☝🏻 *सूरत आश्रम तो मेरा हृदय है ये पूज्यश्री के श्रीवचन है ऐसे सूरत आश्रम का ये नजारा आपने कभी नही देखा होगा | youtu.be/Wof-fltzyBo?si=L1QGd0RWseFeUuQd 🕉️


Surat Ashram

🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 📿⤵️
https://youtu.be/wSzX-63X4Ok?si=cPbva...

📿 *संकटनाशक मंत्रराज* 📿

*नृसिंह भगवान का स्मरण करने से महान संकट की निवृत्ति होती है | जब कोई भयानक आपत्ति से घिरा हो या बड़े अनिष्ट की आशंका हो तो भगवान नृसिंह के इस मंत्र का अधिकाधिक जप करना चाहिए :*

*ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम |*
*नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम ||*

*पूज्य बापूजी के सत्संग में आता है कि “इस विशिष्ट मंत्र के जप और उच्चारण से संकट की निवृत्ति होती है |”*

📿 *ऋषि प्रसाद – मई २०२० से*

5 hours ago | [YT] | 423

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🌹 *नृसिंह जयंती पर लें शुभ संकल्प* 🌹⤵️
https://youtu.be/7H6olRjOpRA?si=rUABJ...

https://youtu.be/Q5R04hlK_tA?si=DSOh1...

🌹 *नृसिंह जयंती - 30 अप्रैल 2026* 🌹

🌹 *भगवान नृसिंह की कथा में तीन प्रतीक मिलते हैं। ये तीन पात्रों से जुड़े हैं – हिरण्यकशिपु अहंकार से भरी बुराई का प्रतीक है, प्रह्लाद विश्वास से भरी भक्ति का प्रतीक है और दुष्ट का वध करने वाले भगवान नृसिंह भक्त के प्रति प्रेम का प्रतीक हैं।*

🌹 *अब सवाल यह है कि हम अपने जीवन को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं ?*

👉 *यदि अहंकार और बुराई की ओर ले जायेंगे तो निश्चित ही अंत बुरा है। इसलिए विश्वास से भरे भक्तिरूप प्रह्लाद को जीवन में उतारना होगा। प्रह्लाद से होते हुए आस्था व विश्वास का रास्ता भगवान तक जाता है। विकारों, आसक्तियों को जीतने की शक्ति विश्वास से हो जाती है और दुष्टता का अंत करने का बल पैदा होता है।*

👉 *हिरण्यकशिपु के रूप में यह दुष्टता हमारे अपने मन की है, जिसे अपने भीतर भगवान नृसिंह का आह्वान करके ही दूर किया जा सकता है।*

👉 *नृसिंह जयंती इसी संकल्प का पर्व है।भक्ति व प्रेम के महान आचार्य देवर्षि नारदजी ने जब सदगुरू के रूप में प्रह्लाद को दीक्षा-शिक्षा दी, तब उसके जीवन में भगवदभक्ति व प्रेम का प्राकट्य हुआ था।*

🌹 *अतः इस दिन संकल्प लें कि हम भी किन्हीं हयात ब्रह्मज्ञानी महापुरूष को खोजकर उनसे दीक्षा-शिक्षा ग्रहण करके, उनके बताये हुए मार्ग पर चल के प्रह्लादरूपी दृढ़ भक्ति के द्वारा अपने जीवन में भगवान का अवतरण करेंगे। अहंकार व बुराईरूपी हिरण्यकशिपु का नाश कर अपने हृदय को भगवदभक्ति व संतों के ज्ञान से प्रकाशित करेंगे।*


🌹 *स्रोतः लोक कल्याण सेतु, अप्रैल 2011, पृष्ठ संख्या 7, अंक 166 ॐ ॐ* 🌷

5 hours ago | [YT] | 73

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https://youtu.be/wSzX-63X4Ok?si=cPbva...
📿 *आ रही है अत्यंत दुर्लभ तथा महत्वपूर्ण तिथियां एक बार अवश्य जान ले* ⤴️

5 hours ago | [YT] | 5

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📿 *आ रही है अत्यंत दुर्लभ तथा महत्वपूर्ण तिथियां एक बार अवश्य जान ले* ⤴️

5 hours ago | [YT] | 97

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📿 *आ रही है अत्यंत दुर्लभ तथा महत्वपूर्ण तिथियां एक बार अवश्य जान ले* ⤴️

5 hours ago | [YT] | 62

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🌹 *कैसी दिव्य नारी आनंदमयी माँ !* ⤵️
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🌹 *(श्री माँ आनंदमयी जयंती : 30 अप्रैल 2026 दि. अ.)*

🌹 *पूज्यपाद संत श्री आशारामजी बापू*

✊🏻 *संयम में अद्भुत सामर्थ्य है । जिसके जीवन में संयम है, जिसके जीवन में ईश्वरोपासना है उसका जीवन सहज ही में महान हो जाता है । आनंदमयी माँ का जब विवाह हुआ तब उनका व्यक्तित्व अत्यंत आभासम्पन्न था । शादी के बाद उनके पति उन्हें संसार-व्यवहार में ले जाने का प्रयास करते रहते थे किंतु आनंदमयी माँ संयम और सत्संग की महिमा सुनाकर, पति की थोड़ी सेवा करके, विकारों से उनका मन हटा देतीं थीं । इस प्रकार कई दिन बीते, हफ्ते बीते, कई महीने बीत गये लेकिन आनंदमयी माँ ने अपने पति को विकारी जीवन में गिरने नहीं दिया ।*

*आखिरकार कई महीनों के पश्चात् एक दिन उनके पति ने कहा : ‘‘तुमने मुझसे शादी की है फिर भी क्यों मुझे इतना दूर-दूर रखती हो ?’’*

*तब आनंदमयी माँ ने जवाब दिया : ‘‘शादी तो जरूर की है लेकिन शादी का वास्तविक मतलब तो इस प्रकार है : शाद अर्थात् खुशी । वास्तविक खुशी प्राप्त करने के लिए पति-पत्नी एक-दूसरे के सहायक बनें न कि शोषक । काम-विकार में गिरना यह कोई शादी का फल नहीं ।’’*

*इस प्रकार अनेक युक्तियों से और अत्यंत विनम्रता से उन्होंने अपने पति को समझा दिया । आनंदमयी माँ संसार के कीचड़ में न गिरते हुए भी अपने पति की बहुत अच्छी तरह से सेवा करतीं थीं । पति नौकरी करके घर आते तो गर्म-गर्म भोजन बनाकर खिलाती थीं ।*

*आनंदमयी माँ घर में भी ध्यानाभ्यास किया करती थीं । कभी-कभी स्टोव पर दाल चढ़ाकर, छत पर खुले आकाश में चन्द्रमा की ओर त्राटक करते-करते ध्यानस्थ हो जातीं । इतनी ध्यानमग्न हो जातीं कि स्टोव पर रखी हुई दाल कोयला हो जाती । घर के लोग डाँटते तो चुपचाप अपनी भूल स्वीकार कर लेतीं लेकिन अंदर से तो समझती कि : ‘मैं कोई गलत मार्ग पर तो नहीं जा रही हूँ...’ इस प्रकार उनके ध्यान-भजन का क्रम चालू ही रहा । घर में रहते हुए ही उनके पास एकाग्रता का कुछ सामर्थ्य आ गया ।*

*एक रात्रि को वे उठीं और अपने पति को भी उठाया । फिर स्वयं महाकाली का चिंतन करके अपने पति को आदेश दिया : ‘‘महाकाली की पूजा करो ।’’ उनके पति ने इनका पूजन कर दिया । आनंदमयी माँ में उन्हें महाकाली के दर्शन होने लगे । उन्होंने आनंदमयी माँ को प्रणाम किया । तब आनंदमयी माँ बोलीं : ‘‘अब महाकाली को तो माँ की नजर से ही देखना है न ?’’*

*पति : ‘‘यह क्या हो गया ?’’*

*आनंदमयी माँ : ‘‘तुम्हारा कल्याण हो गया ।’’*

*कहते हैं कि उन्होंने अपने पति को दीक्षा दे दी और साधु बनाकर* *उत्तरकाशी के आश्रम में भेज दिया । कैसी दिव्य नारी रही होंगी माँ* *आनंदमयी ! उन्होंने अपने पति को भी परमात्मा के रंग में रंग दिया ।*

*जो संसार की माँग करता था, उसे भगवान की माँग का अधिकारी बना दिया । इस भारत भूमि में ऐसी भी अनेकों सन्नारियाँ हो गयीं ! कुछ वर्ष पूर्व ही आनंदमयी माँ ने अपना शरीर त्यागा है । अभी हरिद्वार में उनकी समाधि बनी है ।*

*ऐसी तो अनेकों बंगाली लड़कियाँ थीं, जिन्होंने शादी की, पुत्रों को जन्म दिया, पढ़ाया-लिखाया और मर गईं । शादी करके संसार-व्यवहार चलाओ उसकी ना नहीं है लेकिन पति को विकारों में गिराना या पत्नी के जीवन को विकारों में खत्म करना यह एक-दूसरे के मित्र के रूप में एक-दूसरे के शत्रु का कार्य है । संयम से संतति को जन्म दिया यह अलग बात है किंतु विषय-विकारों में फँस मरने के लिए थोड़े ही शादी की जाती है ।*

*बुद्धिमान नारी वही है जो अपने पति को ब्रह्मचर्य-पालन में मदद करे और बुद्धिमान पति वही है जो विषय-विकारों से अपनी पत्नी का मन हटाकर निर्विकारी नारायण के ध्यान में लगाये । इस रूप में पति-पत्नी दोनों सही अर्थों में एक-दूसरे के पोषक होते हैं, सहयोगी होते हैं । फिर उनके घर में जो बालक जन्म लेते हैं वे भी ध्रुव जैसे, गौरांग जैसे, रमण महर्षि जैसे, रामकृष्ण जैसे, विवेकानंद जैसे बन सकते हैं ।*

🌹 *ऋषि प्रसाद : जुलाई 1998 से*

14 hours ago | [YT] | 774

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🌺 *ॐ आज की टिप्स ॐ*🌺 ⤵️
https://youtu.be/1THpU3WBM50?si=g_E_F...

🌷 *आधी रात को नींद खुल जाती है तो* 🌷

🙄 *कभी नींद १२ से २ के बीच खुल जाती है तो पित्त की प्रधानता है | उस समय मिश्री मिश्रित ठंडा पानी.... न हो थोडा गुनगुना पानी पी लें... पित्त का शमन होगा ....नींद अच्छी आयेगी |*

🙄 *लेकिन २ से ६ बजे तक अनिद्रा और दुःख होता तो वायु है | तो मिश्री और जीरा ....कूट के रख दे ,सेक के | जीरा और मिश्री मिलाके पीना चाहिये | लेकिन ठंडा पीने से जठराग्नि मंद होगी | रात को पानी नहीं पीना चाहिये, थोडा गुनगुना पानी पी लें |*

🙏🏻 *पूज्य बापूजी - Delhi 26th Jan'2013* 🌺



2️⃣ 🌷 *मुलतानी मिटटी* 🌷

🌞 *जिसको भी गरमी हो, पित्त है, आँखे जलती हों वह मुलतानी मिटटी लगाकर थोड़ी देर बैठे तो शरीर की गरमी निकल जाये |*

🙏🏻 *पूज्य बापूजी - आकोट 27th Feb' 2012* 🌺

1 day ago | [YT] | 892

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🌹 *गुरु अमरदासजी जयंती - 30 अप्रैल 2026*⤵️
https://youtu.be/QzGoX2fJ99w?si=FWgVo...

🌹 *गुरु की सेवा साधु जाने..*

🌹 *एक बार रात से ही जोरदार वर्षा हो रही थी । भीगते हुए ही भाई अमरदासजी अपने नियम के अनुसार व्यास नदी पर पहुँचे और गागर में जल भरकर वापस लौट पड़े । रास्ते में बहुत ज्यादा कीचड़ हो रहा था और फिसलन भी थी लेकिन भाई अमरदास का ध्यान उसकी ओर नहीं था । वे तो अपनी ही धुन में चले आ रहे थे । जिस समय वे गाँव में एक जुलाहे के घर के पास पहुँचे, उनका पैर फिसल गया और वे धड़ाम-से कीचड़ में गिरे । लेकिन उन्होंने गागर का एक बूँद पानी भी नहीं छलकने दिया । गागर को उन्होंने अपने हाथों में सँभाले रखा । वे धीरे-से उठने लगे तभी उन्हें जुलाहे के घर से आती आवाज सुनायी दी । जुलाहा अपनी पत्नी से पूछ रहा था : ‘‘जरा देखो तो बाहर कौन गिरा है ?’’*

*‘‘इतने मुँह अँधेरे और कौन होगा ? वही अमरू निथावा होगा । वही दूसरे के टुकड़ों पर अपना जीवन काट रहा है ।’’ जुलाहे की पत्नी भिन्नाती हुई-सी बोली ।*

🌹 *भाई अमरदास ने जुलाहे की पत्नी की बात अनसुनी कर दी और वे उठकर गुरु के घर की ओर चल दिये । गुरु अंगददेव ने उनके लाये हुए जल से स्नान किया और वस्त्र धारण करते हुए भाई अमरदास से पूछने लगे :*

*‘‘भाई अमरदास ! जब तुम जल भरकर व्यास नदी से लौट रहे थे, तब तुम्हारे साथ कोई हादसा हुआ था ?’’*

🌹 *‘‘नहीं गुरुजी ! कोई खास बात तो नहीं हुई ।’’ भाई अमरदास ने सहज भाव से उत्तर दिया : ‘‘रास्ते में कीचड़ बहुत था । मैं जुलाहे के घर के पास फिसलकर गिर पड़ा था, पर गागर का पानी मैंने जरा भी नहीं छलकने दिया ।’’*

*‘‘इसके अलावा और कोई बात ?’’*

🌹 *‘‘नहीं गुरुजी ! और तो कोई बात नहीं हुई, केवल जुलाहे की पत्नी अपने पति से कह रही थी कि बाहर गिरनेवाला अमरू होगा, जिसका इस संसार में कोई अपना नहीं है । वह बेसहारा है ।’’ भाई अमरदास ने गुरु अंगददेव की ओर देखा : ‘‘अब आप ही बताइये गुरुजी ! मैं बेसहारा कैसे हूँ ? आपका सहारा मुझे है । आप मेरे स्वामी हैं और मैं आपका सेवक हूँ । फिर मैं बेसहारा क्योंकर हुआ ?’’*

🌹 *भाई अमरदास की तर्कपूर्ण और सहज उक्ति सुनकर गुरु अंगददेव मुस्कराये और बोले : ‘‘नहीं भाई अमरदास ! तुम बेसहारा नहीं हो । तुम तो बेसहारा लोगों के भी सहारा हो ।’’*

*तू निथानियां दा थान निमानियां दा मान*

*निगतियां दी गति निपतियां दा पति*

*निधियों दा पीर निआसरियां दा आसरा*

*तू सब दा स्वामी ।*

🌹 *अर्थात् तू तो उनका भी स्थान है जिनका कोई स्थान नहीं है । तू उन सभी गिरे हुए दीन-हीन लोगों का मान है । जिनके जीवन में कहीं भी गति नहीं है और असहाय होकर जड़ बनकर रह गये हैं, तू उनकी गति है । तू उनकी इज्जत है जिन्हें लोगों ने बेइज्जत किया है । तू उन सभी निधियों अर्थात् उन सभी ऋद्धि-सिद्धियों तथा धन-वैभव का पीर है, रक्षक है, ज्ञाता है । तू उन सभी लोगों का सहारा है जो असहाय और बेसहारा हैं । फिर तू बेसहारा कैसे हो सकता है ?*

🌹 *गुरु अंगददेवजी के स्नेहभरे वचनों को सुनकर भाई अमरदासजी का हृदय गद्गद हो उठा । वे अपने गुरु के चरणों में गिर पड़े । गुरु अंगददेवजी का हृदय अपने इस सत्शिष्य के लिए उमड़ पड़ा ।*

*तभी तो कहा है :*

*गुरुकृपा हि केवलं शिष्यस्य परं मंगलम् ।*

🌹 *कितना सुंदर कहा गया है :*

*गुरु की सेवा साधु जाने, गुरु सेवा क्या मूढ पिछाने ।*

*गुरु सेवा सबहुन पर भारी, समझ करो सोई नर-नारी ।।*

🌷 *लोक कल्याण सेतु - मई 2005* 🌷

1 day ago | [YT] | 337

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https://youtu.be/1THpU3WBM50?si=g_E_F...
📿 *अभी यह जानकारी साधकों के लिए क्यों है इतनी महत्वपूर्ण* ⤴️

1 day ago | [YT] | 258

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https://youtu.be/1THpU3WBM50?si=g_E_F...
📿 *अभी यह जानकारी साधकों के लिए क्यों है इतनी महत्वपूर्ण* ⤴️

1 day ago | [YT] | 12