पेंटिंग, स्केचिंग, ड्रइंग, कविताओं और भक्ति गानों के
सारी नयी विडियो सबसे पहले देखने के लिए मेरे चैनल को कृप्या🙏 स्बस्क्राइब कर दें और बेल 🔔आइकन को दबा दें,मेरे चैनल पर बने रहें इन सब का आनंद लेते रहें और लाइक👍,कमेंट करते रहें।
Please 🙏subscribe my you tube channel
(mind blowing vm) and press the bell icon 🔔for getting latest update of --- Painting, Sketching, Drawing, Poetry and Devotional videosongs.Stay tuned to my channel and enjoy it and don't forget to like👍 and comment.


mind blowing vm

🇮🇳🇮🇳भारत की पहली महिला जासुस नीरा आर्या जिन्होंने सुभाष चन्द्र बोस को बचाने के लिए अपने ही पति की हत्या कर दी,और अंग्रेजों द्वारा पुछे जाने पर की नेताजी कहां है ? तो इन्होंने कहा मेरे दिल में हैं,इससे अंग्रेजी अधिकारी ने गुस्से में आकर लुहार से बरी हीं बेरहमी से इनके स्तन कटवा दिए।🇮🇳🇮🇳

नीरा आर्या भारत की स्वतंत्रता संग्राम की एक साहसी और कम जानी-पहचानी महिला क्रांतिकारी थीं। वे नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज (INA) की एक जासूस और योद्धा के रूप में प्रसिद्ध हुईं।

🇮🇳🇮🇳प्रारंभिक जीवन:-🇮🇳🇮🇳
जन्म: नीरा आर्या का जन्म 1902 में काशी (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) में हुआ था।उनका परिवार शिक्षित और देशभक्त था। उनके पिता भागवत राय स्वतंत्रता सेनानी थे।छोटी उम्र से ही उनमें देशभक्ति की भावना गहरी थी।

🇮🇳🇮🇳स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका🇮🇳🇮🇳
नेरा आर्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज के लिए गुप्तचर (स्पाई) के रूप में कार्य करती थीं।ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ वे कई गुप्त सूचनाएँ इकट्ठा कर आज़ादी के आंदोलन को आगे बढ़ाती थीं।उनका विवाह एक ब्रिटिश पुलिस अफ़सर श्रीकांत आर्य से हुआ था, लेकिन वे गुप्त रूप से नेताजी के मिशन से जुड़ी रहीं।देश की आजादी में योगदान देने के लिए इन्होंने आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट में अपनी सेवाएं दी।एक समय पर उनके पति को उनके देशभक्त कार्यों का पता चला और वे नेताजी को पकड़वाने की कोशिश करने लगा।‌इन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अफसर अपने पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी। अवसर पाकर श्रीकांत जयरंजन दास ने नेताजी को मारने के लिए गोलियां दागी तो वे गोलियां नेताजी के ड्राइवर निजामुददीन को जा लगी, लेकिन इस दौरान नीरा आर्या ने श्रीकांत जयरंजन दास के पेट में संगीन घोंपकर उसे परलोक पहुंचा दिया था। श्रीकांत जयरंजन दास नीरा आर्या के पति थे, इसलिए पति को मारने के कारण ही नेताजी ने उन्हें नागिनी कहा था। आजाद हिन्द फौज के समर्पण के बाद जब दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चला तो सभी बंदी सैनिकों को छोड़ दिया गया, लेकिन इन्हें पति की हत्या के आरोप में काले पानी की सजा हुई थी, जहां इन्हें घोर यातनाएं दी गई। ब्रेस्ट रिपर से इनके स्तन तक उखाडने का प्रयास किया।
इनके भाई बसंत कुमार भी स्वतंत्रता सेनानी थे, जो आजादी के बाद संन्यासी बन गए थे। आजादी के जंग में अपनी भूमिका पर इन्होंने अपनी आत्मकथा भी लिखी है। उर्दू लेखिका फरहाना ताज (जो हिन्दी में मधु धामा के नाम से लिखती हैं) को भी इन्होंने अपने जीवन के अनेक प्रसंग सुनाए थे। उन्होंने भी इनके जीवन पर एक उपन्यास लिखा है, जिसमें इनके आजादी की जंग में योगदान को रेखांकित किया गया है।इनकी आत्मकथा का एक हृदयविदारक अंश प्रस्तुत है — ‘‘मुझे गिरफ्तार करने के बाद पहले कलकत्ता जेल में भेजा गया। यह घटना कलकत्ता जेल की है, जहां हमारे रहने का स्थान वे ही कोठरियाँ थीं, जिनमें अन्य महिला राजनैतिक अपराधी रही थी अथवा रहती थी। हमें रात के 10 बजे कोठरियों में बंद कर दिया गया और चटाई, कंबल आदि का नाम भी नहीं सुनाई पड़ा। मन में चिंता होती थी कि जहां हमें भेजा जाना था, वहां गहरे समुद्र में अज्ञात द्वीप में रहते स्वतंत्रता कैसे मिलेगी, अभी तो ओढ़ने बिछाने का ध्यान छोड़ने की आवश्यकता आ पड़ी है? जैसे-तैसे जमीन पर ही लोट लगाई और नींद भी आ गई। लगभग 12 बजे एक पहरेदार दो कम्बल लेकर आया और बिना बोले-चाले ही ऊपर फेंककर चला गया। कंबलों का गिरना और नींद का टूटना भी एक साथ ही हुआ। बुरा तो लगा, परंतु कंबलों को पाकर संतोष भी आ ही गया। अब केवल वही एक लोहे के बंधन का कष्ट और रह-रहकर भारत माता से जुदा होने का ध्यान साथ में था। सूर्य निकलते ही मुझको खिचड़ी मिली और लुहार भी आ गया। हाथ की सांकल काटते समय थोड़ा-सा चमड़ा भी काटा, परंतु पैरों में से आड़ी बेड़ी काटते समय, केवल दो-तीन बार हथौड़ी से पैरों की हड्डी को जाँचा कि कितनी पुष्ट है। मैंने एक बार दुःखी होकर कहा, ‘‘क्या अंधा है, जो पैर में मारता है?’’
‘‘पैर क्या हम तो दिल में भी मार देंगे, क्या कर लोगी?’’ उसने मुझे कहा था।‘‘बंधन में हूँ तुम्हारे कर भी क्या सकती हूँ…’’ फिर मैंने उनके ऊपर थूक दिया था, ‘‘औरतों की इज्जत करना सीखो?’’जेलर भी साथ थे, तो उसने कड़क आवाज में कहा, ‘‘तुम्हें छोड़ दिया जाएगा, यदि तुम बता दोगी कि तुम्हारे नेताजी सुभाष कहाँ हैं?’’
‘‘वे तो हवाई दुर्घटना में चल बसे, ’’ मैंने जवाब दिया, ‘‘सारी दुनिया जानती है। ’’‘‘नेताजी जिंदा हैं….झूठ बोलती हो तुम कि वे हवाई दुर्घटना में मर गए?’’ जेलर ने कहा।‘‘हाँ नेताजी जिंदा हैं।’’‘‘तो कहाँ हैं…। ’’‘‘मेरे दिल में जिंदा हैं वे। ’’जैसे ही मैंने कहा तो जेलर को गुस्सा आ गया था और बोले, ‘‘तो तुम्हारे दिल से हम नेताजी को निकाल देंगे।’’ और फिर उन्होंने मेरे आँचल पर ही हाथ डाल दिया और मेरी आँगी को फाड़ते हुए फिर लुहार की ओर संकेत किया…लुहार ने एक बड़ा सा जंबूड़ औजार जैसा फुलवारी में इधर-उधर बढ़ी हुई पत्तियाँ काटने के काम आता है, उस ब्रेस्ट रिपर को उठा लिया और मेरे दाएँ स्तन को उसमें दबाकर काटने चला था…लेकिन उसमें धार नहीं थी, ठूँठा था और उरोजों (स्तनों) को दबाकर असहनीय पीड़ा देते हुए दूसरी तरफ से जेलर ने मेरी गर्दन पकड़ते हुए कहा, ‘‘अगर फिर जबान लड़ाई तो तुम्हारे ये दोनों गुब्बारे छाती से अलग कर दिए जाएँगे…’’ उसने फिर चिमटानुमा हथियार मेरी नाक पर मारते हुए कहा, ‘‘शुक्र मानो ब्रिटिश आकाओं का कि इसे आग से नहीं तपाया, आग से तपाया होता तो तुम्हारे दोनों स्तन पूरी तरह उखड़ जाते।’’

🇮🇳🇮🇳अंतिम जीवन:-🇮🇳🇮🇳
स्वतंत्रता के बाद उन्हें भुला दिया गया।वे दिल्ली की गलियों में फूल बेचकर गुज़ारा करने लगीं।1998 में उनका देहांत हो गया, और उनका अंतिम संस्कार भी बहुत सादगी से हुआ

🇮🇳महत्व🇮🇳🙋
नीरा आर्या का जीवन इस बात का उदाहरण है कि भारत की स्वतंत्रता के लिए अनेक अनाम नायकों ने अपना सब कुछ बलिदान कर दिया, लेकिन इतिहास में उनका नाम बहुत कम लिया जाता है।उन्हें "आजाद हिंद फौज की प्रथम महिला जासूस" भी कहा जाता है।

कम दिखाएँ

5 months ago (edited) | [YT] | 0

mind blowing vm

एक-एक करके हमारे राज्यों के शहर गांव डुबते जा रहे हैं,पर जनता इसे प्राकृतिक आपदा समझ रही है।इस आपदा को आमंत्रण हमारी भोगवादी संस्कृति ने दिया है-1) कहीं पहाड़ तोड़े जा रहे ,कहीं जंगल काटे जा रहे,बढ़ती जनसंख्या जंगल के जंगल साफ कर रही है,नदियों,पहाड़ों और वातावरण को दुषीत किया जा रहा है।विकास के नाम पर महाविनाश को आमंत्रण दिया जा रहा।आम जन-मानस तो इसका जीम्मेदार है हीं।
2)सरकारें भी इस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही,उल्टा पुंजीपतियों को पहाड़,जंगल,नदियां बेचती जा रही है।
3)और पुंजीपती बस अपना पैसा बनाने में लगे हैं,चाहे पृथ्वी पर तबाही आए तो आए ,वो बस इस फीराक में हैं कि हमारा क्या होनेवाला जो होगा इन गरीब जनता का होगा,पर ये नहीं जानते की पृथ्वी डुबेगी तो उनका भी घर डुबेगा।पृथ्वी बिना हमारा आस्तित्व संभव नहीं है।
#आगे आइए सभी और अपनी पृथ्वी के लिए आवाज उठाइए,एक करके हमारे राज्यों के शहर-गांव तबाह हो रहे हैं,जाने जा रही है।ये तबाही हमारे घर तक पहुंच गयी है-1) हमें लोगों को जागरुक करना होगा इसके बारे में हर तरह से लोगों तक बात पहुंचानी होगी सोशल मीडिया के द्वारा या डायरेक्टली। 2)उपभोक्तावादी संस्कृति को बॉयकॉट करना होगा।
3)#सरकार से Carbon foot print के law भी बनवाने होंगे और उसे लागू करवाने होंगे।
#पॉपुलेशन कंट्रोल के भी लेए भी law बनवाने होंगे। #पहाड़,नदियों और जंगलों के लिए भी enviromental law strict होने चाहिए ताकि कोई पर्यावरण को हानि न पहुंचा सके।
# Animal Cruelity के खिलाफ भी स्ट्रिक्ट ले बनवाने होंगे।
#और इन सभी law को लागु करवाने होंगें।
और ये सारे काम हम आम-जनता को हीं करना है,तो लग जाइए जोर-शोर से इस काम को अंजाम देने में घर-घर तक जलवायु परिवर्तन की बात पहुंचने में,क्या पता कुछ राज्य तो बच जाए इन भरी तबाहियों से. ‪@dhruvrathee‬ ‪@ravishkumar.official‬

5 months ago (edited) | [YT] | 0

mind blowing vm

माता-पिता जो खुद अपने जीवन में सपने पुरे नहीं कर पाते, वो अपने बच्चों पर थोपते हैं। और दुनिया से वाह-वाही लुटते हैं ,कहते हैं -- मेरा बेटा/बेटी IAS/Doctor/Engineer बनेगा/बनेगी, और बच्चों पर जोर बनाकर रखते हैं कि तुम्हें करना हीं है जैसे उसका जन्म हीं यही बनने के लिए हुआ हो,और अगर बच्चे उल्टा सवाल करें उनसे- "पापा,आप कहां के कलेक्टर बन गए ?"तो कहते हैं -"उल्टा जवान लड़ाती है अपने बाप से", मार-पिटाई शुरु कर देते हैं ।अपनी असफलता का भड़ास अपने बच्चों को पीट कर निकालते,यही हालत इस बच्ची की हुई है बाप ने इतना पीटा की बच्ची की जान हीं चली गयी। और जो parents पीटते नहीं है वो इतना जोड़ बनाकर रखते हैं बच्चों पर की बच्चा अपने मन की बात अपने माता-पिता से कर ही नहीं पाता,दोस्त से कहा देगा,किसी अजनबी से कह देगा पर अपने मम्मी -पापा से नहीं,यहीं कारण है कि बच्चे अपने असफलता बर्दाश्त नहीं कर पाते और Suicide कर लेते हैं,इन बच्चों पर parents का बहुत pressure होता यहीं कारण है वो ऐसे कदम उठा लेते हैं। हमारा समाज आज ना जाने कितने मानसिक रोगों से ग्रसीत हो चुका है कि बाप अपनी बेटी की हत्या करने लगे हैं। बाप क्रोध ,हीन भावना से ग्रसीत है ,तो बेटी भय से ,इन सभी रोगों का ईलाज बस गीता के पास है ,जबतक गीता हर जन मानस के मन में उतरकर जीवन में नहीं उतरेगी,तब तक ऐसी घटनाएं घटती रहेगी।

6 months ago | [YT] | 0

mind blowing vm

कोमल है कमजोर नहीं शक्ति का नाम नारी है।

11 months ago | [YT] | 0