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Parthasarathy V
https://youtu.be/QHsfGhOqo5c?si=gnLHK...
Is song me kalki (Raghav, ram meaning) white horse, lakshmi near beach(shantipriya). He has no union, last me mar jaata he. Movie name maharshi.Maharshi snatches Suchitra's newborn baby and escapes into the city with the police searching for him. In the end, as he falls from a building along with the baby, he dies saving it, thus earning Suchitra's affection.
3 hours ago (edited) | [YT] | 6
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Parthasarathy V
## स्वर्ण हिरन के पीछे
हमारे जीवन में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिनका पीछा हम वर्षों तक करते रहते हैं। कभी वह कोई व्यक्ति होता है, कभी कोई संबंध, कभी सफलता, कभी धन, कभी सम्मान, कभी कोई पुरानी स्मृति और कभी अपने ही अतीत का कोई खोया हुआ रूप।
हमें लगता है कि बस वह एक चीज़ मिल जाए, तो सब कुछ ठीक हो जाएगा।
यही स्वर्ण हिरन है।
रामायण में स्वर्ण हिरन अचानक वन में दिखाई देता है। वह साधारण हिरन नहीं है। वह इतना सुंदर, इतना असाधारण है कि उसे देखकर इच्छा पैदा होना स्वाभाविक है। सीता उसे चाहती हैं। राम उसके पीछे जाते हैं। और उसके बाद घटनाओं की पूरी श्रृंखला बदल जाती है।
लेकिन स्वर्ण हिरन की शक्ति केवल इस बात में नहीं है कि वह सुंदर है।
उसकी शक्ति इस बात में है कि वह **इच्छा को एक आकार दे देता है।**
हमारे भीतर इच्छाएँ पहले से मौजूद होती हैं। हमें पता भी नहीं होता कि हम वास्तव में क्या खोज रहे हैं। फिर अचानक कोई व्यक्ति, कोई वस्तु, कोई अवसर या कोई सपना हमारे सामने आता है और हमें लगता है—
**“यही है।”**
यही वह चीज़ है जिसका मुझे इंतज़ार था।
यही वह व्यक्ति है जो मुझे पूरा करेगा।
यही वह सफलता है जिसके बाद मुझे संतोष मिलेगा।
यही वह उत्तर है जो मेरी सारी उलझन समाप्त कर देगा।
और फिर हम उसके पीछे चल पड़ते हैं।
समस्या यह नहीं है कि हम किसी चीज़ की इच्छा करते हैं। इच्छा मनुष्य को आगे बढ़ाती है। इच्छा के बिना खोज नहीं होती। जिज्ञासा नहीं होती। सृजन नहीं होता।
समस्या तब शुरू होती है जब हम अपनी इच्छा की वस्तु को अपने भीतर के अधूरेपन का अंतिम समाधान मान लेते हैं।
तब खोज केवल खोज नहीं रहती।
वह पीछा बन जाती है।
और पीछा धीरे-धीरे हमारी पहचान का हिस्सा बन सकता है।
हम अपने आप से पूछना बंद कर देते हैं कि हम कौन हैं और लगातार यह पूछते रहते हैं कि वह चीज़ कहाँ है।
**“वह कब मिलेगी?”**
**“वह वापस कब आएगी?”**
**“मैं उसे कैसे पा सकता हूँ?”**
**“मैं उसे कैसे पकड़ सकता हूँ?”**
लेकिन शायद एक समय के बाद असली प्रश्न बदल जाना चाहिए।
**“मैं उसके पीछे क्यों भाग रहा हूँ?”**
यहीं से बाहरी यात्रा भीतर की यात्रा बन जाती है।
इस पुस्तक में स्वर्ण हिरन इसी अर्थ में एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनता है। वह केवल किसी बाहरी वस्तु का प्रतीक नहीं है। वह उस चीज़ का प्रतीक है जिसे हम अपने भीतर की किसी कमी को पूरा करने वाला मान लेते हैं।
कभी वह खोया हुआ प्रेम होता है।
कभी वह बचपन होता है।
कभी वह पुराना घर होता है।
कभी कोई ऐसा व्यक्ति होता है जिसके साथ हम अपने आपको किसी अलग रूप में महसूस करते थे।
और कभी हमें वास्तव में उस व्यक्ति की नहीं, बल्कि **उस व्यक्ति के साथ अपने उस रूप की याद आती है जो हम तब थे।**
यही स्मृति का रहस्य है।
जब हम कहते हैं, “मुझे अपना बचपन याद आता है,” तो शायद हमें केवल पुराने घर, पुरानी गलियों या पुराने दिनों की याद नहीं आती। हमें उस स्वयं की याद आती है जो उस समय मौजूद था।
वह स्वयं जो भविष्य को अनंत संभावनाओं से भरा हुआ देखता था।
वह स्वयं जिसके ऊपर इतनी जिम्मेदारियाँ नहीं थीं।
वह स्वयं जो किसी संबंध में अधिक प्रेमपूर्ण, किसी मित्रता में अधिक स्वतंत्र या किसी समय में अधिक आशावान था।
इसलिए कभी-कभी हम अतीत को वापस पाने की कोशिश करते हुए वास्तव में अपने ही खोए हुए रूप को खोज रहे होते हैं।
लेकिन अतीत वापस नहीं आता।
स्मृति उसे हमारे सामने फिर से बना सकती है, लेकिन उसे उसी रूप में लौटा नहीं सकती।
यहीं स्वर्ण हिरन फिर दिखाई देता है।
वह हमारे सामने है।
हम उसकी ओर बढ़ते हैं।
लेकिन जैसे ही हमें लगता है कि हम उसे पकड़ने वाले हैं, वह आगे निकल जाता है।
और हम फिर उसके पीछे जाते हैं।
यही चक्र चलता रहता है।
मिथकों में।
कथाओं में।
हमारे सपनों में।
और हमारे अपने जीवन में।
हम एक संबंध से दूसरे संबंध की ओर जा सकते हैं।
एक उपलब्धि से दूसरी उपलब्धि की ओर।
एक शहर से दूसरे शहर की ओर।
एक लक्ष्य से दूसरे लक्ष्य की ओर।
लेकिन यदि हमारे भीतर का प्रश्न नहीं बदला, तो हिरन केवल अपना रूप बदलता रहेगा।
कल जो चीज़ हमारा स्वर्ण हिरन थी, आज उसकी जगह कोई दूसरी चीज़ ले सकती है।
इसलिए असली परिवर्तन तब शुरू होता है जब हम हिरन को पकड़ने के बजाय उसे देखने लगते हैं।
हम पूछते हैं—
**“तुम मुझे इतना आकर्षित क्यों करते हो?”**
**“तुम्हारे भीतर ऐसा क्या है जो मुझे लगता है कि मेरे पास नहीं है?”**
**“मैं तुम्हारे मिलने के बाद अपने जीवन में क्या बदल जाने की उम्मीद कर रहा हूँ?”**
और शायद सबसे कठिन प्रश्न—
**“क्या मैं जिस चीज़ को बाहर खोज रहा हूँ, उसका कोई हिस्सा पहले से मेरे भीतर मौजूद है?”**
यहाँ से खोज का अर्थ बदल जाता है।
अब हम हिरन को पाने के लिए नहीं दौड़ रहे।
हम यह समझने के लिए देख रहे हैं कि हिरन हमारे लिए क्या अर्थ रखता है।
शायद यही कारण है कि स्वर्ण हिरन को केवल छल या माया के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है।
माया हमें धोखा दे सकती है, लेकिन वह हमें कुछ दिखाती भी है।
वह हमारे भीतर की इच्छा को दृश्य बना देती है।
वह हमें दिखाती है कि हम किस चीज़ के लिए अपना परिचित संसार छोड़ने को तैयार हैं।
और कभी-कभी हमें यह भी दिखाती है कि हम किस चीज़ के पीछे इतना दूर चले गए हैं कि अपने वर्तमान को देखना ही भूल गए।
यात्रा का उद्देश्य हमेशा वह वस्तु पाना नहीं होता जिसके लिए यात्रा शुरू हुई थी।
कभी-कभी यात्रा का उद्देश्य यह समझना होता है कि हमने यात्रा शुरू ही क्यों की थी।
यही कारण है कि घर लौटना इतना महत्वपूर्ण है।
नायक जब घर लौटता है, तो वह वही व्यक्ति नहीं होता जो घर से निकला था।
राम अयोध्या लौटते हैं, लेकिन वन उनके भीतर रह चुका है।
ओडीसियस इथाका लौटता है, लेकिन समुद्र और युद्ध उसके भीतर रह चुके हैं।
कॉब अपने बच्चों की ओर लौटता है, लेकिन स्वप्नों और स्मृतियों की पूरी यात्रा उसके भीतर हो चुकी है।
घर वही हो सकता है।
लेकिन घर लौटने वाला व्यक्ति बदल चुका है।
इसलिए घर लौटना अतीत को फिर से जीवित करना नहीं है।
यह अपने बदले हुए स्वयं के साथ जीवन में वापस प्रवेश करना है।
और शायद यही स्वर्ण हिरन की अंतिम शिक्षा है।
**हर हिरन को पकड़ना आवश्यक नहीं है।**
कुछ हिरन हमें दौड़ाने के लिए आते हैं।
कुछ हमें जगाने के लिए।
कुछ हमें हमारी इच्छाएँ दिखाने के लिए।
कुछ हमें हमारे घावों तक ले जाने के लिए।
और कुछ हमें यह समझाने के लिए कि जिस चीज़ को हम बाहर खोज रहे थे, उसका अर्थ हमारे भीतर कहीं छिपा हुआ था।
अंत में हिरन वन में ही रह जाता है।
हम उसे पकड़ नहीं पाते।
लेकिन अब शायद हमें उसे पकड़ने की आवश्यकता भी नहीं है।
हम पीछे मुड़कर देखते हैं और समझते हैं कि वह हमारी पूरी यात्रा का कारण था, लेकिन हमारी मंज़िल नहीं।
मंज़िल शायद वह क्षण था जब हम उसके पीछे भागना छोड़कर स्वयं को देखने लगे।
शायद जीवन का सबसे कठिन निर्णय किसी चीज़ को पाना नहीं है।
कभी-कभी सबसे कठिन निर्णय यह है कि हम यह स्वीकार कर लें कि हमें अब उसका पीछा करने की आवश्यकता नहीं है।
**स्वर्ण हिरन अब भी वन में दौड़ रहा है।**
**प्रश्न यह नहीं है कि वह कहाँ है।**
**प्रश्न यह है कि हम अब भी उसके पीछे क्यों दौड़ रहे हैं।**
**और जिस दिन हम रुककर यह प्रश्न पूछ लेते हैं, उसी दिन हमारी वास्तविक यात्रा शुरू होती है।**
5 hours ago | [YT] | 14
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Parthasarathy V
मृगशिरा, यादें और उस चीज़ की तलाश जिसे हमने खो दिया (hindi book) (partvinu@gmail.com)
विषय-सूची
भाग 1 — स्वर्ण मृग
अध्याय 1 — स्वर्ण मृग
अध्याय 2 — खोज का तारा
अध्याय 3 — जब सच एक तस्वीर बन जाता है
अध्याय 4 — वह स्त्री जो खो गई
अध्याय 5 — राम ने सीता को खो दिया
अध्याय 6 — राम ने सीता को फिर खो दिया
अध्याय 7 — जन्म-जन्म की प्रिया
अध्याय 8 — वह स्त्री जो जानी-पहचानी लगती है
भाग 2 — मेमेंटो
अध्याय 9 — वह आदमी जो याद नहीं रख सकता
अध्याय 10 — यादें अतीत नहीं हैं
अध्याय 11 — अंतहीन चक्र
भाग 3 — इनसेप्शन
अध्याय 12 — सपनों की दुनिया में राम
अध्याय 13 — वह सीता जो केवल यादों में है
अध्याय 14 — सपने के अंदर का स्वर्ण मृग
अध्याय 15 — एरियाड्ने और भूलभुलैया
भाग 4 — नोलन का स्वर्ण मृग
अध्याय 16 — मेमेंटो की मशीन
अध्याय 17 — द प्रेस्टिज: खोने की याद
अध्याय 18 — बैटमैन: पुराने दुख की याद
अध्याय 19 — इंटरस्टेलर: अपने प्रिय की याद
अध्याय 20 — डनकर्क: यादें समय बन जाती हैं
अध्याय 21 — टेनेट: यादें भौतिक दुनिया बन जाती हैं
अध्याय 22 — ओपेनहाइमर: यादें इतिहास बन जाती हैं
भाग 5 — अगर नोलन महाकाव्य बनाते
अध्याय 23 — नोलन राम के साथ क्या करते?
अध्याय 24 — नोलन अर्जुन के साथ क्या करते?
अध्याय 25 — नोलन कृष्ण के साथ क्या करते?
अध्याय 26 — नोलन ओडीसियस के साथ क्या करते?
भाग 6 — मन का स्वर्ण मृग
अध्याय 27 — खोई हुई प्रिया
अध्याय 28 — हम दूसरों में खुद को क्यों देखते हैं
अध्याय 29 — अपने आप की खोज
अध्याय 30 — हमारे भीतर का अंधेरा
भाग 7 — आखिरी सच
अध्याय 31 — क्या हम सब स्वर्ण मृग की खोज कर रहे हैं?
अध्याय 32 — जिसे हम समझते हैं कि हमने खो दिया
अध्याय 33 — मृग कभी पकड़े जाने के लिए था ही नहीं
अध्याय 34 — घर वापस लौटना
उपसंहार — मृग का पीछा करना बंद करो
9 hours ago | [YT] | 10
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Parthasarathy V
Heart chakra
10 hours ago | [YT] | 3
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Parthasarathy V
https://youtu.be/Hh4MNLwh2kc
14 hours ago | [YT] | 7
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Parthasarathy V
www.amazon.in/dp/B0HG7VL55D?dplnkId=756398ac-1d38-…
THE GOLDEN DEER
Mrigashira, Memory and the Eternal Search for What We Lost
1 day ago (edited) | [YT] | 17
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Parthasarathy V
youtube.com/live/sSXCbBH9P9Q?si=fMmcbZeL3qHQjFn7
1 day ago | [YT] | 14
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Parthasarathy V
youtube.com/live/sSXCbBH9P9Q
1 day ago | [YT] | 9
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Parthasarathy V
Afghanistan duryodhan kalipurush decoding
2 days ago | [YT] | 3
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Parthasarathy V
144 twinflame
2 days ago | [YT] | 6
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