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Angutha Chhap

भारतीय पौराणिक कथाओं में शक्ति और आत्मज्ञान के विभिन्न स्तरों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें अक्सर साधना, तपस्या और ध्यान के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। इन स्तरों को आध्यात्मिक उन्नति के क्रम में समझा जा सकता है। यहाँ कुछ प्रमुख स्तरों का विवरण है:

1. साधारण मानव स्तर

इस स्तर पर व्यक्ति एक सामान्य मानव के रूप में जीवन व्यतीत करता है और उसके पास कोई विशेष आध्यात्मिक शक्ति नहीं होती। यह अवस्था आत्मा के जागरण की शुरुआत होती है।


2. योगी स्तर

यह स्तर वह होता है जहाँ व्यक्ति योग और ध्यान के अभ्यास के माध्यम से आत्म-चेतना का अनुभव करना शुरू करता है। योग के माध्यम से व्यक्ति शरीर, मन और आत्मा में संतुलन लाता है।


3. ऋषि स्तर

ऋषि स्तर पर साधक गहरी तपस्या और ध्यान के माध्यम से ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों को समझने लगता है। उसे कुछ सिद्धियाँ (अलौकिक शक्तियाँ) प्राप्त हो सकती हैं, जैसे कि ध्यान से संकल्प सिद्ध करना।


4. महार्षि स्तर

इस स्तर पर साधक को गहन आत्मज्ञान और गहन शक्ति की अनुभूति होती है। वह ब्रह्मांड के नियमों को समझने में सक्षम हो जाता है और समाज को मार्गदर्शन प्रदान करने की क्षमता रखता है।


5. महायोगी/सिद्ध स्तर

इस स्तर पर साधक अपनी सारी इच्छाओं और भौतिक जीवन के बंधनों से मुक्त हो जाता है। वह स्वयं में ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति करता है। इस स्तर पर व्यक्ति को योगशास्त्र में सिद्ध पुरुष कहा जाता है।


6. देवता स्तर

देवता स्तर पर व्यक्ति को अत्यधिक आध्यात्मिक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। इस स्तर पर साधक केवल एक महान आत्मा नहीं होता, बल्कि उसे देवताओं के समान शक्ति और ज्ञान प्राप्त होता है।


7. महादेव स्तर

यह सबसे उच्च स्तर होता है, जहाँ साधक स्वयं को परमात्मा के समान अनुभव करता है। वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है और जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। इस स्तर पर व्यक्ति को "महादेव" या परमात्मा तुल्य माना जाता है।


भारतीय पौराणिक ग्रंथों में इन स्तरों का विस्तृत विवरण मिलता है, और यह बताया गया है कि इन सभी अवस्थाओं तक पहुँचने के लिए साधना, तपस्या, और ध्यान की एक कठिन यात्रा को तय करना पड़ता है।

1 year ago | [YT] | 0

Angutha Chhap

1 year ago | [YT] | 1

Angutha Chhap

Oscar winning

2 years ago | [YT] | 4

Angutha Chhap

Perfect shot?

3 years ago | [YT] | 6