यह चैनल मनुष्य की चेतना का विकास करने मे सहायता प्रदान करने व जीवन को आनंद पूर्वक कैसे जिये ओर अपनी मुक्ति के मार्ग पर आगे बढने के लिए है,अपने जीवन में सुख व शान्ति बनाये रखने के लिये कम से कम एक धंटे का समय ध्यान व योग के लिए अवश्य निकाले,
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MAHARISHI SHRENIK
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2 weeks ago | [YT] | 6
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MAHARISHI SHRENIK
आज 1 फ़रवरी, संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर उनके वचनों का स्मरण हमें जीवन की सही दिशा दिखाता है।संत रविदास जी कहते हैं कि हरि अर्थात् भगवान अमूल्य हीरे के समान हैं, किंतु मनुष्य उस हीरे को छोड़कर नश्वर धन-दौलत और भौतिक सुखों के पीछे भागता रहता है। “आन की आस” में उलझकर वह ईश्वर को भूल जाता है और जीवन के सच्चे लक्ष्य से भटक जाता है। ऐसा जीवन दुःख, अशांति और असंतोष से भर जाता है,यही वास्तविक “जमपुर” है।“सत भाषै रविदास” के माध्यम से संत यह शाश्वत सत्य बताते हैं कि ईश्वर की भक्ति ही जीवन का वास्तविक सार है। हरि-स्मरण से ही सच्चा सुख, शांति और मुक्ति प्राप्त होती है। जो व्यक्ति भगवान को अपने जीवन का केंद्र बना लेता है, वही अपने जीवन को सार्थक करता है।
🙏 संत रविदास जी की जयंती पर उनके विचारों को अपनाने और प्रेम, समता व भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लें। 🙏
3 weeks ago | [YT] | 7
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MAHARISHI SHRENIK
ॐ सरस्वती देवाय नमः 🙏🙏🙏
देवी सरस्वती का वास्तविक संबंध विशुद्ध चक्र से है। जब साधक की प्राण–ऊर्जा साधना के माध्यम से इस विशुद्ध चक्र में स्थिर हो जाती है, तब उसके भीतर काव्य का उद्गम होता है। यह काव्य कभी संगीत के रूप में, कभी ज्ञान के रूप में, और कभी मौन की गहराई से प्रकट होता है।
जिसका विशुद्ध चक्र जाग्रत हो जाता है, समझो उसके भीतर सरस्वती का प्राकट्य हो गया। तब उसकी वाणी में एक विशेष स्पंदन, एक मधुरता और एक प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। वह जो भी बोलता है, उसमें सहज ही प्रभावशीलता और सत्य की गूंज होती है।वसंत पूजा और वसंत पंचमी इसी आंतरिक जागरण का प्रतीक हैं,जहाँ भीतर की सरस्वती प्रकट होती है और चेतना वाणी के माध्यम से प्रवाहित होने लगती है।
4 weeks ago | [YT] | 10
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MAHARISHI SHRENIK
ॐ नमः शिवाय 🙏🙏🙏
हर इंसान अकेला पैदा होता है,माँ के गर्भ से निकलते समय कोई साथ नहीं। अकेला मरता है,मौत के समय सब छूट जाता है। अकेला कर्मों का फल भोगता है,अच्छे-बुरे कामों का नतीजा सिर्फ़ खुद को मिलता है, किसी और को नहीं। अकेला मोक्ष पाता है,भगवान तक पहुँचने की राह खुद चलनी पड़ती है।रिश्तेदार भाग्य नहीं बदल सकते माता-पिता, भाई-बहन या दोस्त मदद कर सकते हैं, लेकिन तुम्हारा कर्म और भाग्य तुम्हारा ही है। वे प्रेरणा दे सकते हैं,
1 month ago | [YT] | 7
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MAHARISHI SHRENIK
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1 month ago | [YT] | 9
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The Divine Spirituality Of Rumi
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1 month ago | [YT] | 9
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आधुनिक गीता
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1 month ago (edited) | [YT] | 8
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The Secret Psychology Of Kundalini Chakras
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3 months ago | [YT] | 10
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3 months ago | [YT] | 9
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MAHARISHI SHRENIK
3 months ago | [YT] | 8
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