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-------------------- जय सरस्वती मां , जय हिन्द, वन्दे मातरम् ----------------------
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दुःख है , दुःख का कारण है , दुःख का निवारण नहीं है। माफ़ी मित्रों पर कटऑफ देख के आज लोगों के ये ही रिएक्शंस है ...!
9 hours ago | [YT] | 160
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1 day ago | [YT] | 1,385
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....मूल किताबें..... आप असिस्टेंट प्रोफेसर RAS और स्कूल व्याख्याता तक की परीक्षाओं की तैयारी करते हैं तो निश्चित रूप से कुछ किताबें ऑथेंटिक स्त्रोत आपको पढ़ना चाहिए ताकि आप विषय की समझ के साथ वर्तमान पैटर्न को समझ सको.... सामान्य परीक्षा की तैयारी करते हो तो आपको सिर्फ राजस्थान GK के लिए 10 किताबें पढ़नी पड़ेगी तो वह संभव नहीं है मूल किताबों का जो हा हु बाजार में हो रखा है बचे.....बाकी थारी मर्जी कुछ भी पढ़ो कौन रोकने वाला है... 10 में से दो कठिन प्रश्न बनते हैं तो 8 सरल प्रश्न भी बनते हैं तो दो के लिए 10 किताबें और 8 के लिए एक किताब यह आपको डिसीजन लेना है... जैसे आगामी सेकंड ग्रेड के लिए अगर मूल किताबें पढ़ने बैठ जाओ तो सामाजिक विज्ञान के लिए लगभग 40 किताबें होगी... कैसे पढ़ोगे कब पढ़ोगे कब रिवीजन करोगे सब सोचने वाला विषय....तो जागरूक बने ....जैसा स्तर की परीक्षा वैसी ही पाठ्य सामग्री....
2 days ago | [YT] | 278
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2 weeks ago (edited) | [YT] | 2,456
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RPSC अध्यक्ष जी द्वारा दिए गए एक बयान जो अख़बारों की सुर्खियों में है...लाखों विद्यार्थी वही बयान देखकर घबरा रहे हैं लेकिन हकीकत इतनी सरल नहीं है सच यह है कि
जो विद्यार्थी वन वीक सीरीज़, शॉर्टकट नोट्स और रेडीमेड मैटेरियल का आदी हो चुका है,
उनके लिए मोटी मोटी किताबें पढ़ना तो दूर खरीदना भी Acha नहीं लगता .....समस्या किताबों की संख्या नहीं है,
समस्या है धैर्य, निरंतरता और आत्म-अध्ययन की कमी ....
आज का विद्यार्थी सोचता है—
“बस कोई मैराथन क्लास में सब कुछ बता दे ,कोई ट्रिक बता दे,
और परीक्षा निकल जाए।”
लेकिन प्रतियोगी परीक्षाएँ
मैराथन/ ट्रिक से नहीं,
मनन से निकलती हैं....
सेल्फ स्टडी का आज तक कोई विकल्प नहीं बना है
और न ही कभी बनेगा....
क्लास रास्ता दिखा सकती है,
लेकिन चलना तो खुद को ही पड़ता है... !
जो विद्यार्थी केवल मैराथन क्लास के पीछे भाग रहा है,
वह असल में अपने आत्मविश्वास से भाग रहा है और जो विद्यार्थी किताब से डरता है,
वह परीक्षा में आने वाले प्रश्न से कैसे नहीं डरेगा?
इसलिए किताबों की लिस्ट से घबराइए मत,
स्टेटस और पोस्ट देखकर विचलित मत होइए।
एक सीमित, सही सामग्री चुनिए,
उसे बार-बार पढ़िए,
खुद से प्रश्न पूछिए,
और खुद ही उत्तर खोजिए।
क्योंकि अंत में
न स्टेटस काम आता है,
न मैराथन की भीड़—
काम आती है सिर्फ़
ईमानदार सेल्फ स्टडी.....
2 weeks ago | [YT] | 2,784
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उम्मीद की दस्तक…
अब रुकना नहीं है
सिस्टम के गलियारों से एक आवाज़ आ रही है—
VDO, LDC और अन्य पदों की नई भर्तियों के संकेत....!
किसी के लिए ये बस एक ख़बर होगी,
लेकिन किसी के लिए यह
बरसों की तपस्या का पहला इशारा है....
ये संकेत उन आँखों के लिए हैं
जो रात देर तक किताबों में भीगती रहीं,
उन हाथों के लिए हैं
जो फार्म भरते-भरते काँप गए,
और उस मन के लिए हैं
जो हर असफलता के बाद भी बोला—
“अभी खत्म नहीं हुआ।”
याद रखिए—
सरकारी नौकरी अचानक नहीं मिलती,
उसके पीछे
धैर्य, अपमान, इंतज़ार और अनुशासन
सब छिपे होते हैं.....
आज जो भर्ती की हल्की-सी आहट सुनाई दे रही है,
वो उन सब क़दमों की गूंज है
जो आपने चुपचाप उठाए थे....
अब समय है
ख़बर पढ़कर खुश होकर बैठ जाने का नहीं,
बल्कि
ख़बर को हौसले में बदलने का.....
आज का एक घंटा,
कल की नियुक्ति बन सकता है।
आज की एक revision,
कल की मेरिट लिस्ट में आपका नाम लिख सकती है।
जो लोग कहते हैं—
“अब कुछ नहीं होगा”
उन्हें इतिहास कभी याद नहीं रखता.....
इतिहास उन्हें याद रखता है
जो कहते हैं—
“संकेत मिल गए हैं, अब पीछे नहीं हटूँगा।”
अगर आप VDO, LDC या किसी भी पद की तैयारी कर रहे हैं,
तो समझ लीजिए—
ये सिर्फ भर्ती नहीं,
आपके संघर्ष को सम्मान मिलने की प्रक्रिया है.....
थोड़ा और रुक जाइए,
थोड़ा और पढ़ लीजिए,
क्योंकि जब मौका आता है,
तैयार लोग ही चुने जाते हैं.....
संकेत मिल चुके हैं…
अब मेहनत को और धार देने का समय है। 💪📚
@SawaitailorkSawau
3 weeks ago | [YT] | 1,206
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तनाव और सफलता का गहरा संबंध
आज हर व्यक्ति सफलता चाहता है,
लेकिन बहुत कम लोग उस रास्ते पर आने वाले तनाव के लिए तैयार होते हैं।
सच्चाई यह है कि
यदि आप तनाव नहीं संभाल सकते,
तो आप सफलता भी नहीं संभाल पाएँगे।
सफलता केवल नाम, पैसा या पद नहीं है।
उसके साथ अपेक्षाएँ आती हैं,
ज़िम्मेदारियाँ बढ़ती हैं,
और हर फैसले पर नज़र रखी जाती है।
ऐसे में जो व्यक्ति भीतर से मज़बूत नहीं होता,
वह सफलता के बोझ तले दबने लगता है।
तनाव से भागना समाधान नहीं है।
समाधान है—उसे समझना और नियंत्रित करना।
जो इंसान संघर्ष के समय खुद को संभाल लेता है,
वही ऊँचाई पर पहुँचकर भी संतुलन बनाए रख पाता है।
अक्सर देखा गया है कि
जो लोग छोटे-छोटे दबावों में टूट जाते हैं,
वे बड़ी उपलब्धियों को भी संभाल नहीं पाते।
इसके विपरीत,
जो कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखता है,
वही सफलता को सही दिशा देता है।
इसलिए सफलता से पहले
अपने मन को मज़बूत बनाइए।
तनाव को अपना शत्रु नहीं,
अपना शिक्षक बनाइए।
क्योंकि जब आप तनाव को संभालना सीख जाते हैं,
तब सफलता अपने आप
आपके हाथों में टिक जाती है.....
3 weeks ago | [YT] | 1,811
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बस इसी दिन का इंतज़ार है—
जब मेहनत शोर नहीं करेगी,
परिणाम खुद बोलेंगे।
जब तानों की जगह ताली होगी,
जब “हो जाएगा?” की जगह
“कर दिखाया!” कहा जाएगा।
वो दिन,
जब संघर्ष कहानी बनेगा
और सब्र पहचान।
बस… उसी दिन का इंतज़ार है......
3 weeks ago | [YT] | 1,485
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हम अक्सर जीवन की शुरुआत ही नहीं कर पाते।
क्योंकि हम सोचते बहुत हैं, करते बहुत कम हैं।
कभी दस लोगों से राय लेते हैं,
कभी घंटों सोशल मीडिया पर दूसरों की ज़िंदगी देखते रहते हैं,
कभी एक के बाद एक मोटिवेशनल वीडियो—
और दिन खत्म हो जाता है, पर ख़ुद का एक भी क़दम आगे नहीं बढ़ता।
सच यह है कि
राय उलझाती है, तुलना थकाती है,
और ज़्यादा मोटिवेशन निर्भर बना देता है।
हमें लगता है—“अभी पूरी तैयारी नहीं हुई”,
“अभी सही समय नहीं आया”,
“एक वीडियो और देख लूँ, फिर शुरू करूँगा।”
लेकिन ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच यही है—
कोई सही समय नहीं आता,
समय को सही बनाना पड़ता है।
जो लोग आगे बढ़े, उन्होंने सब कुछ जानकर शुरुआत नहीं की,
उन्होंने शुरुआत करके सब कुछ सीखा।
उनके पास भी डर था,
भ्रम था,
असफलता का डर था—
फिर भी उन्होंने पहला क़दम उठाया।
याद रखिए—
आपको बदलने वाला वीडियो नहीं,
आपको बदलने वाला निर्णय होता है।
और आपकी किस्मत बदलने वाला निर्णय
तभी असर करता है
जब उसके साथ एक्शन जुड़ा हो।
आज बस इतना कीजिए—
कम सोचिए,
कम देखिए,
और एक छोटा सा काम शुरू कर दीजिए।
क्योंकि
असली गेम चेंजर मोटिवेशन नहीं,
निरंतर किया गया एक्शन है.....
3 weeks ago | [YT] | 2,181
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https://youtu.be/fhPCRLiZWi4
4 weeks ago | [YT] | 24
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