संत भगतराज रूहानी मिशन

🔆 संत भगतराज रूहानी मिशन 🔆
संत भगत राज जी द्वारा सतगुरु कबीर साहिब एवं अन्य पूर्ण पुरुषों (गुरु नानक, दादू दयाल, रविदास, पलटूदास, मलूकदास, तुलसी साहिब) की वाणी पर आधारित आध्यात्मिक सत्संग होते हैं। हमारा मिशन जीवों को सुरत शब्द योग, जो सभी योगों में सर्वोच्च है, की शिक्षा देकर आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्ग दिखाना है।
हमारे उद्देश्य:
- आत्मा और परमात्मा के बीच सीधा संबंध स्थापित करना।
- ध्यान, भक्ति और साधना से जीवन को शुद्ध और पवित्र बनाना।
- संतमत की शुद्ध शिक्षाओं का प्रचार और आत्मज्ञान की ज्योति प्रज्वलित करना।
सुरत शब्द योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का शुद्ध और सहज मार्ग है, जो आंतरिक नाद और ज्योति के अनुभव से मोक्ष की ओर ले जाता है।
📌 हमारे सत्संग, ध्यान, प्रवचन, भजन और आत्मज्ञान की शिक्षाओं से लाभ उठाएं।
📌 सत्य, प्रेम और भक्ति से अपने जीवन को प्रकाशित करें।
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संत भगतराज रूहानी मिशन

🌹 संत भगत राज रूहानी मिशन संदेश 🌹 👇

कबीर आधी साखी यह, कौटि ग्रंथ कर जान। नाम सत्य जग झूठ है, सुरत-शब्द पहचान।। वाणी-कबीर साहिब

संत भगत राज जी साहिब की रूहानी विचारधारा और संत भगत राज रूहानी मिशन के अमर वाक्य "चलो चलें सत्य की ओर" के आलोक में, कबीर साहिब की इस साखी का भावार्थ सीधे तौर पर मानव जीवन के परम लक्ष्य और आध्यात्मिक यात्रा को स्पष्ट करता है।

संत भगत राज जी साहिब के रूहानी दृष्टिकोण से इस वाणी का सटीक भावार्थ इस प्रकार है:

करोड़ों ग्रंथों का सार (आधी साखी यह, कौटि ग्रंथ कर जान):

संत भगत राज जी साहब समझाते हैं कि दुनिया में करोड़ों ग्रंथ, वेद और शास्त्र मौजूद हैं। इंसान जीवन भर बाहरी पोथियों के ज्ञान में उलझा रहता है, लेकिन उन सभी ग्रंथों का संपूर्ण निचोड़ कबीर साहिब के इस एक छोटे से वचन में समाहित है। असली ज्ञान पोथियों में नहीं, बल्कि इस सत्य को अपने भीतर से अनुभव करने में है।

सत्य और असत्य का बोध (नाम सत्य जग झूठ है):

इस संसार में जो कुछ भी आँखों से दिखाई देता है, वह नाशवान और परिवर्तनशील है, इसीलिए इसे 'झूठ' या माया कहा गया है। रिश्ते-नाते, धन-दौलत और भौतिक आकर्षण अंततः छूट जाने वाले हैं। संत-मत के अनुसार इस पूरे ब्रह्मांड में केवल एक ही शाश्वत 'सत्य' है, और वह है परमात्मा का 'नाम' (रूहानी शब्द)। संसार की नश्वरता को पहचान कर, उस शाश्वत परमात्मा को ही अपना असली ठिकाना मानना रूहानियत की पहली सीढ़ी है।

आत्मा और परमात्मा का मिलन (सुरत-शब्द पहचान):

यही संत मत का सबसे गहरा और प्रायोगिक रहस्य है। 'सुरत' का अर्थ है हमारी आत्मा (ध्यान या चेतना), और 'शब्द' का अर्थ है वह दिव्य ज्योति और ध्वनि (अनहद नाद) जो हर पल हमारे भीतर गूंज रही है।

संत भगत राज जी साहिब फरमाते हैं कि जब तक हमारी सुरत बाहरी संसार में भटकेगी, वह बेचैन रहेगी। सच्चे पूर्ण गुरु के मार्गदर्शन में सिमरन और ध्यान के द्वारा अपनी सुरत (आत्मा) को उस आंतरिक 'शब्द' (परमात्मा की आवाज़) के साथ जोड़ना ही जीवन का असली मकसद है।

मिशन के संदेश "चलो चलें सत्य की ओर" की सार्थकता:

संत भगत राज रूहानी मिशन का यह आह्वान कबीर साहिब की इसी साखी का व्यावहारिक रूप है। जब यह स्पष्ट हो गया कि "जग झूठ है" और केवल "नाम सत्य है", तो मनुष्य का स्वाभाविक कदम असत्य (माया) को छोड़ कर सत्य (परमात्मा) की ओर बढ़ना होना चाहिए।

"चलो चलें सत्य की ओर" का अर्थ है— बाहरी भटकाव और कर्मकांडों से मुड़कर अपनी अंतरात्मा की यात्रा शुरू करना। यह नारा हमें प्रेरित करता है कि हम संत भगत राज जी साहिब द्वारा बताए गए ध्यान-अभ्यास के मार्ग पर चलें, अपनी 'सुरत' को 'शब्द' से जोड़ें, और असत्य रूपी संसार से सत्य रूपी परमात्मा के घर (निज घर) की ओर अपनी रूहानी वापसी करें।

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संत भगत राज जी साहिब

दिनांक 11 अगस्त दिन मंगलवार 2026

4 days ago | [YT] | 1

संत भगतराज रूहानी मिशन

🌹 नाम की खुमारी यानी सत्य की ओर यात्रा 🌹

“नशा भंग चरस अफीम का उतर जात प्रभात
नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात॥”
(वाणी गुरु ग्रंथ साहिब)

🌹 नाम की खुमारी और सत्य की ओर यात्रा

संत भगत राज रूहानी मिशन के संदेश
“चलो चले सत्य की ओर” के प्रकाश में भावार्थ

💐 संत भगत राज जी साहिब की शिक्षाओं के अनुसार मनुष्य का जीवन केवल बाहरी सुखों और क्षणिक आनंद के पीछे भागने के लिए नहीं मिला।
यह जीवन उस सत्य को जानने के लिए मिला है, जो मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराए।

वाणी में कहा गया है कि भंग, चरस और अफीम का नशा प्रभात होते-होते उतर जाता है। अर्थात संसार के पदार्थों से प्राप्त नशा क्षणिक है। उसका प्रभाव कुछ समय रहता है और फिर समाप्त हो जाता है। जिस मस्ती के लिए मनुष्य बाहरी पदार्थों का सहारा लेता है, वह स्थायी शांति नहीं दे सकती।

लेकिन “नाम की खुमारी” ऐसी आध्यात्मिक मस्ती है जो मनुष्य को बेहोश नहीं करती, बल्कि जगाती है।

यही अंतर समझना आवश्यक है—

दुनिया का नशा मनुष्य को वास्तविकता से दूर करता है।
नाम की खुमारी मनुष्य को सत्य के निकट ले जाती है।

इसीलिए संत भगत राज रूहानी मिशन का संदेश है—

“चलो चले सत्य की ओर।”

यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने का आह्वान है।

जब मनुष्य सत्य की ओर चलना प्रारंभ करता है, तब उसकी यात्रा बाहर से भीतर की ओर होने लगती है। वह यह देखना शुरू करता है कि जिस सुख को वह संसार की वस्तुओं, पद, प्रतिष्ठा, धन और विषय-विकारों में खोज रहा था, वह स्थायी नहीं है।

💐 संसार की प्रत्येक वस्तु परिवर्तनशील है।
आज जो है, वह कल नहीं होगा।
आज जो सुख दे रहा है, कल वही चिंता का कारण बन सकता है।
आज जिस वस्तु पर मनुष्य गर्व करता है, समय आने पर वही उससे छूट जाती है।

इसलिए संतों का संदेश है—

क्षणिक नशे की तलाश मत कर,
उस सत्य की तलाश कर जो तेरे भीतर स्थायी जागृति पैदा करे।

🌹 “नाम खुमारी” का वास्तविक अर्थ

नाम की खुमारी का अर्थ केवल इतना नहीं कि मनुष्य बार-बार नाम का उच्चारण करता रहे। इसका गहरा अर्थ है कि सत्य की स्मृति जीवन के प्रत्येक कर्म में उतर जाए।

जब सत्य मनुष्य के भीतर उतरता है तो उसके विचार बदलते हैं।
विचार बदलते हैं तो व्यवहार बदलता है।
व्यवहार बदलता है तो संस्कार बदलते हैं।
और जब संस्कार बदलते हैं तो पूरा जीवन सत्य की दिशा में चलने लगता है।

यही है—

💐 “चलो चले सत्य की ओर।” 💐

सत्य की ओर चलने वाला व्यक्ति किसी बाहरी नशे का गुलाम नहीं बनता। वह अपने मन को पहचानता है, अपनी कमजोरियों को पहचानता है और अपने जीवन को सत्य, प्रेम, दया, सेवा, संयम और आत्म-जागृति की ओर ले जाता है।

🌹 प्रभात का नशा और जीवन की प्रभात

वाणी में आया “प्रभात” भी अत्यंत सुंदर संकेत देता है।

रात का अंधकार समाप्त होकर जब प्रभात होता है, तो प्रकाश फैलता है। उसी प्रकार अज्ञान की रात समाप्त होकर जब आत्मिक जागृति का प्रभात होता है, तब मनुष्य को अपने जीवन की वास्तविक दिशा दिखाई देने लगती है।

भंग, चरस और अफीम का नशा प्रभात में उतर जाता है,
लेकिन सत्य की पहचान का प्रकाश प्रभात से प्रारंभ होता है।

इसलिए संतों का मार्ग मनुष्य को नशे में डुबोने का नहीं, बल्कि अज्ञान से जगाने का मार्ग है।

🌹 “दिन रात” क्यों कहा गया?

वाणी कहती है—

“नाम खुमारी नानका, चढ़ी रहे दिन रात।”

इसका मतलब है कि सत्य की साधना किसी एक समय, स्थान या अवसर तक सीमित न रहे। मनुष्य जहाँ भी हो, जिस अवस्था में हो, उसके भीतर सत्य की स्मृति बनी रहे।

सेवा करे—सत्य के साथ।
परिवार निभाए—सत्य के साथ।
व्यापार करे—सत्य के साथ।
समाज में रहे—सत्य के साथ।
और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मनुष्य अपने भीतर की यात्रा भी सत्य के साथ ही करे।

यही वास्तविक नाम की खुमारी है।

🌹 संत भगत राज जी साहिब के संदेश का सार

हे मानव!

ऐसा नशा मत खोज जो तुझे अपने होश से दूर कर दे।
ऐसी खुमारी खोज जो तुझे सत्य के प्रति जागृत कर दे।
ऐसी मस्ती मत खोज जो सुबह उतर जाए।
ऐसी आध्यात्मिक मस्ती खोज जो तेरे विचार, व्यवहार और जीवन को बदल दे।

दुनिया के नशे में मनुष्य स्वयं को भूल जाता है, नाम की खुमारी में मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने की ओर बढ़ता है।

इसलिए—

बाहर संसार में नशे से नहीं, सत्य से जुड़ो।
बेहोशी से नहीं, आत्म-जागृति से जुड़ो।
क्षणिक सुख से नहीं, स्थायी सत्य की खोज से जुड़ो।

और इसी सत्य की खोज में—

चलो चले सत्य की ओर।

क्योंकि सत्य की ओर उठाया गया प्रत्येक कदम मनुष्य को बाहरी अंधकार से निकालकर भीतर के प्रकाश की ओर ले जाता है।

यही नाम की सच्ची खुमारी है—

जो कभी भी उतरती नहीं,
जो जीवन को बिगाड़ती नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, प्रेम और आत्म-जागृति से भर देती है।

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संत भगत राज जी साहिब
मिशन डायरेक्टर
रीना दीदी

1 week ago | [YT] | 0

संत भगतराज रूहानी मिशन

🌹संत भगत राज रूहानी मिशन जी की ओर से🌹

सच्चा मित्र वह नहीं जो केवल सुख में साथ निभाए, बल्कि वह है जो हमें सत्य, सदाचार और परमात्मा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे। संसार की मित्रता समय के साथ बदल सकती है, परंतु सतगुरु की मित्रता कभी नहीं बदलती। जो सतगुरु से जुड़ जाता है, उसे जीवन का सच्चा मित्र, सच्चा सहारा और सच्चा मार्गदर्शक मिल जाता है। आइए, इस मित्रता दिवस पर हम सत्य, प्रेम, सेवा और मानवता से अपनी मित्रता को और दृढ़ करें।



संत भगत राज जी साहिब
संत भगत राज रूहानी मिशन
"चलो चलें सत्य की ओर"
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*मित्रता दिवस की सभी प्रेमीजनों को हार्दिक शुभकामनाएँ।*

1 week ago | [YT] | 2

संत भगतराज रूहानी मिशन

संत भगत राज रूहानी मिशन और उसका अमर उद्घोष

"चलो चलें सत्य की ओर"

मानव चेतना को अध्यात्म के उच्चतम शिखर से जोड़ने वाला एक दिव्य प्रकाश स्तंभ है।

जिसका शब्दार्थ और भावार्थ निम्नवत है:

'संत भगत राज रूहानी मिशन' का अर्थ

💐 शब्दार्थ 💐

संत: जिसने सत्य (परमात्मा) को जान लिया हो, जो राग-द्वेष से परे और परम शांत स्वरूप हो।

भगत: परमात्मा के अनन्य प्रेमी, भक्ति मार्ग का साधक या पथदर्शक।

राज: श्रेष्ठता, प्रकाश या आत्म-ज्ञान का साम्राज्य।

रूहानी: रूह (आत्मा) से संबंधित; विशुद्ध आध्यात्मिक (Mental या Physical नहीं, बल्कि Spiritual)।

मिशन: एक पवित्र लक्ष्य, उच्च उद्देश्य या जन-कल्याणकारी अभियान।

🌹 भावार्थ 🌹

"संत भगत राज रूहानी मिशन का भावार्थ उस पावन आध्यात्मिक अभियान से है, जिसका एकमात्र ध्येय मनुष्य को बाह्य आडंबरों और रूढ़ियों से निकालकर उसकी आत्मा (रूह) का साक्षात्कार परमात्मा से कराना है।"

यह किसी भौतिक या सांसारिक संस्था का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्म-कल्याण और पूर्ण संतों (जैसे कबीर साहिब, रविदास जी, गुरु नानक देव जी, दादूदयाल जी, गरीबदास जी व तुलसी साहिब जी) की प्रामाणिक परंपरा पर आधारित अंतर्मुखी साधना का एक पवित्र मार्ग है।

नारे का शब्दार्थ: "चलो चलें सत्य की ओर"

💐 शब्दार्थ 💐

चलो चलें: गतिशीलता का संदेश; आलस्य, अज्ञान और भ्रम की निद्रा को त्यागकर आगे बढ़ना।

सत्य: जो तीनों कालों (भूत, वर्तमान, भविष्य) में कभी न बदले; यानी वह एक अविनाशी परमेश्वर/परम-तत्त्व।

की ओर का अर्थ है: सही दिशा का चयन करना; यानी असत्य (संसार) से मुड़कर सत्य (परमात्मा) की तरफ प्रस्थान करना।

💐 भावार्थ 💐

संत भगत राज जी साहिब के सिद्धांतों के आलोक में इस नारे का भावार्थ तीन मुख्य स्तरों पर प्रकट होता है:

I. अज्ञान से ज्ञान की ओर प्रस्थान (जन-जागरण)

संसार के प्राणी माया, क्षणभंगुर सुखों और नश्वर पदार्थों को ही 'सत्य' मान बैठे हैं। यह नारा एक दिव्य चेतावनी है कि यह संसार केवल एक रैन-बसेरा है। इसलिए, नश्वर (असत्य) के मोह को छोड़कर उस शाश्वत (सत्य) परमात्मा की खोज में कदम बढ़ाओ।

II. रस्म-रिवाज से रूहानियत की ओर (आंतरिक साधना)

अधिकांश लोग अध्यात्म को केवल बाह्य कर्मकांड, प्रथाओं या रस्म-रिवाज तक सीमित कर लेते हैं। "सत्य की ओर चलने" का अर्थ है बाह्य दिखावे से हटकर अपने अंतर-घट (हृदय) में छिपे नाम-शब्द और परमात्मा का अनुभव करना।

III. दुखों का अंत और परम आनंद का सैलाब

संसार की ओर चलने से केवल चिंता, भय और दुख मिलते हैं। किंतु जब साधक "सत्य की ओर" चलता है, तो उसके भीतर के समस्त दुख-संताप मिट जाते हैं और जीवन में परम आनंद तथा अखंड शांति का अनवरत प्रवाह (सैलाब) फूट पड़ता है।

🌹 संक्षेप में सार 🌹

शब्द / नारा: रूहानी मिशन
शब्दार्थ: आत्मा से जुड़ा अभियान
भावार्थ: मानव मन को सांसारिक विकारों से मुक्त कर आत्म-ज्ञान प्रदान करना।

शब्द / नारा: "चलो चलें सत्य की ओर"
शब्दार्थ: असत्य को त्यागकर सत्य की दिशा में बढ़ना।
भावार्थ: अज्ञान, कर्मकांड और दुखों से निकलकर सतगुरु की शरण में अखंड आनंद को प्राप्त करना।

संत भगत राज रूहानी मिशन

दिनांक: 23 जुलाई, बृहस्पतिवार, 2026

मिशन डायरेक्टर
रीना दीदी

3 weeks ago | [YT] | 7

संत भगतराज रूहानी मिशन

संत भगत राज रूहानी मिशन के पावन अमर संदेश "चलो चलें सत्य की ओर" के प्रकाश में, संत गरीबदास जी महाराज की इस पवित्र वाणी ("अथ अचला का अंग") के माध्यम से परम पूज्य संत भगत राज जी साहिब संपूर्ण मानव जगत को झकझोरते हुए जो विस्तृत चेतावनी भरा संदेश दे रहे हैं, वह इस प्रकार है:

चलो चलें सत्य की ओर : संत भगत राज जी साहिब का संदेश

हे परम सौभाग्यशाली हंस आत्माओं!

प्रेम से बोलो — 'सत साहिब', साहिब बंदगी।

आज संपूर्ण संसार अज्ञानता, पाखंड और दिखावे की गहरी नींद में सोया हुआ है। मानव मात्र के परम कल्याण के लिए ही समय-समय पर पूर्ण संत धरा पर आकर सत्य का मार्ग दिखाते हैं। संत गरीबदास जी महाराज, जो विक्रमी संवत् 1774 में इस धरा धाम पर भारत देश के प्रांत हरियाणा के छुड़ानी ग्राम में बलिराम भगत के यहाँ अवतरित हुए, उन्होंने अपनी इस वाणी में साफ़ और निर्भीक शब्दों में पूरी मानवता को उस परम सत्य से अवगत कराया है और एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसे यदि आज मनुष्य ने नहीं समझा, तो यह दुर्लभ मानव चोला कौड़ियों के भाव बर्बाद हो जाएगा।

1. पाखंडी और झूठे गुरुओं के जाल से जागो!

वाणी का सबसे तीखा प्रहार उन अज्ञानी और ढोंगी गुरुओं पर है, जो स्वयं तो काल के जाल में फँसे ही हैं, साथ ही करोड़ों जीवों के भविष्य को भी अंधकार में धकेल रहे हैं—

> "झूठे गुरुवा मर गये, हो गये भूत मशान।
झूठे गुरु के आसरे, कदे न उधरे जीव।।"

हे इंसानों! दुनिया के भौतिक तमाशों, नामधारी गुरुओं और लकीर के फकीरों के पीछे अंधा होकर भागना बंद करो। जो गुरु स्वयं काम, क्रोध, लोभ और मोह के चक्रव्यूह से मुक्त नहीं हैं, जो रूढ़िवादिता और कर्मकांड में उलझे हैं, वे तुम्हारी आत्मा का बेड़ा पार कैसे करेंगे? जो स्वयं मृत्यु के बाद प्रेत और मसान की नीच योनियों में भटकने को अभिशप्त हैं, उनका आसरा लेने वाला जीव कभी भवसागर से पार नहीं हो सकता। यह कोई साधारण बात नहीं, बल्कि तुम्हारी आत्मा के लिए अंतिम चेतावनी है कि अपने अनमोल जीवन को इन अज्ञानियों के चरणों में सौंपकर व्यर्थ मत करो।

2. केवल कबीर साहिब ही आदि और अंत का सत्य हैं

इस परिवर्तनशील संसार में, चारों युगों में केवल एक ही अविनाशी, शाश्वत और पूर्ण सत्य सत्ता है — सतगुरु पुरुष कबीर।

> "गरीब, सतगुरु पुरुष कबीर हैं, तीनों लोक तत सार।"

सृष्टि के कण-कण में, तीनों लोकों में जो तत्व का असली सार है, वह कबीर साहिब ही हैं। जब जीव को पूर्ण संत के माध्यम से कबीर साहिब की सच्ची और मर्यादापूर्ण भक्ति प्राप्त होती है, तो काल (यमराज) का चक्रव्यूह छिन्न-भिन्न हो जाता है। यमराज के दूत (जम किंकर) उस जीव के समीप आने की हिम्मत भी नहीं कर सकते और जन्म-मरण की करोड़ों जन्मों की बेड़ियाँ पल भर में कट जाती हैं।

3. आंतरिक मार्ग (उलट पंथ) की पहचान करो

परमात्मा को वनों, पहाड़ों या बाहरी कर्मकांडों में खोजने वाले कभी सत्य को नहीं पा सकते।

वाणी स्पष्ट संकेत करती है—

> "गरीब, धावै सो पावै नहीं, उलट पंथ की चाल।
दिल ही अंदर दर्स हैं, योजन शंख विशाल।।"

सच्चा प्रभु कहीं बाहर नहीं, बल्कि तुम्हारे "दिल ही अंदर" विराजमान है। भक्ति का यह मार्ग दुनिया की अंधी दौड़-भाग से बिल्कुल विपरीत अर्थात् अंतर्मुखी (सुरत-शब्द का मार्ग) है। जब तक आप पूर्ण गुरु की छत्रछाया में आकर अपनी वृत्तियों को अंदर की ओर नहीं मोड़ेंगे, तब तक उस परम पद और अमर लोक (कबीर धाम) तक पहुँचना सर्वथा असंभव है, जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव जैसे महान देव भी थाह पाते-पाते थक गए।

संगत के लिए पूज्य साहिब जी का पावन आह्वान

> "गुरु राजी तो करता राजी, काल कर्म की लगे ना बाजी।"

भगत राज जी साहिब संपूर्ण मानव जाति से करबद्ध प्रार्थना और पुरजोर पुकार कर रहे हैं कि हे जीवों! समय बहुत तेजी से हाथ से निकलता जा रहा है। अपनी सुरत को शब्द से जोड़ो और सतगुरु के वचनों को अपने जीवन का आधार बनाओ। यदि तुम्हारी भक्ति निष्कपट होगी और गुरुदेव तुमसे प्रसन्न (राजी) होंगे, तो स्वयं विधाता तुम पर कृपा बरसाएगा। फिर काल का कोई भी कर्म चक्र, कोई भी प्रारब्ध तुम्हें विचलित नहीं कर पाएगा।

उठो, अज्ञानता के इस घने कोहरे को छाँटो, सत्य की पहचान करो और पूर्ण गुरु की शरण ग्रहण कर मर्यादा में रहते हुए आगे बढ़ो—

चलो चलें सत्य की ओर

सत साहिब। साहिब बंदगी।

संत भगत राज रूहानी मिशन
दिनांक : 21 जुलाई, मंगलवार 2026
मिशन डायरेक्टर : रीना दीदी

3 weeks ago | [YT] | 6

संत भगतराज रूहानी मिशन

सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब की अगाध महिमा और एक शिष्य के आत्म-परिवर्तन के साक्षात् चमत्कार से उत्तर देना होगा।

महामंत्री उस निर्धन व्यक्ति के पास गए और शांत स्वर में बोले, "भले मानुष, कल से तुम यह भिक्षा मांगना छोड़ दो। तुम पूर्ण संत सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब की शरण में जाओ, उनके चरणों का ध्यान करो और उनके दिए नाम-मंत्र का सिमरन करो। इसके बदले मैं तुम्हें प्रतिदिन 10 स्वर्ण मुद्राएँ दूँगा।"

उस व्यक्ति के लिए यह एक आसान सौदा था। उसने सोचा, "मज़े की बात है! सतगुरु का नाम भी लो, आध्यात्मिक राह पर भी चलो और पेट भी भरो।"

वह अगले दिन से पूर्ण संत सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब की शरण लेकर, एक पुराने वटवृक्ष के नीचे बैठकर एकांत में गुरु-नाम का जाप करने लगा। शाम होती, तो महामंत्री उसे स्वर्ण मुद्राएँ थमा देते।

शुरुआत में, उस नए शिष्य का मन केवल सिक्कों की खनक में रहता था। वह बार-बार आंख खोलकर देखता कि सूरज कब डूबेगा और कब महामंत्री स्वर्ण मुद्राएँ लेकर आएंगे। लेकिन पूर्ण संत सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब का नाम और ध्यान एक ऐसी दिव्य अग्नि है, जो धीरे-धीरे भीतर के लालच, वासना और सांसारिक अज्ञान के कचरे को जला देती है। कुछ महीने बीते। अब उस शिष्य की आँखें बंद रहने लगी थीं। गुरु-मंत्र की गूंज उसके रोम-रोम में बैठने लगी। एक दिन महामंत्री स्वर्ण मुद्राएँ लेकर पहुँचे, तो शिष्य ने आँखें ही नहीं खोलीं। महामंत्री ने सिक्कों की थैली पास रख दी, लेकिन शिष्य को उसका भान ही नहीं हुआ।

सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब की असीम कृपा और आत्मिक सत्ता ने उस पर अपना दिव्य रंग चढ़ाना शुरू कर दिया था। अब उसे न भूख सताती थी, न प्यास। उसके अंतर्मन में एक अद्भुत विवेक जागा और उसने विचार किया, "कितना मूर्ख हूँ मैं! मेरे पूर्ण संत सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब पूरी सृष्टि के नियंता 'करता पुरख' को राजी करने की सामर्थ्य रखते हैं, क्या वे मेरा पेट नहीं भर सकते? मैं एक मनुष्य के चंद टुकड़ों के लिए अपने उन समर्थ गुरुदेव का अनमोल नाम क्यों बेच रहा हूँ? मुझे तो बस गुरु चरणों का ही अनुरागी बनना है।"

अगले दिन उसने महामंत्री से दो टूक कह दिया, "मंत्री जी, अब इन सिक्कों को ले जाइए। मेरा हिसाब मेरे सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब से हो गया है। जिसने मुझे यह अमूल्य जीवन और नाम-दान दिया है, अब वही मेरे रक्षक और पालनहार हैं। मुझे अब संसार के किसी धन की चाह नहीं।"

उस सच्चे शिष्य के चेहरे पर अब अलौकिक और दैवीय तेज चमक रहा था। सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब की कृपा से उसकी निष्काम गुरु-भक्ति और गुरु-आज्ञा में लीन रहने की सुगंध पूरे राज्य में फैल गई। लोग उसे एक उच्च कोटि का संत-शिष्य मानकर दूर-दूर से दर्शन करने आने लगे।

अंततः, राजा भी महामंत्री के साथ उस "महान आत्मज्ञानी संत" के दर्शन करने पहुँचे। राजा ने सोने के थाल और कीमती रेशमी वस्त्र भेंट किए, लेकिन उस महापुरुष ने उनकी ओर देखा तक नहीं। राजा ने अत्यंत श्रद्धापूर्वक उनके चरणों में अपना सिर नवा दिया। बाहर आकर राजा विस्मय से बोले, "महामंत्री! आज तक मैंने अपने जीवन में ऐसा तेजस्वी और बेपरवाह पुरुष नहीं देखा। इनके चरणों में झुकते ही मन पूरी तरह शांत हो गया।"

"ये दिव्य पुरुष कौन हैं?"

महामंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, "जहाँपनाह! यह वही 'दो कौड़ी का याचक' है जिसे आपने उस दिन महल के झरोखे से देखा था।"

राजा दंग रह गए।

महामंत्री ने आगे कहा, "महाराज! जब तक यह साधारण मनुष्य इंसानों से मांग रहा था, तब तक यह भिखारी था और काल-कर्म के चक्र में फंसा था। लेकिन जिस दिन इसने सांसारिक आसक्ति छोड़कर पूर्ण संत सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब का दामन थामा, पूर्णतः गुरु-शरणागत हुआ और खुद को उस 'परम गुरु-सत्ता' को सौंप दिया, उस दिन से यह स्वयं ब्रह्म का रूप हो गया। आज आपने एक आम मनुष्य को नहीं, बल्कि उसके भीतर प्रकट हुई गुरु-कृपा और साक्षात् परमात्मा को प्रणाम किया है।"

"जब सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब राजी हो जाते हैं, तो काल और कर्म की कोई भी बाजी इंसान को हरा नहीं सकती।"

राजा का अहंकार चूर-चूर हो गया। उन्हें समझ आ गया कि जो पूर्ण संत सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब की अनन्य शरण में होता है, दुनिया उसके चरणों में होती है।

सतगुरु श्री भगतराज जी साहिब की वाणी का परम संदेश:

"जब हम गुरुदेव को केवल सांसारिक वस्तुएं पाने का 'साधन' मानते हैं, तो हमें दुनिया की नाशवान चीजें मिलती हैं। लेकिन जब हम सतगुरु को ही अपना 'साध्य' (परम लक्ष्य) मानकर खुद को उनके चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो पूरी दुनिया हमारे पीछे चलने लगती है।"

संसार के आगे हाथ फैलाने वाला 'याचक' बनता है और गुरु-चरणों में सर्वस्व सौंपने वाला 'नायक' बन जाता है।

"मनुष्य के जीवन की सच्ची जीत वहां से शुरू होती है, जहां उसका खुद पर से भरोसा खत्म होकर अपने समर्थ गुरुदेव पर टिक जाता है।"

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3 weeks ago | [YT] | 7

संत भगतराज रूहानी मिशन

*💐 संत भगत राज 'दीपिका वाणी' 💐*

*विषय: लफ़्ज़ों का भ्रम और नाम का अमूल्य सत्य*

*राम, रहीम, वाहेगुरु, गॉड—सबमें एक ही नूर समाया,*
*भाषाओं के फेर में पड़कर, मानव ने जग भरमाया*

*नाम बदलने से सत्य न बदले, बदले केवल बोली की रीत,*
*संत भगत राज जी साहिब कहें- सच्चा नाम ही जीवन की प्रीत।*

*पानी, आब, माऊ, वाटर—चारों शब्द अलग बताए,*
*प्यास बुझाने वाला तत्व तो एक ही जल कहलाए।*

*जो शब्दों में उलझा बैठा, वह सत्य से रहा अतीत,*
*संत भगत राज जी साहिब कहें -एक ही धारा, एक ही गीत*

*मजहब, जाति, देश, भाषा—सब जग के बाहरी भेष,*
*भीतर घट-घट एक ही मालिक, वही प्रेम का दिव्य संदेश*

*जिसने भीतर झाँक लिया, वही बन गया परम पुनीत,*
*संत भगत राज जी साहिब कहें -अंतर का नाम ही है संगीत।*

*पूर्ण सतगुरु दया करें जब, खुल जाए अंतर का द्वार,*
*शब्द-सुरत का योग लगाकर, मिले अमर दरबार*

*जहाँ न कोई अपना-पराया, न रहे कोई भेद-विभेद की रीत,*
*संत भगत राज जी साहिब कहें -प्रेम ही परमात्मा की जीत।*

*कबीर की वाणी पुकार रही, छोड़ो झूठा अभिमान,*
*एक ही ज्योति से उपजे सब, एक ही सबका भगवान*

*जो नाम-रस पी ले भीतर, वही बने सदा अतीत,*
*संत भगत राज जी साहिब कहें — सच्चा नाम ही जग की जीत।*

*आओ मिलकर सत्य की राह पर, मानवता का दीप जलाएँ,*
*नफरत, द्वेष, अहंकार छोड़, प्रेम का उपवन महकाएँ*

*हर हृदय में एक ही साहिब, यही रहे जीवन की नीति,*
*संत भगत राज जी साहिब कहें — चलो चलें सत्य की ओर, यही है अमर प्रीति।*

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

*संत भगत राज रूहानी मिशन*
*दिनांक: 9 जुलाई 2026, बृहस्पतिवार*
*संदेश: "चलो चलें सत्य की ओर"*

1 month ago | [YT] | 13

संत भगतराज रूहानी मिशन

🌹🌹 शीर्षक 🌹🌹

🌴 “नाम की खोज” 🌴

निम्नलिखित वाणी में संतमत के अनुसार सच्चे “नाम” की महिमा का वर्णन किया गया है। यहाँ “नाम” का अर्थ केवल बोलने वाले शब्द या किसी देवता के बाहरी नाम से नहीं, बल्कि उस अमर, चेतन, दिव्य शक्ति से है जो जीव को काल, माया और जन्म-मरण से पार कराती है।

💐 वाणी कबीर साहिब 💐

सुन धर्मनि मैं कहौ समुझाई। एक नाम खोजो चितलाई।। जिहि सुमिरत जीव होय उबारा। जाते उतरौ भवजल पारा।। काल बीर बांका बड़ होइ। बिना नाम बांचे नही कोई।। काल गरल है तिमिर अपारा। सुमिरत नाम होय उजियारा।। काल फ़ांस डारे गल माही। नाम खड्ग काटत पल माही।। काल जंजाल हैं गरल स्वभाउ। नाम सुधारस विषय बुझाउ।। विष की लहर मतो संसारा। नही कुछ सूझे वार न पारा।। सुर नर माते नाम बिहुना। औट मुये ज्यो जल मीना।। भूल परे पाखण्ड व्यवहारा। तीरथ व्रत औ नेम अचारा।। सगुन जोग जुगति जो गावे। बिना नाम मुक्ति नही पावे।।

वाणी कबीर साहिब

सुन धर्मनि मैं कहौ समुझाई। एक नाम खोजो चितलाई।।

भावार्थ: हे धर्म को मानने वाले मनुष्यों! मैं तुम्हें समझाकर कहता हूँ कि संसार में अनेक मत, कर्मकांड और विचार हैं, परंतु तुम अपने चित्त को लगाकर उस एक सच्चे नाम की खोज करो जो आत्मा का वास्तविक आधार है।

जिहि सुमिरत जीव होय उबारा। जाते उतरौ भवजल पारा।।

भावार्थ: जिस नाम के सुमिरन से जीव का उद्धार हो जाता है और वह जन्म-मरण रूपी भवसागर से पार उतर जाता है, उसी नाम की खोज करनी चाहिए।

काल बीर बांका बड़ होइ। बिना नाम बांचे नही कोई।।

भावार्थ: काल (मृत्यु और माया की शक्ति) अत्यंत बलवान और चतुर है। इस संसार में कोई भी जीव सच्चे नाम के बिना काल से बच नहीं सकता।

काल गरल है तिमिर अपारा। सुमिरत नाम होय उजियारा।।

भावार्थ: काल का प्रभाव घोर अंधकार और विष के समान है, जिससे जीव अज्ञान में पड़ा रहता है। परंतु सच्चे नाम का स्मरण करते ही आत्मा में ज्ञान और प्रकाश उत्पन्न हो जाता है।

काल फ़ांस डारे गल माही। नाम खड्ग काटत पल माही।।

भावार्थ: काल जीव के गले में मोह, कर्म और वासना की फाँसी डाल देता है, लेकिन सच्चा नाम तलवार के समान उन बंधनों को क्षणभर में काट देता है।

काल जंजाल हैं गरल स्वभाउ। नाम सुधारस विषय बुझाउ।।

भावार्थ: काल का स्वभाव विष के समान है, जो जीव को संसारिक विषयों और भोगों में फँसाकर दुःख देता है। परंतु नाम अमृतरस है, जो विषय-विकारों की अग्नि को शांत कर देता है।

विष की लहर मतो संसारा। नही कुछ सूझे वार न पारा।।

भावार्थ: यह संसार विष की लहरों में मतवाला होकर बह रहा है। मनुष्य को न अपने कल्याण की समझ है और न ही जीवन के पार का ज्ञान।

सुर नर माते नाम बिहुना। औट मुये ज्यो जल मीना।।

भावार्थ: देवता और मनुष्य सभी नाम के बिना माया में मतवाले होकर जीवन व्यर्थ गँवा देते हैं, जैसे जल के बिना मछली तड़प-तड़प कर मर जाती है।

भूल परे पाखण्ड व्यवहारा। तीरथ व्रत औ नेम अचारा।।

🌹 भावार्थ: 🌹

लोग बाहरी आडंबर, पाखंड, तीर्थ, व्रत और केवल दिखावे वाले आचरण में उलझ गए हैं, लेकिन आत्मा के वास्तविक कल्याण का मार्ग भूल गए हैं।

सगुन जोग जुगति जो गावे। बिना नाम मुक्ति नही पावे।।

भावार्थ: चाहे कोई अनेक प्रकार के योग, साधनाएँ, देव-उपासना या धार्मिक क्रियाएँ करे, परंतु सच्चे नाम के बिना आत्मा को वास्तविक मुक्ति प्राप्त नहीं हो सकती।

🌹 समग्र संदेश 🌹

इस पूरी वाणी का सार यह है कि:

संसार का सबसे बड़ा सत्य “नाम” है। केवल बाहरी पूजा, कर्मकांड या धार्मिक दिखावा आत्मा का उद्धार नहीं कर सकता।

सच्चा नाम वही है जो जीव को काल और जन्म-मरण से मुक्त करे।

उस नाम की प्राप्ति पूर्ण सतगुरु की शरण और अंतरमुख साधना से होती है।

नाम आत्मा के भीतर प्रकाश, शांति और मुक्ति का मार्ग खोलता है।

यह वाणी जीव को बाहरी भटकाव छोड़कर आत्मिक नाम-साधना की ओर प्रेरित करती है।

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संत भगत राज रूहानी मिशन

दिनांक 17 जून, बुधवार 2026

मिशन डायरेक्टर

रीना दीदी

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संत भगतराज रूहानी मिशन

SaTSANG Aayojan 14th June 2026

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