पिता" और "पति" दोनों मे "प" और "त" अक्षर का इश्तेमाल हुआ है। एक पति मे पिता भी छुपा हुआ है। ये महज संयोग नही है। बल्कि भाषा विशेषज्ञों ने सोच विचार कर ये नाम दिये है। दोनों प्रेम करते हैं। दोनों परवाह करते है। रक्षा करते है। पालन पोषण करते हैं। बस एक जन्मदाता है दूसरा जीवन साथी है। एक का प्रेम वात्सल्यपूर्ण है दूसरे का प्रेम दाम्पत्य पूर्ण है। मगर यहाँ एक बड़ा अंतर है। पिता का प्रेम निस्वार्थ है जबकि पति को प्रेम के बदले प्रेम चाहिए होता हैं !!🫶♥️🤞शुभ प्रभात दोस्तों ❣️ राइटर अजय कुशवाहा यूपी चित्रकूट धाम
जरूरी नहीं सोशल मीडिया पर आपको गर्लफ्रेंड ही मिले अगर नियत साफ है तो एक अच्छी दोस्त ,एक बहन एक बेटी भी मिल सकती हैं .... राइटर अजय कुशवाहा यूपी चित्रकूट धाम,,,,
💔 "विधवा औरत को हुआ कुंवारे लड़के से प्यार… जब रिश्ता सम्भोग तक पहुंचा तो हो गया विवाद
ये कहानी है कमला की — उम्र 34 साल, विधवा, सुंदर, शांत स्वभाव की। उसका पति रामू ट्रक एक्सीडेंट में चल बसा था। पीछे छूटे दो छोटे बच्चे और टूटा हुआ घर। कमला ने रिश्तेदारों से मदद मांगी, समाज से सहारा मांगा… लेकिन हर दरवाज़ा धीरे-धीरे बंद होता चला गया।
काम करने के लिए वो गांव के ही स्कूल में सफाई का काम करने लगी। वहीं उसकी मुलाकात हुई आकाश से — 24 साल का युवक, बेरोज़गार, लेकिन समझदार और संवेदनशील। वो रोज़ काम के बाद कमला से बातें करता, उसकी मदद करता, और उसकी आंखों में छुपी तकलीफ को पढ़ लेता।
धीरे-धीरे कमला को वो सुकून आकाश की बातों में मिला, जो उसे बरसों से किसी ने नहीं दिया था। वो सिर्फ़ हंसता नहीं था — उसके आंसुओं के पीछे की खामोशी को भी समझता था।
और फिर… एक दिन, अकेलेपन की उस लंबी रात में जब कमला टूट गई, तो आकाश ने उसके कांपते हाथों को थामा… और उनके बीच एक गहरा, आत्मीय रिश्ता बन गया — जिसमें सिर्फ़ संभोग नहीं, सहारा, अपनापन और छांव भी थी।
वो रिश्ता छुपा रहा कुछ समय… लेकिन गांव की दीवारों के कान होते हैं।
एक दिन किसी ने दोनों को साथ देख लिया, और अगले ही दिन गांव की चौपाल में चर्चा शुरू हो गई: “विधवा होकर जवान लड़कों को फंसा रही है…” “बेशर्म औरत, अब क्या इज्ज़त सिखाएगी बच्चों को…”
गांववालों ने उसके घर पत्थर फेंके, पंचायत बुलाई गई।
कमला को पंचायत के सामने लाया गया — जहां बैठे थे वही लोग, जो उसके पति की मौत पर चुप रहे थे, जो कभी एक रोटी तक नहीं दे सके उसके बच्चों के लिए।
पंचायत में एक बुज़ुर्ग बोला — "एक विधवा और जवान कुंवारा… ये रिश्ता समाज के खिलाफ़ है!"
कमला ने सिर उठाकर पहली बार बोला: "समाज ने मुझे कब अपनाया जो मैं उसके खिलाफ गई? जब मेरी कोख भूखी थी, तब कोई सामने नहीं आया… अब जब किसी ने मेरा आंसू पोंछा, तो आपको मेरी आंखें जलती लगने लगीं?"
सब चुप थे।
तभी आकाश खड़ा हुआ और कहा — "मैंने कमला को सिर्फ़ एक औरत नहीं, एक इंसान समझा। उसके शरीर से नहीं, उसकी मजबूरी से रिश्ता बनाया। अगर ये गुनाह है, तो मैं हर बार यही गुनाह करूंगा।"
गांव दो हिस्सों में बंट गया — एक वो जो सिर्फ़ बदन देखते थे, और दूसरे जो दिल की आवाज़ सुन पाए।
कुछ दिन बाद… कमला ने गांव छोड़ दिया।
आज वो शहर में एक स्कूल में काम करती है। आकाश उसके साथ है, उसके दोनों बच्चों को पिता का नाम मिला है।
और जब कोई पूछता है — "क्या तुम विधवा हो?" तो वो मुस्कुराकर कहती है — "नहीं… मैं इंसान हूं — जिसे प्यार मिला, तो जी उठी।"
🙏 अगर इस कहानी ने आपकी आंखें नम कर दी हों, तो इसे ज़रूर साझा करें… ताकि समाज समझ सके कि विधवा औरत को प्यार करने का हक है — और प्यार सिर्फ़ जवां दिलों का नहीं, टूटी रूहों का भी होता है। 💔 राइटर अजय कुशवाहा यूपी चित्रकूट धाम
आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक खंभे की लाइट जल रही थी, उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े में डरी सहमी सी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस लड़की पर पड़ी वह रूक सा गया, लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे से लगभग चिपकी हुई सी थी, वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान से पूछा तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही है...?
लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहाँ लड़की देख रही थी तो वहाँ चार लड़के उस लड़की को घूर रहे थे, उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था, लड़का उस बुजुर्ग को देखकर झेप गया और अपने साथियों के साथ वहाँ से चला गया लड़की उस शराब के नशे में बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया मेरा नाम रूपा है मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूँ, वो लोग मुझे आज रात के लिए कहीं भेजने वाले थे, दबी जुबान से बड़ी मुश्किल से वो कह पाई...!
बुजुर्ग:- क्या बात करती है..तू अब कहाँ जाएगी..!
लड़की:- नहीं मालूम.....!
बुजुर्ग:- मेरे घर चलेगी.....?
लड़की मन ही मन सोच रही थी कि ये शराब के नशे में है और आधी रात का समय है ऊपर से ये शरीफ भी नहीं लगता है, और भी कई सवाल उसके मन में धमाचौकड़ी मचाए हुए थे!
बुजुर्ग:- अब आखिरी बार पूछता हूँ मेरे घर चलोगी हमेशा के लिए...?
बदनसीबी को अपना मुकद्दर मान बैठी गहरे घुप्प अँधेरे से घबराई हुई सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़कर लड़की ने दबी कुचली जुबान से कहा जी हाँ
उस बुजुर्ग ने झट से लड़की का हाथ कसकर पकड़ा और तेज कदमों से लगभग उसे घसीटते हुए अपने घर की तरफ बढ़ चला वो नशे में इतना धुत था कि अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था किसी तरह लड़खड़ाता हुआ अपने मिट्टी से बने कच्चे घर तक पहुँचा और कुंडी खटखटाई थोड़ी ही देर में उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला और पत्नी कुछ बोल पाती कि उससे पहले ही उस बुजुर्ग ने कहा ये लो सम्भालो इसको "बेटी लेकर आया हूँ हमारे लिए" अब हम बाँझ नहीं कहलाएंगे आज से हम भी औलाद वाले हो गए, पत्नी की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे और उसने उस लड़की को अपने सीने से लगा लिया।। राइटर अजय कुशवाहा, यूपी चित्रकूट धाम,
माँ की मौत के बाद जब तेरहवीं भी निपट गई, तब चारु ने अपने भाई से विदा लेने के लिए नम आँखों से कहा, "सब काम हो गए भैया, माँ चली गई अब मैं चलती हूँ।" आँसुओं के कारण उसके मुंह से केवल इतना ही निकला।
भैया ने उसकी बात सुनकर कहा, "रुक चारु, अभी एक काम बाकी है। ये ले माँ की अलमारी की चाभी और जो भी सामान चाहिए, ले जा।"
चारु ने चाभी लेने से इनकार करते हुए भाभी को चाभी पकड़ा दी और कहा, "भाभी, ये आपका हक है, आप ही खोलिए।" भाभी ने भैया की स्वीकृति पर अलमारी खोली।
भैया बोले, "देख ये माँ के कीमती गहने और कपड़े हैं। तुझे जो लेना है, ले जा क्योंकि माँ की चीजों पर बेटी का हक सबसे ज्यादा होता है।"
चारु ने उत्तर दिया, "भैया, मैंने हमेशा यहाँ इन गहनों और कपड़ों से भी कीमती चीज देखी है, मुझे वही चाहिए।"
भैया ने पूछा, "तू किस कीमती चीज की बात कर रही है, चारु? हमने माँ की अलमारी को हाथ तक नहीं लगाया, जो भी है, तेरे सामने है।"
चारु ने कहा, "भैया, इन गहनों और कपड़ों पर तो भाभी का हक है क्योंकि उन्होंने माँ की सेवा बहू नहीं, बेटी बनकर की है। मुझे तो वो कीमती सामान चाहिए जो हर बहन और बेटी चाहती है।"
भाभी ने समझते हुए कहा, "दीदी, मैं समझ गई कि आपको किस चीज की चाह है। आप फ़िक्र मत कीजिए, माँ के बाद भी आपका ये मायका हमेशा सलामत रहेगा। पर फिर भी माँ की निशानी समझ कुछ तो ले लीजिए।"
चारु ने भाभी को गले लगाते हुए रोते हुए कहा, "भाभी, जब मेरा मायका सलामत है मेरे भाई और भाभी के रूप में, तो मुझे किसी निशानी की जरूरत नहीं। फिर भी आप कहती हैं तो मैं ये हँसते-खेलते मेरे मायके की तस्वीर ले जाऊंगी, जो मुझे हमेशा एहसास कराएगी कि मेरी माँ भले ही नहीं है पर मायका है।"
यह कहकर चारु ने पूरे परिवार की तस्वीर उठाई और नम आँखों से सबसे विदा ली। ये कहानी आप को कैसी लगी ओर कौन कौन अपनी बहन से प्यार करता है। comment बॉक्स मे बताये क्या मे ने सही लिखा है............... राइटर अजय कुशवाहा ,,यूपी चित्रकूट धाम,,
हर जगह मौन रह कर जवाब नही दिया जा सकता। क्योंकि कुछ लोगों के शब्द इतने कटु होते है कि अगर उन्हे उन्ही की भाषा मे जवाब न दिया जाए तो रोज वो आपका आत्मसम्मान रौंधते रहेंगे। राइटर अजय कुशवाहा ।।
अपनी कमाई का ज्यादा नही तो दस प्रतिशत अपने शौक पूरे करने पर खर्च करो... गृहस्ती यूँ ही चलती रहेगी, बैंक बैलेंस कितना भी कर लो। अंत मे औलाद को कम ही लगेगा। यहाँ आप जीने आये हो। सात पीढ़ियों का बन्दोबस्त करने नही आये। थोड़ा सा जी लो। पता नही कब सांस चलनी बन्द हो जाए। याद रखो ये दिन लौट कर कभी नही आयेंगे। उम्र भाग रही है। थोड़े दिन बाद दांत और आंत दोनों जवाब दे देंगे। घूमो, फिरो, खाओ, पियो मस्ती करो। Good morning everyone मेरी कहानी कैसी लगी कमेंट में बताओ,, अजय कुशवाहा यूपी चित्रकूट धाम,,
एक फटी हुई धोती और जर्जर कमीज पहने एक व्यक्ति अपनी लगभग 15-16 साल की बेटी के साथ शहर के सबसे बड़े होटल में पहुंचा। दोनों एक टेबल पर बैठ गए। वेटर आया, उसने उन्हें दो गिलास ठंडा पानी परोसा और मुस्कुराते हुए पूछा, "आप क्या लेना चाहेंगे?"
व्यक्ति ने विनम्रता से जवाब दिया, "मैंने अपनी बेटी से वादा किया था कि अगर वह दसवीं कक्षा में जिले में टॉप करेगी, तो मैं उसे इस होटल में डोसा खिलाऊंगा। इसने अपना वादा निभाया है, अब मेरी बारी है। कृपया एक डोसा ले आइए।"
वेटर ने पूछा, "आपके लिए कुछ नहीं?" व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरे पास सिर्फ एक डोसे के पैसे हैं।"
वेटर भावुक हो गया और सीधे होटल मालिक के पास पहुंचा। पूरी बात बताकर बोला, "मैं चाहता हूं कि इन दोनों को भरपेट नाश्ता कराया जाए। आप बिल मेरी सैलरी से काट लीजिए।"
मालिक ने कहानी सुनी और मुस्कराते हुए कहा, "आज इस होनहार बेटी की सफलता का जश्न होटल की तरफ से होगा।"
होटल स्टाफ ने टेबल को खूबसूरती से सजाया और बेटी के लिए खास व्यंजन परोसे। मालिक ने न सिर्फ उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराया, बल्कि उपहार में तीन डोसे और पूरे मोहल्ले के लिए मिठाई भी भिजवाई। यह अपनापन देखकर पिता और बेटी की आंखें भर आईं।
सालों बाद, वही बेटी I.A.S. की परीक्षा पास कर उसी शहर की कलेक्टर बन गई। उसने होटल मालिक को संदेश भिजवाया कि कलेक्टर साहिबा नाश्ता करने आ रही हैं।
होटल फिर उसी गर्मजोशी से तैयार हुआ। जब कलेक्टर अपने माता-पिता के साथ पहुंचीं, सभी ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। लड़की ने आगे बढ़कर होटल मालिक और वेटर के सामने सिर झुकाते हुए कहा, "मैं वही लड़की हूं, जिसके पिता उस दिन सिर्फ एक डोसे के पैसे लेकर आए थे। आप दोनों ने मेरे आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचाई, बल्कि मेरी सफलता का जश्न मनाया। आज जो कुछ भी हूं, आपकी उस इंसानियत की वजह से हूं।"
उसने आगे कहा, "आज इस होटल का पूरा खर्च मेरी तरफ से है। सभी ग्राहकों और स्टाफ का बिल मैं दूंगी।" साथ ही यह घोषणा की गई कि होटल मालिक और वेटर को "श्रेष्ठ नागरिक" सम्मान से नवाजा जाएगा।
याद रखिए — किसी की गरीबी पर हँसने से बेहतर है उसकी मेहनत को सलाम करना। आपकी छोटी-सी मदद, किसी के भविष्य की नींव बन सकती है। राइटर,,अजय कुशवाहा,, यूपी चित्रकूट धाम,, मेरी कहानी कैसी लगी,, कमेंट में बताओ बहुत सोच समझ कर लिखा है,,
अगर अपने दिल में अपने mata-pita के प्रति कदर और ज्यादा करनी हो तो उनसे मिलो जिनके सर पर maa-baap का साया नहीं हैं। जब भी अपने माँ-बाप के साथ बैठों तो परमात्मा का शुक्रिया अदा करो क्योंकि कुछ अनाथ लोग इन लम्हों को तरसते हैं।
Ajay kushwaha Kushwaha
पिता" और "पति" दोनों मे "प" और "त" अक्षर का इश्तेमाल हुआ है। एक पति मे पिता भी छुपा हुआ है। ये महज संयोग नही है। बल्कि भाषा विशेषज्ञों ने सोच विचार कर ये नाम दिये है। दोनों प्रेम करते हैं। दोनों परवाह करते है। रक्षा करते है। पालन पोषण करते हैं। बस एक जन्मदाता है दूसरा जीवन साथी है। एक का प्रेम वात्सल्यपूर्ण है दूसरे का प्रेम दाम्पत्य पूर्ण है। मगर यहाँ एक बड़ा अंतर है। पिता का प्रेम निस्वार्थ है जबकि पति को प्रेम के बदले प्रेम चाहिए होता हैं !!🫶♥️🤞शुभ प्रभात दोस्तों ❣️ राइटर अजय कुशवाहा यूपी चित्रकूट धाम
2 weeks ago | [YT] | 2
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Ajay kushwaha Kushwaha
जरूरी नहीं सोशल मीडिया पर आपको गर्लफ्रेंड ही मिले अगर नियत साफ है तो एक अच्छी दोस्त ,एक बहन एक
बेटी भी मिल सकती हैं .... राइटर अजय कुशवाहा यूपी चित्रकूट धाम,,,,
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Ajay kushwaha Kushwaha
💔 "विधवा औरत को हुआ कुंवारे लड़के से प्यार… जब रिश्ता सम्भोग तक पहुंचा तो हो गया विवाद
ये कहानी है कमला की — उम्र 34 साल, विधवा, सुंदर, शांत स्वभाव की।
उसका पति रामू ट्रक एक्सीडेंट में चल बसा था। पीछे छूटे दो छोटे बच्चे और टूटा हुआ घर।
कमला ने रिश्तेदारों से मदद मांगी, समाज से सहारा मांगा… लेकिन हर दरवाज़ा धीरे-धीरे बंद होता चला गया।
काम करने के लिए वो गांव के ही स्कूल में सफाई का काम करने लगी।
वहीं उसकी मुलाकात हुई आकाश से — 24 साल का युवक, बेरोज़गार, लेकिन समझदार और संवेदनशील।
वो रोज़ काम के बाद कमला से बातें करता, उसकी मदद करता, और उसकी आंखों में छुपी तकलीफ को पढ़ लेता।
धीरे-धीरे कमला को वो सुकून आकाश की बातों में मिला, जो उसे बरसों से किसी ने नहीं दिया था।
वो सिर्फ़ हंसता नहीं था — उसके आंसुओं के पीछे की खामोशी को भी समझता था।
और फिर… एक दिन, अकेलेपन की उस लंबी रात में जब कमला टूट गई,
तो आकाश ने उसके कांपते हाथों को थामा…
और उनके बीच एक गहरा, आत्मीय रिश्ता बन गया —
जिसमें सिर्फ़ संभोग नहीं, सहारा, अपनापन और छांव भी थी।
वो रिश्ता छुपा रहा कुछ समय…
लेकिन गांव की दीवारों के कान होते हैं।
एक दिन किसी ने दोनों को साथ देख लिया, और अगले ही दिन गांव की चौपाल में चर्चा शुरू हो गई:
“विधवा होकर जवान लड़कों को फंसा रही है…”
“बेशर्म औरत, अब क्या इज्ज़त सिखाएगी बच्चों को…”
गांववालों ने उसके घर पत्थर फेंके, पंचायत बुलाई गई।
कमला को पंचायत के सामने लाया गया — जहां बैठे थे वही लोग,
जो उसके पति की मौत पर चुप रहे थे,
जो कभी एक रोटी तक नहीं दे सके उसके बच्चों के लिए।
पंचायत में एक बुज़ुर्ग बोला —
"एक विधवा और जवान कुंवारा… ये रिश्ता समाज के खिलाफ़ है!"
कमला ने सिर उठाकर पहली बार बोला:
"समाज ने मुझे कब अपनाया जो मैं उसके खिलाफ गई?
जब मेरी कोख भूखी थी, तब कोई सामने नहीं आया…
अब जब किसी ने मेरा आंसू पोंछा, तो आपको मेरी आंखें जलती लगने लगीं?"
सब चुप थे।
तभी आकाश खड़ा हुआ और कहा —
"मैंने कमला को सिर्फ़ एक औरत नहीं, एक इंसान समझा।
उसके शरीर से नहीं, उसकी मजबूरी से रिश्ता बनाया।
अगर ये गुनाह है, तो मैं हर बार यही गुनाह करूंगा।"
गांव दो हिस्सों में बंट गया — एक वो जो सिर्फ़ बदन देखते थे, और दूसरे जो दिल की आवाज़ सुन पाए।
कुछ दिन बाद…
कमला ने गांव छोड़ दिया।
आज वो शहर में एक स्कूल में काम करती है।
आकाश उसके साथ है, उसके दोनों बच्चों को पिता का नाम मिला है।
और जब कोई पूछता है —
"क्या तुम विधवा हो?"
तो वो मुस्कुराकर कहती है —
"नहीं… मैं इंसान हूं — जिसे प्यार मिला, तो जी उठी।"
🙏 अगर इस कहानी ने आपकी आंखें नम कर दी हों, तो इसे ज़रूर साझा करें… ताकि समाज समझ सके कि विधवा औरत को प्यार करने का हक है — और प्यार सिर्फ़ जवां दिलों का नहीं, टूटी रूहों का भी होता है। 💔 राइटर अजय कुशवाहा यूपी चित्रकूट धाम
1 month ago | [YT] | 3
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Ajay kushwaha Kushwaha
आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के नशे में अपने घर की तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक खंभे की लाइट जल रही थी, उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े में डरी सहमी सी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस लड़की पर पड़ी वह रूक सा गया, लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे से लगभग चिपकी हुई सी थी, वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान से पूछा तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही है...?
लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहाँ लड़की देख रही थी तो वहाँ चार लड़के उस लड़की को घूर रहे थे, उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था, लड़का उस बुजुर्ग को देखकर झेप गया और अपने साथियों के साथ वहाँ से चला गया लड़की उस शराब के नशे में बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया मेरा नाम रूपा है मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूँ, वो लोग मुझे आज रात के लिए कहीं भेजने वाले थे, दबी जुबान से बड़ी मुश्किल से वो कह पाई...!
बुजुर्ग:- क्या बात करती है..तू अब कहाँ जाएगी..!
लड़की:- नहीं मालूम.....!
बुजुर्ग:- मेरे घर चलेगी.....?
लड़की मन ही मन सोच रही थी कि ये शराब के नशे में है और आधी रात का समय है ऊपर से ये शरीफ भी नहीं लगता है, और भी कई सवाल उसके मन में धमाचौकड़ी मचाए हुए थे!
बुजुर्ग:- अब आखिरी बार पूछता हूँ मेरे घर चलोगी हमेशा के लिए...?
बदनसीबी को अपना मुकद्दर मान बैठी गहरे घुप्प अँधेरे से घबराई हुई सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़कर लड़की ने दबी कुचली जुबान से कहा जी हाँ
उस बुजुर्ग ने झट से लड़की का हाथ कसकर पकड़ा और तेज कदमों से लगभग उसे घसीटते हुए अपने घर की तरफ बढ़ चला वो नशे में इतना धुत था कि अच्छे से चल भी नहीं पा रहा था किसी तरह लड़खड़ाता हुआ अपने मिट्टी से बने कच्चे घर तक पहुँचा और कुंडी खटखटाई थोड़ी ही देर में उसकी पत्नी ने दरवाजा खोला और पत्नी कुछ बोल पाती कि उससे पहले ही उस बुजुर्ग ने कहा ये लो सम्भालो इसको "बेटी लेकर आया हूँ हमारे लिए" अब हम बाँझ नहीं कहलाएंगे आज से हम भी औलाद वाले हो गए, पत्नी की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगे और उसने उस लड़की को अपने सीने से लगा लिया।। राइटर अजय कुशवाहा, यूपी चित्रकूट धाम,
1 month ago | [YT] | 2
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Ajay kushwaha Kushwaha
माँ की मौत के बाद जब तेरहवीं भी निपट गई, तब चारु ने अपने भाई से विदा लेने के लिए नम आँखों से कहा, "सब काम हो गए भैया, माँ चली गई अब मैं चलती हूँ।" आँसुओं के कारण उसके मुंह से केवल इतना ही निकला।
भैया ने उसकी बात सुनकर कहा, "रुक चारु, अभी एक काम बाकी है। ये ले माँ की अलमारी की चाभी और जो भी सामान चाहिए, ले जा।"
चारु ने चाभी लेने से इनकार करते हुए भाभी को चाभी पकड़ा दी और कहा, "भाभी, ये आपका हक है, आप ही खोलिए।" भाभी ने भैया की स्वीकृति पर अलमारी खोली।
भैया बोले, "देख ये माँ के कीमती गहने और कपड़े हैं। तुझे जो लेना है, ले जा क्योंकि माँ की चीजों पर बेटी का हक सबसे ज्यादा होता है।"
चारु ने उत्तर दिया, "भैया, मैंने हमेशा यहाँ इन गहनों और कपड़ों से भी कीमती चीज देखी है, मुझे वही चाहिए।"
भैया ने पूछा, "तू किस कीमती चीज की बात कर रही है, चारु? हमने माँ की अलमारी को हाथ तक नहीं लगाया, जो भी है, तेरे सामने है।"
चारु ने कहा, "भैया, इन गहनों और कपड़ों पर तो भाभी का हक है क्योंकि उन्होंने माँ की सेवा बहू नहीं, बेटी बनकर की है। मुझे तो वो कीमती सामान चाहिए जो हर बहन और बेटी चाहती है।"
भाभी ने समझते हुए कहा, "दीदी, मैं समझ गई कि आपको किस चीज की चाह है। आप फ़िक्र मत कीजिए, माँ के बाद भी आपका ये मायका हमेशा सलामत रहेगा। पर फिर भी माँ की निशानी समझ कुछ तो ले लीजिए।"
चारु ने भाभी को गले लगाते हुए रोते हुए कहा, "भाभी, जब मेरा मायका सलामत है मेरे भाई और भाभी के रूप में, तो मुझे किसी निशानी की जरूरत नहीं। फिर भी आप कहती हैं तो मैं ये हँसते-खेलते मेरे मायके की तस्वीर ले जाऊंगी, जो मुझे हमेशा एहसास कराएगी कि मेरी माँ भले ही नहीं है पर मायका है।"
यह कहकर चारु ने पूरे परिवार की तस्वीर उठाई और नम आँखों से सबसे विदा ली। ये कहानी आप को कैसी लगी ओर कौन कौन अपनी बहन से प्यार करता है।
comment बॉक्स मे बताये क्या मे ने सही लिखा है...............
राइटर अजय कुशवाहा ,,यूपी चित्रकूट धाम,,
1 month ago | [YT] | 3
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Ajay kushwaha Kushwaha
हर जगह मौन रह कर जवाब नही दिया जा सकता। क्योंकि कुछ लोगों के शब्द इतने कटु होते है कि अगर उन्हे उन्ही की भाषा मे जवाब न दिया जाए तो रोज वो आपका आत्मसम्मान रौंधते रहेंगे। राइटर अजय कुशवाहा ।।
2 months ago | [YT] | 2
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Ajay kushwaha Kushwaha
अपनी कमाई का ज्यादा नही तो दस प्रतिशत अपने शौक पूरे करने पर खर्च करो... गृहस्ती यूँ ही चलती रहेगी, बैंक बैलेंस कितना भी कर लो। अंत मे औलाद को कम ही लगेगा। यहाँ आप जीने आये हो। सात पीढ़ियों का बन्दोबस्त करने नही आये। थोड़ा सा जी लो। पता नही कब सांस चलनी बन्द हो जाए। याद रखो ये दिन लौट कर कभी नही आयेंगे। उम्र भाग रही है। थोड़े दिन बाद दांत और आंत दोनों जवाब दे देंगे। घूमो, फिरो, खाओ, पियो मस्ती करो। Good morning everyone मेरी कहानी कैसी लगी कमेंट में बताओ,, अजय कुशवाहा यूपी चित्रकूट धाम,,
2 months ago | [YT] | 6
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Ajay kushwaha Kushwaha
एक फटी हुई धोती और जर्जर कमीज पहने एक व्यक्ति अपनी लगभग 15-16 साल की बेटी के साथ शहर के सबसे बड़े होटल में पहुंचा। दोनों एक टेबल पर बैठ गए। वेटर आया, उसने उन्हें दो गिलास ठंडा पानी परोसा और मुस्कुराते हुए पूछा, "आप क्या लेना चाहेंगे?"
व्यक्ति ने विनम्रता से जवाब दिया, "मैंने अपनी बेटी से वादा किया था कि अगर वह दसवीं कक्षा में जिले में टॉप करेगी, तो मैं उसे इस होटल में डोसा खिलाऊंगा। इसने अपना वादा निभाया है, अब मेरी बारी है। कृपया एक डोसा ले आइए।"
वेटर ने पूछा, "आपके लिए कुछ नहीं?"
व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरे पास सिर्फ एक डोसे के पैसे हैं।"
वेटर भावुक हो गया और सीधे होटल मालिक के पास पहुंचा। पूरी बात बताकर बोला, "मैं चाहता हूं कि इन दोनों को भरपेट नाश्ता कराया जाए। आप बिल मेरी सैलरी से काट लीजिए।"
मालिक ने कहानी सुनी और मुस्कराते हुए कहा, "आज इस होनहार बेटी की सफलता का जश्न होटल की तरफ से होगा।"
होटल स्टाफ ने टेबल को खूबसूरती से सजाया और बेटी के लिए खास व्यंजन परोसे। मालिक ने न सिर्फ उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराया, बल्कि उपहार में तीन डोसे और पूरे मोहल्ले के लिए मिठाई भी भिजवाई। यह अपनापन देखकर पिता और बेटी की आंखें भर आईं।
सालों बाद, वही बेटी I.A.S. की परीक्षा पास कर उसी शहर की कलेक्टर बन गई। उसने होटल मालिक को संदेश भिजवाया कि कलेक्टर साहिबा नाश्ता करने आ रही हैं।
होटल फिर उसी गर्मजोशी से तैयार हुआ। जब कलेक्टर अपने माता-पिता के साथ पहुंचीं, सभी ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। लड़की ने आगे बढ़कर होटल मालिक और वेटर के सामने सिर झुकाते हुए कहा, "मैं वही लड़की हूं, जिसके पिता उस दिन सिर्फ एक डोसे के पैसे लेकर आए थे। आप दोनों ने मेरे आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचाई, बल्कि मेरी सफलता का जश्न मनाया। आज जो कुछ भी हूं, आपकी उस इंसानियत की वजह से हूं।"
उसने आगे कहा, "आज इस होटल का पूरा खर्च मेरी तरफ से है। सभी ग्राहकों और स्टाफ का बिल मैं दूंगी।"
साथ ही यह घोषणा की गई कि होटल मालिक और वेटर को "श्रेष्ठ नागरिक" सम्मान से नवाजा जाएगा।
याद रखिए — किसी की गरीबी पर हँसने से बेहतर है उसकी मेहनत को सलाम करना। आपकी छोटी-सी मदद, किसी के भविष्य की नींव बन सकती है। राइटर,,अजय कुशवाहा,, यूपी चित्रकूट धाम,, मेरी कहानी कैसी लगी,, कमेंट में बताओ बहुत सोच समझ कर लिखा है,,
3 months ago | [YT] | 5
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Ajay kushwaha Kushwaha
जो सच बोले उसे सूली चढ़ा दो
ये तख़्ती हर कचहरी में लगा दो
तुम्हारा इंडिया तुमको मुबारक़
मेरा भारत कहाँ है, ये बता दो
हमें दुनिया का नक्शा मत बताओ
हमारा घर कहाँ है, ये बता दो
यक़ीनन कल जलेगा घर में चूल्हा
ये वादा करके बच्चों को सुला दो
दीवाली आपके बच्चे भी देखें
ये माचिस लो हमारा घर जला दो
छिड़े इक जंग तो मरती हैं सदियाँ
जहाँ मातम न हो वो घर बता दो
घड़ी में इस समय बारह बजे हैं
प्रलय कितने बजे होगी, बता दो
- अजय कुशवाहा
5 months ago | [YT] | 6
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Ajay kushwaha Kushwaha
अगर अपने दिल में अपने mata-pita के प्रति कदर और ज्यादा करनी हो तो उनसे मिलो जिनके सर पर maa-baap का साया नहीं हैं। जब भी अपने माँ-बाप के साथ बैठों तो परमात्मा का शुक्रिया अदा करो क्योंकि कुछ अनाथ लोग इन लम्हों को तरसते हैं।
5 months ago | [YT] | 6
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