👉🏻 *आसुरी बुद्धि, मोहिनी बुद्धि, राक्षसी बुद्धि...* *वो मनुष्यों को गिरा देती है |* *इसलिए दीक्षा लेते तो १०* *माला नियमपूर्वक जपे तो गिराने* *का प्रारब्ध आयेगा तो फिर* *भी सुरक्षित हो जाएगा |* *१० से २० माला जो जपता है |* *ना उसको गिराने की* *परिस्थिति भगा देगी लेकिन फिर* *खड़ा हो जाएगा |* *जप छोड़ दिया तो उसको तो गिरना ही है* *ना ...गुरुमंत्र, गुरुध्यान छोड़ दिया गिरना ही गिरना |* *नहीं तो गुरुमंत्र और गुरुध्यान कितना ही गिरा दे कोई...* *उसको उठा लेगा |*
*हजारों प्रतिकूलताओ में भी जो निराश नहीं होता, हजारों विरोधों में भी जो सत्य को नहीं छोड़ता, हजारों मुसीबतों में भी जो पुरुषार्थ को नहीं छोड़ता, वह अवश्य-अवश्य विजयी होता है और आपको विजयी होना ही है | लौकिक युद्ध के मैदान में तो कई विजेता हो सकते हैं लेकिन आपको तो उस युद्ध में विजयी होना है जिसमें बड़े-बड़े योद्धा भी हार गये | आपको तो ऐसे विजयी होना है जैसे ५ वर्ष की उम्र में ध्रुव, ८ वर्ष की उम्र में रामी रामदास, अल्पायु में ही शुकदेवजी व ७ दिन में राजा परीक्षित विजयी हो गये ( उन्होंने ईश्वरप्राप्ति कर ली ) |*
*जो व्यक्ति चतुर्मास में अथवा अधिक ( पुरुषोत्तम) मास में (17 मई से 15 जून 2026) भगवान् विष्णु पर कनेर के पुष्प अर्पित करता है, उस पर लक्ष्मीजी की सदैव कृपा बनी रहती है | उसे आरोग्य एवं शांति की प्राप्ति होती है तथा उसके संकट दूर होते है |*
*हजार वर्ष से भी अधिक समय तक विदेशियों के अधीन रहने के कारण भारत के इतिहास में अनेकानेक सफेद झूठ घुसेड़ दिये गये हैं तथा वास्तविकता को जानबूझकर दबा दिया गया है। लम्बे समय से सरकारी मान्यता तथा संरक्षण में पुष्ट होने के कारण इन झूठी कथाओं पर सत्यता की मोहर लग चुकी है।*
*संत श्री आशारामजी आश्रम, अमदावाद से प्रकाशित मासिक समाचार पत्र ‘लोक कल्याण सेतु’ के गत तीन अंकों में आपने पढ़ा होगा कि कैसे-कैसे षड्यन्त्र रचकर एक पवित्र शिवमंदिर को क्रूर मुगल बादशाह शाहजहाँ तथा उसकी तथाकथित प्रेयसी की झूठी कथा से कलंकित किया जा रहा है।*
*ऐसा ही एक सफेद झूठ भारत के उस विश्वप्रसिद्ध स्तंभ के पीछे भी गढ़ा गया है जिसे संसार में ‘कुतुबमीनार’ के नाम से जाना जाता है।*
*जिस प्रकार तथाकथित ‘ताजमहल’ के साथ ‘शाहजहाँ कि बेसिरपैरवाली झूठी प्रेमगाथा थोपी गयी उसी प्रकार तथाकथित कुतुबमीनार के पीछे भी एक अन्य मुगल शासक ‘कुतुबुद्धीन ऐबक’ का नाम थोप दिया गया है।*
*एक अंग्रेज पुरातत्त्व प्रमुख कनिंघम द्वारा फैलायी गयी सरकारी अफवाह को सच मानकर समस्त संसार को यह झूठ सुनाया जा रहा है कि इसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया। यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि जिन्होंने इस भारत की भूमि को अपने अथक परिश्रम से सजाया सँवारा है भारत के वे मूल निवासी आज भी विदेशी लुटेरों के मानसिक दबाव में जीवन बसर कर रहे हैं। उन्हें अपने देश में ही अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है। इतना ही नहीं सारे प्रतिबंध, बड़े-बड़े नियम-कानून केवल और केवल उन्हीं के लिए बने हैं।*
*तथाकथित कुतुबमीनार मुगल शासक कुतुबुद्दीन ने बनवायी इस बात का तो कोई ठोस प्रमाण नहीं है परन्तु कुतुबुद्दीन ने उस स्थान पर 27 मंदिरों को नष्ट करने का पाप किया था इस बात का ठोस प्रमाण उपलब्ध है।*
*उसने एक शिलालेख पर स्वयं लिखवाया है कि तथाकथित कुतुबमीनार के चारों ओर बने 27 मंदिरों को उजाड़ने की दुष्टता उसने की।*
*सच तो यह है कि तथाकथित कुतुबमीनार उस समय भी थी जब दुष्ट कुतुबुद्दीन का परदादा भी पैदा नहीं हुआ था। यह स्तम्भ एक प्राचीन हिन्दू कलाकृति है जिसका उपयोग नक्षत्र विज्ञान की प्रयोगशाला के रूप में किया जाता था।*
*इस स्तम्भ के पार्श्व में महरौली नगरी है। यह संस्कृत नाम मिहिरवाली का अपभ्रंश है। प्राचीन भारत के महान नक्षत्रविज्ञानी तथा महाराजा विक्रमादित्य के विश्वविख्यात दरबारी ज्योतिषी आचार्य मिहिर अपने सहायक विशेज्ञों के साथ यहाँ रहते थे। उन्हीं के नाम से इसका नाम मिहिरवाली (महरौली) पड़ा।*
*आचार्य वराह मिहिर इस तथाकथित कुतुबमीनार का उपयोग नक्षत्र विद्याध्ययन के लिए एक वेध स्तम्भ के रूप में किया करते थे।*
*इस वेध स्तम्भ के चारों ओर राशियों के 27 मण्डल बने हुए थे जो कुतुबुद्दीन द्वारा तुड़वा दिये गये। इसकी निर्माणकला में ऐसे कई चिह्न है जिनसे इसके हिन्दू भवन होने के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं।*
*इस स्तम्भ का घेरा 27 मोड़ों, चापों तथा त्रिकोणों का है तथा ये सब क्रमश एक के बाद एक हैं। इनसे स्पष्ट होता है कि इसके निर्माण में 27 की संख्या का विशेष महत्त्व रहा है। यह संख्या भारतीय ज्योतिष एवं नक्षत्र विज्ञान से संबंधित है।*
*इसका मुख्य द्वार इस्लामी मान्यता के अनुसार पश्चिम की ओर न होकर उत्तर की ओर है। इसके अनेक खम्भों तथा दीवारों पर संस्कृत में उत्कीर्ण शब्दावली अभी भी देखी जा सकती है। यद्यपि इसे काफी विद्रूप कर दिया गया है तथापि सूक्ष्मतापूर्वक देखने से भित्ति में अनेक देवमूर्तियाँ दृष्टिगोचर होती हैं। इतना ही नहीं कुतुबमीनार का अर्थ जानकर भी दंग रह जायेंगे कि इस अरबी शब्द का अर्थ नक्षत्रीय स्तम्भ ही है। हिन्दी में जिसे वेध स्तम्भ कहते हैं उसे ही अरबी में कुतुबमीनार कहा जाता है। इस नाम का कुतुबुद्दीन से कोई भी संबंध नहीं है। फिर भी यह कहा जाना कि कुतुबुद्दीन ने इसे बनाया इसलिए इसका नाम कुतुबमीनार पड़ा, कितना बड़ा धोखा है।*
✍🏻 *पी.एन.ओक.*
🛕 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जुलाई 2001, पृष्ठ संख्या 27,28 अंक 103* 🕉️
Surat Ashram
https://youtu.be/dfFWJ_6iiBY
7 hours ago | [YT] | 294
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Surat Ashram
🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌹 ⤵️
https://youtu.be/dfFWJ_6iiBY?si=H1ig6...
🌷 *गिरावट से रक्षा पाने हेतु –* 🌷
👉🏻 *आसुरी बुद्धि, मोहिनी बुद्धि, राक्षसी बुद्धि...*
*वो मनुष्यों को गिरा देती है |* *इसलिए दीक्षा लेते तो १०*
*माला नियमपूर्वक जपे तो गिराने* *का प्रारब्ध आयेगा तो फिर*
*भी सुरक्षित हो जाएगा |* *१० से २० माला जो जपता है |* *ना उसको गिराने की* *परिस्थिति भगा देगी लेकिन फिर*
*खड़ा हो जाएगा |* *जप छोड़ दिया तो उसको तो गिरना ही है*
*ना ...गुरुमंत्र, गुरुध्यान छोड़ दिया गिरना ही गिरना |*
*नहीं तो गुरुमंत्र और गुरुध्यान कितना ही गिरा दे कोई...*
*उसको उठा लेगा |*
🌷 *पूज्य बापूजी* 🌷
21 hours ago | [YT] | 765
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Surat Ashram
🌹 *वह अवश्य-अवश्य विजयी होता है*⤵️
https://youtu.be/zyL-0i_KWEs
*हजारों प्रतिकूलताओ में भी जो निराश नहीं होता, हजारों विरोधों में भी जो सत्य को नहीं छोड़ता, हजारों मुसीबतों में भी जो पुरुषार्थ को नहीं छोड़ता, वह अवश्य-अवश्य विजयी होता है और आपको विजयी होना ही है | लौकिक युद्ध के मैदान में तो कई विजेता हो सकते हैं लेकिन आपको तो उस युद्ध में विजयी होना है जिसमें बड़े-बड़े योद्धा भी हार गये | आपको तो ऐसे विजयी होना है जैसे ५ वर्ष की उम्र में ध्रुव, ८ वर्ष की उम्र में रामी रामदास, अल्पायु में ही शुकदेवजी व ७ दिन में राजा परीक्षित विजयी हो गये ( उन्होंने ईश्वरप्राप्ति कर ली ) |*
🌹 *ऋषि प्रसाद – अगस्त २०२० से*
21 hours ago | [YT] | 1,279
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Surat Ashram
https://youtu.be/dfFWJ_6iiBY?si=H1ig6...
🔥 *अधिक मास में करें ये दान इतना पुण्यफल होगा कि आप सोच भी नहीं सकते - श्री सुरेशानंदजी* ⤴️
22 hours ago | [YT] | 81
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Surat Ashram
https://youtu.be/dfFWJ_6iiBY?si=H1ig6...
🔥 *अधिक मास में करें ये दान इतना पुण्यफल होगा कि आप सोच भी नहीं सकते - श्री सुरेशानंदजी* ⤴️
22 hours ago | [YT] | 8
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Surat Ashram
https://youtu.be/dfFWJ_6iiBY?si=H1ig6...
🔥 *अधिक मास में करें ये दान इतना पुण्यफल होगा कि आप सोच भी नहीं सकते - श्री सुरेशानंदजी* ⤴️
22 hours ago | [YT] | 489
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Surat Ashram
https://youtu.be/DrhQiscl0zw?si=teAiK...
1 day ago | [YT] | 537
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Surat Ashram
🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌹⤵️
https://youtu.be/DrhQiscl0zw?si=teAiK...
💰 *धन, आरोग्य एवं शांति की प्राप्ति के लिए*
*जो व्यक्ति चतुर्मास में अथवा अधिक ( पुरुषोत्तम) मास में (17 मई से 15 जून 2026) भगवान् विष्णु पर कनेर के पुष्प अर्पित करता है, उस पर लक्ष्मीजी की सदैव कृपा बनी रहती है | उसे आरोग्य एवं शांति की प्राप्ति होती है तथा उसके संकट दूर होते है |*
🌹 *ऋषि प्रसाद – सितम्बर २०२० से*
1 day ago | [YT] | 686
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Surat Ashram
🚩 *दिल्ली की प्रसिद्ध कुतुब मीनार का सच….* 🛕⤵️
https://youtu.be/SK6zhn2HyQ8
*हजार वर्ष से भी अधिक समय तक विदेशियों के अधीन रहने के कारण भारत के इतिहास में अनेकानेक सफेद झूठ घुसेड़ दिये गये हैं तथा वास्तविकता को जानबूझकर दबा दिया गया है। लम्बे समय से सरकारी मान्यता तथा संरक्षण में पुष्ट होने के कारण इन झूठी कथाओं पर सत्यता की मोहर लग चुकी है।*
*संत श्री आशारामजी आश्रम, अमदावाद से प्रकाशित मासिक समाचार पत्र ‘लोक कल्याण सेतु’ के गत तीन अंकों में आपने पढ़ा होगा कि कैसे-कैसे षड्यन्त्र रचकर एक पवित्र शिवमंदिर को क्रूर मुगल बादशाह शाहजहाँ तथा उसकी तथाकथित प्रेयसी की झूठी कथा से कलंकित किया जा रहा है।*
*ऐसा ही एक सफेद झूठ भारत के उस विश्वप्रसिद्ध स्तंभ के पीछे भी गढ़ा गया है जिसे संसार में ‘कुतुबमीनार’ के नाम से जाना जाता है।*
*जिस प्रकार तथाकथित ‘ताजमहल’ के साथ ‘शाहजहाँ कि बेसिरपैरवाली झूठी प्रेमगाथा थोपी गयी उसी प्रकार तथाकथित कुतुबमीनार के पीछे भी एक अन्य मुगल शासक ‘कुतुबुद्धीन ऐबक’ का नाम थोप दिया गया है।*
*एक अंग्रेज पुरातत्त्व प्रमुख कनिंघम द्वारा फैलायी गयी सरकारी अफवाह को सच मानकर समस्त संसार को यह झूठ सुनाया जा रहा है कि इसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया। यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि जिन्होंने इस भारत की भूमि को अपने अथक परिश्रम से सजाया सँवारा है भारत के वे मूल निवासी आज भी विदेशी लुटेरों के मानसिक दबाव में जीवन बसर कर रहे हैं। उन्हें अपने देश में ही अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है। इतना ही नहीं सारे प्रतिबंध, बड़े-बड़े नियम-कानून केवल और केवल उन्हीं के लिए बने हैं।*
*तथाकथित कुतुबमीनार मुगल शासक कुतुबुद्दीन ने बनवायी इस बात का तो कोई ठोस प्रमाण नहीं है परन्तु कुतुबुद्दीन ने उस स्थान पर 27 मंदिरों को नष्ट करने का पाप किया था इस बात का ठोस प्रमाण उपलब्ध है।*
*उसने एक शिलालेख पर स्वयं लिखवाया है कि तथाकथित कुतुबमीनार के चारों ओर बने 27 मंदिरों को उजाड़ने की दुष्टता उसने की।*
*सच तो यह है कि तथाकथित कुतुबमीनार उस समय भी थी जब दुष्ट कुतुबुद्दीन का परदादा भी पैदा नहीं हुआ था। यह स्तम्भ एक प्राचीन हिन्दू कलाकृति है जिसका उपयोग नक्षत्र विज्ञान की प्रयोगशाला के रूप में किया जाता था।*
*इस स्तम्भ के पार्श्व में महरौली नगरी है। यह संस्कृत नाम मिहिरवाली का अपभ्रंश है। प्राचीन भारत के महान नक्षत्रविज्ञानी तथा महाराजा विक्रमादित्य के विश्वविख्यात दरबारी ज्योतिषी आचार्य मिहिर अपने सहायक विशेज्ञों के साथ यहाँ रहते थे। उन्हीं के नाम से इसका नाम मिहिरवाली (महरौली) पड़ा।*
*आचार्य वराह मिहिर इस तथाकथित कुतुबमीनार का उपयोग नक्षत्र विद्याध्ययन के लिए एक वेध स्तम्भ के रूप में किया करते थे।*
*इस वेध स्तम्भ के चारों ओर राशियों के 27 मण्डल बने हुए थे जो कुतुबुद्दीन द्वारा तुड़वा दिये गये। इसकी निर्माणकला में ऐसे कई चिह्न है जिनसे इसके हिन्दू भवन होने के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं।*
*इस स्तम्भ का घेरा 27 मोड़ों, चापों तथा त्रिकोणों का है तथा ये सब क्रमश एक के बाद एक हैं। इनसे स्पष्ट होता है कि इसके निर्माण में 27 की संख्या का विशेष महत्त्व रहा है। यह संख्या भारतीय ज्योतिष एवं नक्षत्र विज्ञान से संबंधित है।*
*इसका मुख्य द्वार इस्लामी मान्यता के अनुसार पश्चिम की ओर न होकर उत्तर की ओर है। इसके अनेक खम्भों तथा दीवारों पर संस्कृत में उत्कीर्ण शब्दावली अभी भी देखी जा सकती है। यद्यपि इसे काफी विद्रूप कर दिया गया है तथापि सूक्ष्मतापूर्वक देखने से भित्ति में अनेक देवमूर्तियाँ दृष्टिगोचर होती हैं। इतना ही नहीं कुतुबमीनार का अर्थ जानकर भी दंग रह जायेंगे कि इस अरबी शब्द का अर्थ नक्षत्रीय स्तम्भ ही है। हिन्दी में जिसे वेध स्तम्भ कहते हैं उसे ही अरबी में कुतुबमीनार कहा जाता है। इस नाम का कुतुबुद्दीन से कोई भी संबंध नहीं है। फिर भी यह कहा जाना कि कुतुबुद्दीन ने इसे बनाया इसलिए इसका नाम कुतुबमीनार पड़ा, कितना बड़ा धोखा है।*
✍🏻 *पी.एन.ओक.*
🛕 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जुलाई 2001, पृष्ठ संख्या 27,28 अंक 103* 🕉️
1 day ago | [YT] | 405
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Surat Ashram
https://youtu.be/DrhQiscl0zw?si=qyHzf...
🌹 *अधिक मास में ये छोटा सा प्रयोग आपका भाग्य खोल देगा* ⤴️
1 day ago | [YT] | 489
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