Ayaansh Xplore एक ऐसा YouTube चैनल है जहाँ हम
देश, समाज, राजनीति, सच्ची ख़बरें, मोटिवेशन और इंसानियत को एक साथ एक्सप्लोर करते हैं।
यह चैनल किसी पार्टी, धर्म या विचारधारा का नहीं है।
यह चैनल है सच, सवाल और समझदारी का।
हम यहाँ बात करते हैं:
🇮🇳 भारत और देश से जुड़े अहम मुद्दों की
📰 आस-पास और राष्ट्रीय स्तर की सच्ची ख़बरों की
🗳️ राजनीति को आम आदमी की नज़र से समझने की
💪 युवाओं और आम लोगों के लिए मोटिवेशन की
🤝 भाईचारे, एकता और इंसानियत की
Ayaansh Xplore का मक़सद है: 👉 लोगों को जोड़ना, तोड़ना नहीं
👉 नफ़रत फैलाना नहीं, सच दिखाना
👉 अंधभक्ति नहीं, जागरूकता
अगर आप: ✔ सच्ची और ज़मीनी बात सुनना चाहते हैं
✔ देश और समाज को समझना चाहते हैं
✔ बिना डर सवाल पूछना चाहते हैं
✔ मिल-जुल कर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं
तो Ayaansh Xplore आपके लिए है।
🔥 हमारा नारा
“ना नफ़रत, ना झूठ – सिर्फ़ सच”
📢 Disclaimer
इस चैनल पर दी गई बातें जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से होती हैं।
हम किसी भी प्रकार की हिंसा, नफ़रत या भेदभाव का समर्थन नहीं करते।
👉 Subscribe करें – सच को एक्सप्लोर करने के लिए
Ayaansh Xplore
6 months ago | [YT] | 2
View 0 replies
Ayaansh Xplore
📰 मुख्य न्यायाधीश बोले – मातृभाषा में शिक्षा से मिलती है असली समझ
6 जुलाई, रविवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने एक कार्यक्रम में कहा —
“मातृभाषा में पढ़ाई करने से विषय की गहराई समझ में आती है, और जीवनभर साथ रहने वाले मूल्य बनते हैं।”
उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद मराठी माध्यम से शिक्षा ली, और वही उनकी सफलता की नींव बनी।
सीजेआई बोले —
“मैं जो भी हूं, उसमें मेरे स्कूल और मराठी माध्यम की भूमिका बहुत बड़ी है।”
🧠 ये बयान ऐसे वक्त पर आया है जब महाराष्ट्र में हिंदी पर राजनीति गरम है।
महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल 2024 में एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी कर कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया था।
इस फैसले का विपक्षी दलों ने जबरदस्त विरोध किया —
उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की MNS ने इसे मराठी अस्मिता पर हमला बताया।
बाद में सरकार ने नियम में ढील दी, लेकिन 29 जून को GR को पूरी तरह वापस ले लिया।
🧑⚖️ CJI का यह बयान प्रतीकात्मक क्यों है?
गवई ने अपने पुराने स्कूल में कहा —
“मैं मराठी में पढ़ा, यही मेरी ताक़त बनी।
मंच पर बोलना यहीं से सीखा, आत्मविश्वास यहीं से मिला।”
उन्होंने भाषण मराठी में ही दिया और कहा —
“ये महाराष्ट्र है — मराठी ही बोलूंगा।”
⚔️ राजनीति में मराठी बनाम हिंदी की गूंज
6 जुलाई को ही राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे 20 साल बाद एक ही मंच पर आए।
दोनों ने बीजेपी पर राज्य को भाषाई आधार पर बांटने का आरोप लगाया।
राज ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा:
“जो काम बालासाहेब नहीं कर पाए, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया —
उन्होंने हमें साथ ला दिया।”
🎯 मुद्दा सिर्फ भाषा का नहीं — पहचान और आत्मसम्मान का है।
क्या मातृभाषा में पढ़ाई करना पिछड़ापन है?
या यही असली ज्ञान की जड़ है?
आपका क्या मानना है?
कमेंट में बताइए — और जुड़िए "TRUE INDIA ECHOES" से।
#IndianJudiciary
#ChiefJusticeOfIndia
#LanguagePolitics
#EducationPolicyIndia
#MotherTongueMatters
#CJIJusticeGavai
#MaharashtraPolitics
#RajThackeray
#UddhavThackeray
#HindiImposition
#MarathiIdentity
#TrueIndiaEchoes
#YouthAwakening
#VoiceOfIndia
@AyaanshXplore
6 months ago | [YT] | 0
View 0 replies
Ayaansh Xplore
🎯 टॉपिक: "बिहार में वोटर लिस्ट रिविज़न पर बवाल – क्या करोड़ों लोग वोट देने से वंचित हो जाएंगे?"
✍️ सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 7 जुलाई को बिहार में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए "स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न" यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की सहमति दे दी है।
यह याचिकाएं कई प्रमुख नेताओं और संगठनों ने मिलकर दाखिल की हैं — जिनमें राजद सांसद मनोज झा, ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स), PUCL, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा शामिल हैं।
🔍 याचिकाकर्ताओं की चिंता क्या है?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि:
> "अगर कोई मतदाता तय दस्तावेज़ नहीं दे पाता, तो उसका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा — चाहे वो पिछले 20 सालों से लगातार वोट क्यों न दे रहा हो।"
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस प्रक्रिया से लगभग 4 करोड़ लोग प्रभावित हो सकते हैं, खासकर गरीब और हाशिए के समुदायों से आने वाले नागरिक।
⚠️ कौन से दस्तावेज़ माने जा रहे हैं ‘अमान्य’?
वकीलों ने बताया कि चुनाव आयोग ने आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड को भी मान्य दस्तावेज़ नहीं माना, जिससे इतनी कम समय-सीमा में फॉर्म भर पाना लगभग नामुमकिन हो गया है।
📢 वरिष्ठ वकीलों की दलील:
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, शादान फरासत और गोपाल शंकरणारायणन ने कोर्ट में कहा:
> "24 जून की अधिसूचना करोड़ों गरीब और ग्रामीण मतदाताओं पर जबरदस्ती की गई समयसीमा थोपती है। उनसे ऐसे दस्तावेज़ मांगे जा रहे हैं जो उनके पास नहीं हैं।"
सिब्बल ने कोर्ट से मांग की कि चुनाव आयोग से पूछा जाए कि इतनी जल्दी में यह प्रक्रिया शुरू करने की क्या जरूरत थी — और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी नागरिक बिना वजह अपने वोटिंग अधिकार से वंचित न हो।
📌 क्या कहता है चुनाव आयोग?
चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक देशव्यापी प्रक्रिया है, जिसकी शुरुआत बिहार से की जा रही है, और बाकी राज्यों में आगे इसकी घोषणा होगी।
🧾 पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का सवाल:
इस मुद्दे पर पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा:
"2003 की वोटर लिस्ट को ही आधार क्यों माना जा रहा है? उसके बाद भी कई बार लिस्ट अपडेट हुई है।"
"जब भारत में नागरिकता का कोई आधिकारिक दस्तावेज़ ही नहीं होता, तो क्या चुनाव आयोग के पास नागरिकता साबित करवाने का अधिकार है?"
लवासा ने साफ कहा कि:
> "चुनाव आयोग पहले सिर्फ दस्तावेज़ी साक्ष्य और फिजिकल वेरिफिकेशन के आधार पर नाम जोड़ता रहा है — तो अब अचानक ऐसा नया नियम क्यों जो लोगों को वोटिंग से बाहर कर दे?"
🧑⚖️ अगली सुनवाई कब?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और अटॉर्नी जनरल को याचिका की प्रतियां सौंपें। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।
🎯 सबसे बड़ा सवाल:
क्या वोटर लिस्ट के नाम पर गरीबों और ग्रामीण भारत के मताधिकार को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है?
क्या आपको लगता है कि यह प्रक्रिया नागरिकता जाँच की आड़ में डर फैलाने और छंटनी का जरिया बन सकती है?
👇 कमेंट में बताइए — क्या ये सही दिशा है या लोकतंत्र के लिए खतरा?
🔔 और ऐसे ही ज़रूरी मुद्दों की सच्चाई के लिए TRUE INDIA ECHOES को फ़ॉलो करना न भूलें l
#biharelection2025 #biharnewstoday #trueindiaechoes True India Echoes
6 months ago | [YT] | 0
View 0 replies