*(ब्रह्मलीन ब्रह्मनिष्ठ स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज के प्रवचन से)*
*ऋषियों का कथन है कि ब्रह्मचर्य ब्रह्म-परमात्मा के दर्शन का द्वार है, उसका पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए यहाँ हम ब्रह्मचर्य-पालन के कुछ सरल नियमों एवं उपायों की चर्चा करेंगे :*
*1.ब्रह्मचर्य तन से अधिक मन पर आधारित है। इसलिए मन को नियंत्रण में रखो और अपने सामने ऊँचे आदर्श रखो।*
*2.आँख और कान मन के मुख्यमंत्री हैं। इसलिए गंदे चित्र व भद्दे दृश्य देखने तथा अभद्र बातें सुनने से सावधानी पूर्वक बचो।*
*3.मन को सदैव कुछ-न-कुछ चाहिए। अवकाश में मन प्रायः मलिन हो जाता है। अतः शुभ कर्म करने में तत्पर रहो व भगवन्नाम-जप में लगे रहो।*
*4.'जैसा खाये अन्न, वैसा बने मन।' - यह कहावत एकदम सत्य है। गरम मसाले, चटनियाँ, अधिक गरम भोजन तथा मांस, मछली, अंडे, चाय कॉफी, फास्टफूड आदि का सेवन बिल्कुल न करो।*
*5.भोजन हल्का व चिकना स्निग्ध हो। रात का खाना सोने से कम-से-कम दो घंटे पहले खाओ।*
*6.दूध भी एक प्रकार का भोजन है। भोजन और दूध के बीच में तीन घंटे का अंतर होना चाहिए।*
*7.वेश का प्रभाव तन तथा मन दोनों पर पड़ता है। इसलिए सादे, साफ और सूती वस्त्र पहनो। खादी के वस्त्र पहनो तो और भी अच्छा है। सिंथेटिक वस्त्र मत पहनो। खादी, सूती, ऊनी वस्त्रों से जीवनीशक्ति की रक्षा होती है व सिंथेटिक आदि अन्य प्रकार के वस्त्रों से उनका ह्रास होता है।*
*8.लँगोटी बाँधना अत्यंत लाभदायक है। सीधे, रीढ़ के सहारे तो कभी न सोओ, हमेशा करवट लेकर ही सोओ। यदि चारपाई पर सोते हो तो वह सख्त होनी चाहिए।*
*9.प्रातः जल्दी उठो। प्रभात में कदापि न सोओ। वीर्यपात प्रायः रात के अंतिम प्रहर में होता है।*
*10.पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, शराब, चरस, अफीम, भाँग आदि सभी मादक (नशीली) चीजें धातु क्षीण करती हैं। इनसे दूर रहो।*
*11.लसीली (चिपचिपी) चीजें जैसे – भिंडी, लसौड़े आदि खानी चाहिए। ग्रीष्म ऋतु में ब्राह्मी बूटी का सेवन लाभदायक है। भीगे हुए बेदाने और मिश्री के शरबत के साथ इसबगोल लेना हितकारी है।*
*12.कटिस्नान करना चाहिए। ठंडे पानी से भरे पीपे में शरीर का बीच का भाग पेटसहित डालकर तौलिये से पेट को रगड़ना एक आजमायी हुई चिकित्सा है। इस प्रकार 15-20 मिनट बैठना चाहिए। आवश्यकतानुसार सप्ताह में एक-दो बार ऐसा करो।*
*13.प्रतिदिन रात को सोने से ठंडा पानी पेट पर डालना बहुत लाभदायक है।*
*14.बदहज्मी व कब्ज से अपने को बचाओ।*
*15.सेंट, लवेंडर, परफ्यूम आदि से दूर रहो। इन्द्रियों को भड़काने वाली किताबें न पढ़ो, न ही ऐसी फिल्में और नाटक देखो।*
*16.विवाहित हो तो भी अलग बिछौने पर सोओ।*
*17.हर रोज प्रातः और सायं व्यायाम, आसन और प्राणायाम करने का नियम रखो।*
🌷 *आश्रम के साहित्य निरोगता के साधन` से संकलित* 🕉🕉🌷🌸
*दिनांक : 10 मार्च 1969* *swami_leelashah_ji_bapu*
*प्रिय, प्रिय आशाराम !*
*विश्वरूप परिवार से खुश-प्रसन्न हो | तुम्हारा पत्र मिला | समाचार जाना |*
*जब तक शरीर है, तब तक सुख-दुःख, ठंडी-गर्मी, लाभ-हानि , मान-अपमान होते रहते हैं | सत्य वस्तु परमात्मा में जो संसार प्रतीत होता है वह आभास है | कठिनाईयां तो आती-जाती रहती हैं |*
🙏🏻 *अपने सत्संग-प्रवचन में अत्यधिक सदाचार और वैराग्य की बातें बताना | सांसारिक वस्तुएं , शरीर इत्यादिक हकीकत में विचार दृष्टि से देखें तो सुन्दर नहीं है, आनंदमय नहीं है, प्रेम करने योग्य नहीं है और वे सत्य भी नहीं है – ऐसा दृष्टान्त देकर साबित करें | जैसे शरीर को देखें तो वह गंदगी और दुःख का थैला है | नाक से रेंट , मुंह से लार, त्वचा से पसीना, गुदा से मल, शिश्नेंद्रिय से मूत्र बहते रहते हैं | उसी प्रकार कान, आँख से भी गंदगी निकलती रहती है | वायु शरीर में जाते ही दूषित हो जाती है | अन्न-जल सब कफ-पित्त और दूसरी गंदगी में परिणत हो जाते हैं | बीमारी व बुढ़ापे में शरीर को देखें | किसी की मौत हो जाए तो शरीर को देखें | उसी मृत शरीर को कोई कमरे में चार दिन रखकर बाहर निकाले तो कोई वहां खड़ा भी नहीं रह सकता | विचार करके देखने से शरीर की पोल खुल जाएगी | दूसरी वस्तुओं की भी ऐसी ही हालत समझनी चाहिए | आम कितना भी अच्छा हो , 3-4 हफ्ते उसे रखे रहोगे , तो सड़ जाएगा, बिगड़ जाएगा | इतनी बदबू आएगी कि हाथ लगाने में भी घृणा होगी | इस प्रकार के विचार लोगों को अधिक बताना ताकि उनके दिमाग में पड़ी मोह की परतें खुल जायें |*
🙏🏻 *नर्मदा तट जाकर 10-15 दिन रहकर आना | दो बार स्नान करना | अपने आत्मविचार में, वेदांत ग्रंथ के विचारों में निमग्न रहना | विशेष जब रू-बरू मुलाक़ात होगी तब बतायेंगे |*
*बस अब बंद करता हूँ | शिव !*
*हे भगवान ! सबको सद्बुद्धि दो , शक्ति दो , निरोगता दो | सब अपने-अपने कर्त्तव्य का पालन करें और सुखी रहें |*
📿 *बुधवारी अष्टमी पर आपके पुण्यों का खजाना भर देगा यह कीर्तन* ⤴️
➡️ *बाते छोटी काम बड़े*
➡️ *बाथरूम के लिए गए, हाथ-पैर धो लो | ३ बार कुल्ला करो | आँख और कान को पानी का स्पर्श कराओ | शुद्धि रखे | अशुद्धि नहीं | गंदगी नहीं | स्वच्छता बाहर की मन की पवित्रता में बहुत काम देगी... बहुत काम देगी |*
➡️ *भोजन करें तो दो हाथ, दो पैर, मुँह ये पाँच अंग धोकर भोजन करे | बहुत फायदा होगा | स्वच्छता......*
➡️ *पानी पियें, सभा में बैठे हो तो बात अलग है पर बाहर कही हो तो पानी पिए तो एक बार कुल्ला करें |*
➡️ *स्वच्छता..... शरीर निरोग रहेगा | आजकल लोग अपना शरीर भी निरोग नहीं रख पाते | बीमारियाँ ढेरों होती है | बीमारियाँ हो ही क्यों? अगर हो तो टिके क्यों? हम ऐसी स्वच्छता रखें |*
➡️ *एक दूसरे को झूठा पानी पी रहें हैं | सबके अपने-अपने संस्कार होते हैं | ऐसा ना हो | आपसी प्रेम अलग बात है | झूठा पीना ... एक दूसरे का झूठा खाना.... जो अपना झूठा दूसरे को खिलाता है न उसके पुण्य नष्ट होते हैं | खिलाने वाले के... जो अपना झूठा दूसरों को खिलते हैं | खा-खा कोई बात नहीं | उसके पुण्य भी स्वाहा हो जाते हैं | इसलिए अशुद्धि नहीं स्वच्छता....*
➡️ *घर में रोज बहनें ध्यान रखे नाश्ता होने से पहले सफाई हो जाए | आपके घर में लक्ष्मी ना आये तो कहना | और गंदगी पड़ी है कोई नाश्ता कर रहा है, कोई कुछ कर रहा है तो लक्ष्मी क्यों आएगी वहाँ पर | लक्ष्मी को स्वच्छता पसंद है |*
➡️ *बहनें सुबह कभी घर से बाहर जाती हो तो घर में सफाई करके घर से बाहर जाए | ऐसे घर में लक्ष्मी अंदर आती है | ये बातें बहुत छोटी-छोटी है पर काम बहुत आएगी | घर में सुबह नाश्ता हो उससे पहले सफाई हो जाए | घर में लक्ष्मी का वास होगा |*
➡️ *रात को घर में झूठे बर्तन रखकर ना सोएं | एक भी बर्तन घर में झुठा रख कर ना सोएं | आपके घर लक्ष्मी जरुर आएगी और स्थाई वास करेगी | पलंग पर जहाँ आप सोते है वहाँ झूठे बर्तन मत रखो | आपके घर लक्ष्मी आये बिना नहीं रहेगी |*
➡️ *शाम हो गई कपड़े सुखाने बाहर डाले, वो ले लो | शाम के बाद कपड़े डाले रात को तो उसमे मलिनता प्रवेश करती है | ये बातें छोटी-छोटी....*
➡️ *घर में टूटे-फूटे बर्तन मत रखो | जिनके घर में टूटे-फूटे बर्तन होते हैं, महाभारत में लिखा है- कोई ऐसे वैसे ग्रन्थ की बात नहीं है | टूटे-फूटे बर्तन रखते हैं ऐसे घर में झगड़े ज्यादा होते हैं |*
➡️ *शादियों में जाते हैं,जाओ मना नहीं है | भले आपके बेटे की, भतीजे की भतीजी की शादी है जाओ पर शादी में क्या करते हैं फूल फेंकते हैं तो गुलाब के फूल पर पैर रखने से लक्ष्मी चली जाएगी| गुलाब के फूल में लक्ष्मी का वास होता है | फूल तो गुरु और ईश्वर को अर्पण करने के लिए होते हैं, हमारे पैरों तले कुचलने के लिए नहीं हैं | इसलिए बारातों में ऐसी बेवकूफी नहीं करनी चाहिए | गुलाब के फूल उछाल रहें हैं... पैरों में नहीं आने चाहिए | बात छोटी है पर काम की है |*
➡️ *खाना खाओ तो पूर्व या उत्तर की ओर मुहँ करके खाना खाओ | तबियत बढ़िया रहेगी |*
➡️ *सोना है तो पूर्व या दक्षिण की तरफ सिर करके सोओ | तबियत बढ़िया रहेगी | दवाइयाँ नहीं खानी पड़ेगी |*
🌹 *एक बार बड़ें साँईं* *लीलाशाहजी अहमदाबाद* *स्टेशन से गुजरने वाले थे, हम स्टेशन पर दर्शन करने* *गये।*
*बहू (लक्ष्मीदेवी) को बड़े* *साँईं के आगे करके मैंने कहा :"इस पर* *दया कीजिये साँईं !" साँईं ने कहाः "इस उम्र में* *कितने ही लड़के* *व्यभिचारी जीवन जीते* *हैं, तम्बाकू आदि व्यसनों से अपना जीवन* *तबाह करते हैं |*
🌹 *परिवार व समाज को कलंकित करते* *हैं। आसुमल तो भगवान के रास्ते जा रहा है। इतने* *सारे लोग गृहस्थी हैं, एक* *त्यागी हुआ तो क्या हुआ ?*
*जल्दी ही अपना लक्ष्य* *हासिल करके कर वापस लौटेगा।"* *फिर लक्ष्मीदेवी के सिर* *पर अपना कृपाभरा वरदहस्त रखकर बड़े साँईं ने कहा :* *"तू रोना मत।" उस समय* *लक्ष्मीदेवी पर* *उनकी ऐसी कृपा बरसी कि तब* *से उसकी भी साधन-भजन में तीव्रता बढ़ गयी और अनायास* *ही अजपाजप चालू हो गया।*
Surat Ashram
https://youtu.be/lZfyeZ4_H7E?si=oy80L...
7 hours ago | [YT] | 594
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Surat Ashram
💪🏻 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌷⤵️
https://youtu.be/lZfyeZ4_H7E?si=oy80L...
*ब्रह्मचर्य-पालन के नियम*
*(ब्रह्मलीन ब्रह्मनिष्ठ स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज के प्रवचन से)*
*ऋषियों का कथन है कि ब्रह्मचर्य ब्रह्म-परमात्मा के दर्शन का द्वार है, उसका पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए यहाँ हम ब्रह्मचर्य-पालन के कुछ सरल नियमों एवं उपायों की चर्चा करेंगे :*
*1.ब्रह्मचर्य तन से अधिक मन पर आधारित है। इसलिए मन को नियंत्रण में रखो और अपने सामने ऊँचे आदर्श रखो।*
*2.आँख और कान मन के मुख्यमंत्री हैं। इसलिए गंदे चित्र व भद्दे दृश्य देखने तथा अभद्र बातें सुनने से सावधानी पूर्वक बचो।*
*3.मन को सदैव कुछ-न-कुछ चाहिए। अवकाश में मन प्रायः मलिन हो जाता है। अतः शुभ कर्म करने में तत्पर रहो व भगवन्नाम-जप में लगे रहो।*
*4.'जैसा खाये अन्न, वैसा बने मन।' - यह कहावत एकदम सत्य है। गरम मसाले, चटनियाँ, अधिक गरम भोजन तथा मांस, मछली, अंडे, चाय कॉफी, फास्टफूड आदि का सेवन बिल्कुल न करो।*
*5.भोजन हल्का व चिकना स्निग्ध हो। रात का खाना सोने से कम-से-कम दो घंटे पहले खाओ।*
*6.दूध भी एक प्रकार का भोजन है। भोजन और दूध के बीच में तीन घंटे का अंतर होना चाहिए।*
*7.वेश का प्रभाव तन तथा मन दोनों पर पड़ता है। इसलिए सादे, साफ और सूती वस्त्र पहनो। खादी के वस्त्र पहनो तो और भी अच्छा है। सिंथेटिक वस्त्र मत पहनो। खादी, सूती, ऊनी वस्त्रों से जीवनीशक्ति की रक्षा होती है व सिंथेटिक आदि अन्य प्रकार के वस्त्रों से उनका ह्रास होता है।*
*8.लँगोटी बाँधना अत्यंत लाभदायक है। सीधे, रीढ़ के सहारे तो कभी न सोओ, हमेशा करवट लेकर ही सोओ। यदि चारपाई पर सोते हो तो वह सख्त होनी चाहिए।*
*9.प्रातः जल्दी उठो। प्रभात में कदापि न सोओ। वीर्यपात प्रायः रात के अंतिम प्रहर में होता है।*
*10.पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, शराब, चरस, अफीम, भाँग आदि सभी मादक (नशीली) चीजें धातु क्षीण करती हैं। इनसे दूर रहो।*
*11.लसीली (चिपचिपी) चीजें जैसे – भिंडी, लसौड़े आदि खानी चाहिए। ग्रीष्म ऋतु में ब्राह्मी बूटी का सेवन लाभदायक है। भीगे हुए बेदाने और मिश्री के शरबत के साथ इसबगोल लेना हितकारी है।*
*12.कटिस्नान करना चाहिए। ठंडे पानी से भरे पीपे में शरीर का बीच का भाग पेटसहित डालकर तौलिये से पेट को रगड़ना एक आजमायी हुई चिकित्सा है। इस प्रकार 15-20 मिनट बैठना चाहिए। आवश्यकतानुसार सप्ताह में एक-दो बार ऐसा करो।*
*13.प्रतिदिन रात को सोने से ठंडा पानी पेट पर डालना बहुत लाभदायक है।*
*14.बदहज्मी व कब्ज से अपने को बचाओ।*
*15.सेंट, लवेंडर, परफ्यूम आदि से दूर रहो। इन्द्रियों को भड़काने वाली किताबें न पढ़ो, न ही ऐसी फिल्में और नाटक देखो।*
*16.विवाहित हो तो भी अलग बिछौने पर सोओ।*
*17.हर रोज प्रातः और सायं व्यायाम, आसन और प्राणायाम करने का नियम रखो।*
🌷 *आश्रम के साहित्य निरोगता के साधन` से संकलित* 🕉🕉🌷🌸
20 hours ago | [YT] | 1,197
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Surat Ashram
🙏🏻 *पूज्य बापूजी के सद्गुरु साँईं श्री लीलाशाहजी महाराज द्वारा पूज्यश्री को लिखा हुआ पत्र*
🌹 *13 मार्च : दादागुरु लीलाशाहजी बापू के प्राकट्य दिवस पर विशेष*⤵️
https://youtu.be/AAjCB0MEwsE
*दिनांक : 10 मार्च 1969*
*swami_leelashah_ji_bapu*
*प्रिय, प्रिय आशाराम !*
*विश्वरूप परिवार से खुश-प्रसन्न हो | तुम्हारा पत्र मिला | समाचार जाना |*
*जब तक शरीर है, तब तक सुख-दुःख, ठंडी-गर्मी, लाभ-हानि , मान-अपमान होते रहते हैं | सत्य वस्तु परमात्मा में जो संसार प्रतीत होता है वह आभास है | कठिनाईयां तो आती-जाती रहती हैं |*
🙏🏻 *अपने सत्संग-प्रवचन में अत्यधिक सदाचार और वैराग्य की बातें बताना | सांसारिक वस्तुएं , शरीर इत्यादिक हकीकत में विचार दृष्टि से देखें तो सुन्दर नहीं है, आनंदमय नहीं है, प्रेम करने योग्य नहीं है और वे सत्य भी नहीं है – ऐसा दृष्टान्त देकर साबित करें | जैसे शरीर को देखें तो वह गंदगी और दुःख का थैला है | नाक से रेंट , मुंह से लार, त्वचा से पसीना, गुदा से मल, शिश्नेंद्रिय से मूत्र बहते रहते हैं | उसी प्रकार कान, आँख से भी गंदगी निकलती रहती है | वायु शरीर में जाते ही दूषित हो जाती है | अन्न-जल सब कफ-पित्त और दूसरी गंदगी में परिणत हो जाते हैं | बीमारी व बुढ़ापे में शरीर को देखें | किसी की मौत हो जाए तो शरीर को देखें | उसी मृत शरीर को कोई कमरे में चार दिन रखकर बाहर निकाले तो कोई वहां खड़ा भी नहीं रह सकता | विचार करके देखने से शरीर की पोल खुल जाएगी | दूसरी वस्तुओं की भी ऐसी ही हालत समझनी चाहिए | आम कितना भी अच्छा हो , 3-4 हफ्ते उसे रखे रहोगे , तो सड़ जाएगा, बिगड़ जाएगा | इतनी बदबू आएगी कि हाथ लगाने में भी घृणा होगी | इस प्रकार के विचार लोगों को अधिक बताना ताकि उनके दिमाग में पड़ी मोह की परतें खुल जायें |*
🙏🏻 *नर्मदा तट जाकर 10-15 दिन रहकर आना | दो बार स्नान करना | अपने आत्मविचार में, वेदांत ग्रंथ के विचारों में निमग्न रहना | विशेष जब रू-बरू मुलाक़ात होगी तब बतायेंगे |*
*बस अब बंद करता हूँ | शिव !*
*हे भगवान ! सबको सद्बुद्धि दो , शक्ति दो , निरोगता दो | सब अपने-अपने कर्त्तव्य का पालन करें और सुखी रहें |*
*हरी ॐ शांति, शांति |*
*लीलाशाह।* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻💐
🌹 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, सितम्बर 2015, पृष्ठ संख्या 5, अंक 273* 🕉
20 hours ago | [YT] | 549
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Surat Ashram
https://youtu.be/lZfyeZ4_H7E?si=oy80L...
📜 *जब लीलाशाहजी बापू ने इस प्रसंग पर पूज्य बापूजी को 57 साल पहले लिखा ये पत्र (प्राकट्य दिवस पर विशेष)* ⤴️
21 hours ago | [YT] | 318
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Surat Ashram
https://youtu.be/lZfyeZ4_H7E?si=oy80L...
📜 *जब लीलाशाहजी बापू ने इस प्रसंग पर पूज्य बापूजी को 57 साल पहले लिखा ये पत्र (प्राकट्य दिवस पर विशेष)* ⤴️
21 hours ago | [YT] | 10
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Surat Ashram
https://youtu.be/lZfyeZ4_H7E?si=oy80L...
📜 *जब लीलाशाहजी बापू ने इस प्रसंग पर पूज्य बापूजी को 57 साल पहले लिखा ये पत्र (प्राकट्य दिवस पर विशेष)* ⤴️
21 hours ago | [YT] | 242
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Surat Ashram
https://youtu.be/GuFXkumjQJY?si=pES5u...
1 day ago | [YT] | 943
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Surat Ashram
🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌹⤵️
https://youtu.be/GuFXkumjQJY?si=pES5u...
📿 *बुधवारी अष्टमी पर आपके पुण्यों का खजाना भर देगा यह कीर्तन* ⤴️
➡️ *बाते छोटी काम बड़े*
➡️ *बाथरूम के लिए गए, हाथ-पैर धो लो | ३ बार कुल्ला करो | आँख और कान को पानी का स्पर्श कराओ | शुद्धि रखे | अशुद्धि नहीं | गंदगी नहीं | स्वच्छता बाहर की मन की पवित्रता में बहुत काम देगी... बहुत काम देगी |*
➡️ *भोजन करें तो दो हाथ, दो पैर, मुँह ये पाँच अंग धोकर भोजन करे | बहुत फायदा होगा | स्वच्छता......*
➡️ *पानी पियें, सभा में बैठे हो तो बात अलग है पर बाहर कही हो तो पानी पिए तो एक बार कुल्ला करें |*
➡️ *स्वच्छता..... शरीर निरोग रहेगा | आजकल लोग अपना शरीर भी निरोग नहीं रख पाते | बीमारियाँ ढेरों होती है | बीमारियाँ हो ही क्यों? अगर हो तो टिके क्यों? हम ऐसी स्वच्छता रखें |*
➡️ *एक दूसरे को झूठा पानी पी रहें हैं | सबके अपने-अपने संस्कार होते हैं | ऐसा ना हो | आपसी प्रेम अलग बात है | झूठा पीना ... एक दूसरे का झूठा खाना.... जो अपना झूठा दूसरे को खिलाता है न उसके पुण्य नष्ट होते हैं | खिलाने वाले के... जो अपना झूठा दूसरों को खिलते हैं | खा-खा कोई बात नहीं | उसके पुण्य भी स्वाहा हो जाते हैं | इसलिए अशुद्धि नहीं स्वच्छता....*
➡️ *घर में रोज बहनें ध्यान रखे नाश्ता होने से पहले सफाई हो जाए | आपके घर में लक्ष्मी ना आये तो कहना | और गंदगी पड़ी है कोई नाश्ता कर रहा है, कोई कुछ कर रहा है तो लक्ष्मी क्यों आएगी वहाँ पर | लक्ष्मी को स्वच्छता पसंद है |*
➡️ *बहनें सुबह कभी घर से बाहर जाती हो तो घर में सफाई करके घर से बाहर जाए | ऐसे घर में लक्ष्मी अंदर आती है | ये बातें बहुत छोटी-छोटी है पर काम बहुत आएगी | घर में सुबह नाश्ता हो उससे पहले सफाई हो जाए | घर में लक्ष्मी का वास होगा |*
➡️ *रात को घर में झूठे बर्तन रखकर ना सोएं | एक भी बर्तन घर में झुठा रख कर ना सोएं | आपके घर लक्ष्मी जरुर आएगी और स्थाई वास करेगी | पलंग पर जहाँ आप सोते है वहाँ झूठे बर्तन मत रखो | आपके घर लक्ष्मी आये बिना नहीं रहेगी |*
➡️ *शाम हो गई कपड़े सुखाने बाहर डाले, वो ले लो | शाम के बाद कपड़े डाले रात को तो उसमे मलिनता प्रवेश करती है | ये बातें छोटी-छोटी....*
➡️ *घर में टूटे-फूटे बर्तन मत रखो | जिनके घर में टूटे-फूटे बर्तन होते हैं, महाभारत में लिखा है- कोई ऐसे वैसे ग्रन्थ की बात नहीं है | टूटे-फूटे बर्तन रखते हैं ऐसे घर में झगड़े ज्यादा होते हैं |*
➡️ *शादियों में जाते हैं,जाओ मना नहीं है | भले आपके बेटे की, भतीजे की भतीजी की शादी है जाओ पर शादी में क्या करते हैं फूल फेंकते हैं तो गुलाब के फूल पर पैर रखने से लक्ष्मी चली जाएगी| गुलाब के फूल में लक्ष्मी का वास होता है | फूल तो गुरु और ईश्वर को अर्पण करने के लिए होते हैं, हमारे पैरों तले कुचलने के लिए नहीं हैं | इसलिए बारातों में ऐसी बेवकूफी नहीं करनी चाहिए | गुलाब के फूल उछाल रहें हैं... पैरों में नहीं आने चाहिए | बात छोटी है पर काम की है |*
➡️ *खाना खाओ तो पूर्व या उत्तर की ओर मुहँ करके खाना खाओ | तबियत बढ़िया रहेगी |*
➡️ *सोना है तो पूर्व या दक्षिण की तरफ सिर करके सोओ | तबियत बढ़िया रहेगी | दवाइयाँ नहीं खानी पड़ेगी |*
🌹 *श्री सुरेशानंदजी - गोरखपुर 19th April' 2012*
1 day ago | [YT] | 1,249
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Surat Ashram
✨ *साँईं लीलाशाहजी की कृपा*⤵️
https://youtu.be/wOgmSFCkhT4
🌹 *एक बार बड़ें साँईं*
*लीलाशाहजी अहमदाबाद*
*स्टेशन से गुजरने वाले थे, हम स्टेशन पर दर्शन करने*
*गये।*
*बहू (लक्ष्मीदेवी) को बड़े*
*साँईं के आगे करके मैंने कहा :"इस पर*
*दया कीजिये साँईं !" साँईं ने कहाः "इस उम्र में*
*कितने ही लड़के*
*व्यभिचारी जीवन जीते*
*हैं, तम्बाकू आदि व्यसनों से अपना जीवन*
*तबाह करते हैं |*
🌹 *परिवार व समाज को कलंकित करते*
*हैं। आसुमल तो भगवान के रास्ते जा रहा है। इतने*
*सारे लोग गृहस्थी हैं, एक*
*त्यागी हुआ तो क्या हुआ ?*
*जल्दी ही अपना लक्ष्य*
*हासिल करके कर वापस लौटेगा।"*
*फिर लक्ष्मीदेवी के सिर*
*पर अपना कृपाभरा वरदहस्त रखकर बड़े साँईं ने कहा :*
*"तू रोना मत।" उस समय*
*लक्ष्मीदेवी पर*
*उनकी ऐसी कृपा बरसी कि तब*
*से उसकी भी साधन-भजन में तीव्रता बढ़ गयी और अनायास*
*ही अजपाजप चालू हो गया।*
📿 *पूज्य बापूजी* 📿
1 day ago | [YT] | 357
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Surat Ashram
https://youtu.be/GuFXkumjQJY?si=pES5u...
📿 *बुधवारी अष्टमी पर आपके पुण्यों का खजाना भर देगा यह कीर्तन* ⤴️
2 days ago | [YT] | 34
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