स्वतंत्र लेखनी- राहुल कुमार

स्वतंत्र लेखनी में आपका स्वागत है।

यह मंच विचारों, कविताओं, कहानियों, प्रेरणादायक लेखों और सामाजिक विषयों पर स्वतंत्र अभिव्यक्ति को समर्पित है। यहाँ शब्दों के माध्यम से भावनाओं, अनुभवों और जीवन के विभिन्न पहलुओं को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।

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"कलम स्वतंत्र हो, विचार सशक्त हों।"


स्वतंत्र लेखनी- राहुल कुमार

एक सच्ची घटना ..
मै एक पेड़ के नीचे बैठा था थोड़ा आराम करने के लिए वही पर एक छोटी सी किराना की दुकान,एक छोले भटूरे की दुकान थी जिस पर एक 24 साल का एक लड़का काम कर रहा था,वह भटूरे बना रहा था सड़क के पास उसकी दुकान थी।
तभी मेरी नजर एक बुजुर्ग औरत पड़ी जो दिमाग से थोड़ी कम लग रही थी,उसके पैरों में चप्पल नहीं थी इतनी तेज तपती धूप में वह जा रही थी,छोले भटूरे बनाने वाले ने पहले दूर से उसके ऊपर पानी फेंका,फिर उसके चिढ़ाने लगा,एक बार को देख में भी हक्का बक्का रहा गया कि जो खुद बहुत परेशान है उसे और परेशान कर रहा है।
किराना वाले ने बताया कि ये औरत किसी का दिया कुछ नहीं लेती, बिना पैसे के समान नहीं लेती।
पर उस लड़के पर मुझे गुस्सा आ रहा था कि वो इसको बिना मतलब छेड़ रहा है। वो भी जोर जोर से बड़बड़ाते हुए आगे बढ़ी फिर किराने वाले ने उसको टोका और कहा ये हालत कभी भी किसी की भी हो सकती है।

मुझे इंसान की इस करतूत पर अब तक अफसोस है।
इंसान की इंसानियत वाकई कहीं खो गई है।
जंग लग गया है इंसान की सोच में।
सच में कुछ तो बदला है इस दुनिया में ना तो सामने वाले के दुख में इंसान हँस कैसे सकता है???
@highlight @राहुल कुमार

3 months ago | [YT] | 0

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3 months ago | [YT] | 0