Nightend is a songwriter, vocalist, composer & poet who is passionate for creating music that merges storytelling with a variety of musical genres and styles.Subscribe THE OFFICIAL YOUTUBE CHANNEL NOW FOR MUSIC RELEASES & MUCH MORE.
Nightend
नहाये धोये क्या भया, जो मन मैल न जाए।मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाय॥
13 hours ago | [YT] | 2
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सब देखा सब था यहीं, अंतर दिखा सदा।तत्व तो सारा एक हैं, कुछ भी नहीं जुदा॥क्या करेगा जाग कर, जागत है दिन रैन।इस जगने से जाग जा, सो पावे सुख चैन॥है दर्शन बेहतर सभी, टोपी तिलक सब जात।दर्शन जो दर्शन नहीं, ना जानत कुछ बात॥अब जीवन जीवन नहीं, दुःख भी हुआ उदास।क्याँ माने क्याँ जान लें, रहा नहीं कुछ पास॥प्यार इश्क़ या चाहत का, रहे ढिंढोरा पीट।जो आपे को जान लें, गाये प्रेम का गीत॥छींटे अभी पड़े नहीं, देना हैं जो घाव।तरकश में जो तीर तेरे, कर जाए आत्मघात॥रात अंधेरा छा गया, जाग उठेगा तू।सदा यहीं था काल से, तू ना जाने क्यूँ॥है मुक्ति मैं की मृत्यु, देदो इसको मात।है ही नहीं था ही नहीं, मैं से मैं की हार॥अनाहत नाद की जो ध्वनि, बाजत हैं दिन रैन।दिल धड़के जो शोर में, फिर क्यूँ खोवें चैन॥क्या संतों ने पाया था, क्या जाने थे फ़क़ीर।ख़ुद को ज्ञानी मान के, क्या माने हैं भीड़॥होगी कैसे बांसुरी, निर्मित बिना जो बांस।दुःखी ही की सत्ता नहीं, तो दुःख काहे की आँच॥लिखते लिखते सो गए, है बेहोशी साथ।जग जाए सो मौन है, हो नहीं सकती बात॥मिट्टी खड़ी है जगत की, हो ना जाए भूल।गिर जाए तो फिर उठे, है समय की धूल॥सत्य तो वैसा नहीं, जैसा माने लोग।कल्पना के वृक्ष से, तोड़े है फल सौ॥कुछ भी नहीं अब ज्ञान को, पानी हो गया राख।विगलन से जो प्रेम की, बच गई पूरी साख॥देखा जो उस आँख से, दिख गया दर्पन।क्या दिखेगा देह से, आवरण बस मन॥जो थी अपनी सादगी, बिन तोले अनमोल।रख के बीच बाज़ार में, खो जाये अपना मोल॥चल रहा था शान से, भीतर काल समाये।जगमगाया दीप जो, जरामरण की बलाये॥है अनूठा तत्व ये, माटी के ढेले।बिखरा बिखरा उठ खड़ा, उठ के ये खेले॥शून्य दिया संसार ने, थी जो अधूरी प्यास।मिट जाने दे भव्य से, शून्य बड़ा एहसास॥~Nightend ✍️
2 days ago | [YT] | 2
पाथर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़।या से तो चक्की भली, पीस खाए संसार॥
2 weeks ago | [YT] | 2
माला फेरत जग भया, फिरा न मन का फेर।कर का मनका डार दे, मन का मणका फेर॥
3 weeks ago | [YT] | 2
पहले तो मन कागा था, करता आत्म-घात।अब तो मन हंसा भया, मोती चुन-चुन खात॥
1 month ago | [YT] | 2
कबीरा तेरे जगत में, उल्टी देखी रीत।पापी मिलके राज करे, साधु मांगे भीख॥
कबीर सोता क्या करे, जागो जपो मुरार।एक दिन तो है सोवना, लंबे पाँव पसार॥
2 months ago | [YT] | 3
Watch and Share the timeless wisdom of Saints ♾️
The Next Release ♾️
2 months ago | [YT] | 4
नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग।और रसायन छोड़ कर, नाम रसायन लाग॥
2 months ago | [YT] | 2
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नहाये धोये क्या भया, जो मन मैल न जाए।
मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाय॥
13 hours ago | [YT] | 2
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सब देखा सब था यहीं, अंतर दिखा सदा।
तत्व तो सारा एक हैं, कुछ भी नहीं जुदा॥
क्या करेगा जाग कर, जागत है दिन रैन।
इस जगने से जाग जा, सो पावे सुख चैन॥
है दर्शन बेहतर सभी, टोपी तिलक सब जात।
दर्शन जो दर्शन नहीं, ना जानत कुछ बात॥
अब जीवन जीवन नहीं, दुःख भी हुआ उदास।
क्याँ माने क्याँ जान लें, रहा नहीं कुछ पास॥
प्यार इश्क़ या चाहत का, रहे ढिंढोरा पीट।
जो आपे को जान लें, गाये प्रेम का गीत॥
छींटे अभी पड़े नहीं, देना हैं जो घाव।
तरकश में जो तीर तेरे, कर जाए आत्मघात॥
रात अंधेरा छा गया, जाग उठेगा तू।
सदा यहीं था काल से, तू ना जाने क्यूँ॥
है मुक्ति मैं की मृत्यु, देदो इसको मात।
है ही नहीं था ही नहीं, मैं से मैं की हार॥
अनाहत नाद की जो ध्वनि, बाजत हैं दिन रैन।
दिल धड़के जो शोर में, फिर क्यूँ खोवें चैन॥
क्या संतों ने पाया था, क्या जाने थे फ़क़ीर।
ख़ुद को ज्ञानी मान के, क्या माने हैं भीड़॥
होगी कैसे बांसुरी, निर्मित बिना जो बांस।
दुःखी ही की सत्ता नहीं, तो दुःख काहे की आँच॥
लिखते लिखते सो गए, है बेहोशी साथ।
जग जाए सो मौन है, हो नहीं सकती बात॥
मिट्टी खड़ी है जगत की, हो ना जाए भूल।
गिर जाए तो फिर उठे, है समय की धूल॥
सत्य तो वैसा नहीं, जैसा माने लोग।
कल्पना के वृक्ष से, तोड़े है फल सौ॥
कुछ भी नहीं अब ज्ञान को, पानी हो गया राख।
विगलन से जो प्रेम की, बच गई पूरी साख॥
देखा जो उस आँख से, दिख गया दर्पन।
क्या दिखेगा देह से, आवरण बस मन॥
जो थी अपनी सादगी, बिन तोले अनमोल।
रख के बीच बाज़ार में, खो जाये अपना मोल॥
चल रहा था शान से, भीतर काल समाये।
जगमगाया दीप जो, जरामरण की बलाये॥
है अनूठा तत्व ये, माटी के ढेले।
बिखरा बिखरा उठ खड़ा, उठ के ये खेले॥
शून्य दिया संसार ने, थी जो अधूरी प्यास।
मिट जाने दे भव्य से, शून्य बड़ा एहसास॥
~Nightend ✍️
2 days ago | [YT] | 2
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पाथर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़।
या से तो चक्की भली, पीस खाए संसार॥
2 weeks ago | [YT] | 2
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माला फेरत जग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मणका फेर॥
3 weeks ago | [YT] | 2
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पहले तो मन कागा था, करता आत्म-घात।
अब तो मन हंसा भया, मोती चुन-चुन खात॥
1 month ago | [YT] | 2
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कबीरा तेरे जगत में, उल्टी देखी रीत।
पापी मिलके राज करे, साधु मांगे भीख॥
1 month ago | [YT] | 2
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कबीर सोता क्या करे, जागो जपो मुरार।
एक दिन तो है सोवना, लंबे पाँव पसार॥
2 months ago | [YT] | 3
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नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग।
और रसायन छोड़ कर, नाम रसायन लाग॥
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