🤧 *कफ - खाँसीवाला बुखार : काली मिर्च के ३ ग्राम चूर्ण और अदरक के ५ मि.ली. रस को १० ग्राम शहद में मिलाकर दिन में २ – ३ बार चाटने से कफ – खाँसीवाले बुखार में आराम मिलता है |*
*कफ व खाँसी : कफ जम जाने से साँस लेने में तकलीफ हो तो आधा कप गुनगुने पानी में १५ – २० मि.ली. गोमूत्र ( ७ बार कपड़छन करके) अथवा ५ से १० मि.ली. गोमूत्र अर्क तथा २ – ४ चुटकी हल्दी मिलाकर सुबह खाली पेट पियें |*
*उबले पानी में हल्दी, अजवायन, भीमसेनी कपूर को अथवा केवल अमृत द्रव को डालकर सूँघे |*
*सरसों के तेल में २ कली लहसुन डालकर गरम करें | हल्का गर्म रहने पर छाती पर मालिश करें | इससे छाती में जमा हुआ कफ बाहर निकलने में मदद मिलती है |*
*कब्ज : २० ग्राम ग्वारपाठे में २ से ४ चुटकी काला नमक मिलाकर सुबह – शाम खाली पेट लें अथवा घृतकुमारी रस (Aloe Vera Juice) का सेवन करें |*
🌹 *वह आनंद जो ईश्वर का आनंद है – ब्रह्मानंद, जिससे बढ़कर दूसरा कोई आनंद नहीं है, उसकी प्राप्ति के लिए आज से शक्तिभर प्रयत्न करेंगे।’ – यह दृढ़ निश्चय, दृढ़ प्रतिज्ञा ध्यान मेंसहायक है। इसका अर्थ है कि हमको अब जिंदगी भर ध्यान ही करना है।*
👉🏻 *हे विषयो ! अब हम तुम्हें हाथ जोड़ते हैं। हे कर्मकांड ! तुम्हें हाथ जोड़ते हैं। हे संसार के संबधियो ! तुम अपनी-अपनी जगह पर ठीक रहो, अपना काम करो। अब हम तुम्हारी ओर से आँख बंद कर परमानंद की प्राप्ति के लिए पूरी शक्ति से, माने प्राणों की बाजी लगाकर और अपने मन को काबू में करके परमानंद की प्राप्ति के लिए दृढ़ प्रयत्न करने का निश्चय करते हैं।’ अगर यह निश्चय तुम्हारे जीवन में आ जाय तो देखो क्या ध्यान लगता है !*
🌹 *बारम्बार, बारम्बार-बारम्बार वही चीज आयेगी ध्यान में। महात्मा बुद्ध ने अपना ध्यान लगाते समय कहा था कि इस आसन पर बैठे-बैठे हमारा शरीर सूख जाय |*
🌹 *इहासने शुष्यतु में शरीरं त्वगस्थि मांसानलयं प्रयान्तु।*
🌹 *दृढ़निश्चय होकर ध्यान के लिए बैठो। ऐसे लोगों की परमात्मा बहुत बड़ी सहायता करता है, जो अपनी वासना, अपना भोग, अपना संकल्प छोड़कर परमात्मा की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील होते हैं। परमात्मा उनका सारा भार अपने ऊपर ले लेता है और उनको ऊपर उठाता है।मन को एकाग्र करके जब हम उसके द्वारा अपनी इन्द्रियों को परमानंद में डुबोना चाहते हैं, जब हमारी इन्द्रियाँ परमानंद की प्राप्ति के लिए अंतर्मुख होने लगती हैं और हम अपनी बुद्धि से परम प्रकाश स्वरूप अनंत ब्रह्म को, चिन्मात्र को अपने हृदय मेंआविर्भूत (उत्पन्न) करना चाहते हैं, तब अंतर्यामी ईश्वर बिना याचना के ही हमारी मदद करता है, हमारी इन्द्रियों, मन, बुद्धि की मदद करता है।*
🌹 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जनवरी 2016, पृष्ठ संख्या 6, अंक 277 ॐ* 🌹
*पूज्य बापूजी अपने सत्संग में बताते है : “आप अपने घरों में देशी गाय के गोबर के कंडे पर अगर एक चम्मच मतलब ८ – १० मि. ली. घी की बुँदे डालकर धूप करते हैं तो एक टन शक्तिशाली वायु बनती है | इससे मनुष्य तो क्या, कीट – पतंग और पशु- पक्षियों को भी फायदा होता है | ऐसा शक्तिशाली भोजन दुनिया की किसी चीज से नहीं बनता | वायु जितनी बलवान होगी, उतना बुद्धि, मन, स्वास्थ्य बलवान होंगे |”*
*( गौ-गोबर व विभिन्न जड़ी-बूटियों से बनी ‘गौ-चंदन’ धूपबत्ती आश्रमों में व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है | उसे जलाकर उस पर देशी गाय के घी अथवा घानीवाले खाद्य तेल या नारियल तेल की बुँदे डाल के भी ऊर्जावन प्राणवायु बनायी जा सकती है |)*
🌹 *एक दिन गुरु हरगोविंद जी के एक शिष्य ने प्रार्थना कीः “गुरुदेव ! हम गुरुभाईयों में शास्त्र चर्चा करते समय आपस में कोई विवाद उन्पन्न न हो इसका उपाय बताइये।”*
🌹 *गुरु हरगोविंद जी ने समझाते हुए कहाः “चर्चाएँ भले चार प्रकार की होती हैं परंतु सज्जनों, बुद्धिमानों या गुरुभाइयों के ग्रहण करने योग्य दो प्रकार की चर्चाएँ होती हैं- वेद चर्चाःप्रेमभाव से प्रश्न उत्तर करके एक-दूसरे की तसल्ली करना।*
🌹 *हेत चर्चाःईर्ष्यारहित होकर प्रेमभाव से खंडन-मंडन (दोनों पक्षों का प्रतिपादन) करके एक दूसरे की तसल्ली करना।*
🌹 *त्यागने योग्य दो प्रकार की चर्चाएँ हैं-जलप चर्चाःअपनी बात की पुष्टि के लिए दूसरे की बात को रद्द करके झगड़ा करना।*
😗 *वितंड चर्चाःदूसरे के पक्ष का खंडन करने के लिए छल कपट और झूठ का सहारा लेकर अपने पक्ष को सिद्ध करने का यत्न करना।*
🌹 *गुरु भक्त को किसी का मन हीं दुखाना चाहिए। सबके मन में सात्त्विक प्रसन्नता पैदा करनी चाहिए।*
Surat Ashram
https://youtu.be/CXGLvOBNNpQ
3 hours ago | [YT] | 264
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Surat Ashram
🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌹⤵️
https://youtu.be/CXGLvOBNNpQ?si=rrzKg...
☔ *बारिश के दिनों में लाभदायी कुछ घरेलू प्रयोग*
🤧 *कफ - खाँसीवाला बुखार : काली मिर्च के ३ ग्राम चूर्ण और अदरक के ५ मि.ली. रस को १० ग्राम शहद में मिलाकर दिन में २ – ३ बार चाटने से कफ – खाँसीवाले बुखार में आराम मिलता है |*
*कफ व खाँसी : कफ जम जाने से साँस लेने में तकलीफ हो तो आधा कप गुनगुने पानी में १५ – २० मि.ली. गोमूत्र ( ७ बार कपड़छन करके) अथवा ५ से १० मि.ली. गोमूत्र अर्क तथा २ – ४ चुटकी हल्दी मिलाकर सुबह खाली पेट पियें |*
*उबले पानी में हल्दी, अजवायन, भीमसेनी कपूर को अथवा केवल अमृत द्रव को डालकर सूँघे |*
*सरसों के तेल में २ कली लहसुन डालकर गरम करें | हल्का गर्म रहने पर छाती पर मालिश करें | इससे छाती में जमा हुआ कफ बाहर निकलने में मदद मिलती है |*
*कब्ज : २० ग्राम ग्वारपाठे में २ से ४ चुटकी काला नमक मिलाकर सुबह – शाम खाली पेट लें अथवा घृतकुमारी रस (Aloe Vera Juice) का सेवन करें |*
🌹 *ऋषि प्रसाद – अगस्त २०२१ से*
15 hours ago | [YT] | 677
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Surat Ashram
🌹😌 *तो देखो क्या ध्यान लगता है !*⤵️
https://youtu.be/-Q43b27MXmw
🌹 *वह आनंद जो ईश्वर का आनंद है – ब्रह्मानंद, जिससे बढ़कर दूसरा कोई आनंद नहीं है, उसकी प्राप्ति के लिए आज से शक्तिभर प्रयत्न करेंगे।’ – यह दृढ़ निश्चय, दृढ़ प्रतिज्ञा ध्यान मेंसहायक है। इसका अर्थ है कि हमको अब जिंदगी भर ध्यान ही करना है।*
👉🏻 *हे विषयो ! अब हम तुम्हें हाथ जोड़ते हैं। हे कर्मकांड ! तुम्हें हाथ जोड़ते हैं। हे संसार के संबधियो ! तुम अपनी-अपनी जगह पर ठीक रहो, अपना काम करो। अब हम तुम्हारी ओर से आँख बंद कर परमानंद की प्राप्ति के लिए पूरी शक्ति से, माने प्राणों की बाजी लगाकर और अपने मन को काबू में करके परमानंद की प्राप्ति के लिए दृढ़ प्रयत्न करने का निश्चय करते हैं।’ अगर यह निश्चय तुम्हारे जीवन में आ जाय तो देखो क्या ध्यान लगता है !*
🌹 *बारम्बार, बारम्बार-बारम्बार वही चीज आयेगी ध्यान में। महात्मा बुद्ध ने अपना ध्यान लगाते समय कहा था कि इस आसन पर बैठे-बैठे हमारा शरीर सूख जाय |*
🌹 *इहासने शुष्यतु में शरीरं त्वगस्थि मांसानलयं प्रयान्तु।*
👉🏻 *ये चमड़ा, हड्डी, मांस, खाक में मिल जायें किन्तु अप्राप्यबोधं बहुकल्प दुर्लुभं नैवासनाकायमिदं चलिष्यति।।*
🌹 *बोध को प्राप्त किये बिना अब हमारा यह शरीर इस आसन से हिलेगा नहीं।*
🌹 *तो संतुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।(गीताः 12.14)* 📖
🌹 *दृढ़निश्चय होकर ध्यान के लिए बैठो। ऐसे लोगों की परमात्मा बहुत बड़ी सहायता करता है, जो अपनी वासना, अपना भोग, अपना संकल्प छोड़कर परमात्मा की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील होते हैं। परमात्मा उनका सारा भार अपने ऊपर ले लेता है और उनको ऊपर उठाता है।मन को एकाग्र करके जब हम उसके द्वारा अपनी इन्द्रियों को परमानंद में डुबोना चाहते हैं, जब हमारी इन्द्रियाँ परमानंद की प्राप्ति के लिए अंतर्मुख होने लगती हैं और हम अपनी बुद्धि से परम प्रकाश स्वरूप अनंत ब्रह्म को, चिन्मात्र को अपने हृदय मेंआविर्भूत (उत्पन्न) करना चाहते हैं, तब अंतर्यामी ईश्वर बिना याचना के ही हमारी मदद करता है, हमारी इन्द्रियों, मन, बुद्धि की मदद करता है।*
🌹 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जनवरी 2016, पृष्ठ संख्या 6, अंक 277 ॐ* 🌹
15 hours ago | [YT] | 812
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Surat Ashram
https://youtu.be/CXGLvOBNNpQ?si=rrzKg...
🌹 *जुलाई 2026 शुरू होते ही सभी साधक जान ले ये आवश्यक जानकारी*⤴️
16 hours ago | [YT] | 94
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Surat Ashram
https://youtu.be/CXGLvOBNNpQ?si=rrzKg...
🌹 *जुलाई 2026 शुरू होते ही सभी साधक जान ले ये आवश्यक जानकारी*⤴️
16 hours ago | [YT] | 1
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Surat Ashram
https://youtu.be/CXGLvOBNNpQ?si=rrzKg...
🌹 *जुलाई 2026 शुरू होते ही सभी साधक जान ले ये आवश्यक जानकारी*⤴️
16 hours ago | [YT] | 115
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Surat Ashram
🔥 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🔥⤵️
https://youtu.be/c9kz-asvr9Y?si=3kbnf...
*वायुशुद्धि हेतु सुंदर युक्ति*
*पूज्य बापूजी अपने सत्संग में बताते है : “आप अपने घरों में देशी गाय के गोबर के कंडे पर अगर एक चम्मच मतलब ८ – १० मि. ली. घी की बुँदे डालकर धूप करते हैं तो एक टन शक्तिशाली वायु बनती है | इससे मनुष्य तो क्या, कीट – पतंग और पशु- पक्षियों को भी फायदा होता है | ऐसा शक्तिशाली भोजन दुनिया की किसी चीज से नहीं बनता | वायु जितनी बलवान होगी, उतना बुद्धि, मन, स्वास्थ्य बलवान होंगे |”*
*( गौ-गोबर व विभिन्न जड़ी-बूटियों से बनी ‘गौ-चंदन’ धूपबत्ती आश्रमों में व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध है | उसे जलाकर उस पर देशी गाय के घी अथवा घानीवाले खाद्य तेल या नारियल तेल की बुँदे डाल के भी ऊर्जावन प्राणवायु बनायी जा सकती है |)*
🔥 *ऋषि प्रसाद – जून २०२१ से*
1 day ago | [YT] | 991
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Surat Ashram
😷 *कौन सी चर्चाएँ ग्राह्य और कौन सी त्याज्य ?* 😷⤵️
https://youtu.be/fabLQO86BzU?si=KhPiO...
🌹 *गुरु हरगोविंदजी जयंती (ति. अ.) : 30 जून 2026* 🌹
🌹 *एक दिन गुरु हरगोविंद जी के एक शिष्य ने प्रार्थना कीः “गुरुदेव ! हम गुरुभाईयों में शास्त्र चर्चा करते समय आपस में कोई विवाद उन्पन्न न हो इसका उपाय बताइये।”*
🌹 *गुरु हरगोविंद जी ने समझाते हुए कहाः “चर्चाएँ भले चार प्रकार की होती हैं परंतु सज्जनों, बुद्धिमानों या गुरुभाइयों के ग्रहण करने योग्य दो प्रकार की चर्चाएँ होती हैं- वेद चर्चाःप्रेमभाव से प्रश्न उत्तर करके एक-दूसरे की तसल्ली करना।*
🌹 *हेत चर्चाःईर्ष्यारहित होकर प्रेमभाव से खंडन-मंडन (दोनों पक्षों का प्रतिपादन) करके एक दूसरे की तसल्ली करना।*
🌹 *त्यागने योग्य दो प्रकार की चर्चाएँ हैं-जलप चर्चाःअपनी बात की पुष्टि के लिए दूसरे की बात को रद्द करके झगड़ा करना।*
😗 *वितंड चर्चाःदूसरे के पक्ष का खंडन करने के लिए छल कपट और झूठ का सहारा लेकर अपने पक्ष को सिद्ध करने का यत्न करना।*
🌹 *गुरु भक्त को किसी का मन हीं दुखाना चाहिए। सबके मन में सात्त्विक प्रसन्नता पैदा करनी चाहिए।*
🌹 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, मई 2017, पृष्ठ संख्या 15, अंक 293 ॐॐ* 🌹
1 day ago | [YT] | 645
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Surat Ashram
https://youtu.be/c9kz-asvr9Y?si=3kbnf...
🏠 *घर में सुख शांति की बहार ला देगा यह पाठ* ⤴️
1 day ago | [YT] | 489
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Surat Ashram
https://youtu.be/c9kz-asvr9Y?si=3kbnf...
🏠 *घर में सुख शांति की बहार ला देगा यह पाठ* ⤴️
1 day ago | [YT] | 2
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