“Itihaas ke Panne 16” भारत के गौरवशाली इतिहास, प्राचीन सभ्यताओं, पौराणिक कथाओं और अनसुने रहस्यों को सरल व रोचक तरीके से प्रस्तुत करने वाला एक हिंदी चैनल है।
यहाँ आपको मिलता है –
✔ भारत का प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास
✔ रामायण–महाभारत से जुड़े तथ्य
✔ सरस्वती नदी, हड़प्पा–मोहनजोदड़ो और वैदिक सभ्यता के रहस्य
✔ मुगल, मौर्य, गुप्त, मराठा, चोल जैसे महान साम्राज्यों की कहानियाँ
✔ वीर योद्धाओं, राजाओं और रानियों के जीवन की अद्भुत गाथाएँ
✔ दुनिया के इतिहास और सभ्यताओं की दिलचस्प जानकारी
हमारा उद्देश्य है: सत्य, प्रमाण और शोध आधारित इतिहास सब तक पहुँचाना।
अगर आपको इतिहास, संस्कृति और पुराणों की असली कहानियाँ जानना पसंद है, तो यह चैनल आपके लिए ही बना है।
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Itihaas Ke Panne 16
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3 months ago | [YT] | 1
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4 months ago | [YT] | 1
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5 months ago | [YT] | 3
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Itihaas Ke Panne 16
8 months ago | [YT] | 3
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Itihaas Ke Panne 16
भारतीय नौसेना ने हाल ही में एक शक्तिशाली एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जिसने दुश्मन देश पाकिस्तान में हड़कंप मचा दिया है। यह वीडियो उसी ऐतिहासिक परीक्षण को दर्शाता है, जिसमें समुद्र के सीने को चीरते हुए मिसाइल ने सटीकता से अपने लक्ष्य को तबाह किया।
इस शॉर्ट्स में आप देखेंगे:
युद्धपोत से मिसाइल लॉन्च का शक्तिशाली दृश्य
हवा में उड़ती मिसाइल की रफ्तार और सटीकता
दुश्मन जहाज के विस्फोट का हाई रेज़ोल्यूशन एनिमेशन
भारतीय नौसेना की रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन
पाकिस्तान की घबराहट और खुफिया एजेंसियों की हलचल
“अब सिर्फ रक्षा नहीं, प्रहार की तैयारी” – भारत की नई सोच
भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने जिस प्रकार से आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता के साथ अपनी शक्ति को बढ़ाया है, वह भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में एक नया अध्याय जोड़ता है। यह एंटी-शिप मिसाइल परीक्षण केवल एक अभ्यास नहीं था, यह एक स्पष्ट संकेत था – भारत अब किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों में यह परीक्षण चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इस मिसाइल की रेंज और सटीकता इतनी प्रभावशाली है कि यह दुश्मन के जहाज को लॉन्च पॉइंट से सैकड़ों किलोमीटर दूर ही तबाह कर सकती है।
इस वीडियो के ज़रिए हम आपको दिखाते हैं भारतीय रक्षा क्षेत्र की वो तस्वीर जो आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है। हमारे सैनिक, हमारी तकनीक, और हमारी नीयत — तीनों ही अब पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत और साफ हैं।
इस वीडियो को अंत तक ज़रूर देखें और अपने विचार कमेंट में बताएं।
अगर आप भारत की सैन्य ताकत, टेक्नोलॉजी और गौरवशाली मिशनों में रुचि रखते हैं, तो चैनल “Itihaas ke Panne 16” को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएं।
8 months ago | [YT] | 2
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Itihaas Ke Panne 16
800 के दशक का भारत: एक झलक अतीत की
दोस्तों, यह कहानी है उस दौर की जब भारत इतिहास के एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ा था—साल था 1800। मुगलिया सल्तनत अब कमजोर पड़ने लगी थी और अंग्रेज़, यानी ईस्ट इंडिया कंपनी, भारत में अपनी जड़ें मज़बूती से जमा चुके थे। धीरे-धीरे भारत के अलग-अलग हिस्सों पर अंग्रेजों का नियंत्रण होता गया और 19वीं सदी की शुरुआत तक वे देश के प्रमुख हिस्सों पर हावी हो चुके थे।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उस समय आम लोगों की ज़िंदगी कैसी होती थी? चलिए, आज हम आपको ले चलते हैं उस ज़माने के भारत की एक छोटी सी यात्रा पर।
शांति और भाईचारा
1800 के दशक का भारत, आज की तुलना में कहीं अधिक शांत और सादगी भरा था। गांवों में लोग भाईचारे और आपसी सहयोग की भावना से जीते थे। बुजुर्गों की बात आखिरी मानी जाती थी—उनका अनुभव ही लोगों का मार्गदर्शन करता था। उस समय समाज का ढांचा परिवार और समुदाय के मूल्यों पर टिका हुआ था।
पहनावा और जीवनशैली
लोग अधिकतर पारंपरिक कपड़े पहनते थे—मर्द धोती और गमछा, कुछ धोती-कुर्ता भी पहनते थे। बच्चे नेकर पहनते थे। महिलाओं की पोशाकें भी सादगी भरी होती थीं। अंग्रेजों के आगमन के बाद धीरे-धीरे पश्चिमी पहनावे का प्रभाव दिखने लगा।
कड़ी मेहनत और सादा जीवन
ज़्यादातर लोग खेती-बाड़ी करते थे और दिन भर खेतों में मेहनत के बाद शाम होते ही आराम करने लगते थे। थकान के कारण नींद जल्दी आ जाती थी। कुछ लोग पशुपालन करते थे, जबकि कुछ शहरों में मजदूरी के लिए जाया करते थे—जहां उन्हें बेहद कम मजदूरी मिलती थी।
शहर कम, गांव ज़्यादा
भारत की ज़्यादातर आबादी गांवों में बसती थी। शहर कम थे और गांवों की बसावट पारंपरिक ढंग से होती थी। उस समय भारत की जनसंख्या लगभग 16 करोड़ के आसपास थी, जिसमें आज के पाकिस्तान, बांग्लादेश और बर्मा भी शामिल थे। जनसंख्या कम होने के कारण न भीड़भाड़ थी और न ही प्रदूषण।
मनोरंजन और परंपराएं
मनोरंजन के साधन सीमित थे। लोग भजन-कीर्तन करते, खेल खेलते, और सामाजिक आयोजनों में हिस्सा लेते। टीवी, मोबाइल या इंटरनेट जैसी चीज़ें तो दूर-दूर तक नहीं थीं, लेकिन लोगों के दिलों में अपनापन था।
प्राकृतिक जीवन और खतरे
जंगल बहुत ज़्यादा थे और इसलिए जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता था। पेड़-पौधों की भरमार थी और हवा शुद्ध। बिजली का आगमन 1880 में हुआ था, लेकिन गांवों तक वह कई सालों बाद पहुंची।
व्यापार और शिक्षा
उस दौर में व्यापार अधिकतर वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित था—यानी एक चीज़ के बदले दूसरी चीज़। पैसे की जगह लोग सामान का आदान-प्रदान करते थे। शिक्षा का स्तर काफी कम था—सिर्फ 10% लोग ही youtube.com/shorts/lG-KIVgY6p...
9 months ago (edited) | [YT] | 4
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