Pranay Chhavi Jain



Pranay Chhavi Jain

एक दीपक
जो वर्षों तक जलता रहा,
कर्तव्य की लौ से,
सेवा की तपिश में।
सरकारी फाइलों में,
पुलों की रेखाओं में,
ढूंढा उसने जीवन का सत्य।
पर मन था सदा,
रचनात्मक दिशा में।
सिविल इंजीनियर थे,
पर संवेदना से भरे,
हाथों में बांसुरी,
दिल में सुरों के बसेरे।
हारमोनियम, बैंजो,
हर राग में थी,
आत्मा की पुकार,
जैसे स्वरों से ही ढूँढ़ते हो,
जीवन का सार।
धर्म में रुचि,
और चिकित्सा में शोध,
होम्योपैथी व बैच फ्लावर में
पाया उन्होंने बोध।
हर तकलीफ़ का हल खोजा
स्नेह और शांति से,
मानव सेवा की भावना थी
उनके हर प्रयास में।
अंतिम वर्षों में शरीर
कुछ थक सा गया था,
पारकिंसन की पीड़ा ने
उन्हें घेर लिया था।
पर मुख पर शिकन नहीं,
वाणी में कोई क्लेश नहीं,
पापा में दिखाई देता था
आत्मिक सन्तुलन कहीं।
ना सिर्फ़ कर्मयोगी,
ना सिर्फ़ संगीतज्ञ,
बल्कि एक सौम्य तपस्वी,
शब्दहीन उपदेशज्ञ।
धैर्य, प्रेम और मौन की
जीवित मिसाल,
छोटे बड़े हर जन के लिए
थे प्रेरणा विशाल।
आज जब वे देह से विदा हुए हैं,
हमारे स्मरण और श्रद्धा में
बसे हुए हैं।
कामना है कि
देव, गुरु, धर्म का संग
सदा उन्हें प्राप्त हो,
और मोक्ष का प्रकाश,
उनके पथ पर व्याप्त हो।

शत शत नमन,
कोटिशः श्रद्धांजलि।
🙏🙏🙏

5 months ago | [YT] | 5