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: ﻧَﺼْﺮٌ ﻣِّﻦ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﻭَﻓَﺘْﺢٌ ﻗَﺮِﻳﺐٌ.

أَفَحَسِبْتُمْ أَنَّمَا خَلَقْنَـٰكُمْ عَبَثًۭا وَأَنَّكُمْ إِلَيْنَا تُرْجَعُونَ
فَتَعَـٰلَى ٱللَّهُ ٱلْمَلِكُ ٱلْحَقُّ ۖ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلْعَرْشِ ٱلْكَرِيمِ
وَمَن يَدْعُ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ لَا بُرْهَـٰنَ لَهُۥ بِهِۦ فَإِنَّمَا حِسَابُهُۥ عِندَ رَبِّهِۦٓ ۚ إِنَّهُۥ لَا يُفْلِحُ ٱلْكَـٰفِرُونَ
وَقُل رَّبِّ ٱغْفِرْ وَٱرْحَمْ وَأَنتَ خَيْرُ ٱلرَّٰحِمِينَ


Dr.Nosheen Ali

*एसी से निकलकर तुरंत धूप में न जायें !*
देश के कई इलाक़ों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बड़ गया है।ऐसे एसी से निकलकर तुरंत लू में जाना जानलेवा भी साबित हो सकता है। लिहाजा,लोग सतर्क रहें और अधिक देर तक धूप में रहने से बचें।
सामान्यतया हमारे शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहता है।मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस के में मौजूद थर्मो रेगुलेटरी सेंटर शरीर का तापमान नियंत्रित करता है।
*लू में रहने से शरीर में पानी-नमक की हो जाती है कमी !*
वातावरण का तापमान शरीर के तापमान से अधिक होने पर शरीर से पसीना निकलता है,जो इससे शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। लेकिन अधिक देर तक लगातार लू में रहने के कारण लंबे समय तक पसीना अधिक निकलने से शरीर में नमक व पानी की कमी होने लगती है।इस वजह से शरीर का थर्मो रेगुलेटरी सेंटर शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाता।
*बेहोशी और तेज बुखार भी हो सकता है !* हीट स्ट्रोक होने पर बेहोशी, तेज बुखार, पसीना नहीं आने की समस्या होती है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा हो सकता है। क्योंकि यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के खराब होने का खतरा रहता है।
*एक दम से तापमान में आता है अंतर !*
एसी चलाने पर कमरे का तापमान 20-22 डिग्री सेल्सियस होता है।बाहर का तापमान 45 डिग्री से ज्यादा रह रहा है।ऐसे में कमरे व बाहर के तापमान में करीब 23 डिग्री सेल्सियस का अंतर होता है।ऐसी स्थिति में ठंड से अचानक बहुत गर्म स्थान पर जाने और देर तक धूप में रहने से हीट स्ट्रोक हो सकता है।
*लू लगने पर डिहाइड्रेशन होता है !*
डिहाइड्रेशन से खून गाढ़ा होने का खतरा रहता है।इससे मस्तिष्क की नसों में ब्लड थक्का होने से हेमोरेजिक स्ट्रोक का खतरा रहता है।
*बाहर जाने से पहले करें ये काम !*
इससे हाइपरटेंशन के मरीजों का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है।इसलिए बुजुर्ग, ब्लड प्रेशर के मरीजों को खतरा अधिक होता है।इसलिए बाहर जाने से पहले एसी को कुछ देर के लिए बंद कर देना चाहिए।कमरे का तापमान सामान्य होने के बाद बाहर निकलना चाहिए।
*हीट स्ट्रोक के लक्षण !*
पसीना नहीं आना।उल्टी,दस्त।हृदय गति बढ़ना।बेहोश होना।सिर में दर्द। तेज बुखार।मांसपेशियों में ऐंठन।
*बचाव के उपाय !*
धूप में अधिक देर तक न रहें।दिन में 11 बजे से दोपहर तीन बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें।बाहर निकलने पर छाता या गमछे से चेहरे को ढंक कर रखें। थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहना चाहिए।पानी के अलावा स्वस्थ लोग शिंकजी,लस्सी व छाछ का इस्तेमाल करना चाहिए।अल्कोहल का इस्तेमाल न करें,इससे डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है। सूती कपड़े का इस्तेमाल करें।

2 weeks ago | [YT] | 2

Dr.Nosheen Ali

*गर्मियों की बारिश ! अपनी सेहत के लिए सावधान रहें ‼️*
गर्मियों की बारिश में कुछ ऐसा होता है जो निस्संदेह पुरानी यादों को ताज़ा कर देता है। वे हमें बचपन के सरल समय की याद दिलाते हैं, इस पल का आनंद लेने के लिए हमारा मन बहुत मचलता है। सच में यह पल बेहद सुखद होता है। भीषण गर्मी में अचानक होने वाली बारिश तापमान में कमी तो लाती है, लेकिन यह संक्रमण (इन्फेक्शन), सर्दी-जुकाम, मच्छर जनित रोगों (डेंगू, मलेरिया) और पेट से संबंधित समस्याओं को बढ़ा सकती है। आद्रता (Humidity) और पसीने के कारण फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ता है तथा शरीर में दबे चर्मरोग उभर कर सामने आ जाते हैं। इसलिए ध्यान रखें की चर्म रोग को शरीर में दबाने की बजाय होमियोपैथी के लंबे इलाज से खत्म कर देना ही बेहतर है।
इस मौसम में बाहर का खाना खाने से बचें, गर्म खाना खाएं और हाइड्रेटेड रहने के लिए पानी/तरल पदार्थ पीते रहें।इस मौसम में संक्रमण और एलर्जी से बचाव बेहद जरूरी है। बारिश में भीगने के तुरंत बाद साफ पानी से नहाएं और सूखे कपड़े पहनें।इम्यूनिटी बढ़ाएं। गर्म पेय, अदरक वाली चाय और पौष्टिक भोजन का सेवन करना ठीक रहेगा।
*बारिश में मन ख़ुश क्यों हो जाता है ?* इसका मुख्य कारण यह है कि बारिश से नकारात्मक वायु आयन निकलते हैं – ऑक्सीजन के अणु जिनमें एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन होता है। ये आयन बारिश की बूंदों के टकराने या किसी सतह से टकराकर अलग होने पर बनते हैं। अधिक मात्रा में होने पर ये मस्तिष्क में सेरोटोनिन और अल्फा तरंगों को बढ़ाते हैं, जिससे मन प्रसन्न और तनावमुक्त हो जाता है।
*एलर्जी* - बारिश से हवा में फैले प्रदूषण और धूल से सांस संबंधी परेशानी हो सकती है, सतर्क रहें।ताजा भोजन कर ईद न। गर्मी और बारिश के मौसम में उच्च तापमान और नमी के कारण ये बैक्टीरिया, जैसे कि साल्मोनेला (Salmonella), ई. कोली (E. coli), और लिस्टेरिया (Listeria), तेजी से पनपते हैं। इसलिए बाहर के कटे-फटे फल और स्ट्रीट फूड से बचें।
*पानी उबालकर पिएं* प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों (टाइफाइड, हैजा) से बचने के लिए पानी को उबालकर या छानकर पिएं।
*मच्छरों से बचाव* कूलर, गमलों या छतों पर पानी न जमा होने दें क्योंकि ये डेंगू के मच्छर पनपने की जगह हैं। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
*गर्मी का असर (Heat Stress)* बारिश के बावजूद शरीर में पानी की कमी (Dehydration) हो सकती है, इसलिए नियमित रूप से पानी, नारियल पानी या छाछ पीते रहें।

3 weeks ago | [YT] | 3

Dr.Nosheen Ali

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1 month ago | [YT] | 5

Dr.Nosheen Ali

Aap sab exercise kaise karte hain?

2 months ago | [YT] | 3

Dr.Nosheen Ali

"Kya aapne bhi bachpan mein mitti khayi hai? 😂"

2 months ago | [YT] | 2