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लव कुश रामलीला कमेटी
लाल किला मैदान, दिल्ली
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया गणेश पूजन, रसराज जी महाराज के भजनों से राममय हुआ वातावरण|
दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026
लव कुश रामलीला कमेटी, लाल किला मैदान, दिल्ली में रविवार को रामलीला के भव्य शुभारंभ के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने काशी, मथुरा और दिल्ली से पधारे विद्वान पंडितों द्वारा पूर्ण विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणेश पूजन किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय सांसद श्री प्रवीण खंडेलवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कमेटी के अध्यक्ष श्री अर्जुन कुमार ने बताया कि गणेश पूजन के पश्चात रामलीला के प्रथम दिन भगवान शिव-पार्वती प्रसंग, नारद मोह, विश्वमोहिनी स्वयंवर, रावण-कुंभकर्ण की तपस्या तथा रावण-वेदवती संवाद जैसे प्रमुख प्रसंगों का भव्य एवं आकर्षक मंचन किया गया।चार सौ से ज्यादा फिल्मों में अपनी अभिनय कला का लोहा मनवा चुके विख्यात फिल्म अभिनेता पेंटल ने नारद की भूमिका में रामभक्तों की खूब वाहवाही बटोरी। इन प्रसंगों ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति, भक्ति और धर्म की गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का संदेश दिया।
रामलीला मंचन के पश्चात सुप्रसिद्ध भजन गायक एवं हनुमंत कृपा पात्र रसराज जी महाराज की भजन संध्या का आयोजन किया गया। महाराज जी ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण आवाज में प्रभु श्रीराम के भजनों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुति दी कि पूरा रामलीला परिसर भक्तिरस में सराबोर हो उठा और वातावरण पूरी तरह राममय हो गया। उपस्थित रामभक्त भजनों की मधुर धुनों पर भावविभोर नजर आए।
श्री अर्जुन कुमार ने इस भव्य धार्मिक आयोजन में सपरिवार सम्मिलित होने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं रामभक्तों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें रामलीला के आगामी कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने का आमंत्रण दिया।
उन्होंने बताया कि रामलीला के दूसरे दिन, सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को पुत्रेष्टि यज्ञ, प्रभु श्रीराम का जन्म, नामकरण संस्कार, महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, ताड़का वध एवं सुबाहु वध सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का भव्य मंचन किया जाएगा।
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*प्रो रेसलिंग लीग की छठे सीजन के साथ धमाकेदार वापसी, लांच के मौके पर दिल्ली में एशियाई खेलों के पदक विजेताओं का सम्मान*
-9 से 26 जनवरी 2027 तक केडी जाधव कुश्ती एरिना में होंगे मुकाबले; छह फ्रेंचाइजी के 86 पहलवान दिखाएंगे दम खम
छह टीमें और 34 अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता होंगे लीग का हिस्सा
एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता सुजीत कलकल और अमन सहरावत समेत छह पहलवान सम्मानित
हर सीजन अलग फ्रेंचाइजी शहर में लीग आयोजित करने की योजना के तहत इस बार दिल्ली को मिली मेजबानी
*नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026:* प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) ने शुक्रवार को छठे सीजन के आयोजन की आधिकारिक घोषणा के साथ भारतीय खेल कैलेंडर में धमाकेदार वापसी की है। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के तत्वावधान में होने वाली यह लीग 9 से 26 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम स्थित केडी जाधव कुश्ती एरिना में आयोजित की जाएगी।
लीग के शुभारंभ समारोह में 2026 एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले भारतीय पहलवानों को सम्मानित किया गया। पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किग्रा स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाले सुजीत कलकल और पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाले अमन सहरावत को सम्मान मिला। इनके अलावा अंतिम पंघाल, नितेश सिवाच, दीपक पूनिया और सुनील कुमार को भी सम्मानित किया गया। छह पदक विजेताओं का यह सम्मान समारोह भारतीय कुश्ती की शानदार उपलब्धियों को समर्पित रहा।
पीडब्ल्यूएल के छठे सीजन की मेजबानी दिल्ली को देना लीग को हर साल अलग-अलग फ्रेंचाइजी शहर में आयोजित करने की योजना का हिस्सा है। दिल्ली में कुश्ती की समृद्ध परंपरा है और यहां इस खेल के बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं। ऐसे में राजधानी में लीग की वापसी से दर्शकों को विश्वस्तरीय मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा।
छठे सीजन में छह फ्रेंचाइजी खिताब के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी। इनमें टाइगर्स ऑफ मुंबई दंगल्स, हरियाणा थंडर्स, दिल्ली दंगल वॉरियर्स, महाराष्ट्र केसरी, पंजाब रॉयल्स और यूपी डोमिनेटर्स शामिल हैं।
इस बार लीग में पुरुष और महिला वर्ग के कुल 86 शीर्ष पहलवान हिस्सा लेंगे। इनमें 34 ओलंपियन तथा राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता शामिल होंगे। जापान की ओलंपिक चैंपियन युई सुसाकी के साथ भारत के कई प्रमुख पहलवान भी मैट पर अपना दमखम दिखाएंगे।
प्रतियोगिता नौ ओलंपिक भार वर्गों में होगी। पुरुषों के मुकाबले 57, 65, 74, 86 और 125 किग्रा वर्ग में, जबकि महिलाओं के मुकाबले 53, 57, 62 और 76 किग्रा वर्ग में आयोजित किए जाएंगे।
टेलीविजन और डिजिटल दर्शकों के लिए मुकाबलों का प्रारूप पहले की तरह दो-दो नहीं, बल्कि तीन-तीन मिनट के दो राउंड यानी 2×3 मिनट का होगा। लीग में ‘पावर मिनट’ का नियम भी जारी रहेगा। इसके तहत मुकाबले के अंतिम 60 सेकंड में हासिल किए गए अंक दोगुने माने जाएंगे। इससे मुकाबलों के आखिरी क्षणों में रोमांच और बढ़ने की उम्मीद है।
प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) के चेयरमैन दयान फारूकी ने कहा, “कुश्ती भारतीय खेल संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और हमारे पहलवानों ने लगातार अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाया है। प्रो रेसलिंग लीग का छठा सीजन इस समृद्ध विरासत का उत्सव होने के साथ-साथ खेल को नए वैश्विक मानकों तक ले जाने का प्रयास है। हमारा लक्ष्य हर सीजन लीग को अलग फ्रेंचाइजी शहर में आयोजित करना रहा है, ताकि देशभर के प्रशंसकों को विश्वस्तरीय कुश्ती देखने का अवसर मिले। हमें खुशी है कि दुनिया के कई बेहतरीन पहलवान दिल्ली में जुटेंगे। हमें उम्मीद है कि यह सीजन दर्शकों के लिए यादगार साबित होगा और भारत में कुश्ती की लोकप्रियता को और बढ़ाएगा।”
प्रो रेसलिंग लीग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अखिल गुप्ता ने कहा, “छठे सीजन के लिए हमारा उद्देश्य ऐसी उच्चस्तरीय लीग तैयार करना है, जिसमें प्रशंसकों की भागीदारी और उनके अनुभव को प्राथमिकता दी जाए। दिल्ली इसके लिए एक आदर्श स्थान है। यहां कुश्ती की समृद्ध विरासत है और इस शहर ने हमेशा इस खेल को अपनाया है। इसलिए छठे सीजन का दिल्ली में आयोजन हमारे लिए खास महत्व रखता है। आज का सम्मान समारोह उन खिलाड़ियों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है, जिनकी मेहनत भारतीय कुश्ती को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। जनवरी में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने और प्रशंसकों को यादगार मुकाबले देने का अवसर मिलेगा।”
ओलंपिक कांस्य पदक विजेता और एशियाई खेल 2026 के स्वर्ण पदक विजेता अमन सहरावत ने कहा, “ओलंपिक और एशियाई खेलों में पदक जीतना वर्षों के त्याग, अनुशासन और मेहनत का परिणाम है। दिल्ली में कुश्ती समुदाय और प्रशंसकों के बीच सम्मानित होना मेरे लिए बेहद खास है। ऐसे अवसर उस सफर की याद दिलाते हैं, जिससे हम गुजरे हैं और उन लोगों की भी, जिन्होंने हर कदम पर हमारा साथ दिया। प्रो रेसलिंग लीग की दिल्ली में वापसी भी उत्साहजनक है। मुझे उम्मीद है कि इससे कुश्ती को नए दर्शक मिलेंगे और युवा पहलवान इस खेल से प्रेरित होंगे।”
एशियाई खेल 2026 के स्वर्ण पदक विजेता सुजीत कलकल ने कहा, “प्रो रेसलिंग लीग ने मेरे कुश्ती करियर में अहम भूमिका निभाई है। इस लीग ने मुझे ऐसे अवसर दिए, जिनसे मैट पर और उसके बाहर भी मेरा विकास हुआ। दुनिया के बेहतरीन पहलवानों के साथ और उनके खिलाफ मुकाबला करने से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और बड़ी चुनौतियों का सामना करने का विश्वास मिला। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद सम्मानित होना मेरे लिए बेहद खास है। इससे मुझे अपने अब तक के सफर का एहसास होता है। पीडब्ल्यूएल मेरे सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है और मुझे खुशी है कि यह दिल्ली में लौट रही है। उम्मीद है कि लीग युवा भारतीय पहलवानों को बड़े सपने देखने का मंच देती रहेगी।”
वर्ष 2015 में शुरुआत के बाद से प्रो रेसलिंग लीग ने भारतीय कुश्ती में रोमांचक मुकाबलों और खिलाड़ियों की प्रतिभा को मंच दिया है। इसके पांच सीजन में कई यादगार प्रतिद्वंद्विताएं और शानदार प्रदर्शन देखने को मिले हैं। पांचवें सीजन के फाइनल में गत चैंपियन हरियाणा थंडर्स ने दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 5-4 से हराकर खिताब जीता था। अब छठे सीजन से लीग को एक नया मुकाम मिलने की उम्मीद है।
पीडब्ल्यूएल के छठे सीजन के प्रसारण साझेदारों के साथ नीलामी की तारीख और इसके आयोजन स्थल की घोषणा आने वाले सप्ताहों में की जाएगी।
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*दिल्ली के दिल में सजा देश की लोककला एवं बुनकरों का संसार*
_*• कनॉट प्लेस में 'दशहरा महोत्सव 2026' का भव्य आगाज़*_
_*• स्टेट एम्पोरिया कॉम्प्लेक्स में 19 अक्टूबर तक चलेगा 12 दिवसीय मेला*_
_*• कश्मीरी पश्मीना से लेकर बनारसी साड़ियों के स्टॉलों पर उमड़ रही भारी भीड़*_
_*• मिथिला पेंटिंग, नक्काशीदार काष्ठ-शिल्प के सजावटी सामान बने मुख्य आकर्षण*_
*नई दिल्ली:* त्योहारी मौसम के आगाज़ के साथ ही राजधानी दिल्ली की धड़कन कहे जाने वाले बाबा खड़क सिंह मार्ग स्थित 'स्टेट एम्पोरिया कॉम्प्लेक्स' में भारतीय संस्कृति, कला और हथकरघा के अनूठे संगम का रंग बिखर गया है। आना हैंडलूम्स के तत्वावधान में आयोजित 12 दिवसीय भव्य 'हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट मेला - दशहरा महोत्सव 2026' का आगाज़ हो चुका है, जो 8 से 19 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। मेले के परिसर में कदम रखते ही देशभर के पारंपरिक हुनर की जीवंत छटा और कारीगरों की कारीगरी देखते ही बनती है। दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों और पारंपरिक बुनकर परिवारों के उत्पादों से सजे इस प्रांगण में उत्सव जैसी चहल-पहल और उत्साह का माहौल नजर आ रहा है।
*मेले का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में बदरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के साथ स्थानीय गणमान्य नागरिक, कला प्रेमी और बड़ी संख्या में शिल्पकार उपस्थित रहे। उद्घाटन के पश्चात मुख्य अतिथियों ने स्टॉलों का अवलोकन किया और कारीगरों से रूबरू हुए।*
इस बार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों एवं बुनकरों के 80 से अधिक आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं। कश्मीर की वादियों से आया नायाब पश्मीना शॉल, दक्षिण भारत की समृद्ध परंपरा को दर्शाती कांजीपुरम साड़ियां, बंगाल का सुप्रसिद्ध तांत व बालूचरी सिल्क और बनारस के अनुभवी बुनकरों की महीन जरीदार बनारसी साड़ियों के स्टॉल महिलाओं के विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वस्त्रों के अतिरिक्त बिहार की विश्वप्रसिद्ध मिथिला (मधुबनी) पेंटिंग्स, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुशल कारीगरों द्वारा गढ़े गए नक्काशीदार लकड़ी व पत्थरों के मनमोहक सजावटी सामान, धातु शिल्प, जूट उत्पाद तथा मिट्टी, चीनी मिट्टी व शीशे के कलात्मक पात्र (क्राकरी) भी लोगों को खूब लुभा रहे हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक तत्वों से तैयार पारंपरिक घरेलू आचार, पापड़, बांस और घास से बुनी गई कलात्मक डलियां व गृह-उपयोगी वस्तुएं भी हाथों-हाथ बिक रही हैं। इसके अलावा सूखे मेवे के स्टॉलों पर भी उच्च गुणवत्ता वाले ड्राई फ्रूट्स की वेराइटी उपलब्ध है। नवरात्रि को लेकर इन सूखे मेवे के स्टॉलों पर लोगों की खासी रुचि देखी जा रही है।
मेले के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए आयोजक संस्था आना हैंडलूम्स के अध्यक्ष मो. बी इस्लाम ने कहा, "हमारा मूल ध्येय देश के अंतिम छोर पर बैठे उन हुनरमंद दस्तकारों और बुनकरों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं से जोड़ना है, जिनकी कला सदियों पुरानी है। बिचौलियों के बिना मिलने वाले इस मंच से न केवल खरीदारों को प्रामाणिक उत्पाद उचित मूल्य पर मिलते हैं, बल्कि कारीगरों की मेहनत का पूरा मेहनताना भी सीधा उनके हाथों में पहुंचता है।"
वहीं संस्था के उपाध्यक्ष धर्मवीर सिंह ने बताया, "दशहरा और दीपावली के त्योहारी मौसम में लोग अपने घरों को सजाने और अपनों को विशेष उपहार देने के लिए हाथ से बनी पारंपरिक वस्तुओं को पहली प्राथमिकता देते हैं। दिल्लीवासियों का उत्साह पहले ही दिन से देखने लायक है और हमें पूरा विश्वास है कि आगामी दिनों में बिक्री नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।"
संस्था के सचिव राम सिंह ने मेले की व्यवस्थाओं और कारीगरों के कल्याण पर जोर देते हुए कहा, "हमारी प्राथमिकता देश के कोने-कोने से आए इन दस्तकारों और बुनकरों को एक बेहतर और सुविधाजनक मंच उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी कला का सही मूल्य पा सकें। मेले में आम जनता का प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क है और यह 19 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से लेकर रात 8:00 बजे तक खुला रहेगा। इससे परिवार सहित आने वाले लोग खरीदारी के साथ-साथ हमारी समृद्ध लोक-संस्कृति का भी आनंद ले सकें।"
विभिन्न राज्यों के कारीगर भी सीधे ग्राहकों से संवाद कर अपनी कला की बारीकियां साझा कर रहे हैं। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये लोगों के भरपूर मनोरंजन की व्यवस्था की गई है, जहाँ भारत के अलग-अलग राज्यों की लोकसंस्कृतियों को सुंदर प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया जा रहा है। मेले में न केवल कला की खरीदारी हो रही है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का यह अनूठा संगम 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' की भावना को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
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पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 रोजगार और कौशल का बनेगा बड़ा मंच: उदय सिंह बयास
दिल्ली में आईपीईएमए की प्रेस कॉन्फ्रेंस, 24 नवंबर से हैदराबाद में होगा 18वां पोल्ट्री इंडिया एक्सपो
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026: भारतीय पोल्ट्री उपकरण निर्माता संघ (आईपीईएमए) ने गुरुवार को द पार्क होटल, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पोल्ट्री इंडिया कर्टेन रेज़र 2026 और देश की पहली व सबसे बड़ी पोल्ट्री रोजगार प्रदर्शनी की घोषणा की। इस अवसर पर आईपीईएमए अध्यक्ष उदय सिंह बयास ने मीडिया को संबोधित करते हुए पोल्ट्री उद्योग में रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता की बढ़ती संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
उदय सिंह बयास ने कहा, “पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता का बड़ा मंच है। भारत का पोल्ट्री क्षेत्र चिकन मीट में 8–10 प्रतिशत और अंडे में 6–8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। यह क्षेत्र ग्रामीण युवाओं, किसानों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और एग्री-टेक उद्यमियों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।”
उन्होंने बताया कि 18वां पोल्ट्री इंडिया एक्सपो 2026 आगामी 24 से 27 नवंबर तक हैदराबाद में आयोजित होगा। 24 नवंबर को एचआईसीसी/नोवोटेल, हाईटेक सिटी में नॉलेज डे सेमिनार होगा, जबकि 25 से 27 नवंबर तक एचिटेक्स एग्जिबिशन सेंटर में मुख्य प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, एक्सपो में 120 से अधिक देशों के 550 से ज्यादा प्रदर्शकों और 51,000 से अधिक उद्योग विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि एक्सपो में ब्रीडिंग एवं जेनेटिक्स, हैचरी एवं फार्म ऑटोमेशन, फीड मिलिंग, एडवांस्ड न्यूट्रिशन, ईसी हाउसिंग एवं वेंटिलेशन, वेटरनरी डायग्नोस्टिक्स, बायोसिक्योरिटी, अंडा प्रोसेसिंग, मैन्योर मैनेजमेंट और ग्रीन पोल्ट्री सॉल्यूशंस जैसी आधुनिक तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा।
आईपीईएमए के अनुसार, एक्सपो फार्म मैनेजमेंट, फीड मिलिंग, उपकरण निर्माण, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड चेन, फूड प्रोसेसिंग, सेल्स एवं मार्केटिंग, रिसर्च तथा एग्री-टेक स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में रोजगार, कारोबार और नेटवर्किंग के नए अवसर उपलब्ध कराएगा।
आयोजकों के मुताबिक, इस आयोजन को 20 से अधिक विदेशी पोल्ट्री संगठनों, 40 से अधिक राष्ट्रीय पोल्ट्री निकायों और अंतरराष्ट्रीय पोल्ट्री मीडिया का समर्थन प्राप्त है। “वन नेशन, वन एक्सपो” थीम के तहत आयोजित यह एक्सपो किसानों, युवाओं, उद्यमियों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने के साथ विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देने पर केंद्रित होगा।
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आयुष सेवा क्षेत्र के कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत; कई प्रमुख क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक
अस्पतालों, डे-केयर केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों और वेलनेस प्रतिष्ठानों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक
आयुष सेवा क्षेत्र 17.6 लाख आजीविकाओं को दे रहा है सहारा; रोजगार और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है
08 OCT 2026 Delhi
आयुष सेवा क्षेत्र महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक भागीदारी के नए अवसर पैदा कर रहा है। क्षेत्र के हालिया आकलन के अनुसार, आयुष सेवा क्षेत्र के कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत है। वहीं, अस्पतालों, डे-केयर केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों और वेलनेस प्रतिष्ठानों जैसे कई संगठित क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से अधिक है।
आयुष सेवा अर्थव्यवस्था में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं। वर्ष 2024-25 में आयुष सेवा क्षेत्र का अनुमानित आकार 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर था। वर्ष 2022-23 से इस क्षेत्र में 16.91 प्रतिशत की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है। यह क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा, वेलनेस, शिक्षा और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में लगभग 17.6 लाख आजीविकाओं को सीधे सहारा देता है।
आयुष सेवा क्षेत्र में रोजगार की बढ़ती संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “आयुष सेवा क्षेत्र का विस्तार स्वास्थ्य सेवा, वेलनेस, शिक्षा और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है। इसका विस्तार न केवल भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि उद्यमिता, कौशल विकास और कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी के लिए भी नए अवसर खोल रहा है।”
आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर आर.आई.एस. (RIS) द्वारा जारी आयुष सेवा क्षेत्र रिपोर्ट के अनुसार संगठित आयुष संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्पा और वेलनेस रिसॉर्ट में महिलाओं की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक, शैक्षणिक संस्थानों में 58 प्रतिशत, डे-केयर केंद्रों में 57 प्रतिशत और अस्पतालों में 53 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के ये आंकड़े आयुष सेवा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, वेलनेस और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं। स्थानीय और स्वतंत्र रूप से संचालित क्लीनिकों में 10 लाख से अधिक आजीविकाएं जुड़ी हुई हैं। इससे पता चलता है कि आयुष क्षेत्र का रोजगार संबंधी प्रभाव शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी व्यापक है।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, “गुणवत्ता मानकों, कौशल विकास, डिजिटल सुविधाओं और मजबूत संस्थागत नेटवर्क के सहयोग से संगठित आयुष सेवाओं का विस्तार रोजगार के अवसरों की संख्या और गुणवत्ता, दोनों को बढ़ा सकता है। संगठित आयुष संस्थानों में महिलाओं की अधिक भागीदारी यह भी दर्शाती है कि यह क्षेत्र समावेशी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।”
स्वतंत्र और स्थानीय क्लीनिक आयुष सेवा क्षेत्र में सबसे अधिक राजस्व देने वाला क्षेत्र बने हुए हैं। इनसे लगभग 16.21 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी कुल क्षेत्र के राजस्व का 43.9 प्रतिशत, प्राप्त होता है। डे-केयर केंद्रों से लगभग 10.13 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व आता है। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर आयुष सेवा क्षेत्र के कुल राजस्व में इनकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है।
आयुर्वेद आयुष की प्रमुख चिकित्सा प्रणालियों में सबसे बड़ा क्षेत्र है और इससे लगभग 17.73 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी आयुष सेवा क्षेत्र के कुल राजस्व का लगभग 48 प्रतिशत, प्राप्त होता है।
वेलनेस क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। इस क्षेत्र ने 21.29 प्रतिशत की वार्षिक औसत वृद्धि दर दर्ज की है। वहीं, योग केंद्रों के राजस्व में दो वर्षों के दौरान लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह लोगों के बीच रोगों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी सेवाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
आयुष क्षेत्र मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 में इससे लगभग 1.77 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। विदेशी मरीजों की संख्या कुल मरीजों का लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन अस्पताल क्षेत्र के राजस्व में उनका योगदान लगभग 15 से 25 प्रतिशत है। आयुष से जुड़ी उपचार सेवाओं में मरीज आमतौर पर 5 से 11 दिनों तक रहते हैं।
आकलन के अनुसार, आयुष सेवा क्षेत्र का आकार वर्ष 2024-25 के 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2047 तक 216 से 318 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, वेलनेस, शिक्षा, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य और अन्य संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होने की संभावना है।
आयुष सेवा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तथा इसके बढ़ते आर्थिक और रोजगार संबंधी प्रभाव से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, समावेशी विकास और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
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रामलीला एवं दशहरा पर्व पर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था रहेगी चाक-चौबंद : दिल्ली पुलिस
दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026।
श्री रामलीला महासंघ, दिल्ली के अध्यक्ष श्री अर्जुन कुमार ने बताया कि दिल्ली में इस वर्ष श्री रामलीला मंचन समारोह 11 से 21 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व भी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाएगा। रामलीला एवं दशहरा पर्व के सफल, शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित आयोजन को लेकर श्री रामलीला महासंघ, दिल्ली की विभिन्न रामलीला कमेटियों के पदाधिकारियों तथा दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में रामलीला आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधा तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) श्री देवेश श्रीवास्तव ने रामलीला महासंघ को आश्वासन दिया कि दिल्ली में आयोजित होने वाली सभी रामलीलाओं एवं दशहरा कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सभी रामलीला कमेटियों को दिल्ली पुलिस का पूर्ण सहयोग मिलेगा तथा श्रद्धालुओं एवं दर्शकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला एवं दशहरा पर्व के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्रबंध किए जाएंगे, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
श्री रामलीला महासंघ, दिल्ली के महामंत्री श्री सुभाष गोयल ने बताया कि बैठक के दौरान महासंघ की ओर से श्री देवेश श्रीवास्तव, स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर), दिल्ली पुलिस संयुक्त पुलिस आयुक्त, श्री विजय सिंह एवं श्री मिलिंद महादेव डूंबरें तथा उपायुक्त, वरिष्ठ अधिकारियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
श्री अर्जुन कुमार ने कहा कि दिल्ली में रामलीला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। महासंघ का प्रयास रहेगा कि सभी रामलीला कमेटियां दिल्ली पुलिस एवं प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर रामलीला एवं दशहरा पर्व को भव्य, शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न कराएं।
इस अवसर पर सर्वश्री पवन गुप्ता, अखिल सिंघल, सत्यभूषण जैन, वीरू सिंधी, प्रवीण सिंगल आदि उपस्थित रहे|
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03 اکتوبر 2026
جماعت اسلامی ہند کی حکومت سے عوامی مسائل پر ٹکراؤ کے بجائے بات چیت کا راستہ اختیار کرنے کی اپیل
جماعت کی قیادت نے مساجد کی مسماری، ایس آئی آر میں بے ضابطگیوں اور اختلاف رائے کو دبانے پر شدید تشویش کا اظہار کیا
نئی دہلی: جماعت اسلامی ہند نے حکومت سے اپیل کی ہے کہ وہ عوامی مسائل پر ٹکراؤ کے بجائے مذاکرات کا راستہ اختیار کرے۔ جماعت نے عبادت گاہوں کو بار بار نشانہ بنائے جانے، ووٹر فہرستوں کی خصوصی جامع نظرثانی ( ایس آئی آر ) اور پُرامن عوامی احتجاج پرعائد پابندیوں کے حوالے سے شدید تشویش کا اظہار کیا ہے۔
جماعت اسلامی ہند کے مرکز میں منعقدہ پریس کانفرنس کو خطاب کرتے ہوئے نائب امیر پروفیسر سلیم انجینئر نے ووٹر فہرستوں کی خصوصی جامع نظرثانی (ایس آئی آر) کے طریقۂ کار پر تشویش کا اظہار کرتے ہوئے کہا کہ رپورٹ کے مطابق تقریباً 13 کروڑ ناموں کو ووٹر فہرستوں سے باہر کر دیا گیا ہے ۔ الیکشن کمیشن کے اس عمل سے سماج میں سخت تشویش پیدا ہوئی ہے۔ووٹر فہرست جمہوری نظام کی بنیاد ہے اور بڑے پیمانے پر کی جانے والی نظرثانی میں غیر معمولی شفافیت اور احتیاط ضروری ہے۔ انہوں نے کہا کہ انتخابی نتائج، الیکشن کمیشن آف انڈیا کی خودمختاری اور آئینی طرز عمل اور حق رائے دہی سے متعلق معاملات میں عدلیہ کے رویے سے پیدا ہونے والے سوالات نے عوام کے اعتماد کو مزید کمزور کیا ہے۔جمہوری اداروں پر عوام کے اعتماد میں کمی سے ملک کے امن و امان اور استحکام کو بھی خدشات پیدا ہوسکتے ہیں۔ جماعت اسلامی ہند چیف الیکشن کمشنر سے مطالبہ کرتی ہے کہ وہ ووٹر فہرستوں کےعمل سے متعلق خدشات کی اخلاقی ذمہ داری قبول کریں اور اگر الیکشن کمیشن عوام کا اعتماد برقرار رکھنے میں ناکام ہے تو رضاکارانہ طور پر اپنےعہدے سے مستعفی ہوجائیں۔انہوں نے کہا کہ ایس آئی آر کے عمل کو فوری طور پر روکا جائے، نظرثانی سے متاثر ہونے والے ووٹروں کی نشاندہی کی جائے اور ان کے نام دوبارہ ووٹر فہرستوں میں شامل کئے جائیں۔ بے ضابطگیوں کی آزادانہ تحقیقات کرائی جائے اور جہاں کسی غلط کام کا ثبوت ملے وہاں کے اہل کاروں کی ذمہ داری طے کی جائے۔ الیکشن کمیشن کی غیر جانب داری اور غیر متعصبانہ کردار کو یقینی بنانے کے لیے اس کی تشکیل اور تقرری کے طریقۂ کار میں اصلاحات کی جائیں، جن میں حکومت، اپوزیشن اور عدلیہ کی شرکت لازمی ہو۔
پروفیسر سلیم انجینئر نے پُرامن جمہوری احتجاج کو دبانے کے لیے پولیس کی کارروائیوں پر بھی سوال اٹھایا ۔ آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ اور مانیٹرنگ کمیٹی آف انڈین مسلمز کی جانب سے منعقدہ حالیہ احتجاج اور 2 اکتوبر کو ایس آئی آر اور چیف الیکشن کمشنر کے خلاف کئے گئے عوامی احتجاج کا حوالہ دیتے ہوئے انہوں نے کہا کہ عوامی احتجاج کی اجازت سے انکار اور پُرامن مظاہرین کو حراست میں لیے جانے کے واقعات نے اظہار رائے کی آزادی کی گنجائش کے حوالے سے سنگین سوالات پیدا کر دئے ہیں۔ حکومت کے فیصلوں پر سوال اٹھانے کے لیے پُرامن احتجاج ملک کے شہریوں کا جمہوری حق ہے ۔ انہوں نے کہا کہ ہم حکومت اور پولیس انتظامیہ سے اپیل کرتے ہیں کہ پُرامن مظاہروں کے لیے پیشگی اجازت کو ضروری نہ بنایا جائے عوامی مظاہروں کے لیے صرف پیشگی اطلاع کافی ہونی چاہئے۔ ہم غیر ضروری حراست اور ایف آئی آر کو ختم کرنے، پولیس کی جانب سے بدسلوکی کے الزامات کی آزادانہ تحقیقات اور ذمہ دار پائے جانے والے اہلکاروں کے خلاف کاروائی کا مطالبہ کرتے ہیں۔پروفیسر سلیم انجینئرنے کہا کہ حکومت کو ٹکراؤ کے بجائے مذاکرات کا راستہ اختیار کرنا چاہیے، شہریوں اور تنظیموں سے براہِ راست بات چیت کرنی چاہیے ، عوامی رابطوں اور مذاکرات کے ذریعے شکایات کا ازالہ کرنا چاہیے۔
پریس کا نفرنس کو خطاب کرتے ہوئے جماعت اسلامی ہند کے نائب امیر ملک معتصم خان نے مساجد، گرجا گھروں اور دیگر عبادت گاہوں کو بار بار نشانہ بنائے جانے کے واقعات پر تشویش کا اظہار کرتے ہوئے کہا کہ انہدامی کارروائیوں سے مذہبی اقلیتوں اور عوام میں بڑے پیمانے پر ناراضگی، تشویش اور بے چینی پیدا ہو رہی ہے۔ عبادت گاہیں مختلف طبقات کے لیے مذہبی اور جذباتی اہمیت رکھتی ہیں، اس لیے ان کے خلاف کسی بھی کارروائی میں انصاف، حساسیت اور قانون کی مکمل پابندی ضروری ہے۔ ملک معتصم خان نے کہا کہ مسلمانوں اورعیسائیوں کی عبادت گاہوں کے خلاف قانون کے امتیازی اطلاق نے انتظامیہ کی ساکھ کو نقصان پہنچایا ہے۔ مذہبی مقامات سے متعلق بار بار پیدا ہونے والے تنازعات کشیدگی کو بڑھا رہے ہیں اور عوام کی توجہ اہم معاشی اور سماجی مسائل سے ہٹا رہے ہیں۔ اگر مذہبی مقامات کو اسی طرح سے نشانہ بنایا جاتا رہا تو احتجاج پھیل سکتا ہے اور ایک بڑی عوامی تحریک کی شکل اختیار کرسکتا ہے۔ انہوں نے کہا کہ ہم حکام سے مطالبہ کرتے ہیں کہ عبادت گاہوں سے متعلق معاملات میں قوانین کے غلط استعمال کو فوری طور پر روکا جائے اور کسی بھی کارروائی سے پہلے تمام فریقوں کے دعووں کی باریکی سے جانچ کیا جائے۔ جہاں تک ممکن ہو تنازعات قانونی تصفیے یا دیگر قانونی طریقۂ کار کے ذریعے حل کیا جائے اور انہدامی کارروائی سے گریز کیا جائے۔ ملک معتصم خان نے کہا کہ جہاں کسی عدالتی فیصلے یا قانون کے تحت مسماری ناگزیر ہو، وہاں اس پورے عمل کی عدالت کے ذریعے نگرانی ہونی چاہیے۔ ہم ماضی میں کی گئی ان انہدامی کارروائیوں کی بھی سپریم کورٹ کی نگرانی میں تحقیقات کا مطالبہ کرتے ہیں، جن کی قانونی حیثیت پر سوالات اٹھائے گئے ہیں۔ جہاں انہدامی کارروائی غیر قانونی ثابت ہو وہاں مناسب اقدامات کرتے ہوئے عبادت گاہوں کی تعمیر نو اور بحالی کو یقینی بنایا جائے۔
जमाअत ने सरकार से सार्वजनिक मुद्दों पर टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की मांग की
जमाअत नेतृत्व ने मस्जिदों को गिराने, SIR में अनियमितताओं और असहमति को दबाने पर चिंता जताई
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2026।
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकार से अपील की है कि वह जनहित के मुद्दों पर टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाए। संगठन ने इबादतगाहों को निरंतर निशाना बनाए जाने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
जमाअत के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तरीके पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "लाखों मूल वोटर्स सहित लगभग 13 करोड़ नामों को हटाए जाने की खबर ने व्यापक चिंता पैदा कर दी है। मतदाता सूची प्रतिनिधि लोकतंत्र का आधार है है। बड़े पैमाने पर इसमें बदलाव के लिए असाधारण पारदर्शिता, सावधानी और सुधार के लिए सुलभ व्यवस्था अनिवार्य है। चुनाव से जुड़े फैसलों, भारत के चुनाव आयोग की आज़ादी और उसके संवैधानिक कामकाज, और वोट देने के अधिकार पर असर डालने वाले मामलों में न्यायपालिका के रवैये को लेकर उठे सवालों ने जनता के भरोसे को और कमज़ोर कर दिया है। लोकतांत्रिक संस्थाओं में घटता भरोसा कानून-व्यवस्था और देश की स्थिरता के लिए बड़ी चिंता का कारण बन सकता है। जमात-ए-इस्लामी हिंद ने मुख्य चुनाव आयुक्त से अपील की है कि वे वोटर लिस्ट की प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर चिंताओं के लिए नैतिक ज़िम्मेदारी लें और अगर आयोग जनता का भरोसा बनाए रखने में नाकाम रहता है, तो स्वेच्छा से पद छोड़ दें। SIR प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए, पुनरीक्षण से प्रभावित पात्र मतदाताओं की पहचान की जानी चाहिए और उनके नाम बहाल किए जाने चाहिए। अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और जहां भी गड़बड़ी साबित हो वहां जवाबदेही तय की जानी चाहिए। निष्पक्षता और तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग के गठन और नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार किए जाने चाहिए, जिसमें सरकार, विपक्ष और न्यायपालिका की सार्थक भागीदारी हो।
प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को हतोत्साहित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं और पुलिस प्रतिबंधों के बढ़ते उपयोग का मुद्दा भी उठाया। हाल के विरोध प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए - जिनमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और इंडियन मुस्लिम्स की मॉनिटरिंग कमिटी द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन, और साथ ही 2 अक्टूबर को SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ हुआ सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन शामिल हैं - उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अनुमति न देना और उन्हें हिरासत में लेना, लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के लिए उपलब्ध जगह पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों के लिए सरकार के फैसलों और संस्थागत कार्यों पर सवाल उठाने का एक वैध लोकतांत्रिक माध्यम है। हम सरकार और पुलिस अधिकारियों से शांतिपूर्ण सार्वजनिक अभिव्यक्ति के लिए पूर्व अनुमति को अनावश्यक बनाने का आग्रह करते हैं। सार्वजनिक सुरक्षा के लिए पूर्व सूचना और उचित व्यवस्था आम तौर पर पर्याप्त होती है। हम गैर-ज़रूरी हिरासत और बेबुनियाद FIR को खत्म करने, पुलिस के दुर्व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग करते हैं। सरकार को टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुनना चाहिए, नागरिकों और संगठनों से सीधे जुड़ना चाहिए, और लोकतांत्रिक तरीके से बातचीत और संस्थागत संवाद के ज़रिए जायज़ शिकायतों का समाधान करना चाहिए।"
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के दूसरे उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने मस्जिदों, चर्चों और इबादतगाहों को निरंतर निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई और कहा, "इन तोड़-फोड़ की घटनाओं से धार्मिक अल्पसंख्यकों में बड़े पैमाने पर नाराज़गी, बेचैनी और निराशा पैदा हो रही है। इबादतगाहों का गहरा धार्मिक और भावनात्मक महत्व होता है। उनके खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए निष्पक्षता, संवेदनशीलता और कानून का सख्ती से पालन ज़रूरी है। मुसलमानों और ईसाइयों के धार्मिक स्थलों के खिलाफ़ कानून का लक्षित इस्तेमाल प्रशासन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा है। धार्मिक स्थलों से जुड़े बार-बार होने वाले विवाद सामाजिक तनाव पैदा कर रहे हैं और लोगों का ध्यान ज़रूरी आर्थिक और सामाजिक मुद्दों से हटा रहे हैं। अगर इस तरह निशाना बनाना जारी रहा तो विरोध प्रदर्शन फैल सकते हैं और एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकते हैं। हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे इबादतगाहों से जुड़े मामलों में कानूनों के दुरुपयोग को तुरंत रोकें और कोई भी कार्रवाई करने से पहले सभी पक्षों के दावों और चिंताओं की सावधानीपूर्वक जांच की जाए। विवादों को, जहाँ तक संभव हो विवादों को नियमितीकरण, कानूनी समझौते या अन्य वैध तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए और तोड़-फोड़ से बचना चाहिए। अपरिहार्य कारणों से जब किसी अंतिम न्यायिक या कानूनी फैसले के तहत तोड़-फोड़ करना हो तो यह प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में होनी चाहिए। हम यह भी मांग करते हैं कि जिन मामलों में तोड़-फोड़ की वैधता पर सवाल उठे हैं उनकी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो और जहां भी गैर-कानूनी तोड़-फोड़ साबित हो वहां बहाली के लिए उचित कदम उठाए जाएं।"
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नई दिल्ली नगरपालिका परिषद
01.10.2026.
• *श्री किरेन रिजिजू, श्री जी. किशन रेड्डी और श्री प्रवेश साहिब सिंह ने एनडीएमसी क्षेत्र में ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ स्वच्छता श्रमदान में भाग लिया,*
• *स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत एनडीएमसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर स्वच्छता के लिए सामुदायिक सहभागिता अभियान चलाए गए।*
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026.
" स्वच्छता ही सेवा " अभियान के तहत नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने आज अपने क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रव्यापी जनभागीदारी अभियान “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” का आयोजन किया। केंद्रीय मंत्रियों, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, दिल्ली सरकार के मंत्री, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् के अध्यक्ष, सचिव, वरिष्ठ अधिकारियों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, स्थानीय निवासियों, सफाई सेवकों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से श्रमदान में भाग लिया और स्वच्छ, हरित एवं स्वस्थ नई दिल्ली के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराया।
इस पहल में स्कूलों, बाजारों, आवासीय क्षेत्रों, सार्वजनिक स्थलों, कार्यालयों और संस्थागत परिसरों में लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। इस प्रकार स्वच्छता को नई दिल्ली क्षेत्र में जन-केंद्रित जन आंदोलन का रूप दिया गया।
भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्री - श्री किरेन रिजिजू ने गोल मार्केट के निकट पेशवा रोड स्थित नवयुग स्कूल में आयोजित श्रमदान कार्यक्रम में पालिका परिषद् के अध्यक्ष - श्री मनोज कुमार द्विवेदी के साथ भाग लिया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय निवासियों ने भी उत्साहपूर्वक स्वच्छता गतिविधियों में हिस्सा लिया। इस अवसर पर वृक्षारोपण अभियान भी आयोजित किया गया, जिसमें श्री रिजिजू और स्कूली विद्यार्थियों ने पौधे लगाए तथा पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संदेश दिया।
इस अवसर पर श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि “एक दिन – एक घंटा – एक साथ श्रमदान” का संदेश सरल और प्रभावशाली है। अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि युवा स्वच्छता, नागरिक भावना और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाकर इस जन आंदोलन की प्रेरक शक्ति बन सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से स्वच्छ और हरित स्वच्छ भारत के व्यापक लक्ष्य की दिशा में इस भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
नई दिल्ली में चाणक्यपुरी स्थित यशवंत सिंह प्लेस में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री - श्री जी. किशन रेड्डी ने कोयला मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ श्रमदान कार्यक्रम में भाग लिया। मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के सदस्यों और स्थानीय निवासियों ने भी स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया। श्री रेड्डी ने एनडीएमसी के सफाई सेवकों से संवाद किया और क्षेत्र में प्रतिदिन स्वच्छता बनाए रखने में उनके समर्पित योगदान के लिए उनका अभिनंदन किया।
जोधपुर मेस में NDMC की सबसे बड़ी सामुदायिक शौचालय सुविधा का उद्घाटन
सेवा संकल्प अभियान के तहत दिल्ली सरकार के मंत्री - श्री प्रवेश साहिब सिंह ने पंडारा रोड, नई दिल्ली स्थित जोधपुर मेस में एनडीएमसी की सबसे बड़ी सामुदायिक शौचालय सुविधा का उद्घाटन किया। लगभग 01 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस सुविधा को एनडीएमसी द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि पर एनबीसीसी के सीएसआर फंड के सहयोग से विकसित किया गया है। आधुनिक सुविधा में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं, सीसीटीवी कैमरे तथा स्वच्छता, साफ-सफाई, सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
इस अवसर पर श्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि क्षेत्र के निवासियों से किया गया एक और वादा पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का बुनियादी नागरिक अधिकार है। उन्होंने दिल्ली की जनता को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इससे पहले, श्री प्रवेश साहिब सिंह ने एनडीएमसी टीम और मंदिर ट्रस्टियों के साथ कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर परिसर में भी श्रमदान कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से संवाद किया और मंदिर परिसर तथा उसके आसपास स्वच्छता एवं साफ-सफाई बनाए रखने में योगदान देने की अपील की।
भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय और अन्य विभागों की भागीदारी के तहत, एनडीएमसी टीम के साथ पंचायती राज मंत्रालय ने भी श्रमदान अभियान में भाग लिया। मंत्रालय के सचिव के नेतृत्व में नई दिल्ली स्थित एम्पोरियम बिल्डिंग के सामने बाबा खड़क सिंह मार्ग पर कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों और प्रतिभागियों ने स्वच्छता गतिविधियों में हिस्सा लिया।
" स्वच्छता ही सेवा "अभियान के तहत ही एनडीएमसी के स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के सहयोग से चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक, पं. उमा शंकर दीक्षित मार्ग पर विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया। लगभग 120 प्रतिभागियों ने इस अभियान में हिस्सा लिया। अभियान के दौरान पं. उमा शंकर दीक्षित मार्ग, राष्ट्रीय पुलिस स्मारक और आसपास के क्षेत्रों से लगभग 300 किलोग्राम कचरा और गाद हटाई गई।
• एनडीएमसी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर श्रमदान कार्यक्रम
एनडीएमसी क्षेत्र में “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” की भावना व्यापक रूप से दिखाई दी। बाजारों, आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों, कॉलेजों, संस्थागत परिसरों, अस्पतालों, डिस्पेंसरी, विद्युत सब-स्टेशनों और कार्यालयों में श्रमदान एवं स्वच्छता गतिविधियों का आयोजन किया गया। नागरिकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, बाजार संगठनों, स्थानीय निवासियों और अधिकारियों की व्यापक भागीदारी ने स्वच्छता को दैनिक आदत और साझा नागरिक जिम्मेदारी बनाने के सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित किया।
स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के माध्यम से एनडीएमसी सक्रिय सामुदायिक भागीदारी को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है और इस संदेश को मजबूत कर रहा है कि स्वच्छता केवल एक दिन की गतिविधि नहीं, बल्कि स्वच्छ, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ नई दिल्ली के निर्माण के लिए निरंतर सामूहिक प्रतिबद्धता है।
#ndmc #zednews4you
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केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने लिज्जत पापड़ की कारीगर बहनों से किया संवाद, महिला सशक्तिकरण की सराहना.
1966 में लिज्जत पापड़ को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग से ग्रामोद्योग के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी।
केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप लिज्जत पापड़ महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की प्रेरक मिसाल बन चुका है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने बुधवार को मुंबई के श्री षण्मुखानंद चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती ऑडिटोरियम, सायन (पूर्व), मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की कारीगर बहनों को संबोधित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केवीआईसी अध्यक्ष ने महिला कारीगरों के कार्य की सराहना की और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में लिज्जत पापड़ जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की प्रेसिडेंट श्रीमती स्वाति आर. पराडकर भी उपस्थित रहीं। उन्होंने संस्था की छह दशक से अधिक की प्रेरक यात्रा, महिला कारीगरों की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर जानकारी साझा की।
अपने संबोधन में अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज गोयल ने कहा कि लिज्जत पापड़ की कहानी 15 मार्च 1959 को केवल 7 बहनों और 80 रुपये से शुरू हुई थी। यह प्रयास केवल पापड़ बनाने का नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने, सम्मान के साथ जीने और आत्मनिर्भर बनने का सपना था। वर्ष 1966 में केवीआईसी द्वारा लिज्जत पापड़ को ग्रामोद्योग के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद इस यात्रा को नई गति मिली। आज लिज्जत पापड़ की 83 शाखाओं के माध्यम से 16 राज्यों में 45 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की यात्रा से जुड़ी हैं। लिज्जत पापड़ ने समय के साथ अपने उत्पादों में भी विस्तार किया है। पापड़ के अलावा संस्था मसाले, आटा, डिटर्जेंट और लिक्विड सोप जैसे उत्पादों का भी निर्माण कर रही है। इसके उत्पाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण अफ्रीका सहित 30 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं।
केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि लिज्जत पापड़ की सबसे बड़ी ताकत गुणवत्ता, मेहनत और अनुशासन है। उन्होंने कहा कि यह संस्था प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के विजन को साकार करने का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा, “लिज्जत सिर्फ पापड़ नहीं बनाती, वह सम्मान, आत्मविश्वास और अवसर गूंथती है।”
श्री गोयल ने कहा कि लिज्जत पापड़ की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। वर्ष 2003 में सर्वश्रेष्ठ ग्रामोद्योग पुरस्कार, 2005 में ब्रांड इक्विटी अवार्ड और 2017 में महिला विकास पुरस्कार से संस्था को सम्मानित किया गया। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों और मीडिया ने भी लिज्जत पापड़ की प्रेरक यात्रा को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है।
केवीआईसी अध्यक्ष ने खादी और ग्रामोद्योग आयोग से जुड़ी की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि देशभर में करीब 3 हजार खादी संस्थाओं के माध्यम से लगभग 5 लाख कारीगरों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। पिछले 12 वर्षों में खादी कारीगरों की वेजेज में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये और बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत पिछले 12 वर्षों में 3.23 लाख से अधिक मशीन एवं टूलकिट वितरित किए गए हैं। वहीं, PMEGP के अंतर्गत अभी तक करीब 11 लाख नई परियोजनाएं स्थापित हुईं, जिनके लिए 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गई और करीब 1 करोड़ नए लोगों को रोजगार मिला।
#kvic #zednews4you
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#zednews4you #chairmen and both Members of Delhi minority commission #dmc
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