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अस्वीकरण: यह वीडियो लोगों की मदद के लिए बनाया गया है। ये वीडियो लोगों को बुरे काम करने या नकारात्मक काम करने के लिए प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं

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Parthasarathy V

इस वीडियो में नाड़ी शास्त्र और ज्योतिष के माध्यम से मानव शरीर की संरचना, खून, यादों (मेमोरी) और पितृ देव के संबंधों की व्याख्या की गई है। यहाँ 3 मिनट के अंतराल पर वीडियो का सारांश दिया गया है:

0:00 - 3:00 मिनट:
वीडियो की शुरुआत मानव शरीर के ढांचे (हड्डी) और सूर्य नाड़ी (पिंगला) के महत्व से होती है। वक्ता बताते हैं कि शरीर में हड्डियाँ सूर्य का प्रतीक हैं जो हमें भौतिक ढांचा और संसाधन प्रदान करती हैं। शनि को छाया पुत्र और कर्म का कारक बताया गया है, जो दिन के कार्यों और भौतिक अस्तित्व से जुड़ा है।

3:00 - 6:00 मिनट:
यहाँ यमराज, वरुण और सपनों के महत्व पर चर्चा की गई है। रात के समय को वरुण और यम से जोड़ा गया है, जहाँ आत्मा अपने अनुभवों का आकलन करती है। साथ ही, सूर्य और चंद्रमा के मेल से बनने वाले 'राजयोग' के बारे में बताया गया है; सूर्य को इंजन माना गया है और चंद्रमा को उसे बनाए रखने वाला (sustain) बल।

6:00 - 9:00 मिनट:
इस खंड में होरा (D2) चार्ट और देवता बनाम पितृ के अंतर को समझाया गया है। यदि किसी की कुंडली में 'देव होरा' प्रबल है, तो वह सिस्टम और संरचना पर विश्वास करता है। इसके विपरीत, 'पितृ होरा' वाले व्यक्ति जीवन के गहरे अर्थ (meaning) और अपनी वंश परंपरा को समझने की ओर अधिक झुकाव रखते हैं।

9:00 - 12:00 मिनट:
वक्ता अपने निजी जीवन के उदाहरण से पितृ ऊर्जा को समझाते हैं। वे बताते हैं कि कैसे कठिन पारिवारिक स्थितियों ने उन्हें ज्योतिष और हस्त सामुद्रिका की ओर प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि पितृ देवता का काम 'प्रिजर्वेशन' (संरक्षण) और इतिहास को जीवित रखना है।

12:00 - 13:30 मिनट:
वीडियो के अंत में मघा नक्षत्र और माघ मास के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। वक्ता इतिहास और पितरों के सम्मान की महत्ता बताते हुए चर्चा का समापन करते हैं।

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Parthasarathy V

Cherapunji

5 hours ago | [YT] | 17