श्री सतगुरूदेव महाराज जी की असीम कृपा से ही यह अनुभव हुआ कि केवल जीवन व्यतीत करना अथवा जीवन के लक्ष्य को पाना - इन दोनों उक्तियों में महान अंतर है।
अपने जीवन को सारमय बनाना ही हमारे जीवन का वास्तविक लक्ष्य है
गुरु चरणन में वन्दना, प्रथम करूं सिर नाय।।
बिगड़ी जनम अनेक की, गुरु बिन कौन बनाय।।
Amritvela Samagam
DHAN GURU NANAK
3 months ago | [YT] | 36
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3 months ago | [YT] | 69
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3 months ago | [YT] | 52
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DHAN GURU NANAK
3 months ago | [YT] | 48
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