☝🏻 *सूरत आश्रम तो मेरा हृदय है ये पूज्यश्री के श्रीवचन है ऐसे सूरत आश्रम का ये नजारा आपने कभी नही देखा होगा | youtu.be/Wof-fltzyBo?si=L1QGd0RWseFeUuQd 🕉️


Surat Ashram

🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ*⤵️
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🥵 *पित्त-संबंधी समस्याओं हेतु*

*शरद ऋतू (२३ अगस्त से २३ अक्टूबर तक) में पित्त कुपित व जठराग्नि मंद रहती है, जिससे पित्त-प्रकोपजन्य अनेक व्याधियाँ उत्पन्न होने की सम्भावना रहती है |*

➡️ *१] जिनको पित्तवृद्धि की तकलीफ है वे अगर थोड़ी भी भुखमरी करें तो उनके मणिपुर केंद्र में क्षोम पैदा होता है और पित्त बढ़ता है | स्वभाव में क्रोध, आँखों में जलन आदि समस्याएँ उनको घेर लेती हैं | ऐसे लोग पित्त-शमन के लिए घी व मिश्री मिश्रित भोजन लें व बेल या ताड़ का फल खाकर पानी पियें |*

➡️ *२] पित्तजन्य व्याधियों मिटाने के लिए २ चम्मच पिसा हुआ धनिया और थोड़ी मिश्री ठंडे पानी में घोलकर पीने से कितना भी बढ़ा हुआ पित्त हो, उसका शमन हो जायेगा |*

➡️ *३] २ – ३ ग्राम तिल का चूर्ण और मिश्री मिलाकर चबा-चबा के खायें | तिल पचने में भारी होते हैं लेकिन पित्तवाले के लिए तिल और मिश्री का मिश्रण चबा के खाना पित्तशामक होता है |*

➡️ *४] पित्त के कारण सिर में दर्द हो तो गाय के शुद्ध घी को गुनगुना करके नस्य लें | इससे पित्त शमन होता है, सिरदर्द गायब हो जायेगा |*

➡️ *५] दही खट्टा न हो और उसमें थोड़ी-सी मिश्री मिली हो तो वह भी पित्तशमन करेगा |*


🌹 *ऋषि प्रसाद – अगस्त २०१९ से*

8 hours ago | [YT] | 426

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🌸 *चल पड़े तो चल पड़े....*🌸 ⤵️
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🌷 *भर्तृहरि महाराज को जब परमात्मा का साक्षात्कार हुआ तो उन्होंने कलम उठायी और 100 श्लोकों वाला एक शतक लिखा-”वैराग्य शतक”। उसका अनुवाद किया पंडित हरदयाल जी ने।*

*पंडित हरदयाल संस्कृत शास्त्रों का इतना बढ़िया काव्यात्मक अनुवाद करते थे कि कविता में सारा अर्थ स्पष्ट हो जाता था।*

*एक पंजाबी साधु ने सोचा कि ‘जिसकी कविताएँ इतनी प्रभावशाली हैं वह आदमी स्वयं कैसा होगा ?’ पूछताछ की तो पता चला कि पंडित हरदयाल की किराने की दुकान है। पूछते-पूछते वह साधु पँहुचा पंडित हरदयाल की दुकान पर और वहाँ बैठे व्यक्ति से पूछः “पंडित हरदयाल आपका नाम है ?”*

*“हाँ।”*

*“हम आपकी कविता पढ़कर संत हो गये और आप अभी तक तराजू तौल रहे हो ! क्या रखा है इस तराजू में !”*

*पंडित हरदयाल उठ के चल पड़े। तराजू में बाट रखने तक को रूके नहीं। जूता चप्पल पहनने को भी नहीं रहे। चल पड़े तो चल पड़े और साधु हो गये। और लगे तो ऐसे लगे कि ‘स्व’-स्वभाव में जग गये। ज्ञान, शांति, आत्मसुख के धनी हो गये।*

*अमीरी की तो ऐसी की सब जर लुटा बैठे।*

*फकीरी की तो ऐसी की गुरु के दर पे आ बैठे।।*

*जो धर्माचरण करता है उसका हृदय शुद्ध हो जाता है। ऐसे शुद्ध हृदय व्यक्ति के चित्त पर संत-वचन का प्रभाव तत्काल पड़ता है, वह उसके हृदय में चोट कर जाता है और उसमें विवेक-वैराग्य का उदय हो जाता है।*

*संत तुलसीदास जी ने भी कहा हैः धर्म ते बिरति…. ‘धर्म के आचरण में वैराग्य होता है।’*

*हमें चाहिए कि ईमानदारी से भगवत्प्रीत्यर्थ कर्तव्यकर्म करें और अपने हृदय को विशुद्ध बनायें, ताकि कोई संत-वचन या शास्त्र-वचन हृदय में चोट कर जाय और जीवन कृतार्थ हो जाये |*

📖 *आश्रम के साहित्य प्रेरक प्रसंग से* 🕉🕉 🌷🙏🏻

8 hours ago | [YT] | 307

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🎵 *भजन बस सुनने जैसा*.....⤴️

8 hours ago | [YT] | 197

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🎵 *भजन बस सुनने जैसा*.....⤴️

8 hours ago | [YT] | 1

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🎵 *भजन बस सुनने जैसा*.....⤴️

8 hours ago | [YT] | 81

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🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌹⤵️
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🚩 *कलश मांगलिकता का प्रतिक क्यों ?*


🚩 *सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य को प्रारम्भ करने से पूर्व कलश-स्थापना की परम्परा है | विवाह आदि शुभ प्रसंगों, उत्सवों तथा पूजा-पाठ, गृह-प्रवेश, यात्रारम्भ आदि अवसरों पर घर में भरे हुए कलश पर आम के पत्ते रखकर उसके ऊपर नारियल रखा जाता है और कलश की पूजा की जाती है | जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त कलश का उपयोग किसी-न-किसी रूप में होता रहता है | दाह-संस्कार के समय व्यक्ति के जीवन की समाप्ति के सूचकरूप में उसके शव की परिक्रमा करके जल से भरा मटका छेदकर खाली किया जाता है और उसे फोड़ दिया जाता है |*

*कलश में सभी देवताओं का वास माना गया है | हमारे शास्त्र में आता है कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिपुटी एवं अन्य सभी देवी-देवता, पृथ्वी माता और उसके सप्तद्वीप, चारों वेदों का ज्ञान एवं इस संसार में जो-जो है वह सब इस कलश-जल में समाया हुआ है |*

🌊 *समुद्र- मंथन के समय अमृत-कलश प्राप्त हुआ था | माना जाता है कि माँ सीताजी का आविर्भाव भी कलश से हुआ था | लंकाविजय के बाद भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे तब उनके राज्याभिषेक के समय भी अयोध्यावासियों ने अपने घरों के दरवाजे पर कलश रखे थे |*

*भरा हुआ कलश मांगलिकता का प्रतिक है | मनुष्य – शरीर भी मिट्टी के कलश अथवा घड़े के जैसा ही है | जिस शरीर में जीवनरूपी जल न हो वह मुर्दा शरीर अशुभ माना जाता है | इसी तरह खाली कलश भी अशुभ माना जाता है | इसी तरह खाली कलश भी अशुभ माना जाता है | शरीर में मात्र श्वास चलते है, वह वास्तविक जीवन नहीं है | परंतु जीवन में प्रभु-प्रेम का सत्संग, श्रद्धा, भगवत्प्रेम, उत्साह, त्याग, उद्यम, उच्च चरित्र, साहस आदि गुण हों तभी कलश भी अगर दूध, पानी अथवा अनाज से भरा हुआ हो तभी वह कल्याणकारी कहलाता है |*

*कलश का तात्त्विक रहस्य बताते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : “अपना शरीर, अपना जीवन एक कलश या कुम्भ के जैसा है | कलश के अंदर क्या है ? कलश के अंदर पानी है | और यह गागर का चार घूँट या २-५ लीटर पानी सागर की खबर दे रहा है ऐसे ही अंत:करण में समाया चैतन्य, विभु चैतन्य की खबर दे रहा है | हे मानव ! तेरा यह शरीररूपी कलश है | कलश में ब्रह्मा, विष्णु और महेश अर्थात सात्विक, राजस और तामस गुणों के अधिष्ठाता देवों का निवास है | इसलिए मंदिर के दर्शन के बाद कलश के दर्शन करने होते हैं, ऐसी ही गृह के दर्शन के साथ-साथ अपने शरीररूपी कलश के दर्शन कर और उसके आधार चैतन्य की स्मृति कर !*

🚩 *कलश का पानी सागर में मिल जाय ऐसे यह जीवात्मा का शरीररूपी कलश यही छूट जाय इससे पहले वह परमात्मा को मिलने की विधि जान ले तो उसका बेड़ा पार हो जाय |”*

🚩 *लोक कल्याण सेतु – अगस्त २०२० से*

1 day ago | [YT] | 805

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💪🏻 *सावधान व संगठित रहें, हौसला बुलंद रखें* 🌹⤵️
https://youtu.be/DuetvSMlT2I?si=fu3xN...

🇨🇮 *भारत के हिन्दू संत-महापुरुषों को बदनाम करने की साजिश चल पड़ी है। संत कबीर जी, गुरु नानक जी, महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी, स्वामी विवेकानंद आदि संतों का कुप्रचार हुआ तो अब हमारा हो रहा है। मेरे को कोई फरियाद नहीं लेकिन ऐसा करने वालो ! आपको क्या मिलेगा ? जरा भविष्य सोचो। कोई चोर नहीं और आप उसको चोर कहते हैं तो आपको बड़ा भारी पाप लगता है।*

🙏🏻 *भइया ! तू भगवान को प्रार्थना कर तेरी बुद्धि में भगवान द्वेष नहीं, सच्चा ज्ञान दे दें। फिर तू सत्य की कमाई का उपयोग करेगा और तेरे बच्चों का भविष्य जहरी नहीं उज्ज्वल बनायेगा।कुप्रचार के शिकार न हों |*

🌹 *महात्मा बुद्ध को बदनाम करने वालों ने तो अपनी तरफ से पूरी साजिश की लेकिन वे कौन से नरकों में होंगे मुझे पता नहीं है, बुद्ध तो आपके, हमारे और करोड़ों दिलों में अभी भी हैं। ऐसे ही गाँधी जी के लिए अंग्रेजों के पिट्ठू कितना-कितना बोलते और कितना-कितना लिखते थे लेकिन गांधी बापू डटे रहे तो बेटे जी हार गये व भाग गये और बापू जी अब भी जिंदाबाद हैं।जब साबरमती के बापू के लिए लोगों ने ऐसा-ऐसा बोला और वे अडिग रहे तो हम भी साबरमती के बापू जी हैं। हमारी तो किसी के प्रति नफरत नहीं है, द्वेष नहीं है और विदेशी ताकतों को भी हम कभी बुरे शब्द नहीं कहते हैं। अगर ये किसी दूसरे धर्म के गुरुओं के पीछे ऐसा पड़ते तो आज देश की क्या हालत हो जाती ! हम सहिष्णु व उदार होते-होते अपनी संस्कृति पर कुठाराघात करने दे रहे हैं। अब हम सावधान रहेंगे, सहिष्णु तो रहेंगे लेकिन सूझबूझ से और आपस में संगठित रहेंगे।*

🇨🇮 *हमारे भारत में अशांति फैला दें ऐसे तत्वों के चक्कर में हम नहीं आयेंगे, कुप्रचार के शिकार नहीं बनेंगे।अपने अनुभव का आदर करें किसी पर लांछन लगाना तो आसान है लेकिन संत-महापुरुषों का प्रसाद लेकर बेड़ा पार करना तो पुण्यात्माओं का काम है। इतने-इतने लांछन लगते हैं फिर भी मुझे दुःख होता नहीं और सुख मिटता नहीं।*

🌹 *संतों के संग से दूर करने वाला वातावरण भी खूब बन रहा है। न जाने कितने-कितने रूपये देकर चैनलों के द्वारा फिल्में, कहानियाँ, आरोप ऐसी-ऐसी कल्पना करके बनाया जाता है कि लगता है कि संत ही बेकार हैं, करोड़ों रुपये लेकर जो दिखाते हैं, कुप्रचार करते हैं वे तो सती-सावित्री के हैं, उनके पास तो दूध का धोया हुआ सब कुछ है और गड़बड़ी है तो सत्संगियों में और संतों में है, ऐसा कुप्रचार भी खूब होता है। लेकिन भाई ! जिनकी बीमारियाँ मिट जाती हैं, जिनके रोग-शोक मिट जाते हैं, वे कुप्रचार के शिकार नहीं होते।सलूका-मलूका संत कबीर जी के शिष्य थे। उन्हें कबीर जी ने कहाः “भई ! वह वेश्या बोलती है कि मैं उसके बिस्तर पर था, दारूवाला बोलता है कि मैंने दारू पिया… ये सब बोलते हैं, सब लोग जा रहे हैं, तुम क्यों नहीं जाते ?”सलूका-मलूका कहते हैं- “महाराज ! हमारे मन, बुद्धि और तन की सारी बीमारियाँ यहाँ मिटी हैं।*

🌹 *हम आपके सत्संग का त्याग करके नहीं जाना चाहते। लोग चाहे आपके लिए कुछ भी बोलें, लल्लू-पंजू भक्त कुप्रचार सुनकर कुप्रचार के शिकार हो जायें तो हो जायें लेकिन महाराज ! हमें आप रवाना मत करिये।”कबीर जी ने कहाः “इतनी समझ है तुम्हारी तो बैठो।” सत्संग सुनाते-सुनाते कबीर जी ने ऐसी कृपादृष्टि की कि सलूका-मलूका को भावसमाधि में प्रेमाश्रु आने लगे। भगेड़ू भागते रहे और कौन से गर्भों में कहाँ-कहाँ भगे भगवान जानें !मैं सत्य का पक्षधर हूँ, कानून और व्यवस्था का पक्षधर हूँ।*

🌹 *समाज की सुन्दर व्यवस्था रहे इससे मैं प्रसन्न होने वाला व्यक्ति हूँ फिर भी क्या-क्या कुप्रचार किये जा रहे हैं, कुछ-की-कुछ सामग्री जुटाये जा रहे हैं !वे समाज के साथ बहुत जुल्म करते हैं…..जिनके विचार प्रखर भगवद्-ज्ञान के भगवत्-प्रसाद के हैं, ऐसे लोग भी सावधान नहीं रहते और जिस किसी के हाथ का खाते हैं, जिस किसी से हाथ मिलाते हैं तो ऐसे भक्तों की भक्ति भी दब जाती है। इसलिए संग अच्छा करना चाहिए, नहीं तो निःसंग रहना चाहिए।निंदकों की बात सुनकर, कभी हलके वातावरण में रहकर कइयों की श्रद्धा हिल जाती है, शांति और भक्ति क्षीण हो जाती है।*

🌹 *जब सत्संगियों के वातावरण में आते हैं तो लगता है कि ‘अरे, मैंने बहुत कुछ खो दिया !’ इसलिए कबीर जी सावधान करते हैं-*

🌹 *कबीरा निंदक न मिलो, पापी मिलो हजार।एक निंदक के माथे पर, लाख पापिन को भार।।*

👉🏻 *निंदक ऐसे दावे से बोलते हैं कि लगेगा, ‘अरे यही सत्य जानता है, हम इतने दिन तक ठगे जा रहे थे।’ हजारों-हजारों जन्मों के कर्म-बंधन काटकर ईश्वर से मिलाने वाली श्रद्धा की डोर जो काटते हैं, वे समाज के साथ बहुत-बहुत जुल्म करते हैं। उनको हत्यारा कहो तो हत्यारे नाराज होंगे। हत्यारा तो एक-दो को मारता है इसी जन्म में लेकिन श्रद्धा तोड़ने वाला तो कई जन्मों की कमाई नाश कर देता है।कैसे रखें हौसला बुलंद ?विदेशी ताकतें तो वैसे ही साधु-संतों और हमारी संस्कृति को तोड़कर देश को तोड़ने के स्वप्न देख रही है और आप उस आग में घी डालने की गलती क्यों करते हो भाई साहब? न लड़ो न लड़ाओ। हौसला बुलंद रखो ! हौसला बुलंद उसको कहा जाता है कि न दुःखी रहो न दूसरे को दुःखी करो, न टूटो न दूसरों को तोड़ो, न खुद डरो न दूसरों को भयभीत करो, न खुद बेवकूफ बनो न दूसरों को बेवकूफ बनाओ। यह वैदिक वाणी के आधार से मैं आपको बता रहा हूँ। मैं तो साँपों के बीच रहा हूँ, रीछों के साथ मुलाकात हुई और उनके प्रति भी मेरा सद्भाव रहा तो मनुष्य के प्रति, किसी पार्टी के प्रति मैं क्यों कुभाव करूँगा ? कुभाव करने से मेरा हृदय खराब होगा। मैं तो सद्भाव की जगह पर बैठा हूँ, सत्संग की जगह पर बैठा हूँ इसलिए मेरा सत्य बात कहने का कर्तव्य है,अधिकार है कि सबको मंगल की बात कह दूँ। हम नहीं चाहते कि कोई उसको उलटा समझकर परेशान हो। हमारी इस सूझबूझ का आप आदर करेंगे तो आपके जीवन में बहुत कुछ ऊँचाइयाँ आ सकती हैं।*

🌹 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जून 2015, पृष्ठ संख्या 14,15 अंक 270 ॐॐ* 🌹

1 day ago | [YT] | 1,121

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https://youtu.be/Al3n04mdvNc?si=ClSvn...
👶🏻*बस इतनी सी जानकारी लाखों नहीं करोड़ों लोगों का जीवन बचा सकती हैं* ⤴️

1 day ago | [YT] | 77

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👶🏻*बस इतनी सी जानकारी लाखों नहीं करोड़ों लोगों का जीवन बचा सकती हैं* ⤴️

1 day ago | [YT] | 1