Sunil Gupta Ministries is a spiritual ministry founded by preacher and apostle Sunil Gupta. Its mission is to share the gospel of Jesus Christ in spirit and truth, where God’s Word is preached with sincerity and clarity. The ministry works to bring hope, faith, and love into people’s lives while guiding them in their spiritual journey.
Sunil Gupta is known for his inspiring and practical sermons, drawn from the Bible and his own experiences. His messages touch hearts, connect with real-life challenges, and provide wisdom to overcome them.
Through gatherings, prayer meetings, conferences, and online platforms, Sunil Gupta Ministries is reaching countless people across the world. The ministry continues to spread encouragement, spiritual growth, and the truth of Christ, shining as a source of light and transformation for all who seek God.
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आपकी उदारता, किसी की ढाल बन सकती है! 🧣✨
बढ़ती ठंड में बेसहारा लोगों की मदद के लिए हम आगे आए हैं। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद बिना कंबल के न सोए। आप भी इस नेक काम में अपना सहयोग दे सकते हैं।
"उदार मनुष्य पुष्ट हो जाता है, और जो दूसरों की खेती सींचता है, उसकी भी सींची जाएगी।" — (नीतिवचन 11:25
4 days ago | [YT] | 35
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📖 "क्योंकि हम देखने से नहीं, विश्वास से चलते हैं।"
– 2 कुरिन्थियों 5:7
💡 इस वचन का अर्थ:
यह वचन हमें याद दिलाता है कि:
✅ मसीही जीवन आंखों से देखे जाने वाली परिस्थितियों पर नहीं,
बल्कि परमेश्वर पर विश्वास करने पर आधारित होता है।
✅ हम हर बात को समझ नहीं सकते,
लेकिन हमें हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा करना है।
✅ चाहे रास्ता अंधकारमय लगे,
पर विश्वास का दीपक हमें आगे बढ़ने में सहायता करता है।
🕊️ Holyspirit And Truth Ministries का संदेश:
विश्वास वह पुल है
जो हमें असंभव को पार कराकर
परमेश्वर की योजनाओं में लेकर जाता है।
आज खुद से पूछिए:
क्या मैं अपनी आंखों से देख कर चल रहा हूँ या विश्वास से?
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2 months ago | [YT] | 53
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परमेश्वर की भरपूरी – जीवन में किसी बात की कमी क्यों नहीं होती?
वइस लेख में विस्तार से बताया गया है कि परमेश्वर अपने बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करता है, और हमें भरोसा दिलाता है कि यदि हम विश्वास और परमेश्वर के मार्ग में चलते हैं तो कभी किसी बात की घटी नहीं होगी। भजन संहिता 23:1 तथा अन्य बाइबल वचन इस सच्चाई की पुष्टि करते हैं।
परमेश्वर – हमारा चरवाहा, हमारी संपत्ति का स्रोत
भजन संहिता 23:1 “यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।”
किंग डेविड ने परमेश्वर को चरवाहा बताया। चरवाहा अपने पशुओं को पूरी सुरक्षा, भोजन, मार्गदर्शन और विश्राम देता है, ठीक इसी तरह परमेश्वर अपने लोगों की देखभाल करता है।
जब हम परमेश्वर के मार्ग में चलते हैं तब वह हमारी हरेक जरूरत, शारीरिक, मानसिक और आत्मिक आवश्यकताओं को पूरा करता है। उसके पास हमारी सभी कमी के लिए समाधान है — चाहे स्थिति कितनी ही कठिन क्यों न हो.
जीवन के अनुभव और परमेश्वर का वचन
भजन संहिता 34:9-10 भी इसी विषय को आगे बढ़ाता है:
“यहोवा के डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती। जवान सिंह भूखे रहते हैं, परन्तु यहोवा के खोजने वालों को किसी भली वस्तु की घटी नहीं होती।”
इस वचन के अनुसार दुनियादारी, शक्ति या साधन संपन्न होना स्थायी नहीं है। लेकिन परमेश्वर में चलने, भरोसा रखने और उसकी खोज में लगे रहने वालों को किसी जरूरी चीज की कमी नहीं महसूस होती।
परमेश्वर हमारी वास्तविक जरूरतों को उनसे भी बहतर तरीके से पूरा करता है जैसे एक माँ बच्चे की जरूरत समझ लेती है। उसके पास आनन्द, शांति, सुरक्षा और प्रेम का भंडार है.
सांसारिक कमी पर परमेश्वर की प्रशंसा
इंसान अनुभव करता है – जीवन में रुकावट, बीमारी, आर्थिक समस्या, दुःख — लेकिन परमेश्वर के पास आकर, प्रार्थना और विश्वास से अपने दिल की बात कहने पर, वह हर जरूरत के अनुसार सप्लाई देता है।
भजन संहिता 62:8 भी इसी पर बल देता है — “हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो; उससे अपने-अपने मन की बातें खोलकर कहो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।”
परमेश्वर हमारा refuge है — शरण, सहारा, supply का स्रोत। उसकी योजना-वादा है — “मेरे बच्चे, तेार जरूरतों के लिए मुझे भरोसा कर, मैं पूरी करूंगा।”
परमेश्वर की भरपूरी – व्यवहारिक जीवन में
जरूरत के समय परमेश्वर को पुकारें — प्रार्थना में सब बातें खुलकर कहें।
परिस्थितियों से नहीं, परमेश्वर की प्रतिज्ञा से भरोसा रखें।
ईश्वरीय मार्ग में चलने और सत्य को अपनाने का संकल्प लें।
जब परीक्षा या कमी महसूस हो, परमेश्वर के वचन को याद करें।
उसकी उपस्थिति और प्रेम में संतुष्टि पाएं।
कुछ लोग कहते हैं – जब तक खुद दस हथियार नहीं हैं, कुछ भी संभव नहीं। बाइबल उत्तर देती है – “परमेश्वर की संपत्ति और शक्ति अनंत है, वह तुम्हारी पूरी देखभाल करेगा।”
बाइबल के और वचन
फिलिप्पियों 4:19 – मेरा परमेश्वर अपने धन-सम्पत्ति के अनुसार जो महिमा में यीशु मसीह के द्वारा तुम्हारी सब आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
मत्ती 6:31-33 – इसलिए चिंता मत करो... तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है कि तुम्हें ये सब चीजें चाहिए। प्रथम परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करो, तो ये सब वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएंगी।
निष्कर्ष
परमेश्वर की संपत्ति और योजना पर भरोसा रखें – वह कभी अपने बच्चों को किसी बात की कमी, गिरावट या घटी नहीं होने देगा। विश्वास, प्रार्थना और उसके वचन को जीवन में अपनाने से हर जरूरत, हर कमी, हर गिरावट को परमेश्वर पूरा करता है.
Message by Sunil Gupta
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2 months ago | [YT] | 122
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परमेश्वर हमारा शरणस्थान है – विश्वास की शक्ति और जीवन का भरोसा
कई बार जीवन में विपत्तियां, चिंता और मन की उलझनें हमें कमजोर कर देती हैं। लेकिन भजन संहिता 62:8 सिखाता है कि हमें हर समय परमेश्वर पर भरोसा रखना चाहिए, अपने दिल की बातें उसी से खुलकर कहनी चाहिए, क्योंकि वही हमारा सच्चा शरणस्थान है।
भजन संहिता 62:8 – बाइबल के संदेश का विस्तार
हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो; उससे अपने अपने मन की बातें खोलकर कहो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।
इस वचन में तीन महत्वपूर्ण बातें हैं:
हर समय भरोसा रखो:
हमने सिर्फ खुशियों में ही नहीं, कठिन समय में भी परमेश्वर को विश्वास और धन्यवाद देना चाहिए।
मन की बातें उसी से कहो:
परमेश्वर सिर्फ सुनता ही नहीं, बल्कि हमारे दुखों को समझता भी है। प्रेम और पूरी सच्चाई के साथ अपने दिल की बातें उसी से साझा करें।
शरणस्थान परमेश्वर है:
दुनियावी सहारे, धन, मित्र या परिवार – ये सभी कभी-कभी असमर्थ हो सकते हैं, मगर परमेश्वर हमेशा सुरक्षित और विश्वासयोग्य शरण है।
आध्यात्मिक सीख और जीवन के लिए प्रयोग
रोज़ प्रार्थना में अपने विचार, चिंता और भावनाएं प्रभु के सामने रखें।
मुसीबतों और दुख में परेशानी से डरें नहीं, विश्वास से परमेश्वर को पुकारें।
अपने अनुभव और विजय दूसरों से साझा करें, ताकि उनका भी विश्वास बढ़े।
Message by Sunil Gupta
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2 months ago | [YT] | 74
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“प्रभु में सदा आनंदित रहो” – भजन संहिता 37:5
प्रभु में सदा आनंदित रहो – विश्वास और खुशी का स्रोत
इस बाइबल वचन में हमें जीवन की चुनौतियों और कठिनाइयों के बीच भी प्रभु में सच्चा आनंद पाने का संदेश मिलता है। भजन संहिता 37:5 के अनुसार, जब हम अपने जीवन की परेशानियों और बोझ को प्रभु के हाथों में सौंप देते हैं, तो वह हमारे लिए चिंता करता है और हमें परम शांति तथा आनंद देता है।
भजन संहिता 37:5 – बाइबल के अनुसार
“अपना मार्ग यहोवा पर छोड़ दे, और उस पर भरोसा रख; वही पूरा करेगा।”
इसका अर्थ है कि जीवन के हर मोड़ पर प्रभु को अपना पथ-प्रदर्शक समझें, और अपने कष्ट, चिंता, और लक्ष्य उसी के हाथों में सौंप दें। जब मन बोझिल हो जाए, मार्ग कठिन हो, या जीवन में निराशा आए – प्रभु में खुशी रखना ही विश्वास की निशानी है.
आनंद पाने की राह
अपना बोझ प्रभु पर डाल दें
निराशा में भी उम्मीद बनाए रखें
विश्वास और दया का भाव अपने हृदय में रखें
प्रभु के प्रति धन्यवाद और स्तुति करें
हर कठिन परिस्थिति में प्रभु की ओर लौटना ही सच्चा आनंद का स्रोत है। वह अपने बच्चों की चिंता करता है और हर चीज को उनके अच्छे के लिए पूरा करता है.
जीवन में प्रयोग
प्रार्थना के समय अपना मन प्रभु को सौंपें
हर किसी के साथ दया और उत्साह रखें
अपने आनंद का कारण परिस्थितियों में नहीं, प्रभु में खोजें
Message by Sunil Gupta
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2 months ago | [YT] | 85
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“नम्र लोग यहोवा कारण फिर से आनंदित होंगे!” – एक बाइबिलिक संदेश
यशायाह 3:10 के अनुसार परमेश्वर अपने नम्र बच्चों के पक्ष में कार्य करता है और उन्हें फिर से आनंदित करता है। इस पोस्ट में हम जानेंगे कि बाइबल ‘नम्रता’ और ‘यहोवा के कारण आनंद’ के बारे में क्या सिखाती है, और ये संदेश जीवन में कैसे लागू किया जा सकता है।
बाइबल में नम्रता का महत्व
बाइबल में ‘नम्रता’ को परमेश्वर के सामने झुकना, उसकी इच्छा में चलना, और अपनी आत्मा को दीन रखना बताया गया है। नम्र व्यक्ति परमेश्वर की शक्ति और प्रबंध को स्वीकार करता है, खुद की परिशुद्धता या गर्व से दूर रहता है।
यशायाह 3:10 का यह संदेश नम्र लोगों के जीने का आश्वासन देता है। इसका अर्थ है — जो लोग परमेश्वर के सामने अपने मन, विचार और जीवन को दीनता में रखते हैं, परमेश्वर उन्हें फिर से खुशी और शांति लौटाता है।
आनंद का स्रोत – यहोवा
सच्चा आनंद जमीन-जायदाद, धन या परिस्थितियों से नहीं मिलता, बल्कि प्रभु यहोवा से मिलता है। जब हम जीवन में चुनौतियों या दुख से गुजरते हैं, तो नम्र हृदय से परमेश्वर की ओर लौटना चाहिए। बाइबल कहती है — जब हम अपनी नम्रता में परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, वह हमारे जीवन में पुनः बहार और उमंग जरूर लाता है।
दीनता अपनाएं: रोज़ाना प्रार्थना में नम्रता से ईश्वर का धन्यवाद करें, उसके मार्गदर्शन की प्रार्थना करें।
विश्वास रखें: कठिन समय में उम्मीद बनाए रखें; आत्मा को परमेश्वर की कृपा के लिए खुला रखें।
अपने आनंद का केंद्र परमेश्वर को बनाएं: बाहरी परिस्थितियों से ऊपर उठकर प्रभु के प्रेम और योजना में खुशी ढूंढें।
निष्कर्ष
यशायाह 3:10 का यह वचन समझाता है कि परमेश्वर उन लोगों की रक्षा और बहाली करता है – जो नम्रता से उसके साथ चलते हैं। यदि आप आज जीवन में उल्लास, शांति और बहाली चाहते हैं, तो परमेश्वर के आगे खुद को नम्र करें।
Message by Sunil Gupta
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2 months ago | [YT] | 45
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पवित्र आत्मा ही हमें सुधार सकता है – सच्चा परिवर्तन परमेंश्वर की सामर्थ से
मनुष्य अपने प्रयासों से खुद को सुधार नहीं सकता। केवल पवित्र आत्मा की सहायता और मार्गदर्शन से ही हम अंदर से बदल सकते हैं। इस लेख में जानिए कि बाइबल क्या कहती है पवित्र आत्मा की सामर्थ, पवित्रता, और हमारे जीवन के परिवर्तन के बारे में।
पवित्र आत्मा ही हमें सुधार सकता है
जब परमेश्वर ने मनुष्य को बनाया, उसने उसे अपने स्वरूप में रचा ताकि वह पवित्र और धर्मी जीवन जी सके। लेकिन पाप के कारण मनुष्य परमेश्वर से दूर हो गया। मनुष्य ने अपनी बुद्धि और कर्मों से खुद को सुधारने की कोशिश की, लेकिन सच्चा सुधार भीतर के मन से होता है — और यह कार्य केवल पवित्र आत्मा ही कर सकता है।
बाइबल बताती है कि परमेश्वर का आत्मा ही हमें नया जन्म देता है, हमें नया हृदय प्रदान करता है और हमें सच्चे मार्ग पर चलने में समर्थ बनाता है। पवित्र आत्मा हमारे भीतर निवास करता है और हमें पवित्रता की ओर ले जाने वाला मार्ग दिखाता है।
यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन को सच में बदलना चाहता है — पाप से पवित्रता की ओर, स्वार्थ से प्रेम की ओर, भय से विश्वास की ओर — तो उसे पवित्र आत्मा की आवश्यकता है।
यहेजकेल 36:26-27: “मैं तुम्हें नया हृदय दूँगा और तुम्हारे भीतर नई आत्मा डालूँगा... और तुम मेरे नियमों पर चलोगे।”
गलातियों 5:22-23: पवित्र आत्मा के फल हैं — प्रेम, आनन्द, शान्ति, धैर्य, भलाई, विश्वास, नम्रता और संयम।
ये वचन बताते हैं कि सच्चा परिवर्तन केवल तब संभव है जब पवित्र आत्मा हमारे भीतर कार्य करता है।
हमारा जीवन तभी वास्तव में सुधर सकता है जब हम अपने हृदय को परमेश्वर के हाथों में सौंप दें। पवित्र आत्मा की अगुवाई स्वीकार करने से हमारे विचार, कर्म और जीवन पूरी तरह से बदल जाते हैं। यह सुधार स्थायी, सच्चा और आत्मिक होता है।
Message by Sunil Gupta
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2 months ago (edited) | [YT] | 27
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“यीशु ही केवल हमारे पापों से क्षमा देता है”
दुनिया में कई रास्ते हैं, कई विचार हैं,
कई परम्पराएँ और कई मत हैं—
परन्तु पापों से क्षमा पाने का एक ही मार्ग है:
यीशु मसीह।
क्योंकि वही हमारे पापों के लिए क्रूस पर चढ़े,
वही हमारे लिए खून बहाया,
वही हमारे लिए बलिदान बने
और वही पुनरुत्थान करके जीवित प्रभु सिद्ध हुए।
📖 “क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।” – रोमियों 6:23
कोई धर्म
कोई कर्म
कोई पूजा
कोई बलिदान
पाप को मिटा नहीं सकता।
यीशु ने कहा:
“मार्ग, सत्य और जीवन मैं ही हूँ।”
जब हम अपने पापों को स्वीकार करते हैं
और सच्चे मन से पश्चाताप करते हैं,
तब प्रभु यीशु हमें पूरी तरह क्षमा करते हैं
और हमें नया जीवन देते हैं।
उनकी क्षमा केवल शब्द नहीं,
एक वास्तविक अनुभव है—
जो मन को शांति,
हृदय को आनंद,
और आत्मा को मुक्ति देता है।
आज यदि आपका हृदय बोझिल है,
गिल्ट है, शर्म है, बंधन है—
यीशु को पुकारिए…
वह क्षमा करेगा, उठाएगा और आशीष देगा।
Message by Apostle Sunil Gupta
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2 months ago | [YT] | 37
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“वचन की तलवार लेकर चलना है”
आज के समय में बहुत-सी आवाज़ें हमारे मन और आत्मा को प्रभावित करती हैं—
डर, चिंता, शंका, भ्रम, प्रलोभन और परीक्षा।
दुनिया की बातों से हम कमजोर होते हैं,
लेकिन प्रभु के वचन से हम मजबूत बनते हैं।
बाइबल कहती है कि वचन आत्मा की तलवार है।
तलवार युद्ध में सुरक्षा और विजय दोनों देती है।
जब हम वचन को हाथ में लेते हैं—
हम शत्रु की चालों को पहचानते हैं,
उन्हें काटते हैं और हर संघर्ष में विजय पाते हैं।
वचन हमें प्रकाश देता है,
दिशा दिखाता है,
विश्वास को मजबूत करता है
और आत्मा को दृढ़ बनाता है।
✝️ जब हम वचन की तलवार के साथ चलते हैं:
हम डर को परास्त करते हैं
हम भ्रम से मुक्त होते हैं
हम पाप से बचते हैं
हम परीक्षा में टिके रहते हैं
हम आत्मिक रूप से मजबूत होते हैं
वचन वह शक्ति है जो हर परिस्थिति में हमें संभालती है।
दुनिया बदल सकती है… हालात बदल सकते हैं…
पर परमेश्वर का वचन कभी नहीं बदलता।
🙏 प्रार्थना:
हे प्रभु, हमें प्रतिदिन तेरा वचन पढ़ने और उस पर चलने की बुद्धि दे।
वचन को हमारे जीवन की तलवार बना,
ताकि हम हर चुनौती का सामना विश्वास के साथ कर सकें।
✅ Message by Apostle Sunil Gupta
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2 months ago | [YT] | 40
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“प्रभु के चरणों में हमें शांति मिलती है”
जीवन की दौड़ में हम सब थक जाते हैं—मन, विचार, भावनाएँ और आत्मा सब भारी होने लगते हैं। लोग हमें समझ नहीं पाते, परिस्थितियाँ हमारे विरुद्ध खड़ी दिखाई देती हैं, और कई बार हम अपने ही बोझ से टूटने लगते हैं। ऐसे समय में हम जहाँ भी शांति ढूँढते हैं, वह अस्थायी मिलती है—दुनिया की शांति क्षणिक है।
लेकिन प्रभु यीशु की शांति इससे अलग है।
उसकी शांति है:
गहरी — जो दिल को चंगा करती है
स्थायी — जो परिस्थितियों पर निर्भर नहीं
आध्यात्मिक — जो आत्मा को मजबूत बनाती है
दिव्य — जो स्वर्ग से आती है
जब हम प्रभु के चरणों में बैठते हैं,
हमारे अंदर का तूफ़ान शांत होने लगता है।
हमारे टूटे हुए हिस्से भरने लगते हैं।
हमारा दिल हल्का और मन स्थिर होने लगता है।
यीशु कहता है:
“हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।”
दुनिया बहुत वादे करती है, पर पूरी केवल प्रभु की शांति करती है।
वह हमारे आँसू देखता है, हमारे दर्द को समझता है और हमारी आत्मा को पुनः शक्ति देता है।
आज प्रभु के चरणों में झुक जाइए…
आपकी हर चिंता, हर परेशानी और हर संघर्ष प्रभु की उपस्थिति में हल्का हो जाएगा।
प्रभु के चरणों में बैठने वाला व्यक्ति कभी खाली नहीं लौटता—
वह शांति पाता है, सामर्थ पाता है और नया जीवन पाता है।
🙏 प्रार्थना:
हे प्रभु यीशु, हमें अपने चरणों में बैठने का अनुग्रह दे।
हमारी आत्मा को शांति दे, हमारे मन को स्थिर कर,
और हमें अपने प्रेम में ढाँक ले ताकि हम सच्ची शांति का अनुभव कर सकें।
Message by Apostle Sunil Gupta
Jesus loves you unconditionally. 🙏
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2 months ago | [YT] | 25
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