शच्चिदा नंद रूपाये विश्व उत्पत्यादी हेतवे नापत्ये विनाशाए श्री कृषादी वयम नमः
राधे राधे मित्रों 🙏🏻🙏🏻
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सभी संत महापुरुषों की वाणी को सनातन धर्म जुड़ी खबरों और भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं माधुरी एवं उनके वचनों से जग कल्याण की भावना
रशिक महापुरुषों द्वारा बताए गए मूल भूत सिद्धांतों एवं राधा कृष्ण भक्ति से जुड़ने के लिए हमारे channel पे आपका सहृदय आभार
Bhagvatprapti
उपनिषद के अनुसार ब्रह्म क्या है??
3 days ago | [YT] | 39
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Bhagvatprapti
Happy Independence day
3 days ago | [YT] | 137
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Bhagvatprapti
ब्रह्म ओर जीव में क्या समानताएं है
1 week ago | [YT] | 47
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Bhagvatprapti
राधे राधे 🙏🏻🙏🏻
1 week ago | [YT] | 139
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Bhagvatprapti
निम्नगानां यथा गङ्गा
देवानामच्युतो यथा।
वैष्णवानां यथा शम्भुः
पुराणानामिदं तथा॥
जैसे नदियों में गंगा श्रेष्ठ है,
देवताओं में भगवान अच्युत (श्री विष्णु/श्रीकृष्ण) श्रेष्ठ हैं,
वैष्णवों में भगवान शम्भु (महादेव) सर्वोच्च हैं,
श्रावण माह प्रथम सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं
2 weeks ago | [YT] | 201
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Bhagvatprapti
Happy friendship day
मेरे अनंत जन्मों के साथी
मुझे कभी अकेला न छोड़ने वाले साथी
मेरे सुख दुःख के partner
जय श्री राम 🙏🏻🙏🏻
2 weeks ago | [YT] | 54
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Bhagvatprapti
चरणन की रज पाऊ किशोरी तोरे ......❤️❤️
राधे राधे 😥😥
2 weeks ago | [YT] | 66
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Bhagvatprapti
इस नाशवान संसार में क्या सार्थक है ??
2 weeks ago | [YT] | 19
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Bhagvatprapti
विश्व का प्रत्येक जीव क्या चाहता है??
2 weeks ago | [YT] | 9
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Bhagvatprapti
मेरी अभिलाषा
(ब्रज-रस पदावली)
है एक अभिलाषा जीवन की, मोहि श्याम चरणन की धूरि बनायो।
जहँ-जहँ पग धरैं नंदलाला, तहाँ-तहाँ मोहि प्रेम बिछायो॥
है एक अभिलाषा जीवन की, नंदभवन को माखन होऊँ।
जब-जब खावैं मोहन प्यारे, निज अधरन कौ स्पर्श पाऊँ॥
है एक अभिलाषा जीवन की, जब घुटुरुनि चलैं गिरधारी।
आँगन की रज बनि रहि जाऊँ, पावन होय यह देह हमारी॥
है एक अभिलाषा जीवन की, वृंदावन रास रचावैं श्याम।
रास-मंडल की धूरि बनूँ मैं, चरणन लागै बारंबार॥
है एक अभिलाषा जीवन की, बनि मुरली निज कर धरि लेहैं।
निज अधरन पै मोहि सजायो, प्रेम-सुधा की धुनि बहि देहैं॥
है एक अभिलाषा जीवन की, जब धर्म हेतु रण में आवैं।
भृकुटि ऊपर तेज बनि चढ़ि, दुष्टन कौ संहार करावैं॥
है एक अभिलाषा जीवन की, बाल-श्याम कौ खिलौना होऊँ।
निज कोमल कर-कमलन सों, बारंबार मोहि छूवत रहूँ॥
नाहिं चाहौं स्वर्ग अपवर्ग, न सिद्धि, न धन, न मान।
जनम-जनम बस श्याम मिलैं, यही रहै मोरी पहचान॥
अंत समय जब प्राण निकसैं, मुख ते निकसै "श्याम"।
मोरे नयनन आगे रहियो, राधा सहित घनश्याम॥
2 weeks ago | [YT] | 86
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