🌿 Welcome to Zindagi Simplified – Dr Deepaak
Life complicated nahi hoti… hum use complicated bana dete hain.
Zindagi Simplified – Dr Deepaak ek aisa platform hai jahan spirituality, psychology aur practical wisdom milkar aapki life ko clear, calm aur conscious banate hain. ✨
Dr Deepaak apne 15+ saalon ke anubhav ke saath aapko chhote lekin powerful reels ke through simple life lessons, mindset shifts aur inner clarity dete hain — taaki aap apni zindagi ko samajh sakein, sudhaar sakein aur simplify kar sakein.
Yahan aapko milega:
Practical spiritual insights
Psychology-based life understanding
Inner peace & self-growth guidance
Daily life ke real issues ka simple solution
Agar aap clarity, growth aur real transformation chahte hain,
toh yeh space aapke liye hai.
Let’s simplify life… one reel at a time. 🌿✨
Spirituality Simplified by – Dr Deepak
I just hyped this awesome creator @drdeepaak
1 week ago | [YT] | 0
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Spirituality Simplified by – Dr Deepak
4 months ago | [YT] | 3
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Spirituality Simplified by – Dr Deepak
4 months ago | [YT] | 1
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Spirituality Simplified by – Dr Deepak
Happy Dipawali
11 months ago | [YT] | 0
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Spirituality Simplified by – Dr Deepak
शिव पूजन करते ही ऐसा लगा मानो समय थम गया हो ।
हर दीवार, हर दीपक, हर घंटी महादेव की महिमा सुना रही थी।।
आंखें बंद कीं तो लगा जैसे भीतर से ही कोई स्वर आ रहा हो ।
भगवान भोलेनाथ कह रहे हों डर मत, मैं तेरे साथ हूँ ।।
आज का यह अनुभव सिर्फ पूजा नहीं,
आत्मा का शिव से संवाद था।
वो पल, जब भीतर की शांति बाहर की दुनिया से बड़ी हो गई।।
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1 year ago | [YT] | 2
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Spirituality Simplified by – Dr Deepak
स्कंद पुराण में वर्णित है
“गृहद्वारे तोरणं स्थापयेत् शुभमायुष्यम्।”
“बिल्वपत्रैः, आम्रपत्रैः, पुष्पैः वा तोरणं निर्मीयते।”
जो व्यक्ति घर के मुख्य द्वार पर आम्रपत्र, बिल्वपत्र या फूलों की बंदनवार बांधता है, उसके घर में आयुष्य, ऐश्वर्य और शुभफल की वृद्धि होती है।
१. बंदनवार होता क्या है?
बंदनवार या तोरण एक प्रकार की सजावटी माला होती है जो आमतौर पर आम, अशोक या पीपल के पत्तों से फूलों, मोतियों, हल्दी-कुंकुम या कपड़े आदि से बनाई जाती है और घर के मुख्य दरवाज़े पर बांधी जाती है जो भी वस्तुए धार्मिक दृष्टि से शुभ है, तोरण बनाने में उनका उपयोग होता है।
२. तोरण या बंदनवार का महत्व ?
मुख्यद्वार को सजाने की परंपरा भारतीय संस्कृति में बहुत पुरानी है मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाना, रंगोली बनाना, ॐ बनाना, या देवी देवताओं का चित्र लगाना बहुत प्रचलित रहा है इसी के साथ त्योहारों पर या ख़ुशी के मोके पर भी बंदनवार बाँधने की परंपरा को पूजन के रूप में या शुभ शगुन के तोर पर लिया जाता है और इसके पीछे कई धार्मिक, ज्योतिषीय, आध्यात्मिक, वास्तुशास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक कारण भी होते हैं।
३. तोरण बाँधते क्यो है ?
मुख्य द्वार से ही किसी भी प्रकार की ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। बंदनवार या तोरण प्रवेश द्वार पर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और नकारात्मक को रोकता है। दरवाज़े पर बंदनवार बाँधना देवताओं के स्वागत का प्रतीक है।मान्यता ये है इसे देखकर देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और घर में शुभता और दिव्यता का वास होता है।यह सुख, समृद्धि और सौभाग्य का संकेत देता है। और जब भी कोई अतिथि आता है, तो यह स्वागत और सम्मान का प्रतीक होता है। यह नज़र दोष, अपशकुन, और नकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने से रोकता है। प्राचीन समय में तो जिस घर पर बंदनवार होता था, उस घर के मुखिया सम्मानित, साहसी और प्रतिष्ठित समझा जाता था या ये भी समझ सकते है जो भी प्रतिष्ठित होता था उस के घर के बाहर तोरण जरूर होता था। यह घर की शांति, समृद्धि और स्थायित्व को बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
*From My Book Jyotish or Dhram Charcha*
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1 year ago | [YT] | 0
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Spirituality Simplified by – Dr Deepak
दान के मुख्य प्रकार:-
सात्विक दान : बिना किसी अपेक्षा के, उचित समय और स्थान पर जो उचित लगे सात्विक श्रेणी के अनुसार कसी योग्य व्यक्ति को दान देना।
राजसी दान : फल की कामना से या बदले में कुछ पाने के उद्देश्य से दान देना।
तामसिक दान: अज्ञानता, अयोग्य व्यक्ति को, या अनुचित तरीके से दान देना।
स्थूल दान:- (देह स्तर):- ऐसा दान जो किसी वस्तु का किया जाये अन्नदान, जलदान, औषधिदान, पुस्तक दान, कपडा दान इत्यादि
स्थूल दान शरीर के दुख दूर करता है जरूरते पूरी करता है जिससे तत्कालिक शांति मिलती है।
सूक्ष्म दान (मन स्तर):- क्षमा दान, स्नेह दान,अभय दान
इससे मन निर्मल होता है और कर्मों की ग्रंथि टूटती है।
आत्मिक दान (आत्मा स्तर):- ज्ञान दान, ध्यान दान, प्राण दान
इससे आत्मा का उत्थान होता है, इससे जन्म-जन्मांतर के बंधन कटते हैं।
दान का मात्र अर्थ सिर्फ देना, त्यागना या छोड़ना नहीं इसका वास्तविक अर्थ है
देह स्तर पर: वस्तु त्यागो।
मन स्तर पर: अहंकार त्यागो।
आत्मा स्तर पर: मै का भाव त्यागो।
1 year ago | [YT] | 5
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1 year ago | [YT] | 0
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1 year ago | [YT] | 0
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1 year ago | [YT] | 0
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