भावार्थ - श्री कृष्ण की जीवन शक्ति श्री राधा में बसती है और श्री राधा की जीवन शक्ति श्री हरि में बसती है। ऐसे वे श्री राधा कृष्ण मेरे जीवन में और जीवन के पश्चात भी मेरा शाश्वत आश्रय है।
अर्थ- श्रीराधारानी, भगवान श्रीकृष्ण में रमण करती हैं।भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराधारानी में रमण करते हैं। इसलिए मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में गुजरे।
सुबरन बेलि तमाल सौं, घन सौं दामिनी देह। तूँ राजति घनस्याम सौं, राधे सरिस सनेह॥ सोने की बेल तमाल वृक्ष से और बादल से बिजली का शरीर जिस प्रकार शोभित होता है, हे राधिका! सदृश स्नेह के कारण तू वैसे ही घनश्याम से शोभित होती है। सोने की बेल तमाल वृक्ष से और बादल से बिजली का शरीर जिस प्रकार शोभित होता है, हे राधिका! सदृश स्नेह के कारण तू वैसे ही घनश्याम से शोभित होती है।
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@shreeRadha-vrindavan
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उस धनुष का नाम बताइये जिसका उपयोग भगवान राम ने सीता स्वयंवर में किया था?
1 year ago | [YT] | 0
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लक्ष्मण को किसका अवतार माना जाता है?
1 year ago | [YT] | 0
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रामायण की रचना मूल रूप से किसने की थी?
1 year ago | [YT] | 0
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जो हरि का भक्त होता है उसे हमेशा जय की प्राप्ति होती है, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता है.
1 year ago | [YT] | 0
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जो हरि का भक्त होता है, उसे हमेशा जय की प्राप्ति होती है। उसे कोई परास्त नहीं कर सकता है।
❤️❤️❤️❤️❤️❤️🌺🌺🌺🌺🌺🌺
1 year ago | [YT] | 0
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कभी भी हार मत मानो, क्योंकि जीत हमेशा आपके इंतजार में रहती है.
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कृष्ण प्राणमयी राधा, राधा प्राणमयो हरिः।
जीवने निधने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ।।
भावार्थ - श्री कृष्ण की जीवन शक्ति श्री राधा में बसती है और श्री राधा की जीवन शक्ति श्री हरि में बसती है। ऐसे वे श्री राधा कृष्ण मेरे जीवन में और जीवन के पश्चात भी मेरा शाश्वत आश्रय है।
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“कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेममयो हरिः।
जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम।।”
अर्थ- श्रीराधारानी, भगवान श्रीकृष्ण में रमण करती हैं।भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराधारानी में रमण करते हैं। इसलिए मेरे जीवन का प्रत्येक क्षण श्रीराधा- कृष्ण के आश्रय में गुजरे।
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सुबरन बेलि तमाल सौं, घन सौं दामिनी देह। तूँ राजति घनस्याम सौं, राधे सरिस सनेह॥
सोने की बेल तमाल वृक्ष से और बादल से बिजली का शरीर जिस प्रकार शोभित होता है, हे राधिका! सदृश स्नेह के कारण तू वैसे ही घनश्याम से शोभित होती है। सोने की बेल तमाल वृक्ष से और बादल से बिजली का शरीर जिस प्रकार शोभित होता है, हे राधिका! सदृश स्नेह के कारण तू वैसे ही घनश्याम से शोभित होती है।
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