Ismail Batliwala

इस्माईल बाटलीवाला ने यूट्यूब चैनल को इसलिए बनाया है ताकि देशवासियों को इन नीतिओं कि जानकारी दे सकूँ।
1) भारत कि धर्मनीति कि जानकारी के लिए।
2) भारत कि अधर्मनिति कि जानकारी के लिए।
3) भारत कि राजनीति कि जानकारी के लिए।
4) भारत कि समाजनीति कि जानकारी के लिए।
5) भारत कि व्यापारनीति कि जानकारी के लिए।
6) भारत कि रोज़गारनीति कि जानकारी के लिए।
7) भारत कि वक्फ़ की ज़मीनों कि जानकारी के लिए।
8) भारत में अलगाववाद को रोकने के लिए।
9) भारत में देशवासियों को उनके अधिकार बताने के लिए।
10) भारत में इत्तेहाद कायम करके नफ़रत, घृणा, में कमी लाने के लिए।
11) भारत कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) कि जानकारी के लिए।


Ismail Batliwala

भारत में संगमरमर के पत्थर से बनी इमारतों,पूजा स्थलों और लोहा लक्कड़ से बने जीवन घातक हत्यारों
को अक्सर लोग देश कि तरक्की कहते हैं जब कि इस्माईल बाटलीवाला कि खोज में यह 100% झूठ है।

देश कि तरक्की उसको कहते हैं।

(1)देश में भुखमरी खतम हो जाए,

(2)देश में भ्रष्टाचार खत्म हो जाए,

(3)देश में भेद भाव खत्म हो जाए,

(4)देश में ऊंच नीच खतम हो जाए,

(5)देश में सामाजिक बुराई खतम हो जाए,

(6)देश में सब लोग तालीम याफ्ता हो जाएं,

(7)देश में जियो और जीने दो कि प्रथा कायम हो जाए,

(8)देश में बे-रोजगारी खतम हो जाए,

(9)देश में हर किसी के असुरक्षा का डर खत्म हो जाए,

(10)देश के सभी मैदान में काम करने वाले लोग अपने अपने पेशा में ईमानदार हो जाएं।

इस्माईल बाटलीवाला

2 days ago | [YT] | 0

Ismail Batliwala

#चोरी_का_माल_है,* इस्माईल बाटलीवाला का नही है।
"""""""""""""""""
हिसाब किताब सिर्फ़ ऊपर वाले ने ही सही लगाया है,

सबको खाली हाथ भेजा है और खाली हाथ ही बुलाया है.

1 week ago | [YT] | 1

Ismail Batliwala

फ़ैज़ साहब की पूरी ग़ज़ल-

*ऐ नये साल बता, तुझ में* *नयापन क्या है?*
*हर तरफ ख़ल्क ने क्यों शोर मचा रखा है?*

*रौशनी दिन की वही, तारों भरी रात वही,*
*आज हमको नज़र आती है हर बात वही।*

*आसमां बदला है अफसोस, ना बदली है जमीं,*
*एक हिन्दसे का बदलना कोई जिद्दत तो नहीं।*

*अगले बरसों की तरह होंगे करीने तेरे,*
*किसे मालूम नहीं बारह महीने तेरे।*

*जनवरी, फरवरी और मार्च में पड़ेगी सर्दी,*
*और अप्रैल, मई, जून में होवेगी गर्मी।*

*तेरे मान-दहार में कुछ खोएगा कुछ पाएगा,*
*अपनी मय्यत बसर करके चला जाएगा।*

*तू नया है तो दिखा सुबह नयी, शाम नई,*
*वरना इन आंखों ने देखे हैं नए साल कई।*

*बेसबब देते हैं क्यों लोग मुबारक बादें,*
*गालिबन भूल गए वक्त की कडवी यादें।*

*तेरी आमद से घटी उमर जहां में सभी की,*
*‘फैज’ नयी लिखी है यह नज्म निराले ढब की।*

(खल्क – दुनिया,
हिन्दसे – गणित गिनती,
जिद्दत – नयी बात,
करीने – ढ़ंग,
मान-दहार – समय अंतराल,
ग़ालिबन – शायद,
आमद – आने से)

2 weeks ago | [YT] | 2

Ismail Batliwala

اسی طرح اب بے روزگاری کی حقیقت کا بھی پوسٹ مارٹم ضروری ہے 🔍

📢 یہ صرف ایک بیان نہیں،
بلکہ ایک انکشاف اور سنجیدہ بحث کی شروعات ہے

🤔 آپ کیا سوچتے ہیں؟
اپنی رائے ضرور دیں 👇

✍️ اسماعیل باٹلی والا
📱 واٹس ایپ: 9029341778

2 weeks ago | [YT] | 2

Ismail Batliwala

हमारी कोई राजनीतिक पार्टी,तंजीम और संस्था नही है और किसी पार्टी तंजीम और संस्था का मेंबर भी नही हूं।

हम विचारों और अनुभावों कि मुहीम चला रहे हैं और इस मुहीम के लिए पार्टी,तंजीम और संस्था कि जरूरत नही होती है क्यों कि पार्टी,तंजीम और संस्था के सीमाएँ होती हैं और मुहीम कि सीमाएँ नही होती हैं।

इस्माईल बाटलीवाला

3 weeks ago | [YT] | 3

Ismail Batliwala

नदि किनारे बुढ़िया बैठी, कर्जा लय-लय खाये,

कर्जा वाले कर्जा मांगे, नदीम घिसक के जाय।

#इस_दोहे_को_कौन_कौन_जानते_हैं_और_किस_भाषा_में_है?

इस्माईल बाटलीवाला

3 weeks ago | [YT] | 1

Ismail Batliwala

#राजनीति_दुनिया_कि_सबसे_बड़ी_इंडस्ट्री_है

(1) इस के दरवाजे कभी बंद नही होते हैं।

(2) इसके प्रोडक्ट हर वक्त बदलते रहते हैं।

(3) इसके सेल्समैन हर वक्त बदलते रहते हैं।

(4) इसकि मार्केटिंग के तरीके हर वक्त बदलते रहते हैं।

(5) इसके ग्राहक
हर वक्त बदलते रहते हैं।

सिर्फ जोशीली तकरीरों,जोशीले नारों,और तोड़ फोड़,और धींगामुश्ती करने वाले आंदोलनों से इतनी बड़ी इंडस्ट्री को चलाना मुमकिन नही होगा।

इस्माईल बाटलीवाला

3 weeks ago | [YT] | 0

Ismail Batliwala

सालार-ए-मिल्लत हैं,
हकीम-ए-मिल्लत हैं,
नकीब-ए-मिल्लत हैं,
कायद-ए-मिल्लत हैं,
हबीब-ए-मिल्लत हैं,
मसीह-ए-मिल्लत हैं,
गाज़ी-ए- मिल्लत हैं.

इन सब की नालायकी के कारण ज़िल्लत में मिल्लत है।

इस्माईल बाटलीवाला

1 month ago | [YT] | 3