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थायराइड में आयुर्वेदिक स्वानुभूत क्रमिक प्रयोग 🌿

थायराइड (विशेषतः गलगंड व मंदाग्नि से जुड़े विकार) में
कई बार एक ही औषधि लंबे समय तक देने के बजाय
चरणबद्ध (step-wise) प्रयोग अधिक उपयोगी सिद्ध होता है।

इसी आधार पर एक परंपरागत अनुभव इस प्रकार है —

🔹 प्रथम चरण (10 दिन)
आरोग्यवर्धिनी वटी + कांचनार गुग्गुल + वृद्धि वधिका वटी
तीनों को समान मात्रा में लेकर बारीक पीसकर 20 पुड़िया बना लें
सुबह व शाम 1-1 पुड़िया
10 ml शंखपुष्पी + 20 ml जल के साथ

🔹 द्वितीय चरण (अगले 10 दिन)
कांचनार गुग्गुल + वृद्धि वधिका वटी
इसी प्रकार 20 पुड़िया बनाकर सेवन करें
(इस दौरान आरोग्यवर्धिनी वटी को विराम दिया जाता है)

🔹 तृतीय चरण (अगले 10 दिन)
पुनः आरोग्यवर्धिनी वटी + कांचनार गुग्गुल + वृद्धि वधिका वटी
पूर्ववत विधि से सेवन करें

🔹 सेवन विधि
शंखपुष्पी के साथ मिलाने हेतु
गर्मियों में सामान्य जल
सर्दियों में हल्का गुनगुना जल उपयोग करें

👉 यह क्रम शरीर पर अनावश्यक दबाव डाले बिना
धीरे-धीरे अग्नि, धातु संतुलन एवं ग्रंथि क्रिया पर कार्य करता है

⚠️ महत्वपूर्ण
प्रत्येक रोगी की प्रकृति, अवस्था एवं कारण भिन्न होते हैं
अतः यह एक सामान्य अनुभव है, अंतिम उपचार नहीं

यदि समस्या पुरानी हो, लंबे समय से दवा चल रही हो
या रिपोर्ट में उतार-चढ़ाव बना रहता हो —
तो व्यक्तिगत परामर्श आवश्यक है

📩 परामर्श हेतु WhatsApp करें: 7042699044

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2 weeks ago | [YT] | 6

Guru Ayurveda

🌿 निम्न रक्तचाप — भाग 1
(वात बढ़ने से होने वाला लो बीपी)

कैसे पहचानें?
खड़े होते ही चक्कर आना
हाथ-पैर ठंडे रहना, शरीर रूखा लगना
बिना काम के थकान रहना
भूख कम लगना, गैस बनना
नींद पूरी न होना

अक्सर यह अनियमित भोजन, कम खाना, ठंडी-रूखी चीजें और तनाव के कारण होता है

दवा बनाने की विधि
अश्वगंधा चूर्ण — 15 ग्राम
अर्जुन छाल चूर्ण — 10 ग्राम
मुलेठी — 8 ग्राम
सोंठ — 5 ग्राम
पिप्पली — 5 ग्राम
तुलसी सूखी — 7 ग्राम

सभी को मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें
यह मिश्रण लगभग 20–25 दिन चल जाता है

सेवन की मात्रा
आधा चम्मच (लगभग 2–3 ग्राम)
सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले
गुनगुने दूध या शहद के साथ

साथ में ये 3 चीजें जरूर करें
रात को तिल के तेल से तलवों की मालिश
सुबह भीगी हुई 8–10 किशमिश खाएं
दिन में 3 बार समय पर भोजन करें

क्या न करें
खाली पेट न रहें
ठंडी और फ्रिज की चीजें न लें
चाय-कॉफी ज्यादा न लें

सावधानी
उच्च रक्तचाप, किडनी की समस्या या शरीर में सूजन हो तो मुलेठी वैद्य की सलाह से लें

अगर बार-बार चक्कर आते हैं या बेहोशी लगे तो जांच जरूर कराएं

सही कारण समझना ही असली इलाज है

7042699044
गुरु आयुर्वेद, दिल्ली

🌿 निम्न रक्तचाप — भाग 2
(खून की कमी और कमजोरी से होने वाला लो बीपी)

कैसे पहचानें?
थोड़ा काम करने पर ही थकान
चेहरा पीला पड़ना, होंठ फीके लगना
चलने पर सांस फूलना
खाने के बाद भी ताकत महसूस न होना
महिलाओं में कमजोरी या ज्यादा रक्तस्राव

यह स्थिति अक्सर खून की कमी (रक्ताल्पता), लंबी बीमारी या प्रसव के बाद आती है

दवा बनाने की विधि
शतावरी चूर्ण — 15 ग्राम
अश्वगंधा चूर्ण — 12 ग्राम
आँवला चूर्ण — 10 ग्राम
मुलेठी — 8 ग्राम
गोक्षुर चूर्ण — 5 ग्राम

सभी को मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें
यह मिश्रण लगभग 20–25 दिन चलता है

सेवन की मात्रा
एक चम्मच (लगभग 4–5 ग्राम)
सुबह खाली पेट
गुनगुने दूध के साथ
(शहद अलग से भी ले सकते हैं)

साथ में ये 3 चीजें जरूरी
रोज अनार का रस या चुकंदर-गाजर का रस
भीगे हुए खजूर, किशमिश या अंजीर
दूध और थोड़ा घी नियमित लें

क्या न करें
उपवास न करें
ज्यादा चाय-कॉफी न लें
तला-भुना और बहुत तीखा भोजन कम करें

सावधानी
अगर हीमोग्लोबिन बहुत कम हो (जैसे 7–8 से नीचे) तो केवल घरेलू उपाय पर निर्भर न रहें, जांच और उचित उपचार जरूरी है

यहाँ शरीर में खून और ताकत बनाना ही मुख्य उपचार है

7042699044
गुरु आयुर्वेद, दिल्ली

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3 weeks ago | [YT] | 11

Guru Ayurveda

🌿 फैटी लिवर का आयुर्वेदिक समाधान 🌿

आज के समय में बहुत से लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका जिगर (लिवर) कमजोर हो चुका है।
क्योंकि इसमें दर्द नहीं होता -संकेत बहुत हल्के होते हैं

• हमेशा थकान रहना
• पेट भारी या फूलना
• सुबह मुँह में कड़वाहट
• गैस की समस्या

और जब तक जांच होती है, तब तक Fatty Liver Grade 2 या 3 हो चुका होता है।

🌿 घर पर बनने वाला असरदार आयुर्वेदिक चूर्ण

• भूमि आँवला चूर्ण – 50 ग्राम
• कालमेघ चूर्ण – 30 ग्राम
• कुटकी चूर्ण – 20 ग्राम
• पुनर्नवा चूर्ण – 30 ग्राम
• शुद्ध हल्दी – 20 ग्राम
• त्रिफला चूर्ण – 30 ग्राम
• शुद्ध गुग्गुल – 20 ग्राम

➡️ सभी को मिलाकर बारीक छान लें और काँच के डिब्बे में रखें।

🌿 सेवन विधि

• सुबह खाली पेट 3–5 ग्राम, करेले के रस के साथ
• रात में 3 ग्राम, गुनगुने पानी के साथ

➡️ कम से कम 90 दिन नियमित लें
➡️ शुरुआत कम मात्रा से करें

🌿अगर कोई असुविधा हो तो तुरंत बंद करें

🌿 जब तक ये नहीं छोड़ेंगे, फायदा नहीं मिलेगा

• मैदा और रिफाइंड तेल
• तला हुआ और पैकेट फूड
• मीठा, कोल्ड ड्रिंक
• रात 8 बजे के बाद खाना
• दिन में सोना

🥗 लिवर रिकवरी डाइट

• करेला, लौकी, तोरई
• मूँग दाल, अंकुरित अनाज
• ताज़ी छाछ, गुनगुना नींबू पानी
• दिनभर 3–4 लीटर गुनगुना पानी

🌿 दिनचर्या

• सुबह 30 मिनट तेज़ चलना (पसीना आना चाहिए)
• रात का खाना 7 बजे तक
• 10 बजे तक सो जाएँ

🌿लिवर रात 11 से 2 बजे के बीच खुद को रिपेयर करता है
इस समय जागना मतलब उसकी रिकवरी रोकना

🌿 महत्वपूर्ण चेतावनी

कुटकी, भूमि आँवला और गुग्गुल में सबसे ज्यादा मिलावट होती है।
गलत सामग्री फायदा नहीं, नुकसान कर सकती है।

🌿 हमेशा शुद्ध और भरोसेमंद स्रोत से ही लें

📞 7042699044

🌿 पोस्ट काम की लगे तो आगे जरूर भेजें 🌿


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3 weeks ago | [YT] | 6

Guru Ayurveda

🌿 रोग शरीर में नहीं, आदत में जन्मता है

(अष्टांग हृदयम् और चरक संहिता के सिद्धांतों पर आधारित)
हम दवा ढूंढते हैं।
पर यह नहीं पूछतेयह रोग आया कहाँ से?
आयुर्वेद कहता है
“औषधि रोग को शांत करती है।
दिनचर्या रोग को मिटाती है।”

ये आदतें हैं जो हर घर में हैं, और रोग भी वहीं है

🌿 रात को देर तक जागना
आम भाषा में
रात 12 बजे तक मोबाइल, फिर सुबह उठकर थकान।
यह थकान नहीं शरीर का संकेत है।
शास्त्र कहता है
रात्रि जागरण से वात और पित्त बढ़ते हैं।
नींद टूटती है, स्मृति कमज़ोर होती है, मन अशांत रहता है।
जो सोचते हैं “कम सोकर भी चल जाता है”
वे रोग को पहचान नहीं रहे, केवल सहन कर रहे हैं।

🌿 घड़ी देखकर खाना
आम भाषा में
भूख हो या न हो 1 बज गए, खाना खा लो।
यह आदत पाचन को धीरे-धीरे तोड़ती है।
शास्त्र कहता है
बिना भूख भोजन करने से जठराग्नि मंद होती है।
अन्न पचता नहीं “आम” बनता है।
(आम = शरीर में जमा अधपचा विषैला पदार्थ जो आगे चलकर सूजन, दर्द, मधुमेह बनता है)

🌿 प्राकृतिक वेगों को रोकना
आम भाषा में
“अभी meeting है, बाद में जाऊँगा।”
“छींक रोक लो, शर्म आती है।”
यह छोटी लापरवाही बड़े रोग की नींव है।
शास्त्र कहता है
मल, मूत्र, छींक, प्यास इन्हें रोकना वात को विकृत करता है।
पेट के रोग, सिरदर्द, संधिशूल इनकी जड़ यहाँ भी होती है।

🌿 दूध के साथ नमक, दही रात को
आम भाषा में
दाल-चावल में दही, ऊपर से नमक रोज़ का खाना।
स्वाद में ठीक लगता है। शरीर को नहीं।
शास्त्र कहता है
चरक संहिता में इसे “विरुद्ध आहार” कहा गया है।
त्वचा रोग, पाचन विकार, और दीर्घकालिक सूजन अक्सर यहीं से आती है।

🌿 दिन में सोना
आम भाषा में
खाना खाकर लेट जाना आदत बन गई है।
पर यह आराम नहीं कफ का जमाव है।
शास्त्र कहता है
दिवा स्वप्न से कफ स्थिर होता है।
शरीर भारी, पाचन सुस्त, मधुमेह और मोटापे की नींव यहीं पड़ती है।
(अपवाद: ग्रीष्म ऋतु में अल्प विश्राम स्वीकार्य है)

🌿गुस्सा, चिंता, और मन में चलता शोर
आम भाषा में
ऑफिस की tension, घर की चिंता, रात को विचारों का जाल।
यह केवल “stress” नहीं है।
शास्त्र कहता है
निरंतर क्रोध और चिंता से तीनों दोष विचलित होते हैं।
पित्त बढ़ता ह अम्लपित्त, उच्च रक्तचाप।
वात बढ़ता है घबराहट, अनिद्रा।
हृदय और मस्तिष्क दोनों एक साथ प्रभावित होते हैं।

🌿 तीखा, मसालेदार, जला देने वाला खाना
आम भाषा में
“बिना मिर्च के खाना अच्छा नहीं लगता।”
पर यही मिर्च अंदर से जला रही है।
शास्त्र कहता है🌿
अति तीक्ष्ण भोजन पित्त को उग्र करता है।
अम्लपित्त, आँतों की सूजन, यकृत विकार इसी से आते हैं।

🌿 मौसम को नज़रअंदाज़ करना
आम भाषा में
जाड़े में आइसक्रीम, गर्मी में तली हुई चीज़ें
मन माने, तो खा लो।
शरीर को नहीं पूछा।
शास्त्र कहता है
आयुर्वेद में “ऋतुचर्या” है हर मौसम के अनुसार आहार-विहार।
ऋतु के विरुद्ध चलने से शरीर असंतुलित होता है।
और असंतुलन ही रोग है।

🌿 “आम” — रोगों की मूल जड़
जब अग्नि मंद होती है,
भोजन पूरी तरह नहीं पचता।
यह अधपचा पदार्थ शरीर में जमा होने लगता है
इसी को आयुर्वेद में “आम” कहते हैं।
यही आगे चलकर बनता है
🌿 जोड़ों का दर्द और सूजन
🌿 स्थायी थकान और भारीपन
🌿 त्वचा विकार
🌿 मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल
और अग्नि मंद क्यों होती है?
🌿 इन्हीं आदतों से।

🌿 निदान परिवर्जनम्
(चिकित्सा का प्रथम सूत् चरक संहिता)
आम भाषा में
पहले कारण हटाओ, फिर दवा की बात करो।
शास्त्र में
“निदान परिवर्जनम्”
कारण को हटाना ही प्रथम चिकित्सा है।
समय पर सोना।
भूख लगने पर खाना।
मौसम के अनुसार जीना।
शांत मन, गतिशील शरीर।
यह साधारण नहीं
यही सबसे गूढ़ चिकित्सा है।

🌿 अंतिम बात
औषधि रोग को शांत कर सकती है।
पर यदि आदत वही रही रोग लौटेगा।
और यदि आदत बदल जाए
कई बार औषधि की आवश्यकता ही नहीं रहती।
रोग को नहीं कारण को देखिये।
वही जड़ है। वही समाधान भी।

🌿 गुरु आयुर्वेद
7042699044

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4 weeks ago | [YT] | 1

Guru Ayurveda

हमें यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि गुरु आयुर्वेद निरंतर स्वयं को और अधिक सशक्त बना रहा है।

आयुर्वेद में भी विभिन्न रोगों के अनुसार विशेषज्ञ वैद्य होते हैं। इसी क्रम में अब हमारे साथ जुड़े हैं प्रतिष्ठित आयुर्वेदाचार्य
डॉ. प्रज्ञान त्रिपाठी
एम.डी. (आयुर्वेद), बी.ए.एम.एस. – उडुपी

डॉ. प्रज्ञान त्रिपाठी आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे नाड़ी परीक्षण, पंचकर्म चिकित्सा तथा जड़ी-बूटी आधारित उपचार के विशेषज्ञ हैं और अनेक जटिल रोगों के उपचार में विशेष अनुभव रखते हैं।

विशेषज्ञता :
• जोड़ों व घुटनों का दर्द, गठिया
• माइग्रेन एवं स्नायु संबंधी रोग
• थायरॉइड व डायबिटीज
• पाचन, गैस व पेट संबंधी समस्याएँ


जिन वैद्यों के पास सामान्यतः अत्यधिक भीड़ रहती है और जिनकी परामर्श-शुल्क भी अधिक होती है, अब आप उनसे सीधे परामर्श कर सकते हैं —वह भी अपेक्षाकृत कम शुल्क में।

यह सब आपके विश्वास, स्नेह और सहयोग से ही संभव हो पाया है।

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गुरु आयुर्वेद

1 month ago | [YT] | 10

Guru Ayurveda

🌿 चेहरे की झाइयाँ (व्यंग): कारण भीतर, संकेत बाहर 🌿

झाइयाँ केवल सौंदर्य दोष नहीं हैं।
आयुर्वेद के अनुसार यह पित्त दोष की वृद्धि और रक्त धातु की दूष्यता का परिणाम है।
जब तक भीतर का कारण शांत नहीं होगा, केवल क्रीम से स्थायी लाभ संभव नहीं।

🌿आयुर्वेदिक संप्राप्ति (रोग बनने की प्रक्रिया)

1️⃣ मंद अग्नि → आम निर्माण
अधपचा भोजन ‘आम’ बनाता है, जो रक्त में मिलकर त्वचा की आभा बिगाड़ता है।

2️⃣ भ्राजक पित्त विकृति
त्वचा का वर्ण नियंत्रित करने वाला पित्त असंतुलित हो जाता है।

3️⃣ स्रोतोरोध
सूक्ष्म नलिकाओं में रुकावट से उस भाग का पोषण रुकता है और कालापन उभरता है।

🌿 उपचार सिद्धांत

✔ अग्नि दीपन
✔ आम पाचन
✔ रक्त शोधन
✔ पित्त शमन
✔ स्थानीय वर्ण सुधार

🌿 आंतरिक औषधि योग

अनंतमूल चूर्ण – 40 ग्राम

मंजीष्ठा चूर्ण – 30 ग्राम

गिलोय सत्त्व – 20 ग्राम

प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम

मात्रा: 2–3 ग्राम, दिन में दो बार
अवधि: 8–12 सप्ताह (प्रकृति अनुसार परिवर्तन संभव)

सहायक:
महामंजीष्ठाद्यारिष्ट 15–20 मि.ली. पानी मिलाकर भोजन बाद

🌿 लगाने की औषधि

यह लेप पित्त शांत करता है और त्वचा की रंगत संतुलित करने में सहायक है:

✔ शुद्ध चंदन चूर्ण – 1 चम्मच
✔ मुलेठी चूर्ण – ½ चम्मच
✔ खस (उशीर) चूर्ण – ½ चम्मच
✔ गुलाब जल या कच्चा दूध – आवश्यकतानुसार

विधि:
सभी को मिलाकर पतला लेप बनाएं।
रात में 20–25 मिनट लगाकर साधारण पानी से धो लें।
सप्ताह में 4–5 बार प्रयोग करें।

🌿धूप में जाने से पहले यह लेप न लगाएँ।

🌿 पथ्य (जो आधा इलाज है)

❌ अधिक मिर्च, खट्टा, तला भोजन
❌ देर रात जागना
❌ तनाव
❌ धूप में बिना सुरक्षा जाना

✔ आंवला, अनार, नारियल पानी
✔ पर्याप्त जल
✔ दोपहर की धूप से बचाव

🌿 जीवनशैली

प्रतिदिन 15 मिनट अनुलोम-विलोम।
7–8 घंटे गहरी नींद।
कब्ज न रहने दें।

🌿 कब तुरंत वैद्य से मिलें?

हार्मोनल असंतुलन
थायराइड
गर्भावस्था के बाद बढ़ती झाइयाँ
लंबे समय तक स्टेरॉयड क्रीम का उपयोग

📞 गुरु आयुर्वेद
वैद्य से परामर्श हेतु: 7042699044

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2 months ago | [YT] | 0

Guru Ayurveda

*क्या आपको खून की कमी (पाण्डु रोग) है?*

थकान को आदत मत मानिए।
कई बार यह शरीर का संकेत होता है कि रक्त पर्याप्त नहीं बन रहा।

आयुर्वेद में इसे पाण्डु रोग कहा गया है।
जब अग्नि मंद पड़ती है तो भोजन से पूरा रस नहीं बनता।
रसा धातु दुर्बल होती है और आगे चलकर रक्त धातु का निर्माण घटने लगता है।
धीरे-धीरे चेहरा फीका, शरीर कमजोर और मन उत्साहहीन हो जाता है।

पहले समझें स्थिति कितनी गंभीर है

हल्की अवस्था
• जल्दी थकान
• चेहरा या नाखून फीके
• चक्कर

मध्यम अवस्था
• सीढ़ी चढ़ते समय सांस फूलना
• दिल की धड़कन तेज लगना
• काम में मन न लगना

गंभीर अवस्था
• बहुत अधिक कमजोरी
• पैरों में सूजन
• हीमोग्लोबिन 7 g/dL के आसपास या कम
• गर्भावस्था में तेजी से गिरता Hb

ऐसी स्थिति में केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होते। जाँच आवश्यक है।

कौन-सी जाँच कराएँ?

• CBC
• Serum Iron
• Ferritin
• आवश्यकता हो तो B12

रिपोर्ट देखे बिना केवल अनुमान से दवा लेना समझदारी नहीं है।

आयुर्वेदिक उपचार का सिद्धांत

• अग्नि सुधरे बिना रक्त नहीं सुधरता
• रसा से रक्त धातु निर्माण को पोषण देना आवश्यक
• दोषानुसार उपचार अलग होता है

सरल चूर्ण योग
(हल्की से मध्यम आयरन कमी में)

सामग्री:
• आमलकी चूर्ण – 50 ग्राम
• गुडूची चूर्ण – 30 ग्राम
• यष्टिमधु – 20 ग्राम
• मण्डूर भस्म – 20 ग्राम

अच्छी तरह मिलाकर रखें।

मात्रा (वयस्क)
आधा छोटा चम्मच (लगभग 3 ग्राम)
सुबह-शाम

कैसे लें
गुनगुने जल के साथ
कफ प्रवृत्ति में थोड़ा शहद मिलाया जा सकता है

अवधि
6–8 सप्ताह
बीच में Hb जाँच दोहराएँ

सावधानी:
• अम्लपित्त, कब्ज प्रवृत्ति, गर्भावस्था या गंभीर एनीमिया में स्वयं प्रयोग न करें
• 3 महीने में सुधार न हो तो कारण केवल आयरन कमी नहीं भी हो सकता

परंपरागत लौह योग
(वैद्यकीय परामर्श में)

• धात्री लौह – 1–2 गोली, दिन में 2 बार
• पुनर्नवासव – 15–20 मि.ली., भोजन बाद

उपयोगी जब दीर्घकालिक कमजोरी, यकृत दुर्बलता या सूजन साथ हो।

रक्तवर्धक सहायक काढ़ा

• द्राक्षा – 20 ग्राम
• आमलकी – 10 ग्राम
• गुडूची – 10 ग्राम

400 मि.ली. पानी में उबालें।
100 मि.ली. शेष रहने पर छान लें।
50 मि.ली. सुबह-शाम लें।

भोजन ही पहली दवा है

✔ हरी पत्तेदार सब्जियाँ
✔ अनार
✔ काली द्राक्ष
✔ मूंग दाल
✔ तिल व सीमित गुड़

✘ बार-बार चाय
✘ जंक फूड
✘ देर रात भोजन
✘ अत्यधिक उपवास

दिनचर्या में 3 जरूरी बातें

• समय पर भोजन
• पर्याप्त नींद
• रोज 15 मिनट प्राणायाम या तेज चाल से चलना

कब तुरंत अस्पताल जाएँ?

• सांस लेने में कठिनाई
• अचानक रक्तस्राव
• अत्यधिक चक्कर या बेहोशी
• गर्भावस्था में तेजी से गिरता Hb


खून की कमी धीरे-धीरे बनती है।
इसे नजरअंदाज करना आसान है, पर परिणाम लंबे समय तक रहते हैं।



व्यक्तिगत परामर्श और तैयार आयुर्वेदिक औषधि हेतु संपर्क करें
📞 7042699044
गुरु आयुर्वेद

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2 months ago | [YT] | 5

Guru Ayurveda

🍀 अर्श (बवासीर): कारण, उपचार और आयुर्वेदिक सहयोग 🍀

🍀मुख्य कारण

आयुर्वेद के अनुसार अर्श के प्रमुख कारण:

• दीर्घकालिक कब्ज
• मंदाग्नि (कमजोर पाचन)
• अपान वायु का असंतुलन

लगातार ज़ोर लगाकर शौच करने से गुदा क्षेत्र की शिराएँ सूज जाती हैं। धीरे-धीरे यही स्थिति बवासीर में बदल सकती है।

🍀केवल पेट साफ करना ही उपचार नहीं है।
जरूरी है:
• पाचन संतुलन
• मल को कोमल रखना
• सूजन व जलन कम करना


🍀 अर्श-सहायक मिश्रण 🍀

सामग्री:
• हरितकी – 50 ग्राम
• त्रिफला – 100 ग्राम
• नागकेसर – 40 ग्राम
• लोध्र – 40 ग्राम
• मुलहठी – 40 ग्राम
• इसबगोल भुसी – 150 ग्राम

🍀 कैसे सहायक है?

✔ मल को नियमित व कोमल रखता है
✔ हल्के रक्तस्राव में सहयोगी
✔ सूजन व जलन कम करने में सहायक
✔ पाचन अग्नि संतुलित करता है


🍀 सेवन विधि

सामान्य कब्ज या दर्द में
रात को 1 छोटा चम्मच (लगभग 5 ग्राम)
गुनगुने पानी के साथ

🍀 हल्के रक्तस्राव में
सुबह और रात
सादे पानी या पतली छाछ के साथ

🍀 कम से कम 3 सप्ताह नियमित सेवन करें


🍀 सहायक नियम

• 2–3 लीटर पानी प्रतिदिन
• दोपहर में पतली छाछ
• 20 मिनट टहलना
• शौच में ज़ोर न लगाएँ
• मिर्च, मैदा, तला भोजन बंद करें

🍀 इन स्थितियों में केवल चूर्ण पर्याप्त नहीं:

• अत्यधिक रक्तस्राव
• बाहर निकले मस्से (ग्रेड 3–4)
• असहनीय दर्द
• पुराना एनीमिया

ऐसी स्थिति में व्यक्तिगत परामर्श आवश्यक है।

यदि शुद्ध द्रव्य उपलब्ध न हों या स्वयं बनाना संभव न हो, तो परामर्श के बाद मिश्रण उपलब्ध कराया जा सकता है।

📞 7042699044

🌿 गुरु आयुर्वेद 🌿

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2 months ago | [YT] | 3

Guru Ayurveda

🔶 लिपोमा (वसा की गांठ)

लिपोमा सामान्यतः हानिरहित वसा की गांठ है। आयुर्वेद में इसे मेद-ग्रन्थि कहा जाता है। यह कफ और मेद धातु के असंतुलन से बनती है।

🍀पहले USG से पुष्टि अवश्य करा लें कि यह साधारण लिपोमा है।

🍀सहायक चूर्ण योग

निम्न औषधियाँ समान मात्रा (30-30 ग्राम) लेकर बारीक चूर्ण बना लें:

• कंचनार छाल
• शुद्ध गुग्गुलु
• त्रिफला
• त्रिकटु
• चित्रक मूल
• वरुण छाल
• पुनर्नवा
• विडंग

मात्रा: 3 ग्राम (लगभग आधा चम्मच)
दिन में 2 बार
समय: भोजन के 40 मिनट बाद गुनगुने पानी से
अवधि: 8–12 सप्ताह (स्थिति अनुसार)

🍀 कंचनार गुग्गुलु की स्पष्ट मात्रा

🍀 सामान्य वयस्क (18–60 वर्ष)
2 गोली (प्रत्येक 250–500 mg की)
दिन में 2 बार
भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ

🍀कमजोर पाचन या बुजुर्ग
1–1 गोली दिन में 2 बार

🍀 अधिक कफ/मेद प्रधान एवं मोटापे में
2–2 गोली दिन में 2 बार (चिकित्सकीय निगरानी में)

🍀 3 महीने से अधिक लगातार सेवन से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।

🍀 किन्हें सावधानी रखनी चाहिए

• गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ
• अल्सर या तीव्र एसिडिटी वाले रोगी
• गंभीर लिवर या किडनी रोग
• 15 वर्ष से कम आयु

🍀 क्या अपेक्षा रखें?

• छोटे, मुलायम लिपोमा में बेहतर परिणाम
• बड़े या बहुत पुराने कठोर लिपोमा में पूर्ण समाप्ति हर बार संभव नहीं
• तेजी से बढ़ने या दर्द होने पर तुरंत जांच कराएं

🍀 आयुर्वेद में उपचार रोगी की प्रकृति अनुसार बदलता है।
सभी मामलों में एक जैसा परिणाम अपेक्षित नहीं।

व्यक्तिगत परामर्श हेतु संपर्क करें:
📞 7042699044
गुरु आयुर्वेद

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2 months ago | [YT] | 11

Guru Ayurveda

सुबह ओपीडी में एक सज्जन आए। बोले वैद्य जी, पहले जैसा ही खा रहा हूँ, पर पेट निकल आया है। कम करूँ तो कमजोरी लगती है, और छोड़ दूँ तो वजन बढ़ता है।
यह स्थिति आज बहुत सामान्य हो गई है।

मोटापा केवल अधिक खाने का परिणाम नहीं। आयुर्वेद की दृष्टि से यह मुख्यतः कफ प्रधान स्थौल्य है, पर अधिकांश मामलों में यह आम-कफज अवस्था बन जाता है। जठराग्नि मंद पड़ती है। भोजन पूरा नहीं पचता। अधपचा अंश आम बनता है। यही आम कफ के साथ मिलकर मेदवह स्रोतों में रुकावट करता है।

धीरे धीरे स्रोतोरोध बढ़ता है। धात्वग्नि भी प्रभावित होती है। रस का पोषण ठीक नहीं होता, पर मेद धातु बढ़ती जाती है। शरीर भारी, पर शक्ति कम।
आरंभिक अवस्था में केवल वजन बढ़ता है।
पुरानी अवस्था में सांस फूलना, आलस्य, घुटनों का दर्द, मधुमेह या रक्तचाप जुड़ने लगते हैं।

हर मोटापा एक जैसा नहीं होता।
कुछ में मेद अधिक होता है।
कुछ में आम अधिक होता है।
कुछ में जल-संचय।
और कुछ में हार्मोनल कारण प्रमुख होते हैं।
इसलिए एक ही औषधि सब पर समान परिणाम नहीं देती।

कारणों पर देखें तो देर रात भोजन, बार बार खाना, मीठा-मैदा, दिन में सोना, कम चलना – ये सब मंदाग्नि को बढ़ाते हैं।
मंदाग्नि से आम बना, आम ने कफ बढ़ाया, कफ ने मेद को स्थिर कर दिया।
यही रोग की जड़ है।

अब उपाय की बात।

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी लें, उसमें थोड़ा शहद मिला सकते हैं। यह कफहर और लघु है, स्रोतों को खोलने में सहायक है।
भोजन के बाद आधा चम्मच त्रिकटु चूर्ण गुनगुने पानी से लें। यह जठराग्नि को प्रज्वलित करता है और आम को पचाने में सहायक है।
रोज कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलना आवश्यक है। स्थौल्य में विहार आधा उपचार है।

औषधि चयन अवस्था अनुसार बदलता है।

त्रिफला गुग्गुल
जब मेद अधिक हो, पुरानी प्रवृत्ति हो, कब्ज या स्रोतोरोध हो।
मात्रा: 2 गोली दिन में दो बार, भोजन के बाद।
अवधि: 6–8 सप्ताह, फिर पुनर्मूल्यांकन।
यह मेदहर और स्रोतोशोधक है। तीव्र पित्त, गर्भावस्था या अल्सर में सावधानी।

मेदोहर वटी
आरंभिक अवस्था, मंदाग्नि और कफ प्रधान मोटापा।
मात्रा: 2 गोली सुबह–शाम भोजन के बाद।
यदि आम अधिक है तो अकेले पर्याप्त नहीं, पहले दीपनीय औषधि आवश्यक हो सकती है।

यदि वजन जल-संचय जैसा हो, पैरों में सूजन हो, तो दृष्टि अलग होगी।
यदि PCOS या हार्मोनल कारण हों तो केवल मेदहर औषधि पर्याप्त नहीं।
यदि 8 सप्ताह में अग्नि में सुधार न दिखे तो औषधि योजना बदलनी चाहिए।

पथ्य में जौ, मूंग, छाछ, हरी सब्जियाँ रखें। ये लघु और कफहर हैं।
मीठा, तला हुआ, ठंडे पेय, दिन में सोना और बार बार स्नैकिंग रोकना अधिक महत्वपूर्ण है। ये अग्नि को और मंद करते हैं।

यदि तेजी से वजन बढ़ रहा हो, मासिक अनियमित हो, मधुमेह, थायरॉयड, अत्यधिक सांस फूलना या सूजन हो, तो प्रत्यक्ष परामर्श आवश्यक है।

मोटापा केवल शरीर का भार नहीं, अग्नि और स्रोतों का विषय है।
जब तक अग्नि संतुलित नहीं होगी, वजन टिकाऊ रूप से नहीं घटेगा।
दवा सहायक है, पर अनुशासन और नियमितता ही आधार हैं।
हर शरीर अलग है, इसलिए उपचार भी वैयक्तिक होना चाहिए।

गुरु आयुर्वेद
वैद्य से परामर्श हेतु 7042699044

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2 months ago | [YT] | 2