Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास


चैंनल पर जाकर वीडियो को एक बार जरूर देखें
लाइक करें, कमेंट करें, शेयर करें

राजस्थान के स्वर्णिम इतिहास कला, संस्कृति, सभ्यता, महल मंदिर, व परिवेश को दिखाया गया है_

अगर आप इस चैंनल पर नए हैं तो चैंनल को सब्सक्राइब जरूर करें

chat.whatsapp.com/GaGPon0vddTC4TXwDLL0YG

youtu.be/foBBsSTmtic

youtu.be/-kXiCeynFTM

youtu.be/7R3yXatjxFQ

youtu.be/uLnsfmu4vcE

youtu.be/0wDmapnEqbQ

youtu.be/4B4w_-M6uk4

youtu.be/Jw7bPMGHYn4

youtu.be/7PChqkaTozo

youtu.be/PkuyTkdv_7s

youtu.be/piEgqs0uhQ0


youtube.com/@Youtube.comRajasthanhistory?si=qoR1I8…


Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

भानगढ़ का बाज़ार जिनकी छत टूटी हुई है क़िले तक जाने के लिए पांच रास्ते हुआ करते थे, जिनमें से एक रास्ता मुख्य बाज़ार से होकर गुज़रता था, आज भी ये खण्डर बाज़ार इस तरह दिखता है।

2 hours ago | [YT] | 0

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

"वचन के पक्के - पाबूजी राठौड़! 🚩
14वीं सदी में, अपनी शादी के फेरे आधे छोड़कर, 'देवल चारणी' की गायों को बचाने के लिए युद्ध में कूद पड़े थे।
राजस्थान में सबसे पहले 'ऊंट' लाने का श्रेय पाबूजी को ही है। आज भी ऊंट बीमार होने पर इनकी ही मनौती मांगी जाती है।

2 hours ago | [YT] | 5

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

जब मुगलों की तलवारें भंवरों (मधुमक्खियों) से हार गईं!
सीकर की अरावली पहाड़ियों में गूंजती है 'जीण माता' की यह गाथा। जब औरंगजेब ने अहंकार में चूर होकर मंदिर तोड़ने की ठानी, तो माँ ने अपनी 'भंवरा वाली' शक्ति का परिचय दिया।

विशाल मुगल सेना पर जब लाखों भंवरे टूट पड़े, तो बादशाह को भी घुटने टेकने पड़े। यही वह चमत्कार था जिसने दिल्ली दरबार को भी तेल भेजने पर मजबूर कर दिया।

सच्ची शक्ति आस्था में है, अहंकार में नहीं!
जय जीण माता! जय भंवरों वाली माता!

7 hours ago | [YT] | 6

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

आज ॐ बन्ना सा के जन्मदिन पर सभी कमेंट में "जय श्री ॐ बन्ना" जरूर लिखे 🙏

23 hours ago | [YT] | 20

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

🏛️ 84 खम्भों की छतरी – अमर स्मृति और अनोखी भक्ति

राजस्थान की धरती केवल वीरता ही नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग और सम्मान की अनोखी मिसालों के लिए भी जानी जाती है। ऐसी ही एक अद्भुत विरासत है 84 खम्भों की छतरी, जो बूंदी में स्थित है।

इस भव्य छतरी का निर्माण राव राजा अनिरुद्ध सिंह हाड़ा द्वारा करवाया गया था। यह केवल एक स्थापत्य नहीं, बल्कि भावनाओं और कृतज्ञता का प्रतीक है।

❤️ समर्पण की अनोखी कहानी

कहा जाता है कि राव राजा अनिरुद्ध सिंह हाड़ा ने इस छतरी का निर्माण अपने धाय भाई (दूध भाई) देवा जी और धाय माता की स्मृति में करवाया था।
राजपूताना परंपरा में धाय माता और धाय भाई का स्थान अत्यंत ऊँचा होता था—वे केवल सेवक नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा माने जाते थे।

इसी गहरे सम्मान और प्रेम को अमर बनाने के लिए यह अद्भुत छतरी बनवाई गई।

🏗️ स्थापत्य की विशेषता

यह छतरी अपने आप में वास्तुकला का एक अनोखा नमूना है—

* इसमें 84 खूबसूरत नक्काशीदार खम्भे हैं
* हर खम्भे पर बारीक और अलग-अलग कलाकारी
* ऊपर भव्य गुंबद और चारों ओर छतरियां
* राजस्थानी शैली की उत्कृष्ट शिल्पकला

यह संरचना केवल पत्थरों का समूह नहीं, बल्कि कला और इतिहास का जीवंत संगम है।

🌟 इतिहास में खास महत्व

84 खम्भों की छतरी सिर्फ एक स्मारक नहीं है—
यह उस युग की सोच को दर्शाती है, जहाँ रिश्तों और निष्ठा को सर्वोच्च स्थान दिया जाता था।

यह हमें सिखाती है कि
👉 सम्मान केवल राजाओं और वीरों के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी होना चाहिए जिन्होंने जीवन में साथ निभाया।

🔥 "जहाँ रिश्ते खून से नहीं, दिल से निभाए जाते थे — वहीं बनी है 84 खम्भों की ये अमर छतरी!"

#84KhambonKiChhatri #Bundi #RajasthanHeritage #RajasthanTourism #IncredibleIndia
#HiddenRajasthan #IndianHistory #Rajputana #HeritageIndia #DesertDiariesRajasthan
#ArchitectureLovers #HistoricIndia #TravelRajasthan #BundiDiaries #RoyalRajasthan
#IndianCulture #ExploreRajasthan #HistoryLovers #ViralReels #InstaHistory

23 hours ago | [YT] | 14

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

इतिहास के पन्नों में दर्ज मेवाड़ का एक ऐसा गौरवशाली पल, जिसे हर भारतीय को जानना चाहिए! 👇

⚔️ साजिश (1456 ई.):
मालवा के सुल्तान महमूद और गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन ने मेवाड़ के खिलाफ एक गहरी साजिश रची और 'चंपानेर की संधि' (Treaty of Champaner) की। इन दोनों सुल्तानों का एकमात्र मकसद था—अपनी सेनाएं मिलाना, मेवाड़ पर एक साथ हमला करना और अजेय महाराणा कुंभा को किसी भी तरह हराना।

🔥 करारा जवाब (1457 ई.):
मंसूबे तो बहुत बड़े थे, लेकिन उनका सामना मेवाड़ के शेर से था! जब 1457 में बदनोर का युद्ध हुआ, तो महाराणा कुंभा ने अपने अदम्य साहस और युद्ध-कौशल से इन दोनों बादशाहों की विशाल संयुक्त सेना को बुरी तरह धूल चटा दी। दोनों सुल्तानों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा।

🦁 "एक शेर, सौ लंगूर!" मेवाड़ के इस शौर्य और पराक्रम को कोटि-कोटि नमन! 🙏 हमारे इतिहास की इस गौरवशाली कहानी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ ज़रूर शेयर करें।

#MaharanaKumbha #Rajputana

1 day ago | [YT] | 6

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

इतिहास के पन्नों में गूंजती वीरता की कहानियों के बीच, एक कहानी ऐसी भी है जो निस्वार्थ त्याग और राष्ट्रभक्ति की सर्वोच्च मिसाल है। यह कहानी है दानवीर भामाशाह की।

⚔️ हल्दीघाटी के युद्ध के बाद जब मेवाड़ भीषण संघर्ष से गुजर रहा था, तब राजकोष (खजाना) पूरी तरह खाली हो चुका था। मुगलों से लड़ने के लिए महाराणा प्रताप के पास न तो पर्याप्त संसाधन थे और न ही सेना को वेतन देने के लिए धन।

😔 ऐसी विकट परिस्थिति में, मेवाड़ के प्रधानमंत्री भामाशाह आगे आए। उन्होंने एक क्षण भी सोचे बिना, अपने पूर्वजों की कमाई हुई पूरी निजी संपत्ति महाराणा प्रताप के चरणों में सप्रेम समर्पित कर दी।

💰 क्या आप जानते हैं यह धन कितना था?
इतिहासकारों के अनुसार, यह संपत्ति इतनी विशाल थी कि इससे 25,000 सैनिकों का खर्च पूरे 12 वर्षों तक आसानी से चलाया जा सकता था।

✨ भामाशाह के इसी अतुलनीय सहयोग ने महाराणा प्रताप को पुनः सेना संगठित करने और मेवाड़ की स्वतंत्रता का संघर्ष जारी रखने की शक्ति दी। उनके इस महादान के कारण ही उन्हें इतिहास में 'मेवाड़ का उद्धारक' और 'दानवीर' जैसी उपाधियों से विभूषित किया गया।

कोटि-कोटि नमन ऐसे राष्ट्रभक्त दानवीर को! 🌺

1 day ago | [YT] | 35

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

बॉलीवुड और गलत इतिहास की किताबों द्वारा फैलाया गया "सबसे बड़ा झूठ"
झूठ: "रावल रतन सिंह ने अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मावती का चेहरा कांच में दिखाया था।"
सत्य: यह 100% मनगढ़ंत कहानी है! इस किस्से को इतिहास के 200 साल बाद 'मलिक मोहम्मद जायसी' नाम के एक कवि ने अपनी कविता 'पद्मावत' में लिखा था।

इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
असली राजपूती इतिहास तो यह है कि राजपूत अपने प्राण दे देते हैं, लेकिन दुश्मनों की परछाई भी अपनी रानियों पर नहीं पड़ने देते।

⚔️ रावल रतन सिंह ने खिलजी को युद्ध के मैदान में भयंकर टक्कर दी थी।

🔥 और जब बात स्वाभिमान पर आई, तो महारानी पद्मावती ने 16,000 क्षत्राणियों के साथ धधकती आग में "जौहर" कर इतिहास रच दिया।

कांच वाली मनगढ़ंत बात हमारे स्वाभिमान पर वामपंथियों का एक कलंक है! हमें अपने असली और गौरवशाली इतिहास को जानना चाहिए।

इस सत्य को उजागर करने के लिए इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। जय राजपूताना! 🚩

#स्वाभिमान #क्षत्रिय #Rajputana #HistoryOfIndia #Padmavati #RaniPadmini #Jauhar

2 days ago | [YT] | 5

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

वीरांगना रानी दुर्गावती (चंदेल राजपूत): जिसने मुगलों की गुलामी से बेहतर अपनी छाती में कटार उतारना समझा!

गोंडवाना की शासिका रानी दुर्गावती (चंदेल वंश) राजपूतानी शौर्य की साक्षात देवी थीं। उन्होंने मालवा के बाज बहादुर को दो बार युद्ध में बुरी तरह हराया था। जब अकबर ने आसफ खान के नेतृत्व में एक विशाल सेना उनके राज्य को लूटने भेजी, तो इस शेरनी ने हाथी पर बैठकर मुगलों पर भयंकर धावा बोला।

जब उन्हें तीर लग गए और लगा कि वे मुगलों के हाथ पड़ सकती हैं, तो उन्होंने मुगलों की कैद में जाने के बजाय अपनी ही कटार अपनी छाती में उतारकर सर्वोच्च बलिदान दे दिया!

#RaniDurgavati #ChandelRajput #KshatraniValour #NariShakti #DefeatingMughals

2 days ago | [YT] | 12

Rajasthan का स्वर्णिम इतिहास

राव चूंडा राठौड़ (मारवाड़): घास की गाड़ियों में छिपी मुगलों और तुर्कों की मौत!
इतिहास में 'ट्रोजन हॉर्स' की बहुत चर्चा होती है, लेकिन 14वीं सदी में मारवाड़ के राव चूंडा ने उससे भी बड़ा राजपूती दिमाग लगाया था! जब मंडोर पर तुर्कों और इंदा परिहारों के दुश्मनों का कब्जा था, तो राव चूंडा ने अपने शूरवीरों को घास और चारे से भरी बैलगाड़ियों में छिपाकर किले के अंदर भेज दिया। जैसे ही गाड़ियां अंदर पहुंचीं, घास से राजपूती तलवारें निकलीं और चंद घंटों में किले के अंदर दुश्मनों की लाशें बिछाकर मंडोर पर भगवा लहरा दिया गया!

2 days ago | [YT] | 14