"नमो संस्कृताय" संस्कृत भाषा को स्वीकार करने और सम्मान देने का एक सम्मानजनक तरीका है।"नमो संस्कृताय" का अर्थ है " संस्कृत को नमस्कार ।" यह एक सामान्य वाक्यांश है जिसका प्रयोग संस्कृत भाषा के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए किया जाता है, जो भारतीय संस्कृति में, विशेष रूप से धार्मिक और दार्शनिक संदर्भों में, अपने समृद्ध इतिहास और महत्व के कारण पूजनीय भाषा है।
शब्द "नमो" (नमः) का अर्थ है "झुकना", "अभिवादन" या "सम्मान"। संस्कृत (संस्कृत) भारत की एक शास्त्रीय इंडो-यूरोपीय भाषा है, जिसे कई अन्य भारतीय भाषाओं की मातृभाषा माना जाता है।
Mr. Dinesh Kumar Pandey
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सहित सहाय सभीत अति मानि हारि मन मैन।
गहेसि जाइ मुनि चरन तब कहि सुठि आरत बैन॥१२६॥
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भावार्थ : तब अपने सहायकों समेत कामदेव ने बहुत डरकर और अपने मन में हार मानकर बहुत ही आर्त (दीन) वचन कहते हुए मुनि के चरणों को जा पकड़ा॥१२६॥
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सीताराम कृपा हमारा दिन शुभ हो
🕉️🙏जय सीताराम 🙏🕉️
9 months ago | [YT] | 2
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
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सूख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।
छीनि लेइ जनि जान जड़ तिमि सुरपतिहि न लाज॥१२५॥
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भावार्थ : जैसे मूर्ख कुत्ता सिंह को देखकर सूखी हड्डी लेकर भागे और वह मूर्ख यह समझे कि कहीं उस हड्डी को सिंह छीन न ले, वैसे ही इन्द्र को (नारदजी मेरा राज्य छीन लेंगे, ऐसा सोचते) लाज नहीं आई॥१२५॥
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सीताराम कृपा हमारा दिन शुभ हो
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9 months ago | [YT] | 2
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
10 months ago | [YT] | 6
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
🌞 कहानी — एक दिन का जादू
एक बार एक छोटे से गाँव में एक बालक अर्जुन रहता था।
वह हमेशा कहता — “मैं कल पढ़ूँगा, कल से मेहनत करूँगा।”
लेकिन वह कल कभी नहीं आया।
हर दिन वही बात — “कल से शुरू करूँगा।”
एक दिन उसके गुरुजी ने कहा —
“अर्जुन, यदि तुम सच में सफल होना चाहते हो, तो आज को पकड़ो,
क्योंकि ‘आज’ ही तुम्हारा असली धन है।”
गुरुजी ने उसे एक थैली दी और बोले —
“इसमें तुम्हारे जीवन का सबसे अनमोल खजाना है,
पर यह केवल आज के दिन ही काम आएगा।”
अर्जुन ने थैली खोली — उसमें कुछ नहीं था!
वह बोला — “गुरुजी, इसमें तो कुछ भी नहीं!”
गुरुजी मुस्कुराए —
“बिलकुल सही, यदि तुम आज को खाली छोड़ दोगे,
तो जीवन की थैली भी खाली ही रह जाएगी।”
उस दिन से अर्जुन ने ठान लिया —
अब “कल” नहीं, केवल “आज”!
और धीरे-धीरे वही बालक अपने गाँव का सबसे विद्वान बना।
🌻 संदेश (Moral):
👉 जो आज को महत्व देता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है।
👉 आज का दिन ही हमारे भविष्य की नींव है।
10 months ago | [YT] | 3
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
"रघुवंश" (Raghuvaṁśa) महाकाव्य के रचयिता हैं-
1 year ago | [YT] | 9
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
1-"रघुवंशम्" (Raghuvaṁśam) संस्कृत का एक महान महाकाव्य है, जिसे रचा था - ?
1 year ago | [YT] | 4
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
श्रीमद्भगवद्गीता का पहला श्लोक है ?
1 year ago | [YT] | 4
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
How many chapters are in Geeta ?
1 year ago | [YT] | 5
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
भगवद् गीता के अध्याय 4, जिसका शीर्षक है-?
1 year ago | [YT] | 3
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Mr. Dinesh Kumar Pandey
गीता के 18 अध्याय में कितने श्लोक हैं ?
1 year ago | [YT] | 4
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