मेरी माँ की आध्यात्मिक व जीवन के अनुभवों पर रचित कविताएँ। ईश्वर अभिव्यक्ति। बेटी द्वारा संचालित।
Humble try to share my mom's words with the world🙏


Maa

2 months ago | [YT] | 1

Maa

बस देख ही लो तुम एक बार
हो जाएगा तुमको विश्वास
हूं वही जो तुमने बना दिया
कुछ और के काबिल भी ना हूं
मिट्टी का तन जो तुमने दिया
उस तन की साज संभाल ना की
तन को मिट्टी ही बना दिया
मोह भरा है ममता का
पल पल में रोता गाता है
हंस कर खुश हो कर नाच रहा
कभी बैठ के आंसू बहाता है
तेरे द्वार में माथा टेक कर अपने
घर की खुशियां चाहता है
इस हाड़ मांस के पुतले को
सुख चैन ही हर पल भाता है
मैं मेरा और तू तेरा है
इसी जाल में फंसता जाता है
तेरा मेरा को छोड़ दे अब
हर एक में वही समाया है

11 months ago | [YT] | 2

Maa

एक नाम बस केवल राम, सांस सांस में बोलें राम
अभिवादन में भी तुम हो राम, जब कदम बढ़ें तो बोलूं राम
तुम सदा ही विनती सुनते राम, तुम बिन चले ना कोई काम
तार से तार मिला दे राम, तेरा नाम दुखों से करता पार
तेरे नाम के बिन ना पाप कटें, तेरे नाम के बिन ना पांव बढ़ें
तेरा नाम ही करता भव से पार, तेरे नाम में रहती शक्ति अपार
तेरा नाम ही अंत में पार लगाए, तेरा नाम ही आखिरी सच है राम
तुम सीता संग विराजो राम, घर में दरबार लगाओ राम
तुम्हीं तो हो पुरुषोत्तम राम
मेरा घर भी मंदिर हो जाए, तुम्हारा जब बसेरा हो जाए
हाँ अवध तुम्हे बड़ा प्यारा है, पर भक्त भी तुमको भाते राम
बिन राम के काम ना कोई चले, बस राम नाम से ही काम चले
बिगड़ी को मेरी बना दो राम, अब हार रही हूं मैं मेरे राम 🙏

11 months ago | [YT] | 2

Maa

तू देख तेरा है ध्यान किधर वो ही तो है अंदर और बाहर
ना उसके सिवा कोई आए नजर तू देख ले उसको चाहे जिधर
वो बालक की मुस्कान में है मां की लोरी की तान में है
आती जाती हर सांस में है वो ही मंदिर के घण्टे में और मस्जिद की अजान में ही
बन कर मिठास वो रस भर दे बन मेघ कभी वर्षा कर दे
दिख जाए कभी वो सपनों मे आंसू बन बहता आंखों में
कई बार यूं दिख जाए जैसे कि बैठा हुआ था राहों मे
किसी सोच में व्याकुल तरस रहा निर्धन बन कर वो नजर आया
आँखें क्यूं ना पहचान सकी हर पल बस मेरे साथ में वो
कभी साया बन जाता है और कभी कोई अपना बन आता वो
वो मुझ में है और साथ भी है वो ही तो परम परमेश्वर है

11 months ago | [YT] | 3

Maa

See, your attention is on Him, He is within and outside.
No one else appears in sight, see Him wherever you want.
He is in the smile of a child, in the melody of a mother's lullaby.
He is in every breath, in the temple's bell and the mosque's azan.
He fills with sweetness, sometimes showers like a cloud.
Sometimes He appears in dreams, tears flowing from the eyes.
Sometimes He appears as if sitting on the path.
Lost in thought, yearning, He appears as a pauper.
Why didn't my eyes recognize Him, He is always with me.
Sometimes He becomes a shadow, sometimes a loved one.
He is within me and with me, He is the Supreme God.

11 months ago (edited) | [YT] | 3