Welcome to the official channel of Palak Gupta – Journalist on the Ground.
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Palak Gupta

As the year draws to a close, I find myself writing a final letter to 2025-a year that arrived with promises and stayed with lessons. It was a year that tested my patience, reshaped my expectations, and quietly taught me the strength of standing alone when needed. There were moments when I lost people I once called my own, moments when silence spoke louder than words, and days when holding on felt harder than letting go.

Yet, within every challenge, this year also offered clarity. It taught me resilience, the importance of self-worth, and the courage to accept what cannot be changed. Some relationships stayed steady, some faded, and some ended abruptly-but each one left behind a lesson I will carry forward.

I am deeply grateful to those who stood by me during my most uncertain days and thankful, too, for those who walked away, for they taught me the art of release. As I step into a new year, I choose to move forward lighter-carrying hope instead of hurt, calm instead of chaos, and faith in the belief that growth often comes disguised as discomfort.

Here’s to new beginnings, softer days, and a heart that continues to learn, heal, and believe.

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1 month ago | [YT] | 2

Palak Gupta

Launching something close to the heart today. ✨

Thrilled to share that my new Hindi podcast “Dil Ki Baatein – Baatein Kahi Ankahi Si” is now live on Spotify. It’s a space for unspoken stories, emotions, and heartfelt thoughts that often remain unsaid but never unfelt.

Each episode will bring warm, conversation-style reflections, letters from the heart, and moments you might secretly relate to. If you enjoy soulful, slow, and honest storytelling, this podcast is for you.

Listen here:
https://open.spotify.com/episode/4JbGpXP2edRsasAxaEbGQu?si=f7Emakb-Qh6crIbT2xOOXg

Would love to hear your feedback, reviews, and support as I begin this new audio journey. 💗

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1 month ago | [YT] | 3

Palak Gupta

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिन उनके लिए बेहद खास है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि 2001 में आज ही के दिन यानी 7 अक्टूबर को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। आगे उन्होंने लिखा कि सरकार के मुखिया के रूप में काम करते हुए उन्हें 25 साल पूरे हो गए हैं। इसके बाद, पार्टी की सफलता के दम पर वह 2014 से लगातार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत हैं।

एक्स पर 2001 की तस्वीरें साझा करते हुए मोदी लिखते हैं, “आज ही के दिन 2001 में मैंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। देशवासियों के आशीर्वाद से आज मैं अपनी सेवा के 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहा हूँ।”

इसके बाद माँ को याद करते हुए वे लिखते हैं, “मुझे याद है, माँ ने मुझसे कहा था — मुझे तुम्हारे काम की ज्यादा समझ नहीं है, लेकिन मैं बस दो चीजें चाहती हूँ। पहली, तुम हमेशा गरीबों के लिए काम करोगे, और दूसरी, कभी रिश्वत नहीं लोगे।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने लोगों से यह भी कहा था कि मैं जो भी काम करूंगा, वह नेक इरादे से करूँगा और कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति की सेवा मेरा विज़न होगा, जिससे मैं हमेशा प्रेरित रहूँगा।”

प्रधानमंत्री मोदी आगे लिखते हैं, “पिछले 11 वर्षों में हम भारत के लोगों ने मिलकर काम किया है और कई मुकाम हासिल किए हैं। 25 करोड़ से ज्यादा लोग आज गरीबी से बाहर आ चुके हैं। हम दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक का घर हैं। हमारे किसान नवाचार कर रहे हैं और हम लगातार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।”

भारत की जनता को धन्यवाद देते हुए मोदी लिखते हैं, “एक बार फिर मैं भारत के लोगों के निरंतर विश्वास और स्नेह के लिए धन्यवाद करता हूँ। भारत के संविधान के मूल्यों को मार्गदर्शन के रूप में रखकर, मैं आने वाले समय में हमारे सामूहिक स्वप्न — विकसित भारत — को साकार करने के लिए बहुत मेहनत करूँगा।”

~ पलक गुप्ता

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3 months ago | [YT] | 3

Palak Gupta

गुरु पूर्णिमा विशेष: गुरु के बिना जीवन अधूरा

भारत में गुरु को सदैव भगवान से भी ऊँचा स्थान दिया गया है। संत कबीरदास ने अपने प्रसिद्ध दोहे में कहा है—
"गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पायं।
बलिहारी गुरु आपनो, जिन गोविंद दियो बताय।"
अर्थात्, यदि गुरु और गोविंद (भगवान) दोनों एक साथ खड़े हों तो पहले गुरु के चरण स्पर्श करने चाहिए, क्योंकि वही गुरु हैं जिन्होंने हमें भगवान तक पहुँचने का मार्ग दिखाया है।

भारतीय संस्कृति में एक ऐसा अनुपम पर्व है, जो सभी गुरुओं को समर्पित है—इसे 'गुरु पूर्णिमा' या 'व्यास पूर्णिमा' के नाम से जाना जाता है। यह पर्व आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह किसी एक धर्म का पर्व नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन करने वाले गुरुओं के प्रति आभार प्रकट करने का सामूहिक उत्सव है।

गुरु की महिमा संसार में अतुलनीय है। एक सच्चा गुरु केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करता है। गुरु हमारे जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर, उसमें ज्ञान का प्रकाश भरता है। गुरु चाहे शिक्षक हों, माता-पिता हों या कोई संत—सभी अपने शिष्यों को श्रेष्ठ जीवन जीने का मार्ग दिखाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्हें विष्णु का अवतार माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों का संकलन किया, 18 पुराणों की रचना की और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना की। उन्होंने वेदों के ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाया, इसलिए उन्हें 'आदि गुरु' की उपाधि दी जाती है। इस दिन महर्षि वेदव्यास की पूजा की जाती है और अनेक स्थानों पर गुरुओं के सम्मान में भव्य आयोजन होते हैं।

समय के साथ इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जब हर कोई मानसिक रूप से अशांत है, ऐसे में गुरु द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण कर शांति प्राप्त की जा सकती है। गुरु न केवल पुस्तकें पढ़ाते हैं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। वे हमें चुनौतियों का सामना करना, धैर्य रखना और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना सिखाते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में इस पर्व पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जहाँ छात्र अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला जाता है।

एक सच्चा गुरु हमें हमारी कमियों को दूर करने और क्षमताओं को पहचानने में सहायता करता है। वह हमें एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करता है।

पूरे भारत में यह पर्व हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा केवल एक दिन गुरु का सम्मान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह जीवन भर उनके दिखाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। एक सच्चा शिष्य वही है, जो गुरु के ज्ञान को न केवल सुनता है, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारता भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि बिना गुरु के, ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। गुरु पूर्णिमा हमें अपनी परंपराओं और संस्कारों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।

आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी अपने गुरुओं को नमन करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।

~ पलक गुप्ता

6 months ago | [YT] | 1

Palak Gupta

And here we are back with another announcement....the professional page of Palak Gupta is here

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Thank you
Regards,
Palak Gupta

7 months ago | [YT] | 1

Palak Gupta

*अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: भारत की प्राचीन विरासत से वैश्विक स्वास्थ्य की ओर*

*~ पलक गुप्ता*

*21 जून* - एक ऐसा दिन, जब भारत की प्राचीन विरासत योग, पूरी दुनिया के स्वास्थ्य और शांति का उत्सव बन जाती है। योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो तन, मन और आत्मा को जोड़ती है। योग का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है, और आज यह भारत के कारण विश्व के हर कोने में अपनाया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का विचार भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत किया था। उन्होंने योग को मानव स्वास्थ्य और कल्याण का आधार बताते हुए इसे पूरी दुनिया के लिए अपनाने का आह्वान किया। इसी के परिणामस्वरूप 21 जून को, जो ग्रीष्म संक्रांति का सबसे लंबा दिन होता है, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में चुना गया।

इस दिन का उद्देश्य है- विश्वभर के लोगों को योग के महत्व और उसके सकारात्मक प्रभाव से परिचित कराना। योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक जागरूकता भी देता है। यही कारण है कि आज योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। दुनिया के हर देश, हर संस्कृति के लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं।

योग, संस्कृत शब्द ‘युज’ से बना है, जिसका अर्थ है—जोड़ना या एकता। योग तन, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह हमें न केवल स्वस्थ बनाता है, बल्कि जीवन के तनाव, चिंता और मानसिक दबाव से भी राहत दिलाता है। आज के समय में, जब हर व्यक्ति भागदौड़, तनाव और असंतुलन से जूझ रहा है, योग उन्हें शांति और ऊर्जा प्रदान करता है।

हर वर्ष योग दिवस की थीम अलग होती है। इस वर्ष 2025 की थीम है- *‘Yoga for Self and Society’* इसका उद्देश्य है कि योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाने का साधन बने। भारत के शहर, गांव, स्कूल, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आज भव्य योग सत्रों का आयोजन हो रहा है। देश-विदेश के नेता, योग गुरु और नागरिक इसमें बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

दिल्ली के ऐतिहासिक मैदानों में प्रधानमंत्री समेत हजारों लोग एक साथ योग करते नजर आते हैं, जो यह संदेश देता है कि योग समाज को भी जोड़ता है, एकता और भाईचारे को बढ़ाता है।

आज, जब दुनिया तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रही है, योग एक सरल लेकिन प्रभावशाली समाधान बनकर उभरा है। योग दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि एक सोच है—स्वास्थ्य, शांति और सकारात्मकता की ओर बढ़ने की प्रेरणा है।

आइए, इस योग दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि अपने स्वास्थ्य, मन और आत्मा की भलाई के लिए रोज़ाना कुछ समय योग को दें। यही हमारे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी- जब हम अपने भीतर की ऊर्जा को पहचानेंगे और उसे समाज के कल्याण में लगाएँगे।

*योग करें, स्वस्थ रहें, और दुनिया को जोड़े।
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7 months ago | [YT] | 1

Palak Gupta

*सुशांत सिंह राजपूत: एक चमकते सितारे की याद में – पांचवीं पुण्यतिथि पर विशेष*
~पलक गुप्ता

2020—यह वह वर्ष था जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। हर ओर डर का माहौल था, लोग लॉकडाउन के चलते अपने घरों में कैद थे। आम जनजीवन से लेकर व्यापार और सिनेमा जगत तक, सब कुछ थम सा गया था। इसी कठिन दौर में भारतीय सिनेमा ने इरफान खान और ऋषि कपूर जैसे कई अनमोल सितारे खो दिए।
इसी कड़ी में एक तारीख और भी थी—14 जून।
14 जून 2020, वह दिन जब एक खबर ने पूरे देश और दुनिया को स्तब्ध कर दिया। यह वही तारीख थी जब भारतीय सिनेमा ने अपना एक उभरता हुआ सितारा—सुशांत सिंह राजपूत—हमेशा के लिए खो दिया। सुशांत की आत्महत्या की खबर ने सभी को झकझोर कर रख दिया। किसी को भी इस खबर पर यकीन नहीं हो रहा था। देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। हर किसी के मन में एक ही सवाल था—जो इंसान सफलता की ऊंचाइयों को छू रहा था, वह अचानक जिंदगी से कैसे हार गया?

बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर करोड़ों दिलों पर राज करने वाले सुशांत ने न केवल अभिनय में बल्कि पढ़ाई में भी कमाल किया था। उन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में पूरे भारत में सातवीं रैंक हासिल की थी। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा नाम कमाने वालों में सुशांत का नाम सबसे ऊपर है।
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने टीवी सीरियल 'पवित्र रिश्ता' में मानव के किरदार से की थी, जिससे उन्हें पहचान मिली और यहीं से उनकी सफलता की उड़ान शुरू हुई। सुशांत विज्ञान के क्षेत्र में गहरी रुचि रखते थे। वे तारों को देखना पसंद करते थे और अक्सर एस्ट्रोफिजिक्स की किताबें पढ़ते थे। उन्होंने राष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (National Olympiad in Physics) भी जीता था।

सुशांत के फैंस के मन में आज भी यह सवाल है कि आखिर क्या वजह रही, जो इस उभरते सितारे ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। जो इंसान अपनी हर फिल्म से लोगों को जीना सिखा सकता है, वह खुद जिंदगी से कैसे हार सकता है?
कभी अनिरुद्ध पाठक, कभी इमानुएल राजकुमार जूनियर, कभी मंसूर तो कभी महेंद्र सिंह धोनी—सुशांत ने हर किरदार में जीवन का नया अर्थ दिया। उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से यही संदेश दिया कि हार को अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत माना जाए।

आज, 14 जून 2025 को, सुशांत सिंह राजपूत को गए पांच साल हो गए हैं। लेकिन उनके चाहने वाले आज भी इस दर्द से उबर नहीं पाए हैं कि वह अब हमारे बीच नहीं हैं। सवाल अब भी अनुत्तरित हैं, जिनके जवाब शायद कभी नहीं मिलेंगे। फिर भी, सुशांत के फैंस आज भी इस उम्मीद में हैं कि एक दिन उन्हें इंसाफ जरूर मिलेगा, क्योंकि वे मानते हैं कि वह इंसान, जिसने सबको जीना सिखाया, वह खुद कभी हार नहीं सकता।

सुशांत की फिल्में आज भी उतनी ही लोकप्रिय हैं, जितनी उनके जीवनकाल में थीं। कहते हैं, अगर आप सफल हैं और अच्छे कर्म करते हैं, तो आपका नाम आपके जाने के बाद भी लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहता है।
सुशांत को गए भले ही पांच साल बीत गए हों, लेकिन वे आज भी करोड़ों दिलों में जिंदा हैं और हमेशा रहेंगे।

उनकी पांचवीं पुण्यतिथि पर हमारी ओर से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
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7 months ago | [YT] | 4

Palak Gupta

🎯 🚨 मॉक ड्रिल अलर्ट: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें 🚨

आज, 7 मई 2025, देशभर में मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। यह एक पूर्व नियोजित अभ्यास है, कृपया घबराएं नहीं।

ब्लैकआउट के दौरान क्या करें:
घर के अंदर रहें, आपातकालीन किट तैयार रखें, खिड़कियाँ और दरवाज़े बंद रखें।

अफवाहों से बचें:
सत्यापित जानकारी पर भरोसा करें, अफवाहें न फैलाएं।

एक जिम्मेदार नागरिक बनें
यह मॉक ड्रिल हमारी सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारी का हिस्सा है। आपका सहयोग ही हमारी सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

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8 months ago | [YT] | 4

Palak Gupta

पहलगाम की हवाओं में आज भी गूंज रही है वो चीख़...
घाटियों में आज भी तैर रहा है एक सवाल —
*"क्या सिर्फ धर्म से इंसान की पहचान होगी?"*

मेरी कविता *'देखो वो इंसा चला गया'* आज 'अमर प्रभात' समाचार पत्र में प्रकाशित हुई है।
यह सिर्फ कविता नहीं, इंसानियत के लिए उठती एक सच्ची पुकार है। 💔

*आप सभी से आग्रह है — पढ़ें, महसूस करें और अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया ज़रूर दें।*🙏


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9 months ago | [YT] | 6