Nightend is a songwriter, vocalist, composer & poet who is passionate for creating music that merges storytelling with a variety of musical genres and styles.Subscribe THE OFFICIAL YOUTUBE CHANNEL NOW FOR MUSIC RELEASES & MUCH MORE.
Nightend
शून्य दिया संसार ने, थी जो अधूरी प्यास।मिट जाने दे भव्य से, शून्य बड़ा एहसास॥~Nightend
1 week ago | [YT] | 2
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है अनूठा तत्व ये, माटी के ढेले।बिखरा बिखरा उठ खड़ा, उठ के ये खेले॥~Nightend
2 weeks ago | [YT] | 2
चल रहा था शान से, भीतर काल समाये।जगमगाया दीप जो, जरामरण की बलाये॥~Nightend
जो थी अपनी सादगी, बिन तोले अनमोल।रख के बीच बाज़ार में, खो जाये अपना मोल॥~Nightend
देखा जो उस आँख से, दिख गया दर्पन।क्या दिखेगा देह से, आवरण बस मन॥~Nightend
कुछ भी नहीं अब ज्ञान को, पानी हो गया राख।विगलन से जो प्रेम की, बच गई पूरी साख॥~Nightend
सत्य तो वैसा नहीं, जैसा माने लोग।कल्पना के वृक्ष से, तोड़े है फल सौ॥~Nightend
3 weeks ago | [YT] | 2
मिट्टी खड़ी है जगत की, हो ना जाए भूल।गिर जाए तो फिर उठे, है समय की धूल॥~Nightend
लिखते लिखते सो गए, है बेहोशी साथ।जग जाए सो मौन है, हो नहीं सकती बात॥~Nightend
होगी कैसे बांसुरी, निर्मित बिना जो बांस।दुःखी ही की सत्ता नहीं, तो दुःख काहे की आँच॥~Nightend
3 weeks ago | [YT] | 4
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शून्य दिया संसार ने, थी जो अधूरी प्यास।
मिट जाने दे भव्य से, शून्य बड़ा एहसास॥
~Nightend
1 week ago | [YT] | 2
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है अनूठा तत्व ये, माटी के ढेले।
बिखरा बिखरा उठ खड़ा, उठ के ये खेले॥
~Nightend
2 weeks ago | [YT] | 2
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चल रहा था शान से, भीतर काल समाये।
जगमगाया दीप जो, जरामरण की बलाये॥
~Nightend
2 weeks ago | [YT] | 2
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जो थी अपनी सादगी, बिन तोले अनमोल।
रख के बीच बाज़ार में, खो जाये अपना मोल॥
~Nightend
2 weeks ago | [YT] | 2
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देखा जो उस आँख से, दिख गया दर्पन।
क्या दिखेगा देह से, आवरण बस मन॥
~Nightend
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कुछ भी नहीं अब ज्ञान को, पानी हो गया राख।
विगलन से जो प्रेम की, बच गई पूरी साख॥
~Nightend
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सत्य तो वैसा नहीं, जैसा माने लोग।
कल्पना के वृक्ष से, तोड़े है फल सौ॥
~Nightend
3 weeks ago | [YT] | 2
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मिट्टी खड़ी है जगत की, हो ना जाए भूल।
गिर जाए तो फिर उठे, है समय की धूल॥
~Nightend
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लिखते लिखते सो गए, है बेहोशी साथ।
जग जाए सो मौन है, हो नहीं सकती बात॥
~Nightend
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होगी कैसे बांसुरी, निर्मित बिना जो बांस।
दुःखी ही की सत्ता नहीं, तो दुःख काहे की आँच॥
~Nightend
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