शब्दार्थ की कल्पना की जाती है, तो प्रसिद्ध और अन्य प्रमाणों से जिसका बाद ना होता हो उस अर्थ को सबसे अधिक बल प्राप्त होता है।
महादेव शब्द का जो रूढ़ अर्थ है, वह शिव तत्व के लिए ऊपर है, शिव जी के ऊपर है। शंकर जी के लिए है। और कहां कहां किस-किस धर्म शास्त्र में और रामायण में ही कहा-कहाँ समुद्र को महादेव कहा गया है जी?
कहां कहा गया है महादेव समुद्र को?
किस कोष में महादेव का अर्थ समुद्र बताया गया है?
और कितने स्थानों पर उसी अर्थ का अह प्रयोग किया गया है? वाल्मीकि रामायण में और कहां कहां किया गया है बताइए?
या अन्य धर्म शास्त्रों में कहा महादेव का अर्थ केवल समुद्र लगाया गया है?
इतना नहीं समझ में आ रहा है?
मतलब जितने सारे पुराण हैं, शिव पुराण, लिंग पुराण, वामन पुराण, नारद पुराण, विशेषकर पद्म पुराण, स्कंध पुराण, जहां-जहां रामेश्वरम के स्थापना का वर्णन है नारद पुराण में तो है ही वर्णन और एक नहीं तीन-तीन चार-चार जगहों पर राम जी ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की है। सेतुबंध में तो की ही है। अभी केवल वही की अगर हम चर्चा कर लें। और सबसे बड़े हो गए कि रामायण में केवल वाल्मीकि जी की रामायण मानेंगे? लेकिन वाल्मीकि जी के रामायण में चरितम रघुनाथ सतकोटि प्रविस्तर नहीं मानेंगे। वाल्मीकि जी ने 24 हजार ही लिखा यही मानेंगे। जबकि वह बहुत छोटा हिस्सा है। वाल्मीकि जी ने 24 हजार की रामायण नहीं लिखी है। वाल्मीकि जी ने सतकोटि प्रविस्तर रामायण लिखी है। और 24 हजार को भी ठीक से मानने में जहां पर खोपड़ी घूम रही है ना वहां एक चित्रकूट में बैठा है, कहता है उत्तर कांड प्रक्षिप्त है। तो जिसको नहीं मानना है वहां से भी नहीं मानेगा। मतलब कि नहीं मानना है कि राम जी शिव जी की पूजा किए हैं, तो उसके लिए पहले तो सारे पुराणों को कह दो कि हम मानेंगे नहीं। केवल वाल्मीकि जी की मानेंगे और वाल्मीकि जी जहा खुद महादेव कह रहे है, वहा महादेव का अर्थ समुद्र मान लेंगे। क्योकि मानना तो हमको है ही नहीं कि हम राम जी को शिव जी की पूजा करते देख सकें। यह खोपड़ी में गोबर भरा हुआ है। जो गोस्वामी जी लिखे है लिंग थापि विधिवत कर पूजा, शिव समान प्रिय मोहि न दूजा। वे राम जी को नहीं जानते थे? वे राम कथा के विषय में अनपढ़ थे? और वेदव्यास जी सारे पुराणों में झूठ लिखते गए? मूर्ख थे वेदों व्यासजी कि राम जी से शिव जी की पूजा दिखा दिए?
रामायण की जो बात है, जो महादेव शब्द है, महादेव शब्द का अर्थ महादेव है सीधी बात है। वहां समुद्र अर्थ नहीं है। और समुद्र ने राम पर जी पर कोई कृपा नहीं की है, राम जी ने समुद्र पर कृपा की है। उसको छोड़कर, उसकी दंडता को बहुत कम दंड देकर समुद्र क्या कृपा करेगा राम जी पर वहां पर? समुद्र तो क्षमा मांगने आया था, थाली लेकर, रत्न का, उभार देने के लिए राम जी को आया था। समुद्र क्या करेगा क्षमा राम जी को वहां पर? बहुत वहां अपराधी के भाव से वो बिना होकर प्रस्तुत है। कि आशीर्वाद देने थोड़ी आया है वो? क्षमा मांगने आया है वो। दंड के भय से आया है वो। वो क्या प्रसाद करेगा? और विभु, विभु शब्द भी रुद्रवाचक है। परमेश्वर वाचक है। महादेव भी परमेश्वर वाचक शब्द है। जबरदस्ती वहां फिर समुद्र अर्थ लगा रहे हैं, मूर्खों के समान। और जितने सारे पचास हो अन्य मान्य धर्म शास्त्रों में, जहाँ-जहाँ वर्णन है।
श्री आनन्द रामायण में नहीं वर्णन है क्या? कि शिवजी की शिवलिंग की स्थापना किए हैं। अध्यात्म रामायण में वर्णन नहीं है क्या? भूसुंडि रामायण में वर्णन नहीं है क्या? उन सभी रामायणों में स्पष्ट रूप से शिवजी के शिवलिंग की पूजा का स्थापना का वर्णन है। और वही बात वाल्मीकि जी। अत्र पूर्वं महादेव प्रसाद मकरोद्विभुः कह रहा है। वहां महादेव का अर्थ शिव है, रुद्र है। शिवलिंग की स्थापना का वर्णन है। तो इसमें क्या हो गया?
एक तो जितने सारे ग्रन्थ उस विषय का समर्थन करें, उनको कह दो कि हम तो इसको मानेंगे नहीं प्रमाण में और जिसको मानेंगे उसमें भी अर्थ जो है वो महादेव वाला नहीं लगाएंगे। तो ये सब दोहरापन है।
इन ही बातों के आधार पर तो फिर जहां सती जी को राम जी ने अपना ऐश्वर्य दिखाया है।
वहां सती जी ने श्री राम जी की स्थिति की है या जहां पर गणेश जी ने या और जहां जिस जिस प्रकरण में राम जी की आराधना अन्य देवताओं ने की है वहां भी उन्होंने देवताओं को परम तत्व के रूप में स्थापित करने वाले शास्त्रों को संप्रदाय में भी यही बात फिर उठेगी कि राम जी की इन लोगों ने आराधना नहीं की है इस बात इस बात को भी पक्ष रखा जा सकता है
इतिहास के अनुसार राम जी ने नवरात्र किया है यह शास्त्र में वर्णित है। राम जी के सहस्रनाम में उनको चंडी पाठ विधानज्ञ कहा है अष्टमी व्रतकर्ता कहा है रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना का प्रमाण अनेकानेक प्रमाणिक शास्त्रों में मिलता है। और पूर्वाचार्य उसका समर्थन भी करते हैं अनेकानेक प्रकरणों से और इसी प्रकार से भगवान के द्वारा आदित्य हृदय के माध्यम से सूर्य राधन का भी वर्णन वाल्मीकि रामायण से ही सिद्ध हो जाता है और एवं अलग-अलग देवी देवताओं के द्वारा समयानुसार भगवान राम जी की भी आराधना का विधान और इतिहास शास्त्र ही बताते हैं ऐसे में एक ही परमात्मा अपनी एक विभूति से पूजनीय और अन्य से पूजक बन जाते हैं ऐसा चिंतन करना ही सत्पुरुषों के हित में है और ऐसा बताना यह भी हिंदू समाज के हित में भी है।
1 week ago | [YT] | 82
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महास्वामी अनुग्रह | Mahaswami Anugraha
देखिए कैसे छोटे से छोटे जीवों के लिए सहारा बनते हैं सन्त 🥰
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।
1 week ago | [YT] | 5
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