*JIH Vice President, Malik Moatasim Khan Expresses Concern Over Reports of Mistreatment of Maulana Abdullah Salim in Custody, Calls for Due Process and Dignity*
"We express concern over recent media reports regarding the arrest and alleged custodial mistreatment of Maulana Abdullah Salim Chaturvedi by the Uttar Pradesh Special Task Force (STF). This alleged incident of custodial misconduct raises serious questions about adherence to due process and human dignity. While alleged objectionable remarks attributed to Maulana Abdullah Salim or any hate speech can never be supported, it is equally important to ensure that the law is applied in a fair and just manner. Any individual, regardless of the allegations, is entitled to dignity, due process of law, and protection from any form of torture, harassment or mistreatment.
Jamaat-e-Islami Hind believes that the rule of law must prevail under all circumstances and that any deviation from established legal procedures undermines public trust in institutions. Similarly, Selective implementation of laws is also a matter of grave concern. We wish to emphasize that if any wrongdoing has occurred, it should be addressed strictly within the framework of law, and any allegations of custodial excesses must be independently and impartially investigated. We urge the authorities to ensure that justice is carried out in a manner that upholds constitutional values, protects individual dignity, and avoids any form of arbitrariness."
Malik Moatasim Khan Vice President, Jamaat-e-Islami Hind
جماعت اسلامی ہند نے امریکہ ٹیرف معاہدے، یونین بجٹ کے اثرات اور بڑھتے ہوئے فرقہ وارانہ تشدد پر شدید تشویش کا اظہار کیا
نئی دہلی: جماعت اسلامی ہند نے ہندوستان اور امریکہ کے درمیان طے پانے والے ٹیرف معاہدے اور اس سے متعلق سامنے آنے والی معلومات پر اپنی گہری تشویش کا اظہار کیا ہے۔ میڈیا سے گفتگو کرتے ہوئے جماعت اسلامی ہند کے امیر سید سعادت اللہ حسینی نے کہا کہ ٹیرف معاہدے کے تعلق سے نہ تو پارلیمنٹ کو اور نہ ہی ملک کے عوام کو اعتماد میں لیا گیا ہے۔ تشویشناک بات یہ ہے کہ اس معاہدے سے متعلق معلومات زیادہ تر سوشل میڈیا رپورٹس اور امریکی حکام کے بیانات کے ذریعے سامنے آ رہی ہیں۔ امریکہ سے آنے والے بیانات سے ظاہر ہوتا ہے کہ ہندوستان امریکی مصنوعات پر ٹیرف صفر تک کم کر سکتا ہے، جبکہ امریکہ ہندوستانی برآمدات پر تقریباً 18 فیصد ٹیرف عائد کرے گا۔ اگر یہ دعوے درست ہیں تو یہ معاہدے کے توازن پر سنگین سوالات کھڑے کرتے ہیں۔ مزید تشویش کی بات یہ ہے کہ جن ٹیرف سطحوں کو اس وقت کامیابی کے طور پر پیش کیا جا رہا ہے وہ دراصل پہلے سے موجود شرحوں سے کہیں زیادہ ہیں۔ سید سعادت اللہ حسینی نے کہا کہ جماعت اسلامی ہند اس بات پر بھی فکر مند ہے کہ ابھی تک امریکی ٹیرف سے محفوظ رہنے والے زرعی شعبے کو امریکہ کے لیے کھولا جا رہا ہے۔اس اقدام سے کسانوں کی روزی روٹی اور غذائی تحفظ خطرے میں پڑ سکتا ہے۔انہوں نے کہا کہ روس سے ہندوستان کی تیل خریداری سے متعلق امریکی دعوے نے مزید کنفیوزن پیدا کر دیا ہے۔ کیونکہ اس سلسلے میں حکومت کی جانب سے نہ تو اس کی تصدیق کی گئی ہے اور نہ تردید سامنے آئی ہے۔حکومت کے رویے سے اس کی خودمختاری اور قوت فیصلہ پر شدید خدشات پیدا ہو گئے ہیں۔
یونین بجٹ 2026–27 کے حوالے سے بات کرتے ہوئے سید سعادت اللہ حسینی نے کہا کہ اگرچہ حکومت نے معاشی استحکام، سرمائے کے اخراجات اور مالیاتی نظم و ضبط پر زور دیا ہے، لیکن روزگار کے مواقع پیدا کرنے، سماجی شعبے کی ضروریات، بڑھتی ہوئی معاشی عدم مساوات اور عوامی قرض کے بڑھتے ہوئے بوجھ جیسے اہم مسائل کو حل کرنے میں موجودہ بجٹ ناکام رہا ہے۔ 12.2 لاکھ کروڑ روپے سے زائد کا ریکارڈ سرمائے کا خرچ طویل مدتی بنیادی ڈھانچے کی تعمیر میں مدد دے سکتا ہے۔ خاص طور پر غیر منظم شعبے کے مزدوروں، دیہی گھرانوں، خواتین اور نوجوانوں کو فائدہ پہنچ سکتا ہے۔ انہوں نے مزید کہا کہ سماجی شعبے اور صحت و تعلیم پر فنڈز قومی پالیسی کے اہداف سے بہت کم ہیں۔ فلاحی اسکیموں میں فنڈز کی کمی بڑھتے ہوئے قرضوں پر انحصار مالی گنجائش کو محدود اور ضروری سماجی اخراجات کو متاثر کرتے ہیں۔ سید سعادت اللہ حسینی نے اس بات کو دہرایا کہ انسانی ترقی اور سماجی انصاف میں مناسب سرمایہ کاری کے بغیر معاشی ترقی اور پائیدار پیش رفت ممکن نہیں ہے ۔
فرقہ وارانہ اور ذات پات پر مبنی تشدد کے مسئلے پر گفتگو کرتے ہوئے جماعت اسلامی ہند کے نائب امیر ملک معتصم خان نے مذہبی اقلیتوں، دلت برادریوں اور سماجی طور پر محروم طبقات کے خلاف بڑھتے ہوئے تشدد اور امتیازی سلوک کی شدید مذمت کی۔ انہوں نے ان رپورٹوں کا حوالہ دیا جن کے مطابق 2025 میں نفرت انگیز تقریروں کے 1,318 واقعات ریکارڈ کیے گئے، جن میں سے 98 فیصد بیانات میں مسلمانوں کو نشانہ بنایا گیا، جبکہ ملک بھر میں ذات پات کی بنیاد پر متعدد مظالم بھی سامنے آئے ہیں۔ انہوں نے کہا کہ ایسے واقعات آئینی اقدار اور سماجی ہم آہنگی کے لیے ایک سنگین خطرہ بن چکے ہیں۔ اتراکھنڈ کے کوٹدوار واقعے کا ذکر کرتے ہوئے ملک معتصم خان نے کہا کہ کچھ بہادر نوجوانوں نے ایک مسلم تاجر کو فرقہ وارانہ حملے سے بچانے کی کوشش کی، لیکن فسادات کے اصل ذمہ داروں کو گرفتار کرنے کے بجائے پولیس نے انہی نوجوانوں کے خلاف ایف آئی آر درج کر دی۔ انہوں نے کہا کہ پولیس کی یہ کارروائی قانون اور انصاف کا سراسر مذاق ہے۔ملک معتصم خان نے کہا کہ بے قابو ہوتی جا رہی فرقہ واریت اور ذات پات کی نفرت ملک کے جمہوری ڈھانچے اور سماجی یکجہتی کے لیے خطرہ بن چکی ہے۔ انہوں نے تمام طرح کے فرقہ وارانہ تشدد کے واقعات کی فوری تحقیقات، قانونی تحفظ، موجودہ قوانین کے نفاذ اور انصاف کے فروغ کے لیےمؤثر اقدامات کا مطالبہ کیا۔
RJD की अहम बैठक में पहुंचे लालू यादव, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
पटना के होटल मौर्या में आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू हो गई है. सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में तेजस्वी यादव का पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है.
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए वित्त मंत्रालय को रचनात्मक सुझाव सौंपे सुझावों में भारत के विकास को ज़्यादा रोज़गार-उन्मुख, न्यायसंगत और मांग-आधारित बनाने पर बल दिया गया नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026 जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, वित्त मंत्रालय भारत सरकार को एक विस्तृत सुझाव सौंपी है, जिसमें यूनियन बजट 2026-27 के लिए निति-निर्धारित सुझाव दिए गए हैं। ये सुझाव रोज़गार बढ़ाने, धन के वितरण को बेहतर बनाने और मांग-आधारित विकास को मज़बूत करने पर केंद्रित हैं। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने एक बार फिर सरकार के सामने सबूतों पर आधारित और नतीजों पर केंद्रित सिफारिशें पेश की हैं जिसका मकसद भारतीय अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक असंतुलन को दूर किया जा सके। ये सुझाव भारत के हालिया आर्थिक प्रदर्शन के एक बड़े नीतिगत संदर्भ में है। हालांकि देश ने लगातार सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के विकास, बढ़ते वित्तीय बाज़ार और बढ़ती कॉर्पोरेट लाभप्रदता के रूप में धन सृजन करने की मज़बूत क्षमता दिखाई है, लेकिन ये फायदे समान रूप से दौलत के बंटवारे या पर्याप्त रोज़गार पैदा करने में प्रवर्तित नहीं हुए हैं। आय और धन-संग्रह के संकेतक, साथ ही विकास की कमज़ोर रोज़गार लचीलापन और ज़्यादा युवा बेरोज़गारी राजस्व सुधार की ज़रूरत को रेखांकित करते हैं। भोजन, स्वास्थ्य सेवा, आवास और शिक्षा जैसी ज़रूरी चीज़ों पर बढ़ते घरेलू खर्च ने खपत और घरेलू मांग को और सीमित कर दिया है। इस पृष्ठभूमि से सुझावों में राजकोषीय नीति बनाने में रोज़गार के नतीजों को साफ़ तौर पर शामिल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है। इसमें बड़े सार्वजनिक खर्चों और इंसेंटिव के श्रम-प्रभाव का आकलन करने के लिए संस्थागत तंत्र का प्रस्ताव है, साथ ही क्लाइमेट-रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी सेवाओं और संरक्षण कार्य पर केंद्रित लक्षित शहरी रोज़गार पहल भी शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों के लिए सुझावों में गैर-कृषि रोज़गार के लिए ज़िला-स्तरीय, जगह-आधारित दृष्टिकोण की वकालत की गयी है जो स्थानीय आर्थिक ताकतों पर आधारित हो और आधारभूत संरचना, खरीद और स्थानीय भर्तियोंसे जुड़े रियायती वित्त के ज़रिए समर्थित हो। इन सिफारिशों में रोज़गार के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए लघु, कुटीर और मध्यम उद्दयमों से संबंधित सार्वजनिक ऋण सहायता के लिए नयी रूपरेखा तैयार करने की भी बात कही गई है। खासकर महिलाओं और पहली बार काम करने वालों के लिए क्रेडिट इंसेंटिव को सत्यापित रोज़गार सृजन से जोड़कर। इन सुझावों का मकसद सार्वजनिक वित्त पर सामाजिक लाभ को बढ़ाना है। इसी तरह, सुझावों में औद्योगिक प्रोत्साहन योजना को श्रम प्रोत्साहन क्षेत्र की ओर दुबारा उन्मुखी बनाने पर ज़ोर दिया गया है जिसमें रोज़गार-आधारित इंसेंटिव दिए जाएं जो पूंजी की तीव्रता के बजाय रोज़गार सघनता को प्रतिफल दें। यह मानते हुए कि आय में उतार-चढ़ाव ग्रामीण संकट का एक मुख्य कारण बन गया है, इन सुझावों में कृषि क्षेत्र में निति का निर्धारण निवेश समर्थन से हटाकर आय को स्थिर करने पर किया गया है। सुझावों में मूल्य-कमी भुगतान, फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन, ग़ैर-मौसमी ग्रामीण कामों का विस्तार, और संस्थागत क्रेडिट में धीरे-धीरे आय को स्थिर करने वाले तरीकों की ओर बदलाव शामिल हैं। स्वास्थ्य सम्बन्धी खर्चों से होने वाली परिवारों की वित्तीय कमज़ोरी को कम करने पर भी ध्यान दिया गया है, जिसके लिए ऐसे उपाय किए जाएं जो सीधे जेब से होने वाले खर्च को कम किया जा सके। इस सिफारिश में शिक्षित बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने के लिए संरचित शिक्षा-से-रोजगार परिवर्तन तंत्र का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसमें सशुल्क शिक्षुता और कौशल-आधारित छात्रवृत्ति शामिल हैं, और उन जिलों को प्राथमिकता देने की बात कही गयी है जहां स्नातक बेरोजगारी की दर अधिक है। इसके अलावा, इसमें मुसलमानों के लिए लक्षित सामाजिक-आर्थिक दखल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है, जो लगातार शैक्षिक, रोज़गार और क्रेडिट एक्सेस में होने वाली कमियों के स्थापित आनुभविक सबूतों पर आधारित है। इन उपायों में शिक्षा सहायता, उद्यम- अर्थव्यवस्था, कौशल और रोज़गार समूहों और पब्लिक प्रोक्योरमेंट में मुस्लिम स्वामित्व वाले MSMEs की बेहतर भागीदारी पर ध्यान दिलाया गया है। रेवेन्यू के मामले में भारत के कर-संरचना को मध्यम अवधि में पुनः संतुलित करने की सलाह दी गई है, ताकि परोक्ष कर पर बहुत ज़्यादा निर्भरता कम हो और प्रगतिशील प्रत्यक्ष कराधान को मज़बूत किया जा सके। इसमें विलासिता से जुड़े खपत, सट्टेबाजी से होने वाले मुनाफे और डिजिटल मूल्य निर्माण पर चुनिंदा टैक्स लगाने के साथ-साथ, अनुमानित और नतीजों से जुड़े हस्तांतरण के ज़रिए राज्य की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के उपायों पर भी बात की गई है। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद दोहराती है कि केंद्रीय बजट के लिए रचनात्मक सुझाव देना वार्षिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा है, जो समावेशी और सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार आर्थिक नीति बनाने के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस संदर्भ में जमाअत दूसरे मुस्लिम संगठनों और सिविल सोसायटी संस्थानों से भी अपील करती है कि वे भी अपने रचनात्मक सुझाव वित्त मंत्रालय को भेजें, ताकि अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक चिंताओं को राष्ट्रीय बजट प्रक्रिया में जगह मिल सके। सुझावों के अंत में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि भारत की मुख्य आर्थिक चुनौती केवल धन सृजन में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने में है कि विकास से रोज़गार, आय सुरक्षा और सभी के लिए समान सामाजिक नतीजे बरामद हों। इन सुझावों को 2026-27 के यूनियन बजट को अंतिम रूप देने में विचार के लिए सम्मानपूर्वक वित्त मंत्रालय के सामने रखा गया है।
*BJP का मिशन बंगाल, कल सिंगुर में हुंकार भरेंगे PM मोदी; 830 करोड़ की परियोजनाओं की देंगे सौगात*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल के सिंगुर में ₹830 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें बुनियादी ढांचे, रेलवे और बंदरगाह से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में अब किसी भी सोने-चांदी की दुकान में बुर्का , नकाब या घूंघट पहनकर जाने वालों को एंट्री पर रोक लगा दी गई है. बुधवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश सर्राफा एसोसिएशन ने मीटिंग के बाद यह फैसला लिया है. बैठक में यह भी तय किया गया है कि हेलमेट पहनकर आने वाले पुरुषों और महिलाओं को भी दुकान में एंट्री नहीं दी जाएगी.
छत्तीसगढ़ प्रदेश सर्राफा एसोसिएशन ने यह फैसला लगातार हो रही लूट को देखते हुए लिया है. हाल ही में गरियाबंद जिले के नवापारा-राजिम में सर्राफा कारोबारी से करोड़ों रुपये की लूट की गई थी. #newsupdate#breakingnews
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*JIH Vice President, Malik Moatasim Khan Expresses Concern Over Reports of Mistreatment of Maulana Abdullah Salim in Custody, Calls for Due Process and Dignity*
"We express concern over recent media reports regarding the arrest and alleged custodial mistreatment of Maulana Abdullah Salim Chaturvedi by the Uttar Pradesh Special Task Force (STF). This alleged incident of custodial misconduct raises serious questions about adherence to due process and human dignity. While alleged objectionable remarks attributed to Maulana Abdullah Salim or any hate speech can never be supported, it is equally important to ensure that the law is applied in a fair and just manner. Any individual, regardless of the allegations, is entitled to dignity, due process of law, and protection from any form of torture, harassment or mistreatment.
Jamaat-e-Islami Hind believes that the rule of law must prevail under all circumstances and that any deviation from established legal procedures undermines public trust in institutions. Similarly, Selective implementation of laws is also a matter of grave concern. We wish to emphasize that if any wrongdoing has occurred, it should be addressed strictly within the framework of law, and any allegations of custodial excesses must be independently and impartially investigated. We urge the authorities to ensure that justice is carried out in a manner that upholds constitutional values, protects individual dignity, and avoids any form of arbitrariness."
Malik Moatasim Khan
Vice President, Jamaat-e-Islami Hind
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07 فروری
پریس ریلیز
جماعت اسلامی ہند نے امریکہ ٹیرف معاہدے، یونین بجٹ کے اثرات اور بڑھتے ہوئے فرقہ وارانہ تشدد پر شدید تشویش کا اظہار کیا
نئی دہلی: جماعت اسلامی ہند نے ہندوستان اور امریکہ کے درمیان طے پانے والے ٹیرف معاہدے اور اس سے متعلق سامنے آنے والی معلومات پر اپنی گہری تشویش کا اظہار کیا ہے۔ میڈیا سے گفتگو کرتے ہوئے جماعت اسلامی ہند کے امیر سید سعادت اللہ حسینی نے کہا کہ ٹیرف معاہدے کے تعلق سے نہ تو پارلیمنٹ کو اور نہ ہی ملک کے عوام کو اعتماد میں لیا گیا ہے۔ تشویشناک بات یہ ہے کہ اس معاہدے سے متعلق معلومات زیادہ تر سوشل میڈیا رپورٹس اور امریکی حکام کے بیانات کے ذریعے سامنے آ رہی ہیں۔ امریکہ سے آنے والے بیانات سے ظاہر ہوتا ہے کہ ہندوستان امریکی مصنوعات پر ٹیرف صفر تک کم کر سکتا ہے، جبکہ امریکہ ہندوستانی برآمدات پر تقریباً 18 فیصد ٹیرف عائد کرے گا۔ اگر یہ دعوے درست ہیں تو یہ معاہدے کے توازن پر سنگین سوالات کھڑے کرتے ہیں۔ مزید تشویش کی بات یہ ہے کہ جن ٹیرف سطحوں کو اس وقت کامیابی کے طور پر پیش کیا جا رہا ہے وہ دراصل پہلے سے موجود شرحوں سے کہیں زیادہ ہیں۔ سید سعادت اللہ حسینی نے کہا کہ جماعت اسلامی ہند اس بات پر بھی فکر مند ہے کہ ابھی تک امریکی ٹیرف سے محفوظ رہنے والے زرعی شعبے کو امریکہ کے لیے کھولا جا رہا ہے۔اس اقدام سے کسانوں کی روزی روٹی اور غذائی تحفظ خطرے میں پڑ سکتا ہے۔انہوں نے کہا کہ روس سے ہندوستان کی تیل خریداری سے متعلق امریکی دعوے نے مزید کنفیوزن پیدا کر دیا ہے۔ کیونکہ اس سلسلے میں حکومت کی جانب سے نہ تو اس کی تصدیق کی گئی ہے اور نہ تردید سامنے آئی ہے۔حکومت کے رویے سے اس کی خودمختاری اور قوت فیصلہ پر شدید خدشات پیدا ہو گئے ہیں۔
یونین بجٹ 2026–27 کے حوالے سے بات کرتے ہوئے سید سعادت اللہ حسینی نے کہا کہ اگرچہ حکومت نے معاشی استحکام، سرمائے کے اخراجات اور مالیاتی نظم و ضبط پر زور دیا ہے، لیکن روزگار کے مواقع پیدا کرنے، سماجی شعبے کی ضروریات، بڑھتی ہوئی معاشی عدم مساوات اور عوامی قرض کے بڑھتے ہوئے بوجھ جیسے اہم مسائل کو حل کرنے میں موجودہ بجٹ ناکام رہا ہے۔ 12.2 لاکھ کروڑ روپے سے زائد کا ریکارڈ سرمائے کا خرچ طویل مدتی بنیادی ڈھانچے کی تعمیر میں مدد دے سکتا ہے۔ خاص طور پر غیر منظم شعبے کے مزدوروں، دیہی گھرانوں، خواتین اور نوجوانوں کو فائدہ پہنچ سکتا ہے۔ انہوں نے مزید کہا کہ سماجی شعبے اور صحت و تعلیم پر فنڈز قومی پالیسی کے اہداف سے بہت کم ہیں۔ فلاحی اسکیموں میں فنڈز کی کمی بڑھتے ہوئے قرضوں پر انحصار مالی گنجائش کو محدود اور ضروری سماجی اخراجات کو متاثر کرتے ہیں۔ سید سعادت اللہ حسینی نے اس بات کو دہرایا کہ انسانی ترقی اور سماجی انصاف میں مناسب سرمایہ کاری کے بغیر معاشی ترقی اور پائیدار پیش رفت ممکن نہیں ہے ۔
فرقہ وارانہ اور ذات پات پر مبنی تشدد کے مسئلے پر گفتگو کرتے ہوئے جماعت اسلامی ہند کے نائب امیر ملک معتصم خان نے مذہبی اقلیتوں، دلت برادریوں اور سماجی طور پر محروم طبقات کے خلاف بڑھتے ہوئے تشدد اور امتیازی سلوک کی شدید مذمت کی۔ انہوں نے ان رپورٹوں کا حوالہ دیا جن کے مطابق 2025 میں نفرت انگیز تقریروں کے 1,318 واقعات ریکارڈ کیے گئے، جن میں سے 98 فیصد بیانات میں مسلمانوں کو نشانہ بنایا گیا، جبکہ ملک بھر میں ذات پات کی بنیاد پر متعدد مظالم بھی سامنے آئے ہیں۔ انہوں نے کہا کہ ایسے واقعات آئینی اقدار اور سماجی ہم آہنگی کے لیے ایک سنگین خطرہ بن چکے ہیں۔ اتراکھنڈ کے کوٹدوار واقعے کا ذکر کرتے ہوئے ملک معتصم خان نے کہا کہ کچھ بہادر نوجوانوں نے ایک مسلم تاجر کو فرقہ وارانہ حملے سے بچانے کی کوشش کی، لیکن فسادات کے اصل ذمہ داروں کو گرفتار کرنے کے بجائے پولیس نے انہی نوجوانوں کے خلاف ایف آئی آر درج کر دی۔ انہوں نے کہا کہ پولیس کی یہ کارروائی قانون اور انصاف کا سراسر مذاق ہے۔ملک معتصم خان نے کہا کہ بے قابو ہوتی جا رہی فرقہ واریت اور ذات پات کی نفرت ملک کے جمہوری ڈھانچے اور سماجی یکجہتی کے لیے خطرہ بن چکی ہے۔ انہوں نے تمام طرح کے فرقہ وارانہ تشدد کے واقعات کی فوری تحقیقات، قانونی تحفظ، موجودہ قوانین کے نفاذ اور انصاف کے فروغ کے لیےمؤثر اقدامات کا مطالبہ کیا۔
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RJD की अहम बैठक में पहुंचे लालू यादव, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
पटना के होटल मौर्या में आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू हो गई है. सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में तेजस्वी यादव का पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है.
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⭕ न्याय में देरी न्याय से इनकार नहीं है, बल्कि न्याय का विनाश है (Justice Delayed is not Justice Denied but Justice Destroyed) : CJI Suryakant
1 month ago | [YT] | 0
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फायरिंग केस में एक्टर कमाल आर खान गिरफ्तार, कोर्ट में होगी पेशी
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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने पर जताई सहमति
1 month ago | [YT] | 0
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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए वित्त मंत्रालय को रचनात्मक सुझाव सौंपे
सुझावों में भारत के विकास को ज़्यादा रोज़गार-उन्मुख, न्यायसंगत और मांग-आधारित बनाने पर बल दिया गया
नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, वित्त मंत्रालय भारत सरकार को एक विस्तृत सुझाव सौंपी है, जिसमें यूनियन बजट 2026-27 के लिए निति-निर्धारित सुझाव दिए गए हैं। ये सुझाव रोज़गार बढ़ाने, धन के वितरण को बेहतर बनाने और मांग-आधारित विकास को मज़बूत करने पर केंद्रित हैं। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने एक बार फिर सरकार के सामने सबूतों पर आधारित और नतीजों पर केंद्रित सिफारिशें पेश की हैं जिसका मकसद भारतीय अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक असंतुलन को दूर किया जा सके।
ये सुझाव भारत के हालिया आर्थिक प्रदर्शन के एक बड़े नीतिगत संदर्भ में है। हालांकि देश ने लगातार सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के विकास, बढ़ते वित्तीय बाज़ार और बढ़ती कॉर्पोरेट लाभप्रदता के रूप में धन सृजन करने की मज़बूत क्षमता दिखाई है, लेकिन ये फायदे समान रूप से दौलत के बंटवारे या पर्याप्त रोज़गार पैदा करने में प्रवर्तित नहीं हुए हैं। आय और धन-संग्रह के संकेतक, साथ ही विकास की कमज़ोर रोज़गार लचीलापन और ज़्यादा युवा बेरोज़गारी राजस्व सुधार की ज़रूरत को रेखांकित करते हैं। भोजन, स्वास्थ्य सेवा, आवास और शिक्षा जैसी ज़रूरी चीज़ों पर बढ़ते घरेलू खर्च ने खपत और घरेलू मांग को और सीमित कर दिया है।
इस पृष्ठभूमि से सुझावों में राजकोषीय नीति बनाने में रोज़गार के नतीजों को साफ़ तौर पर शामिल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है। इसमें बड़े सार्वजनिक खर्चों और इंसेंटिव के श्रम-प्रभाव का आकलन करने के लिए संस्थागत तंत्र का प्रस्ताव है, साथ ही क्लाइमेट-रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी सेवाओं और संरक्षण कार्य पर केंद्रित लक्षित शहरी रोज़गार पहल भी शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों के लिए सुझावों में गैर-कृषि रोज़गार के लिए ज़िला-स्तरीय, जगह-आधारित दृष्टिकोण की वकालत की गयी है जो स्थानीय आर्थिक ताकतों पर आधारित हो और आधारभूत संरचना, खरीद और स्थानीय भर्तियोंसे जुड़े रियायती वित्त के ज़रिए समर्थित हो।
इन सिफारिशों में रोज़गार के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए लघु, कुटीर और मध्यम उद्दयमों से संबंधित सार्वजनिक ऋण सहायता के लिए नयी रूपरेखा तैयार करने की भी बात कही गई है। खासकर महिलाओं और पहली बार काम करने वालों के लिए क्रेडिट इंसेंटिव को सत्यापित रोज़गार सृजन से जोड़कर। इन सुझावों का मकसद सार्वजनिक वित्त पर सामाजिक लाभ को बढ़ाना है। इसी तरह, सुझावों में औद्योगिक प्रोत्साहन योजना को श्रम प्रोत्साहन क्षेत्र की ओर दुबारा उन्मुखी बनाने पर ज़ोर दिया गया है जिसमें रोज़गार-आधारित इंसेंटिव दिए जाएं जो पूंजी की तीव्रता के बजाय रोज़गार सघनता को प्रतिफल दें।
यह मानते हुए कि आय में उतार-चढ़ाव ग्रामीण संकट का एक मुख्य कारण बन गया है, इन सुझावों में कृषि क्षेत्र में निति का निर्धारण निवेश समर्थन से हटाकर आय को स्थिर करने पर किया गया है। सुझावों में मूल्य-कमी भुगतान, फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहन, ग़ैर-मौसमी ग्रामीण कामों का विस्तार, और संस्थागत क्रेडिट में धीरे-धीरे आय को स्थिर करने वाले तरीकों की ओर बदलाव शामिल हैं। स्वास्थ्य सम्बन्धी खर्चों से होने वाली परिवारों की वित्तीय कमज़ोरी को कम करने पर भी ध्यान दिया गया है, जिसके लिए ऐसे उपाय किए जाएं जो सीधे जेब से होने वाले खर्च को कम किया जा सके।
इस सिफारिश में शिक्षित बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने के लिए संरचित शिक्षा-से-रोजगार परिवर्तन तंत्र का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसमें सशुल्क शिक्षुता और कौशल-आधारित छात्रवृत्ति शामिल हैं, और उन जिलों को प्राथमिकता देने की बात कही गयी है जहां स्नातक बेरोजगारी की दर अधिक है। इसके अलावा, इसमें मुसलमानों के लिए लक्षित सामाजिक-आर्थिक दखल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है, जो लगातार शैक्षिक, रोज़गार और क्रेडिट एक्सेस में होने वाली कमियों के स्थापित आनुभविक सबूतों पर आधारित है। इन उपायों में शिक्षा सहायता, उद्यम- अर्थव्यवस्था, कौशल और रोज़गार समूहों और पब्लिक प्रोक्योरमेंट में मुस्लिम स्वामित्व वाले MSMEs की बेहतर भागीदारी पर ध्यान दिलाया गया है।
रेवेन्यू के मामले में भारत के कर-संरचना को मध्यम अवधि में पुनः संतुलित करने की सलाह दी गई है, ताकि परोक्ष कर पर बहुत ज़्यादा निर्भरता कम हो और प्रगतिशील प्रत्यक्ष कराधान को मज़बूत किया जा सके। इसमें विलासिता से जुड़े खपत, सट्टेबाजी से होने वाले मुनाफे और डिजिटल मूल्य निर्माण पर चुनिंदा टैक्स लगाने के साथ-साथ, अनुमानित और नतीजों से जुड़े हस्तांतरण के ज़रिए राज्य की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के उपायों पर भी बात की गई है।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद दोहराती है कि केंद्रीय बजट के लिए रचनात्मक सुझाव देना वार्षिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा है, जो समावेशी और सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार आर्थिक नीति बनाने के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस संदर्भ में जमाअत दूसरे मुस्लिम संगठनों और सिविल सोसायटी संस्थानों से भी अपील करती है कि वे भी अपने रचनात्मक सुझाव वित्त मंत्रालय को भेजें, ताकि अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक चिंताओं को राष्ट्रीय बजट प्रक्रिया में जगह मिल सके।
सुझावों के अंत में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि भारत की मुख्य आर्थिक चुनौती केवल धन सृजन में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने में है कि विकास से रोज़गार, आय सुरक्षा और सभी के लिए समान सामाजिक नतीजे बरामद हों। इन सुझावों को 2026-27 के यूनियन बजट को अंतिम रूप देने में विचार के लिए सम्मानपूर्वक वित्त मंत्रालय के सामने रखा गया है।
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*BJP का मिशन बंगाल, कल सिंगुर में हुंकार भरेंगे PM मोदी; 830 करोड़ की परियोजनाओं की देंगे सौगात*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल के सिंगुर में ₹830 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें बुनियादी ढांचे, रेलवे और बंदरगाह से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
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बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या, गाड़ी से कुचलकर जान लेने का आरोप
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छत्तीसगढ़ में अब किसी भी सोने-चांदी की दुकान में बुर्का , नकाब या घूंघट पहनकर जाने वालों को एंट्री पर रोक लगा दी गई है. बुधवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश सर्राफा एसोसिएशन ने मीटिंग के बाद यह फैसला लिया है. बैठक में यह भी तय किया गया है कि हेलमेट पहनकर आने वाले पुरुषों और महिलाओं को भी दुकान में एंट्री नहीं दी जाएगी.
छत्तीसगढ़ प्रदेश सर्राफा एसोसिएशन ने यह फैसला लगातार हो रही लूट को देखते हुए लिया है. हाल ही में गरियाबंद जिले के नवापारा-राजिम में सर्राफा कारोबारी से करोड़ों रुपये की लूट की गई थी. #newsupdate #breakingnews
1 month ago | [YT] | 0
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