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Mere Labz
कभी समेटता हूँ कभी बिखेरता हूँ
कभी ख़ुशी का दास्तां तो कभी ग़म का दास्तां लिखता हूँ
मैं बिखरी हुई ज़िन्दगी का
सारांश लिखता हूँ
कभी ज़िन्दगी मे मौत तो
कभी मौत मे ज़िन्दगी ढूढ़ने की
कोसिस करता हूँ
मैं बिखरी हुई ज़िन्दगी का सारांश लिखता हूँ"
हर कोई उगते सूरज को
सलाम करता है
सारी ज़िंफागी उनके ही
नाम करता है,
मैं दुबते हुए सूरज का
दास्तां बयान करता हूँ
हर्ष से फर्श पर गिरे हुए
तारों का भी मैं प्याम लिखता हूँ
मैं बिखरी हुई ज़िन्दगी का सारांश लिखता हूँ,
अंधेरा है तो अंधेरा ही सही
सूरज की किरणे ना सही
चाँद तारे जुगनु की चमक ही है मेरे लिए काफ़ी
मैं गर्दिश मे गुम हुए सितारों का दुःख भरी दास्तांएँ सुनाता हूँ,
मैं बिखरी हुई ज़िन्दगी का सारांश लिखता हूँ"
1 year ago | [YT] | 3
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Mere Labz
" sach kya jhoot kya
Kya raja kya praja
Kya rank fakeer
Har koi yaha matalabi farebi re sarthi
Kisi ka nahi neej ghar yaha
Har koi yaha ren-basera re sarthi
Har koi dundhe tatale
Apane apane behatar zindagi ke tole koi na jane ka. Tak hai unaka yaha asera re sarthi
Har koi mutti bandhe aaya jag me
Har koi hath pasare yaha se jayega re sarthi
Phir hum ajay kaise
Huwa re sarthi
Bhale abhi yaha
Tera jalawa kuch aur mera jalawa kuch aur hai
Parant samay me
Mera kafan aur tera kafan
Ek jaisa hi hoga re sarthi
Waha na to ameer garib se alag hai na garib ameer se alag hai
Ham sabka hasti mitti me
Milkar rah jayega re sarthi
Phir kya guroor karna
Ye naswar deh par re sarthi
Phir kya guroor karna
Ye naswar deh par re sarthi
1 year ago | [YT] | 3
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Mere Labz
ये कैसी बेबसी
ये कैसी अडम्बना है
जब पास थी तू
तब तुझे पहचान नहीं पाया
ना ही पहचान ने की
कभी कोसिस कर पाया
ये कैसी बेबसी
ये कैसी अडंबना है
जब तू पास थी
मेरे बहुत करीब थी
तब तुझे मैं सही से जान नहीं पाया
पहचान नहीं पाया
ये कैसी बेबसी
ये कैसी अडम्बना है
जब तू पास बैठने को बुलाती थी
तब मैं तुझे नजरअंदाज़ करके
कही और चला जाता था
पर आज जब तू नहीं पास मेरे
तेरे पास बैठने को जी चाहता है
ये कैसी बेबसी
ये कैसी अड़म्बना है
जब आज थक हर कर घर को आता हूँ,
तुम्हारी वो हर बात मुझे याद आता है,
तुम्हारी कमी बहुत खलती रहती है
ये कैसी बेबसी
ये कैसी आडंबना है
जब तू पास थी तब मैं क्यों
इतना ज्यादा नादान था
जो तेरी इशारों को
समझ नहीं पता था
जब आज तू नहीं है
तब क्यों तुझे मैं समझ पता हूँ
जबकि तू नहीं है, तू कही नहीं है
फिर क्यों मुझे तू
इतना याद आती है
माँ
ये कैसी बेबसी
ये कैसी आडम्बना है
माँ
1 year ago | [YT] | 3
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Mere Labz
*माँ*
माँ ममता की जीती जागती मूरत
सबसे अंव्वल त्याग और बलिदाल की है वो सिंबल
माँ सूरत और सीरत की खदान
उनले आँचल तले मिले जन्नत की
एहसास उनके कदमों मे मेरा सारा जहाँ
माँ ख़ुदा के ओर से मेरे लिए एक अनमोल उपहार, उसी के बदौलत सजा है मेरा चारों जहाँ
माँ है तो सबकुछ मुमकिन है
माँ नहीं तो छोटी सी बात
भी कितनी मुश्किल है,
माँ के ही त्याग से आज
मेरा महका महका जहाँ है
माँ मेरे लिए प्यार की
खूबसूरत परिभाषा है
माँ है तो निराशाओं मे भी आशा है
एक ऊँची उड़ान भड़ने की अभिलाषा है
माँ मेरे लिए प्यार की थपकी तो
कभी प्यार भरी झपकी है
माँ मरे लिए सबसे बड़ा
बहाना है, सच पूछो तो
ये आदत बहुत पुराना है
माँ मेरे लिए एक नया तराना है
एम सुकून भड़ा गाना है
माँ मेरे लिए कभी बहाना तो
कभी फ़साना है
माँ मेरे लिए ख़ुशी है तो
कभी मेरे लिए मायूसी
का नजराना है
मैं ये नहीं कहता की
सिर्फ मेरी माँ ही अच्छी हस्ती है
शायद हर माँ में प्यार और ममता की
धारा बहती है
जो माँ अच्छी नहीं
शायद वो कभी किसी अच्छी
माँ की बच्ची नहीं
ख़ुदा ने माँ को बनाया ही
ममता की मूरत है
उन्हें एक अलग दिल और सूरत और सिरत से ख़ुदा ने नवाज़ा है
इसी लिए माँ ने तो हमें जन्म देकर
पाल पोस कर एक अच्छा एक सच्चा नेक इंसान बनाया है
माँ है तो सबकुछ है
माँ ही तो मरा सारा जहाँ है
माँ है तो मौज है
माँ है तो मस्ती है
माँ है तो हंसती
अपनी हश्ती है
माँ है तो सबकुछ है
माँ है तो सबकुछ हैk
1 year ago (edited) | [YT] | 5
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Mere Labz
1 year ago | [YT] | 2
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Mere Labz
दास्तां ए मोहब्बत की मेरी
कुछ खास नहीं है
बस फर्क इतना सा है की
जो तेरी है वो मेरी नहीं है
1 year ago | [YT] | 2
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Mere Labz
जब से तुमसे मिला हूँ, #hindikavita #viralpost #ajaykumar
1 year ago | [YT] | 2
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Mere Labz
मिट्टी का इन्शान हिंदी कविता by अजय कुमार #merelabzdilse
2 years ago (edited) | [YT] | 3
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Mere Labz
बेवजह यूँ ही वो
उलझ जाती है
मौका मिलते ही वो
अँगारे के समान,
कई घरों को वो
अपने लपेटे में ले लेती है
है कौन वो
है जो इतनी फुर्तीली
बताओ हमें
क्यों वो इतना
तिलमिलाती है..
2 years ago | [YT] | 1
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