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Yuva Manch will talk about the problems of youth like employment, privatization, farmers, corruption, nationalism issues.
Yuva Manch is not associated with any political parties.
Employment be a fundamental right.
!!Inquilab Zindabad!!


Yuva Manch

लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश?

ज्ञानू के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर जाने से पहले युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह हाउस अरेस्ट

लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय उसकी बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जिस तरह युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह को हाउस अरेस्ट किया गया है, उसने लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

युवा मंच का आरोप है कि अनिल सिंह को इस आशंका के चलते हाउस अरेस्ट किया गया कि वे चुनाव आयोग के ज्ञानू के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर आवाज बुलंद न कर दें। सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए देश की राजधानी जाना चाहता है, तो उसे रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?

युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह का कहना है कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, अन्याय के खिलाफ उठने वाली आवाज को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। जनता जनार्दन के सवालों का जवाब दमन से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से देना होगा।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता किसी की निजी संपत्ति नहीं होती और जनता की आवाज को पुलिस के बल पर रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। अगर किसी संवैधानिक संस्था या जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ जनता के मन में सवाल हैं, तो उन सवालों का समाधान पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से होना चाहिए।

अनिल सिंह ने अपने आंदोलन को स्पष्ट करते हुए कहा कि मोदी जी के यार कहे जा रहे ज्ञानू को इस्तीफा देना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए तथा जनता के सवालों से किसी को बचने नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने कहा—“सरकार जितनी भी कोशिश कर ले, अन्याय के खिलाफ हमारी आवाज रुकने वाली नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान के बाद दूसरा विकेट भी गिरेगा। यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र, जवाबदेही और जनता के अधिकारों के लिए है।”

युवा मंच ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन का रास्ता लोकतांत्रिक और संवैधानिक रहेगा। संगठन का कहना है कि जनता की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार विरोध की हर आवाज को पुलिस की कार्रवाई के जरिए रोकना चाहती है, या फिर लोकतांत्रिक संवाद के रास्ते जनता के सवालों का सामना करेगी?

संघर्ष जारी है। आवाज जारी है। लोकतंत्र में जनता की आवाज ही सबसे बड़ी ताकत है।

2 days ago | [YT] | 290

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लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश?

ज्ञानू के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर जाने से पहले युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह हाउस अरेस्ट

लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय उसकी बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जिस तरह युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह को हाउस अरेस्ट किया गया है, उसने लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

युवा मंच का आरोप है कि अनिल सिंह को इस आशंका के चलते हाउस अरेस्ट किया गया कि वे चुनाव आयोग के ज्ञानू के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर आवाज बुलंद न कर दें। सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए देश की राजधानी जाना चाहता है, तो उसे रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?

युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह का कहना है कि सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, अन्याय के खिलाफ उठने वाली आवाज को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता। जनता जनार्दन के सवालों का जवाब दमन से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से देना होगा।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता किसी की निजी संपत्ति नहीं होती और जनता की आवाज को पुलिस के बल पर रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। अगर किसी संवैधानिक संस्था या जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ जनता के मन में सवाल हैं, तो उन सवालों का समाधान पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से होना चाहिए।

अनिल सिंह ने अपने आंदोलन को स्पष्ट करते हुए कहा कि मोदी जी के यार कहे जा रहे ज्ञानू को इस्तीफा देना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए तथा जनता के सवालों से किसी को बचने नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने कहा—“सरकार जितनी भी कोशिश कर ले, अन्याय के खिलाफ हमारी आवाज रुकने वाली नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान के बाद दूसरा विकेट भी गिरेगा। यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र, जवाबदेही और जनता के अधिकारों के लिए है।”

युवा मंच ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन का रास्ता लोकतांत्रिक और संवैधानिक रहेगा। संगठन का कहना है कि जनता की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार विरोध की हर आवाज को पुलिस की कार्रवाई के जरिए रोकना चाहती है, या फिर लोकतांत्रिक संवाद के रास्ते जनता के सवालों का सामना करेगी?

संघर्ष जारी है। आवाज जारी है। लोकतंत्र में जनता की आवाज ही सबसे बड़ी ताकत है।

2 days ago | [YT] | 127

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साकेत पीजी कॉलेज अयोध्या के प्रोफेसर एवं उ0प्र0शिक्षा सेवा चयन आयोग के मा0सदस्य डॉ विनोद कुमार सिंह को महामहिम राज्यपाल /राज्य विश्वविद्यालय की कुलाधिपति महोदय ने माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के कार्य परिषद का सदस्य नामित किया है |डॉ सिंह पूर्व मे रतनसेन पी जी कॉलेज बांसी सिद्धार्थनगर के प्राचार्य रह चुके है |डॉ सिंह वर्तमान में एम0जी0 एस0इंटर कॉलेज के प्रबंधक तथा विद्या भारती की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष भी हैं |

1 week ago | [YT] | 36

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TGT-2026 के विज्ञापन पर बड़ा सवाल: NCTE से पत्राचार के बाद भी क्यों नहीं आई स्पष्ट सूचना?

प्रयागराज। TGT-2026 भर्ती के विज्ञापन को लेकर अभ्यर्थियों के बीच एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के साथ भर्ती कराने की मांग को लेकर युवा मंच द्वारा चलाए गए आंदोलन के बाद सरकार की ओर से NCTE से पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि अभी तक इस संबंध में कोई स्पष्ट सार्वजनिक सूचना सामने नहीं आई है।

युवा मंच का कहना है कि अभ्यर्थी लंबे समय से TGT-2026 के विज्ञापन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर इंतजार कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न को बहाल करने की मांग प्रमुखता से उठाई थी। उनका तर्क है कि नियमों में बदलाव से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों के सामने नई पात्रता और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े हुए हैं, जो पहले से भर्ती की तैयारी कर रहे थे।

युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह का कहना है कि सरकार को युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार ने नियमों में बदलाव किया, जिसके बाद अभ्यर्थियों को अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा और यह मुद्दा पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।

अनिल सिंह का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में अचानक बदलाव नहीं किया जाता तो विज्ञापन जारी होता, अभ्यर्थी आवेदन करते, परीक्षा होती और नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती। उनके अनुसार, नियमों में बदलाव के कारण अभ्यर्थियों के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि TGT-2026 की भर्ती किस नियमावली और किस परीक्षा पैटर्न के आधार पर होगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि NCTE से किए गए पत्राचार के बाद सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की अगली कार्रवाई क्या होगी? क्या पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय आएगा? क्या TGT-2026 का विज्ञापन जल्द जारी होगा? इन सवालों पर अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।

युवा मंच का कहना है कि सरकार को पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों को आधिकारिक जानकारी देनी चाहिए, ताकि लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं में बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके।

सामने विधानसभा चुनाव का समय भी है। ऐसे में युवाओं और अभ्यर्थियों के बीच रोजगार तथा भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की चर्चा और तेज हो रही है। अब देखना यह है कि सरकार और आयोग की ओर से TGT-2026 के विज्ञापन तथा परीक्षा पैटर्न को लेकर क्या आधिकारिक निर्णय सामने आता है।

युवा मंच के सौजन्य से जनहित में जारी।

1 week ago | [YT] | 10

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TGT-2026 के विज्ञापन पर बड़ा सवाल: NCTE से पत्राचार के बाद भी क्यों नहीं आई स्पष्ट सूचना?

प्रयागराज। TGT-2026 भर्ती के विज्ञापन को लेकर अभ्यर्थियों के बीच एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के साथ भर्ती कराने की मांग को लेकर युवा मंच द्वारा चलाए गए आंदोलन के बाद सरकार की ओर से NCTE से पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि अभी तक इस संबंध में कोई स्पष्ट सार्वजनिक सूचना सामने नहीं आई है।

युवा मंच का कहना है कि अभ्यर्थी लंबे समय से TGT-2026 के विज्ञापन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर इंतजार कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न को बहाल करने की मांग प्रमुखता से उठाई थी। उनका तर्क है कि नियमों में बदलाव से बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों के सामने नई पात्रता और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े हुए हैं, जो पहले से भर्ती की तैयारी कर रहे थे।

युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह का कहना है कि सरकार को युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार ने नियमों में बदलाव किया, जिसके बाद अभ्यर्थियों को अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा और यह मुद्दा पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।

अनिल सिंह का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में अचानक बदलाव नहीं किया जाता तो विज्ञापन जारी होता, अभ्यर्थी आवेदन करते, परीक्षा होती और नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती। उनके अनुसार, नियमों में बदलाव के कारण अभ्यर्थियों के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि TGT-2026 की भर्ती किस नियमावली और किस परीक्षा पैटर्न के आधार पर होगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि NCTE से किए गए पत्राचार के बाद सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की अगली कार्रवाई क्या होगी? क्या पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय आएगा? क्या TGT-2026 का विज्ञापन जल्द जारी होगा? इन सवालों पर अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।

युवा मंच का कहना है कि सरकार को पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों को आधिकारिक जानकारी देनी चाहिए, ताकि लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं में बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके।

सामने विधानसभा चुनाव का समय भी है। ऐसे में युवाओं और अभ्यर्थियों के बीच रोजगार तथा भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों की चर्चा और तेज हो रही है। अब देखना यह है कि सरकार और आयोग की ओर से TGT-2026 के विज्ञापन तथा परीक्षा पैटर्न को लेकर क्या आधिकारिक निर्णय सामने आता है।

युवा मंच के सौजन्य से जनहित में जारी।

1 week ago | [YT] | 26

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PGT आवेदन शुल्क ₹1500: बेरोजगार अभ्यर्थियों के लिए बढ़ती आर्थिक चुनौती पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के सामने परीक्षा और आवेदन प्रक्रिया के साथ-साथ आर्थिक बोझ का सवाल भी लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। PGT भर्ती के आवेदन शुल्क को लेकर अभ्यर्थियों में चर्चा और असंतोष देखने को मिल रहा है। ₹1500 का शुल्क उन युवाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है, जो लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित है।

क्या आवेदन शुल्क पर पुनर्विचार होना चाहिए?

शिक्षक भर्ती में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का बड़ा वर्ग ग्रामीण, किसान, मजदूर और निम्न आय वाले परिवारों से आता है। एक अभ्यर्थी यदि कई भर्तियों के लिए आवेदन करता है तो अलग-अलग परीक्षाओं के शुल्क का कुल भार काफी बढ़ सकता है।

इसी कारण सवाल उठ रहा है कि क्या भर्ती परीक्षाओं के आवेदन शुल्क को अभ्यर्थियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अधिक सुलभ बनाया जा सकता है?

यह मांग केवल शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है। अभ्यर्थियों की ओर से यह भी अपेक्षा की जाती है कि आवेदन शुल्क का निर्धारण पारदर्शी हो और उसके पीछे प्रशासनिक एवं परीक्षा संचालन की लागत का स्पष्ट आधार बताया जाए।

UPPSC से तुलना का सवाल

UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर अलग-अलग भर्तियों के लिए शुल्क विज्ञापन और श्रेणी के अनुसार निर्धारित होता है। उदाहरण के तौर पर पुराने UPPSC विज्ञापन में सामान्य/OBC अभ्यर्थियों के लिए ₹100 परीक्षा शुल्क तथा ₹25 ऑनलाइन प्रोसेसिंग शुल्क, यानी कुल ₹125 का उल्लेख है; हालांकि अलग-अलग भर्ती में शुल्क अलग हो सकता है।

इसलिए PGT आवेदन शुल्क ₹1500 होने की स्थिति में अभ्यर्थियों की यह मांग महत्वपूर्ण है कि दोनों आयोगों की शुल्क संरचना, परीक्षा प्रक्रिया और प्रशासनिक लागत का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक किया जाए।

गरीब परिवारों के युवाओं पर अतिरिक्त बोझ

एक ओर सरकार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर यदि आवेदन प्रक्रिया की लागत बढ़ती है तो आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों के लिए प्रत्येक भर्ती में आवेदन करना कठिन हो सकता है।

किसान का बेटा हो या मजदूर का, छोटे दुकानदार का परिवार हो या सीमित आय वाला कर्मचारी—हर परिवार के लिए ₹1500 की राशि सामान्य खर्च नहीं है। इसके साथ यात्रा, अध्ययन सामग्री, कोचिंग, परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और अन्य खर्च भी जुड़े होते हैं।

मांग: शुल्क व्यवस्था पर पारदर्शी समीक्षा हो

अभ्यर्थियों की ओर से मांग उठाई जा सकती है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग:

PGT आवेदन शुल्क की पारदर्शी समीक्षा करे।

शुल्क निर्धारण का आधार सार्वजनिक करे।

आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों के लिए राहत की संभावनाओं पर विचार करे।

अन्य प्रमुख भर्ती आयोगों की शुल्क व्यवस्था का तुलनात्मक विवरण उपलब्ध कराए।

भर्ती प्रक्रिया को अधिक अभ्यर्थी-अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।


उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की वेबसाइट पर भी आवेदन और शुल्क से संबंधित प्रक्रियाएं अलग-अलग विज्ञापनों के अनुसार प्रकाशित की जाती हैं।

युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए

शिक्षक भर्ती केवल एक परीक्षा नहीं है। यह लाखों युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों की उम्मीदों से जुड़ी प्रक्रिया है। इसलिए भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, समान अवसर और उचित आर्थिक भार पर सार्वजनिक चर्चा जरूरी है।

₹1500 के PGT आवेदन शुल्क को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान तथ्यात्मक जानकारी और स्पष्ट शुल्क-नीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। यदि शुल्क में राहत संभव हो तो उस पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि आर्थिक कठिनाई किसी योग्य अभ्यर्थी के लिए आवेदन करने में बाधा न बने।

अनिल सिंह
प्रदेश अध्यक्ष, युवा मंच

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TET संशोधन

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