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Narayan Kumar Navin
5 सितंबर : शिक्षक दिवस
Happy Teacher's Day
जो खुद तपकर शिष्यों का भविष्य बनाते हैं, ऐसे गुरु ही राष्ट्र की नींव कहलाते हैं। 🇮🇳📚
#santshriasharamjibapu #asharamjibapu #narayankumarnavin #narayankumarnvn #teachersday
3 days ago | [YT] | 193
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Narayan Kumar Navin
🌺 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌺
आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व है। यह वही दिव्य रात्रि है जब भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा की कारागृह में देवकी और वसुदेव के पुत्र रूप में अवतार लिया। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का यह दिव्य अवतार आज से लगभग 5253 वर्ष पूर्व हुआ था।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक दिव्य घटना नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश है। श्रीकृष्ण ने अपने जीवन से प्रेम, करुणा, कर्म, नीति और भक्ति का अद्भुत मार्ग दिखाया।
उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—
कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो और धर्म का साथ कभी मत छोड़ो।
🦚 जन्माष्टमी का विशेष महत्व
इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करते हैं, मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाते हैं और बाल गोपाल को झूला झुलाते हैं। मंदिरों और घरों में माखन-मिश्री, पंचामृत और धनिया-पंजीरी का भोग लगाया जाता है।
🌸 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अष्टक 🌸
१. नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की।
मन में प्रेम जगाओ, जय गोपाल लाल की॥
२. देवकी के लाल तुम्हीं, वसुदेव के प्यारे।
दीनों के रखवाले, प्रभु जग के सहारे॥
३. मुरली की मधुर तान, मन को हर लेती।
राधा संग प्रेम की, अमृत धारा देती॥
४. माखन मिश्री भोग लगे, गूँजे जय-जयकार।
बाल गोपाल की भक्ति से, मिटे सभी विकार॥
५. गीता का ज्ञान दिया, कर्म का मार्ग बताया।
धर्म की रक्षा करके, सत्य का दीप जलाया॥
६. कंस का किया विनाश, अधर्म हुआ पराजित।
धर्म की विजय हुई, सत्य हुआ प्रतिष्ठित॥
७. हे कान्हा कृपा करो, चरणों में स्थान दो।
भक्ति, प्रेम और सद्बुद्धि, जीवन में दान दो॥
८. राधे-कृष्ण नाम जपे, हर पल मन हमारा।
नन्दलाला की कृपा से, हो मंगल जग सारा॥
🦚 बोलिए—
नन्द के आनंद भयो!
जय कन्हैयालाल की!
राधे-राधे!
जय श्रीकृष्ण! 🙏
🌸🪷🪔🪷🌸
#SantShriAsharamjiBapu #asharamjiBapu #narayankumarnavin #narayankumarnvn #janmastamispecial❤️
4 days ago | [YT] | 203
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Narayan Kumar Navin
🔥 जो सत्य बोलने से डरता हो, वह सत्य का प्रहरी कैसे बन सकता है? 🔥
"सत्य बोलने का साहस ही व्यक्ति के चरित्र की असली पहचान है।"
कुछ समय पहले जब कथित “चंदा चोरों” का नाम लेने की बात आई, तब धीरेन्द्र शास्त्री जी स्वयं यह कहकर पीछे हट गए कि “हमें भी निपटा दिया जाएगा”—तो क्या यह सत्य के प्रति निर्भीकता का प्रमाण है?
और आज धीरेन्द्र शास्त्री जी पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के विषय में बड़े-बड़े ज्ञान बाँट रहे हैं!
«पहले अपने साहस की परीक्षा दीजिए, फिर दूसरों के सत्य पर भाषण दीजिए।»
थू है ऐसी अल्प सिद्धियों, खोखली निर्भीकता और अवसरवादी ज्ञान-वाणी पर!
🚩 डर दो लोगों को नहीं लगता—
1️⃣ मूर्ख को
2️⃣ ब्रह्मज्ञानी को
धीरेन्द्र शास्त्री जी इन दोनों में से कोई नहीं है, तो डर होना भी स्वाभाविक ही है।
जो व्यक्ति अपने बचाव के लिए सत्य बोलने से पीछे हट जाए, उसकी सत्यनिष्ठा की प्रखरता पर प्रश्न उठना भी स्वाभाविक ही है।
धर्म और सत्य की बातें करना बहुत आसान है, लेकिन जब सत्य बोलने की कीमत चुकाने की बारी आती है, तब असली साहस सामने आता है।
जो इंसान स्वयं के बचाव के लिए धर्म और सत्य के विषय में चुप्पी साध ले, वह धीरेन्द्र शास्त्री जी पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के प्रति अपनी कथित सत्यता को कितनी प्रखरता से प्रस्तुत कर सकते हैं—इसका विवेक करना बापूजी के शिष्यों पर छोड़ देना ही पर्याप्त है।
🔥 सिद्धि और ब्रह्मज्ञान में अंतर समझिए! 👇🏻
कोई व्यक्ति कुछ सिद्धियाँ प्राप्त करके भोली-भाली जनता को प्रभावित कर सकता है, चमत्कारों का प्रदर्शन कर सकता है और लोकप्रियता अर्जित कर सकता है।
लेकिन सच्चे ब्रह्मज्ञानी संतों के शिष्य तमाशे और तत्वज्ञान का अंतर भली-भाँति जानते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं भगवद्गीता 7.18 में ज्ञानी की महिमा बताते हुए कहा—
«“ज्ञानी त्वात्मैव मे मतम्।”»
अर्थात्—
“ज्ञानी तो मेरे आत्मस्वरूप ही हैं—ऐसा मेरा मत है।”
🔥 यही तो ब्रह्मज्ञान की ऊँचाई है!
धीरेन्द्र शास्त्री जी, आप एक कथावाचक या ज्यादा से ज्यादा भगवान के भक्त के शिष्य हैं, किसी ब्रह्मज्ञानी के नहीं। इसलिए यदि आप सत्य बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं, तो आपके आध्यात्मिक दावों और कथनों की प्रामाणिकता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
मेरी विनती है—आप किसी ब्रह्मज्ञानी संत के शिष्य बनिए, तब अटल सत्य बोलने की प्रखरता को निखार पाएँगे। यह चाटुकारिता वाली वाणी शोभनीय नहीं है।
क्योंकि— 👇🏻
«सिद्धि बड़ी नहीं होती, साधना बड़ी होती है।
चमत्कार बड़ा नहीं होता, चरित्र बड़ा होता है।
वाक्पटुता बड़ी नहीं होती, सत्यनिष्ठा बड़ी होती है।»
हमारी सनातन परंपरा इसका सर्वोत्तम उदाहरण हनुमानजी के रूप में प्रस्तुत करती है।
"रिद्धि-सिद्धियों के दाता होने के बावजूद हनुमानजी ने अपनी समस्त शक्ति को प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित कर दिया। उन्हें अपनी सिद्धियों का अहंकार नहीं था; बल्कि स्वयं को श्रीराम का दूत और सेवक कहलाने में ही गौरव अनुभव होता था।"
यही अंतर है— 👇🏻
🔸 सिद्धि का प्रदर्शन करने वाले और ब्रह्मज्ञान में स्थित संत में।
🔸 तमाशा दिखाने वाले और तत्व को जानने वाले में।
🔸 ज्ञान का दावा करने वाले और सत्य के लिए खड़े होने वाले में।
इसलिए पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के शिष्यों को किसी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं।
हम जानते हैं—
संतत्व चमत्कारों से नहीं, सत्य, साधना, त्याग और चरित्र से पहचाना जाता है।
🔥 सत्य को डराने वाले बहुत मिलेंगे,
लेकिन सत्य के लिए कीमत चुकाकर खड़े होने वाले विरले ही मिलते हैं।
🚩 सत्य सनातन है।
🚩 जय श्रीराम।
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2 weeks ago | [YT] | 375
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Narayan Kumar Navin
15 अगस्त : स्वतंत्रता दिवस🇮🇳 की हार्दिक बधाई🙏🏻🚩
#asharamjibapu #narayankumarnavin #narayankumarnvn 🇮🇳 #IndependenceDay #15August #HappyIndependenceDay #India #ProudIndian #JaiHind #VandeMataram #BharatMataKiJai #IndianFlag #IndianPride #Patriotism #NationFirst #MyIndia #MeraBharat #IncredibleIndia #SaluteToOurHeroes #Freedom #UnityInDiversity #JaiHindJaiBharat 🇮🇳🙏🏻🚩
3 weeks ago | [YT] | 415
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Narayan Kumar Navin
*📿 पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की पावन प्रेरणा से*
*🔱 देवघर (बाबाधाम), झारखंड में*
*_कांवड़िया सेवा एवं भव्य सुप्रचार अभियान_*
*📅 दिनांक : 14 से 24 अगस्त, 2026*
*_✨ सेवाएँ :_*
*• पलाश शरबत*
*• गुलाब शरबत*
*• आयुर्वेदिक चाय*
*• जल सेवा*
*• नींबू पानी*
*• फल वितरण*
*• आश्रम की टॉफी का वितरण*
*• थकान मिटाने हेतु गर्म जल सेवा*
*• मालिश सेवा*
*• दवा सेवा*
*• सत्साहित्य वितरण*
*• वॉल कैलेंडर वितरण*
*• ऋषि प्रसाद वितरण*
*📍 शिविर स्थल :*
*खिजुड़िया, रांगा मोड़, देवघर जंक्शन के निकट, देवघर*
*🙏 झारखंड एवं बिहार के सेवाभावी युवा, साधकगण सेवा हेतु सादर आमंत्रित हैं।*
*🙏 आयोजक :*
*युवा सेवा संघ (बिहार व झारखंड) एवं श्री योग वेदान्त सेवा समिति, देवघर*
*📞 सेवा के इच्छुक सम्पर्क करें :*
8238091011
9576008617
6200603275
7761871864
9279480828
9934871247
9304914438
9905992587
8797549969
*🙏 आइए, शिवभक्तों की सेवा का पुण्य लाभ प्राप्त करें एवं सनातन संस्कृति के इस महाअभियान का हिस्सा बनें।*
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3 weeks ago | [YT] | 73
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Narayan Kumar Navin
वैद्यनाथ बाबा धाम, देवघर में कांवरियों की सेवा हेतु बने पंडाल में व्यासपीठ का मंगलमय दृश्य🙏🏻🙏🏻🙏🏻👆🏻
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3 weeks ago | [YT] | 76
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Narayan Kumar Navin
💐💐 मैं कौन हूँ? 💐💐
एक संन्यासी सारी दुनिया की यात्रा करके भारत वापस लौटा था। वह एक छोटी-सी रियासत में मेहमान बना।
उस रियासत के राजा ने संन्यासी के पास जाकर कहा—
राजा: “स्वामीजी! एक प्रश्न मैं बीस वर्षों से निरंतर पूछ रहा हूँ, लेकिन उसका कोई उत्तर नहीं मिलता। क्या आप मुझे उसका उत्तर देंगे?”
संन्यासी: “निःसंदेह! आज तुम खाली नहीं लौटोगे। निश्चित ही उत्तर दूँगा। पूछो।”
राजा: “मैं ईश्वर से मिलना चाहता हूँ। ईश्वर को समझाने की कोशिश मत करना। मैं उनसे सीधा मिलना चाहता हूँ।”
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संन्यासी ने पूछा—
“अभी मिलना चाहते हैं या थोड़ी देर ठहर सकते हैं?”
राजा ने कहा—
“माफ कीजिए, शायद आप समझे नहीं। मैं परमपिता परमात्मा की बात कर रहा हूँ। कहीं आप यह तो नहीं समझ रहे कि मैं ‘ईश्वर’ नाम के किसी व्यक्ति की बात कर रहा हूँ, जिसके बारे में आप पूछ रहे हैं कि अभी मिलना है या थोड़ी देर रुक सकते हैं?”
संन्यासी मुस्कुराए और बोले—
“महानुभाव! भूलने की कोई गुंजाइश नहीं है। मैं तो चौबीसों घंटे परमात्मा से मिलाने का ही धंधा करता हूँ। अभी मिलना है या थोड़ी देर रुक सकते हैं—सीधा जवाब दें।”
“तुम तो बीस वर्षों से भगवान से मिलने को उत्सुक हो और आज वक्त आ गया है, तो मिल लो।”
राजा ने हिम्मत करके कहा—
( कांवड़ यात्रा के मुख्य उद्देश्य क्या है?
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“अच्छा, मैं अभी मिलना चाहता हूँ। मिला दीजिए।”
संन्यासी ने कहा—
“इस छोटे-से कागज पर अपना नाम-पता लिख दो, ताकि मैं भगवान के पास पहुँचाकर बता सकूँ कि आप कौन हैं।”
राजा ने अपना नाम, महल का नाम, अपना परिचय और अपनी उपाधियाँ लिखकर कागज संन्यासी को दे दिया।
कागज देखकर संन्यासी बोले—
“महाशय! ये सारी बातें मुझे असत्य मालूम होती हैं, जो आपने इस कागज पर लिखी हैं।”
राजा हतप्रभ रह गया। उसे आश्चर्य हुआ कि इस संन्यासी को उसके परिचय पर संदेह क्यों हो रहा है?
संन्यासी ने पूछा—
“अगर आपका नाम बदल दिया जाए, तो क्या आप बदल जाएँगे? आपकी चेतना, आपकी सत्ता और आपका व्यक्तित्व दूसरा हो जाएगा?”
राजा ने कहा—
“नहीं! नाम बदलने से मैं क्यों बदलूँगा? नाम, नाम है और मैं, मैं हूँ!”
संन्यासी बोले—
“तो एक बात तय हो गई कि नाम आपका वास्तविक परिचय नहीं है, क्योंकि नाम बदलने पर भी आप नहीं बदलते।”
फिर संन्यासी ने पूछा—
“आज आप राजा हैं। कल यदि आपका राज्य चला जाए और आप गाँव के भिखारी हो जाएँ, तो क्या आप बदल जाएँगे?”
राजा ने कहा—
“नहीं! यदि मेरा राज्य चला जाएगा और मैं भिखारी भी हो जाऊँगा, तब भी मैं क्यों बदल जाऊँगा? मैं तो जो हूँ, वही हूँ। राजा होकर जो हूँ, भिखारी होकर भी वही रहूँगा। महल, राज्य और धन-संपत्ति न भी रहें, फिर भी मैं तो वही रहूँगा जो मैं हूँ।”
संन्यासी बोले—
“तो दूसरी बात भी तय हो गई कि राज्य और संपत्ति भी आपका वास्तविक परिचय नहीं हैं, क्योंकि इनके छिन जाने पर भी आप नहीं बदलते।”
फिर संन्यासी ने पूछा—
“अब बताइए, आपकी उम्र कितनी है?”
राजा ने कहा—
“चालीस वर्ष।”
संन्यासी ने पूछा—
“तो पचास वर्ष के होकर क्या आप कुछ और हो जाएँगे? जब आप बीस वर्ष के थे या जब बच्चे थे, तब क्या आप कोई और थे?”
राजा ने कहा—
“नहीं! उम्र बदलती है, शरीर बदलता है, लेकिन मैं कभी नहीं बदला। मैं जो बचपन में था, जो मेरे भीतर था, वही आज भी है।”
संन्यासी बोले—
“अब तो उम्र भी आपका परिचय नहीं रही और शरीर भी आपका वास्तविक परिचय नहीं रहा। अब अपना असली परिचय लिखकर दो—कि वास्तव में तुम कौन हो?”
“अगर वह तुम लिख दोगे, तो मैं उसे भगवान के पास पहुँचा दूँगा। अन्यथा गलत जानकारी देने के कारण मैं भी तुम्हारे साथ झूठा बन जाऊँगा। अभी तक तुम स्वयं बता चुके हो कि अब तक दिया गया परिचय तुम्हारा वास्तविक परिचय नहीं है।”
राजा मौन हो गया।
फिर बोला—
( पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के पावन प्रेरणा से वैद्यनाथ धाम में कावड़ियों की सेवा का शुभ अवसर, सेवा से अवश्य जुड़े
whatsapp.com/channel/0029Vb71t1A7z4kY4lqHIY3q/1328 )
“अब तो बड़ी कठिनाई हो गई। जिसे मैं हूँ, उसे तो मैं भी नहीं जानता! आखिर जो ‘मैं’ हूँ, उसे मैं स्वयं नहीं जानता। अब तक तो मैं इन्हीं चीजों को अपना परिचय समझता था।”
संन्यासी ने कहा—
“मेरे लिए भी यह धर्म-संकट है कि जिसका मैं परिचय ही न दे सकूँ, जिसे मैं बता ही न सकूँ कि कौन मिलना चाहता है, तो भगवान भी क्या कहेंगे कि किसको मिलाने के लिए लाए हो?”
फिर संन्यासी बोले—
“जाओ! पहले इसे खोज लो कि तुम कौन हो।”
“और मैं तुमसे वचन देता हूँ कि जिस दिन तुम यह जान लोगे कि तुम कौन हो, उस दिन तुम्हें भगवान को खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। क्योंकि स्वयं को जानने में ही उस परम सत्य का बोध हो जाता है।”
जिसने स्वयं को जान लिया, उसने परमात्मा को जान लिया।
अपने वास्तविक स्वरूप के बोध के लिए सद्गुरु की शरणागति आवश्यक है। सद्गुरु के मार्गदर्शन से ही साधक अपने भीतर उस परम सत्य का साक्षात्कार कर सकता है।
जिसने उस परमात्म-तत्त्व का दर्शन किया है, उसने उसे कहीं बाहर नहीं, अपने भीतर ही जीते-जी अनुभव किया है।
🙏🏻 प्रश्न वही है—मैं कौन हूँ?
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4 weeks ago | [YT] | 95
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Narayan Kumar Navin
ॐ पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की पावन प्रेरणा से 🙏🏻
🔱 देवघर (बाबाधाम), झारखंड में 🔱
कांवड़िया सेवा एवं भव्य सुप्रचार अभियान
🚩 चलो बाबाधाम! 🚩
बम! बम!
📅 दिनांक : 14 से 24 अगस्त, 2026
🌺 सेवाएँ 🌺
🔸 शरबत, आयुर्वेदिक चाय एवं फलों का वितरण
🔸 आश्रम की टोपी, सत्साहित्य, वॉल कैलेंडर एवं ऋषि प्रसाद का वितरण
🔸 गर्म जल सेवा
🔸 मालिश सेवा
🔸 आयुर्वेदिक दवा सेवा
📍 शिविर स्थल
खिजुड़िया, रंगा मोड़,
देवघर जंक्शन के निकट, देवघर
🙏🏻 झारखंड एवं बिहार के सेवाभावी युवा, साधक भाई-बहनें सेवा हेतु सादर आमंत्रित हैं।
🕉️ आयोजक
युवा सेवा संघ (बिहार व झारखंड)
एवं
श्री योग वेदान्त सेवा समिति, देवघर
📞 सेवा के इच्छुक संपर्क करें
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9576008617
7761871864
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🚩 सेवा • साधना • सत्संग • सुप्रचार 🚩
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1 month ago | [YT] | 78
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Narayan Kumar Navin
🔥 *भविष्य की एक ज्वलंत समस्या* 🔥
( `रक्त के 5 रिश्ते समाप्त होने की कगार पर` )
👉🏿 जब बच्चों का विवाह
20 साल में होता था, तो
एक सदी में 5 पीढ़ियाँ होती थीं।
👉🏿 जब बच्चों का विवाह
25 साल में होता था, तो
एक सदी में 4 पीढ़ियाँ होती थीं।
👉🏿 अब बच्चों का विवाह
30 साल में होता है, तो
एक सदी में 3 पीढ़ियाँ होती हैं।
👉🏿 सोचने वाली बात है।
क्या हमारा समाज
अगली सदी तक जीवित रहेगा?
आज एक अजीब सा
अंधेरा फैल रहा है।
🏚️ गली-मोहल्ले वीरान हैं,
आस-पास के घर खाली हैं।
आज घरों में बच्चों की आवाज कम
पति-पत्नी की आवाज
ज्यादा सुनाई देती है।
🤷🏻♀️ क्या हम इसे
"पढ़ा-लिखा समाज" कहें या
"स्वयं को नुकसान पहुँचाने वाला समाज"
💁🏻♂️ यह तो जनसंख्या कम करने की
एक खामोश साज़िश है।
★ अगर 50 जोड़ों में
सिर्फ़ एक बच्चा हो
तो अगली पीढ़ी में
सिर्फ़ नाममात्र के बच्चे होंगे।
👉 अगर ऐसा ही चलता रहा,
तो तीसरी पीढ़ी लगभग
गायब हो जाएगी।
👉 मोहल्ले, गलियाँ खाली पड़ी हैं।
सब लोग रोड़ पर हैं।
जीवन का आधा समय तो
रोड़ पर ही बीत जाता है।
★ गाँव के गाँव खत्म हो रहे हैं।
★ शहरों में ऊँची इमारतें हैं, लेकिन संयुक्त परिवार प्रथा समाप्त हो गयी है।
👉 नई बहुएं
"सिर्फ़ एक ही बच्चा" चाहती हैं।
🤷🏻♀️ क्या यही समाज है?
❓ क्या यही हमारे पुरखों की
विरासत है?
👉 सच तो यह है, कि ....
बच्चे अब प्यार की निशानी नहीं रहे।
बल्कि बच्चे पैदा करना ...एक मजबूरी सी है।
👉 समाज धीरे-धीरे
समाप्त होता जा रहा है।
💥 अब हम सब को समझने का समय आ गया है।
★ इस्लाम के मज़बूत
फैमिली सिस्टम की वजह से ...
देर सवेर ... अधिकांश देश भारत में भी हिन्दू परिवार परम्परा का पतन होना प्रारम्भ हो चुका है।
रक्त के 5 रिश्ते
समाप्त होने की कगार पर हैं।
ताऊ, चाचा, बुआ, मामा
मौसी जैसे रिश्ते
आने वाले समय में
देखने-सुनने को
नहीं मिलने वाले हैं।
इसे इस तरह 👇🏽
समझा जा सकता है-
पुत्र पुत्री
2 1 (मौसी X)
1 2 (चाचा, ताऊ X)
1 1 (चाचा, ताऊ, मौसी X)
1 0 X
0 1 X
परिणाम
0 0
★
सिंगल चाइल्ड फैमिली को
उनका निर्णय तीसरी पीढ़ी याने जिनके आप ... दादा-दादी होंगे बुरी तरह प्रभावित करेगा।
जिस दादा को मूल से अधिक ब्याज प्यारा होता है, उसका तो ....मूलधन भी समाप्त हो जाएगा।
इसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है।
इसलिए दम्पत्ति को
सिंगल चाइल्ड के निर्णय पर गंभीरता से विचार करना होगा।
यह घटती आबादी के आँकड़े
बोल रहे हैं।
यह विश्लेषण सरकारी आँकड़ों के अध्ययन से आ रहा है।
आपका पौत्र या प्रपौत्र
इस संसार में
अकेला खड़ा होगा।
उसे अपने रक्त के रिश्ते की
आवश्यकता होगी तो
इस पूरे ब्रह्मांड में उसका अपना कोई नहीं होगा।
यह अत्यंत सोचनीय विषय है।
ये न केवल हमारे बच्चों को
एकाकी जीवन जीने को
मजबूर करेगा बल्कि हमारी
हिंदू परिवार सभ्यता को ही नष्ट कर देगा।
हम जो हिन्दू एकता की बात करते हैं ये तो सभ्यता ही समाप्त हो जाएगी और इन सबके लिए हमारी वर्तमान पीढ़ी उत्तरदायी होगी।
★
अगर आप इस विषय को
गंभीर समझते हैं तो
इस समस्या पर विचार करें,
घर परिवार में, पति पत्नी के बीच, रिश्तेदारों में, दोस्तो में एवं
विभिन्न बैठकों एवं आयोजनों में इस विषय पर मंत्रणा करें।
अपनी सभ्यता, संस्कार औऱ पीढ़ियों को बचाये।
🙏🙏🙏
बहुत गंभीर समस्या है।
#narayankumarnavin #narayankumarnvn Narayan Kumar Navin @टॉप फ़ैन
#जागरूकता
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#सोचनेकाविषय
#गंभीरविषय
#सत्यपरविचार
#समाजकीचिंता
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#FamilyValues
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1 month ago | [YT] | 12
View 0 replies
Narayan Kumar Navin
*🛕कावड़ यात्रा के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं ?🚩*
🔱🪔🔆🛕🔆🪔🔱
*🔱कावड़ यात्रा का मुख्य उद्देश्य शिव भगवान् के भक्तों द्वारा की जाने वाली एक महत्वपूर्ण वार्षिक तीर्थयात्रा है🚩*.
*🚩कांवड़ यात्रा हिंदू धर्म में भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को प्रकट करना है!🚩*
*🌸इसका मुख्य महत्व और मान्यताएं इस प्रकार हैं🌸*
~~~~~~~~~~~~~
इस यात्रा में, भक्त गंगा नदी से पवित्र जल लाते हैं और उसे शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। यह माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है
#पौराणिक कथा के अनुसार कावड़ का महत्व
~~~~~~~~~~~~~~
जब समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला और उससे संसार जलने लगा, तब भगवान शिव ने उस विष को पीकर सृष्टि की रक्षा की. इस विष के प्रभाव से उनके कंठ में जलन होने लगी.तब सभी देवताओं ने उन्हें गंगाजल अर्पित कर विष के प्रभाव को कम किया. इसी घटना की याद में भक्त शिव को गंगाजल चढ़ाते हैं.
#आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व
~~~~~~~~~~~~~~
भगवान शिव को प्रसन्न करना
~~~~~~~~~~~~~
कांवड़ यात्रा को भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक अत्यंत सरल और सहज तरीका माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में कांवड़ उठाकर गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
#मोक्ष और #पापों से मुक्ति
~~~~~~~~~~~~~~~~~
मान्यता है कि कांवड़ यात्रा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. शास्त्रों में लिखा है कावड़ यात्रा से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है
सुख-समृद्धि और #अश्वमेध
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यज्ञ का फल: कांवड़ यात्रा करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती, सुख-शांति और समृद्धि आती है. इसे अश्वमेघ यज्ञ के समान फलदायी भी माना जाता है.
#तपस्या और आत्म-शुद्धि
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भक्त भगवा वस्त्र पहनकर, नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करते हैं. यह एक प्रकार की कठोर तपस्या है जो आत्म-शुद्धि और शारीरिक व मानसिक सहनशीलता को दर्शाती है. इस दौरान वे संयम, ब्रह्मचर्य और सात्विक जीवन का पालन करते हैं.
#सामाजिक और सामुदायिक महत्व
सामुदायिक भावना
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कांवड़ यात्रा एक बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाला धार्मिक आयोजन है, जिसमें लाखों भक्त एक साथ यात्रा करते हैं. यह सामुदायिक भावना को बढ़ावा देता है और लोगों को एक-दूसरे की मदद करने के लिए प्रेरित करता है.
सेवा और सहयोग
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यात्रा के दौरान कई स्वयंसेवी संगठन भक्तों के लिए भोजन, पानी, चिकित्सा सहायता और अन्य सुविधाएं प्रदान करते हैं, जिससे सेवा और सहयोग की भावना मजबूत होती है.
#एकता और समानता
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इस यात्रा में जाति, वर्ग और सामाजिक स्थिति का कोई भेद नहीं होता. सभी भक्त एक समान रूप से "कांवड़िया" कहलाते हैं, जो एकता और समानता संदेश देता है.
संक्षेप में, कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भक्ति, तपस्या, आस्था और सामुदायिक सौहार्द का प्रतीक है..!
।। हर हर महादेव ।।
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1 month ago | [YT] | 27
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