Rachna Awasthi poems
कल तक थे जो करीब,आज दूर हो गए ।कितने हंसीन सपने, चूर चूर हो गए।।वादा किया था साथ, चलने का दूर तक ।मंजिल थी अभी दूर, वो काफूर हो गए।।
2 years ago (edited) | [YT] | 6
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Rachna Awasthi poems
कल तक थे जो करीब,आज दूर हो गए ।
कितने हंसीन सपने, चूर चूर हो गए।।
वादा किया था साथ, चलने का दूर तक ।
मंजिल थी अभी दूर, वो काफूर हो गए।।
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