समय का कोई भरोसा नहीं, कभी घड़ी की सुई धीमी चलती है, कभी तेज़ी से भागती है, जैसे किसी ने अपनी ज़िंदगी में एक नया पथ पकड़ लिया हो। वो एक पल जो खुशियों में डूबा था, अगले ही पल दुःख का साया बन जाता है, कभी हंसते हुए जीते हैं हम, कभी आँसू में डूब जाते हैं। समय का कोई भरोसा नहीं।
कभी हर मिनट सोने का अहसास होता है, कभी समय की चाल रुक सी जाती है, दूरी की गहराई हमें पता नहीं चलती, कभी तो ये हमें करीब लाती है। क्या जाने अगला पल क्या होगा, समय की धारा में वो कहाँ खो जाएगा, समय का कोई भरोसा नहीं।
एक क्षण में दुनिया बदल जाती है, फिर वही पल अगले दिन अधूरा सा लगता है, वो खुशी जो कल पास थी, आज बस एक याद बन जाती है। समय पर कोई काबू नहीं पा सकता, यह अपनी दिशा खुद तय करता है, समय का कोई भरोसा नहीं।
जो छू लिया था कभी हमने, अब वो हमसे दूर जा चुका है, समय की रेलगाड़ी, हमेशा आगे बढ़ती जाती है। पर हम वहीं, जहाँ थे, खड़े रहते हैं, समय कभी हमें रोक नहीं सकता, समय का कोई भरोसा नहीं।
हम भी इस समय की लहरों के साथ बहते हैं, कभी तेज़, कभी धीमा, लेकिन समय हमें बताता है कि जीवन एक अदृश्य यात्रा है, जिसे हम समझने की कोशिश करते रहते हैं, पर समय का कोई भरोसा नहीं।
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**कविता का सार**: समय की न धीमी न तेज़ गति में कोई स्थिरता नहीं है, और इसका कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। यह लगातार बदलता रहता है, और हमें यह सिखाता है कि जीवन में हर पल, हर बदलाव को स्वीकार करना चाहिए। समय हमारे हाथों से गुजरता रहता है, और हम इसे रोक नहीं सकते, लेकिन हम इसके साथ जी सकते हैं।
Abhilash Tiwari
**समय का कोई भरोसा नहीं**
(कविता)
समय का कोई भरोसा नहीं,
कभी घड़ी की सुई धीमी चलती है,
कभी तेज़ी से भागती है,
जैसे किसी ने अपनी ज़िंदगी में
एक नया पथ पकड़ लिया हो।
वो एक पल जो खुशियों में डूबा था,
अगले ही पल दुःख का साया बन जाता है,
कभी हंसते हुए जीते हैं हम,
कभी आँसू में डूब जाते हैं।
समय का कोई भरोसा नहीं।
कभी हर मिनट सोने का अहसास होता है,
कभी समय की चाल रुक सी जाती है,
दूरी की गहराई हमें पता नहीं चलती,
कभी तो ये हमें करीब लाती है।
क्या जाने अगला पल क्या होगा,
समय की धारा में वो कहाँ खो जाएगा,
समय का कोई भरोसा नहीं।
एक क्षण में दुनिया बदल जाती है,
फिर वही पल अगले दिन अधूरा सा लगता है,
वो खुशी जो कल पास थी,
आज बस एक याद बन जाती है।
समय पर कोई काबू नहीं पा सकता,
यह अपनी दिशा खुद तय करता है,
समय का कोई भरोसा नहीं।
जो छू लिया था कभी हमने,
अब वो हमसे दूर जा चुका है,
समय की रेलगाड़ी,
हमेशा आगे बढ़ती जाती है।
पर हम वहीं, जहाँ थे, खड़े रहते हैं,
समय कभी हमें रोक नहीं सकता,
समय का कोई भरोसा नहीं।
हम भी इस समय की लहरों के साथ बहते हैं,
कभी तेज़, कभी धीमा,
लेकिन समय हमें बताता है
कि जीवन एक अदृश्य यात्रा है,
जिसे हम समझने की कोशिश करते रहते हैं,
पर समय का कोई भरोसा नहीं।
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**कविता का सार**:
समय की न धीमी न तेज़ गति में कोई स्थिरता नहीं है, और इसका कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। यह लगातार बदलता रहता है, और हमें यह सिखाता है कि जीवन में हर पल, हर बदलाव को स्वीकार करना चाहिए। समय हमारे हाथों से गुजरता रहता है, और हम इसे रोक नहीं सकते, लेकिन हम इसके साथ जी सकते हैं।
6 months ago | [YT] | 0
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