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🚩🙏Pandit Abhishek Mishra (shastri)🚩🙏
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उत्तर प्रदेश
मेरे चैनल का एक मात्र उद्देश्य वैदिक परम्परा को आगे बढ़ाना मात्र है | आज के व्यस्त जीवन में न तो संस्कृत स्तोत्र ,वेद मन्त्र आदि सिखाने वालों के पास इतना समय है ना ही सीखने वालों के पास | मन में बहुत पीड़ा अनुभव होती है कि इस कलिकाल में सभी वर्ण विशेषकर ब्राह्मण वैदिक परम्परा और धार्मिक ग्रंथों से विमुख हो रहे है | इसे ही ध्यान में रखकर सोशियल मीडिया के सशक्त माध्यम यूट्यूब की मदद से रुद्री और विभिन्न स्तोत्रों को अपलोड करने की इच्छा उत्पन्न हुई जिसे गुरु महाराज की असीम कृपा से आप लोगों की सेवार्थ धीरे धीरे कुछ न कुछ अपलोड कर रहा हूँ |
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🙏🚩 JAI SIYA RAM 🚩🙏
Pandit Abhishek Ji
🕉️ हर हर महादेव 🕉️
🌿 आप सभी को पावन श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌿
श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। इस पवित्र माह में भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
🌺 श्रावण मास की महिमा
🔱 श्रावण मास में भगवान शिव का रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, पंचामृताभिषेक एवं बिल्वपत्र अर्पण का विशेष महत्व है।
🔱 इस माह में सोमवार का व्रत रखने से उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, उत्तम दांपत्य जीवन तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🔱 महामृत्युंजय मंत्र, ॐ नमः शिवाय मंत्र, रुद्राष्टाध्यायी, शिव चालीसा तथा शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।
🔱 श्रावण मास में दान-पुण्य, गौसेवा, अन्नदान, वस्त्रदान तथा जरूरतमंदों की सेवा करने से अनेक गुना पुण्य की प्राप्ति होती है।
🌸 श्रावण मास में क्या-क्या करें?
✅ प्रतिदिन प्रातः स्नान करके भगवान शिव का पूजन करें।
✅ शिवलिंग पर गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद, घी एवं शक्कर से अभिषेक करें।
✅ बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प, अक्षत एवं चंदन अर्पित करें।
✅ "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
✅ महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
✅ सोमवार का व्रत रखें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।
✅ शिव मंदिर जाकर दीपक जलाएँ और आरती करें।
✅ गरीबों, गौशाला एवं मंदिर में अपनी श्रद्धा अनुसार दान करें।
✅ क्रोध, अहंकार, निंदा, असत्य एवं नशे से दूर रहें।
🚩 श्रावण मास में क्या न करें?
❌ तामसिक भोजन, मांस, मदिरा एवं नशे का सेवन न करें।
❌ किसी का अपमान, झूठ, छल-कपट और हिंसा से बचें।
❌ शिव पूजन में केतकी का फूल एवं हल्दी शिवलिंग पर अर्पित न करें।
🌺 भगवान शिव का संदेश
"जो भक्त श्रद्धा, विश्वास और सच्चे मन से श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं तथा भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।"
🕉️ हर हर महादेव • ॐ नमः शिवाय 🕉️
━━━━━━━━━━━━━━━━━━
‼️आचार्य अभिषेक मिश्रा‼️
यदि आपको यह संदेश शुभ लगा हो तो कृपया अपने परिवार, मित्रों एवं सभी शिवभक्तों तक अवश्य पहुँचाएँ। 🙏
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1 week ago | [YT] | 3
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Pandit Abhishek Ji
अति दुर्लभ एक ग्रंथ ऐसा भी है हमारे सनातन धर्म मे
इसे तो सात आश्चर्यों में से पहला आश्चर्य माना जाना चाहिए ---🚩
यह है दक्षिण भारत का एक ग्रन्थ
क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो राम कथा के रूप में पढ़ी जाती है और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े
तो कृष्ण कथा के रूप में होती है ।
जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है।
इस ग्रन्थ को
‘अनुलोम-विलोम काव्य’ भी कहा जाता है। पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे
पढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है और
विपरीत (उल्टा) क्रम में पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन कृष्णकथा (उल्टे यानी विलोम)के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60 श्लोक।
पुस्तक के नाम से भी यह प्रदर्शित होता है, राघव (राम) + यादव (कृष्ण) के चरित को बताने वाली गाथा है ~ "राघवयादवीयम।"
उदाहरण के तौर पर पुस्तक का पहला श्लोक हैः
वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥
अर्थातः
मैं उन भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम करता हूं, जो
जिनके ह्रदय में सीताजी रहती है तथा जिन्होंने अपनी पत्नी सीता के लिए सहयाद्री की पहाड़ियों से होते हुए लंका जाकर रावण का वध किया तथा वनवास पूरा कर अयोध्या वापिस लौटे।
अब इस श्लोक का विलोमम्: इस प्रकार है
सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥
अर्थातः
मैं रूक्मिणी तथा गोपियों के पूज्य भगवान श्रीकृष्ण के
चरणों में प्रणाम करता हूं, जो सदा ही मां लक्ष्मी के साथ
विराजमान है तथा जिनकी शोभा समस्त जवाहरातों की शोभा हर लेती है।
" राघवयादवीयम" के ये 60 संस्कृत श्लोक इस प्रकार हैं:-
राघवयादवीयम् रामस्तोत्राणि
वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥
विलोमम्:
सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥
साकेताख्या ज्यायामासीद्याविप्रादीप्तार्याधारा ।
पूराजीतादेवाद्याविश्वासाग्र्यासावाशारावा ॥ २॥
विलोमम्:
वाराशावासाग्र्या साश्वाविद्यावादेताजीरापूः ।
राधार्यप्ता दीप्राविद्यासीमायाज्याख्याताकेसा ॥ २॥
कामभारस्स्थलसारश्रीसौधासौघनवापिका ।
सारसारवपीनासरागाकारसुभूरुभूः ॥ ३॥
विलोमम्:
भूरिभूसुरकागारासनापीवरसारसा ।
कापिवानघसौधासौ श्रीरसालस्थभामका ॥ ३॥
रामधामसमानेनमागोरोधनमासताम् ।
नामहामक्षररसं ताराभास्तु न वेद या ॥ ४॥
विलोमम्:
यादवेनस्तुभारातासंररक्षमहामनाः ।
तां समानधरोगोमाननेमासमधामराः ॥ ४॥
यन् गाधेयो योगी रागी वैताने सौम्ये सौख्येसौ ।
तं ख्यातं शीतं स्फीतं भीमानामाश्रीहाता त्रातम् ॥ ५॥
विलोमम्:
तं त्राताहाश्रीमानामाभीतं स्फीत्तं शीतं ख्यातं ।
सौख्ये सौम्येसौ नेता वै गीरागीयो योधेगायन् ॥ ५॥
मारमं सुकुमाराभं रसाजापनृताश्रितं ।
काविरामदलापागोसमावामतरानते ॥ ६॥
विलोमम्:
तेन रातमवामास गोपालादमराविका ।
तं श्रितानृपजासारंभ रामाकुसुमं रमा ॥ ६॥
रामनामा सदा खेदभावे दया-वानतापीनतेजारिपावनते ।
कादिमोदासहातास्वभासारसा-मेसुगोरेणुकागात्रजे भूरुमे ॥ ७॥
विलोमम्:
मेरुभूजेत्रगाकाणुरेगोसुमे-सारसा भास्वताहासदामोदिका ।
तेन वा पारिजातेन पीता नवायादवे भादखेदासमानामरा ॥ ७॥
सारसासमधाताक्षिभूम्नाधामसु सीतया ।
साध्वसाविहरेमेक्षेम्यरमासुरसारहा ॥ ८॥
विलोमम्:
हारसारसुमारम्यक्षेमेरेहविसाध्वसा ।
यातसीसुमधाम्नाभूक्षिताधामससारसा ॥ ८॥
सागसाभरतायेभमाभातामन्युमत्तया ।
सात्रमध्यमयातापेपोतायाधिगतारसा ॥ ९॥
विलोमम्:
सारतागधियातापोपेतायामध्यमत्रसा ।
यात्तमन्युमताभामा भयेतारभसागसा ॥ ९॥
तानवादपकोमाभारामेकाननदाससा ।
यालतावृद्धसेवाकाकैकेयीमहदाहह ॥ १०॥
विलोमम्:
हहदाहमयीकेकैकावासेद्ध्वृतालया ।
सासदाननकामेराभामाकोपदवानता ॥ १०॥
वरमानदसत्यासह्रीतपित्रादरादहो ।
भास्वरस्थिरधीरोपहारोरावनगाम्यसौ ॥ ११॥
विलोमम्:
सौम्यगानवरारोहापरोधीरस्स्थिरस्वभाः ।
होदरादत्रापितह्रीसत्यासदनमारवा ॥ ११॥
यानयानघधीतादा रसायास्तनयादवे ।
सागताहिवियाताह्रीसतापानकिलोनभा ॥ १२॥
विलोमम्:
भानलोकिनपातासह्रीतायाविहितागसा ।
वेदयानस्तयासारदाताधीघनयानया ॥ १२॥
रागिराधुतिगर्वादारदाहोमहसाहह ।
यानगातभरद्वाजमायासीदमगाहिनः ॥ १३॥
विलोमम्:
नोहिगामदसीयामाजद्वारभतगानया ।
हह साहमहोदारदार्वागतिधुरागिरा ॥ १३॥
यातुराजिदभाभारं द्यां वमारुतगन्धगम् ।
सोगमारपदं यक्षतुंगाभोनघयात्रया ॥ १४॥
विलोमम्:
यात्रयाघनभोगातुं क्षयदं परमागसः ।
गन्धगंतरुमावद्यं रंभाभादजिरा तु या ॥ १४॥
दण्डकां प्रदमोराजाल्याहतामयकारिहा ।
ससमानवतानेनोभोग्याभोनतदासन ॥ १५॥
विलोमम्:
नसदातनभोग्याभो नोनेतावनमास सः ।
हारिकायमताहल्याजारामोदप्रकाण्डदम् ॥ १५॥
सोरमारदनज्ञानोवेदेराकण्ठकुंभजम् ।
तं द्रुसारपटोनागानानादोषविराधहा ॥ १६॥
विलोमम्:
हाधराविषदोनानागानाटोपरसाद्रुतम् ।
जम्भकुण्ठकरादेवेनोज्ञानदरमारसः ॥ १६॥
सागमाकरपाताहाकंकेनावनतोहिसः ।
न समानर्दमारामालंकाराजस्वसा रतम् ॥ १७ विलोमम्:
तं रसास्वजराकालंमारामार्दनमासन ।
सहितोनवनाकेकं हातापारकमागसा ॥ १७॥
तां स गोरमदोश्रीदो विग्रामसदरोतत ।
वैरमासपलाहारा विनासा रविवंशके ॥ १८॥
विलोमम्:
केशवं विरसानाविराहालापसमारवैः ।
ततरोदसमग्राविदोश्रीदोमरगोसताम् ॥ १८॥
गोद्युगोमस्वमायोभूदश्रीगखरसेनया ।
सहसाहवधारोविकलोराजदरातिहा ॥ १९॥
विलोमम्:
हातिरादजरालोकविरोधावहसाहस ।
यानसेरखगश्रीद भूयोमास्वमगोद्युगः ॥ १९॥
हतपापचयेहेयो लंकेशोयमसारधीः ।
राजिराविरतेरापोहाहाहंग्रहमारघः ॥ २०॥
विलोमम्:
घोरमाहग्रहंहाहापोरातेरविराजिराः ।
धीरसामयशोकेलं यो हेये च पपात ह ॥ २०॥
ताटकेयलवादेनोहारीहारिगिरासमः ।
हासहायजनासीतानाप्तेनादमनाभुवि ॥ २१॥
विलोमम्:
विभुनामदनाप्तेनातासीनाजयहासहा ।
ससरागिरिहारीहानोदेवालयकेटता ॥ २१॥
भारमाकुदशाकेनाशराधीकुहकेनहा ।
चारुधीवनपालोक्या वैदेहीमहिताहृता ॥ २२॥
विलोमम्:
ताहृताहिमहीदेव्यैक्यालोपानवधीरुचा ।
हानकेहकुधीराशानाकेशादकुमारभाः ॥ २२॥
हारितोयदभोरामावियोगेनघवायुजः ।
तंरुमामहितोपेतामोदोसारज्ञरामयः ॥ २३॥
विलोमम्:
योमराज्ञरसादोमोतापेतोहिममारुतम् ।
जोयुवाघनगेयोविमाराभोदयतोरिहा ॥ २३॥
भानुभानुतभावामासदामोदपरोहतं ।
तंहतामरसाभक्षोतिराताकृतवासविम् ॥ २४॥
विलोमम्:
विंसवातकृतारातिक्षोभासारमताहतं ।
तं हरोपदमोदासमावाभातनुभानुभाः ॥ २४॥
हंसजारुद्धबलजापरोदारसुभाजिनि ।
राजिरावणरक्षोरविघातायरमारयम् ॥ २५॥
विलोमम्:
यं रमारयताघाविरक्षोरणवराजिरा ।
निजभासुरदारोपजालबद्धरुजासहम् ॥ २५॥
सागरातिगमाभातिनाकेशोसुरमासहः ।
तंसमारुतजंगोप्ताभादासाद्यगतोगजम् ॥ २६॥
विलोमम्:
जंगतोगद्यसादाभाप्तागोजंतरुमासतं ।
हस्समारसुशोकेनातिभामागतिरागसा ॥ २६॥
वीरवानरसेनस्य त्राताभादवता हि सः ।
तोयधावरिगोयादस्ययतोनवसेतुना ॥ २७॥
विलोमम्
नातुसेवनतोयस्यदयागोरिवधायतः ।
सहितावदभातात्रास्यनसेरनवारवी ॥ २७॥
हारिसाहसलंकेनासुभेदीमहितोहिसः ।
चारुभूतनुजोरामोरमाराधयदार्तिहा ॥ २८॥
विलोमम्
हार्तिदायधरामारमोराजोनुतभूरुचा ।
सहितोहिमदीभेसुनाकेलंसहसारिहा ॥ २८॥
नालिकेरसुभाकारागारासौसुरसापिका ।
रावणारिक्षमेरापूराभेजे हि ननामुना ॥ २९॥
विलोमम्:
नामुनानहिजेभेरापूरामेक्षरिणावरा ।
कापिसारसुसौरागाराकाभासुरकेलिना ॥ २९॥
साग्र्यतामरसागारामक्षामाघनभारगौः ॥
निजदेपरजित्यास श्रीरामे सुगराजभा ॥ ३०॥
विलोमम्:
भाजरागसुमेराश्रीसत्याजिरपदेजनि ।स
गौरभानघमाक्षामरागासारमताग्र्यसा ॥ ३०॥
॥ इति श्रीवेङ्कटाध्वरि कृतं श्री ।।
कृपया अपना थोड़ा सा कीमती वक्त निकाले और उपरोक्त श्लोको को गौर से अवलोकन करें कि यह दुनिया में कहीं भी ऐसा न पाया जाने वाला ग्रंथ है ।
जय श्रीकृष्ण ....🙏
🚩 सनातन संस्कृति का वैभव असीम है। गर्व से कहिए — जय श्रीराम! जय श्रीकृष्ण! 🙏
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1 month ago | [YT] | 8
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Pandit Abhishek Ji
फेसबुक पोस्ट के लिए यह स्क्रिप्ट और बधाई संदेश उपयोग कर सकते हैं:
🌺🚩 निर्जला एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🚩🌺
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पावन निर्जला एकादशी का यह महापर्व भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से निर्जला एकादशी का व्रत करता है, उसे वर्ष भर की समस्त एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।
🙏 भगवान लक्ष्मी-नारायण आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति, आरोग्य और वैभव प्रदान करें।
✨ आइए, इस पावन दिवस पर भगवान श्रीहरि का स्मरण करें, धर्म के मार्ग पर चलें और अपने जीवन को मंगलमय बनाएं।
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
आप सभी को निर्जला एकादशी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
— आचार्य अभिषेक मिश्रा
कानपुर नगर
📞 9651896220
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1 month ago | [YT] | 8
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Pandit Abhishek Ji
🙏 परम एकादशी 2026 | व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त एवं पारण समय | भगवान विष्णु की विशेष कृपा 🌼
📅 एकादशी: 11 जून, गुरुवार
⏰ पारण: 12 जून सुबह 5:15 से 9:36 बजे तक
परम एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश, धन-धान्य की वृद्धि और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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1 month ago | [YT] | 15
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Pandit Abhishek Ji
🌕 पुरुषोत्तमी पूर्णिमा 2026: स्नान, दान और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का दिव्य अवसर 🙏
‼️ ॥ श्री हरि ॥ ‼️
आप सभी को पुरुषोत्तमी पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। 🌺
इस पावन पूर्णिमा के दिन स्नान, दान, जप, तप एवं भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
भगवान श्रीहरि आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं खुशियां प्रदान करें। 🙏
✨ आचार्य अभिषेक मिश्रा
📍 कानपुर नगर
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2 months ago | [YT] | 11
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Pandit Abhishek Ji
🙏🌹आप सभी को
‼️ कमला (पद्मिनी) एकादशी व्रत ‼️
की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🙏
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2 months ago | [YT] | 18
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Pandit Abhishek Ji
*राधे - राधे ॥ आज का भगवद् चिंतन ॥*
17 मई 2026
🌟 || पुरुषोत्तम मास महिमा || 🌟
पुरुषोत्तम मास स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीहरि का ही स्वरूप है। इस मल मास को स्वयं भगवान ने अपना लोक मंगलकारी नाम प्रदान करके पुरुषोत्तम मास बनाकर कलिकाल में लोकमंगल हेतु प्रतिष्ठित किया है। इस पावन मास में किया गया कोई भी सद्कर्म निश्चित ही अक्षय पुण्य फल प्रदायक हमारे शास्त्रों में बताया गया है। इस मास की एक विशेषता यह भी है, कि इसमें किया गया न्यून पुण्य कर्म भी अनंत गुना अधिक फलदायी होता है इसीलिए इसको *अधिक मास* के नाम से भी जाना जाता है।
यत्किञ्चित्कुरुते धर्मं पुरुषोत्तममासके।
तदक्षयं भवेत्सर्वं न अत्र कार्या विचारणा॥
मास पर्यंत इस पावन अवधि में यथा सामर्थ्य किसी श्रेष्ठ नियम का निष्ठापूर्वक पालन करके इस सौभाग्यशाली अवसर का लाभ लेकर अपने स्वयं के कल्याण के साथ-साथ अपने पितरों व पूर्वजों की सद्गति मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं। इस पावन पुरुषोत्तम मास में प्रभु नाम का जप, कीर्तन, सुमिरण, दान, गंगा स्नान व दीपदान के साथ-साथ श्रीमद्भागवत, श्रीराम चरित मानस, श्रीमद्भगवद्गीता सहित अन्य सद्ग्रंथों का यथा संभव पाठ करते हुए इस समय को सफल करते हुए अपने जीवन को सार्थक करें।🖋️
Acharya Abhishek Mishra
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2 months ago | [YT] | 19
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Pandit Abhishek Ji
🙏आप सभी को "ज्येष्ठ अमावस्या" की हार्दिक शुभकामनाएं...🙏
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2 months ago | [YT] | 10
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Pandit Abhishek Ji
🙏आप सभी माताओं व बहनों को सुख,समृद्धि और सौभाग्य के प्रतीक वट सावित्री व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं....🌹🌹
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2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई को मनाया जा रहा है।
2 months ago | [YT] | 10
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Pandit Abhishek Ji
Ekadashi vrat
2 months ago | [YT] | 12
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