Mr Anees ke facts

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रोजा रखने की नियत (Roza Rakhne Ki Niyat)
ramadan kareem

नियत यानी कि किसी काम को करने का दिल से इरादा करना। इसी तरह से रमजान का रोजा रखने के लिए दिल में पक्का इरादा करना होता है। जब आप नियत करके रोजा रखते हैं तो इससे आपको सुकून मिलता है और अल्लाह आप के रोजे और इबादत को कबूल फरमाता है। इस्लाम में नियत की बहुत ही बड़ी अहमियत है, बिना नियत की कोई भी इबादत या दुआ कबूल नहीं होती है। इस्लाम में रोजा रखने का नियत करने के लिए कुछ दुआ मुकर्रर किए गए हैं।

रोजा रखने की दुआ (Roza Rakhne Ki Dua)
roza rakhne ki duaaa
इस्लाम में रोजा रखने का नियत करने के लिए कुछ दुआ मुकर्रर की गई हैं। नियत की दुआ पढ़ने के बाद अगर कोई कुछ खा ले तो वह रोजा नहीं माना जाता है। इसके अलावा आप नियत करने के बाद पूरे दिन कुछ भी खा नहीं सकते हैं।हम आपके साथ सहरी यानी कि रोजा रखने की दुआ शेयर कर रहे हैं। (रमजान से जुड़े कुछ रोचक बातें जानें)

हिंदी में रोजा रखने की दुआ ( Roza Rakhne Ki Dua Hindi me)
"व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमजान"

इंग्लिश में रोजा रखने की दुआ ( Roza Rakhne Ki Dua in English)
roza niyat dua
"Wa Bisawmi ghaddan nawaiytu min shahri ramadan"

अरबी में रोजा खोलने की दुआ ( Roza Rakhne Ki Dua in Arabic)
و بسومي غادين نويت من شهري رمضان

इसका मतलब होता है कि मैं रमजान के रोजे की नियत करता हूं या करती हूं।

रोजा खोलने की नियत ( Roza Kholne Ki Niyat)
iftar dua
सुबह से लेकर दिन भर अल्लाह की इबादत करने के बाद रोजा खोलने की नियत शाम के वक्त इफ्तार के दौरान की जाती है। यह नियत अजान के बाद ही की जाती है, अगर इससे पहले की गई तो आपका रोजा मकरू हो जाता है। (जकात और फितरा के बारे में जानें)

रोजा खोलने की दुआ ( Roza Kholne Ki Dua)
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मगरिब की अजान होती है तो खजूर खाकर या पानी पीकर दुआ पढ़ते हुए हम रोजा खोलते हैं। कुरान पाक में अल्लाह ताला फरमाता है कि रोजा खोलने से पहले हर मुसलमान को दुआ पढ़ना वाजिब है। दुआ को पढ़ने से आपको सवाब मिलता है। खाने में बरकत होती है और आप की दुआ कबूल होती है। यह दुआ खजूर खाने से पहले पढ़ी जाती है।

हिंदी में रोजा खोलने की दुआ ( Roza Kholne ki Dua Hindi me)
अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु,व-बिका आमन्तु,व-अलयका तवक्कालतू,व अला रिज़किका अफतरतू

इंग्लिश में रोजा खोलने की दुआ ( Roza Kholne ki Dua in English)
roza kholne ki dua
"Allahumma inni laka sumtu wa bika amantu wa 'alayka tawakkaltu wa 'ala rizqika aftartu'

अरबी में रोजा खोलने की दुआ( Roza Kholne ki Dua in Arabic)

اللهمّ إني لاكا سومتو و بيكا أمانتو و عليك توكلت و على رزقك أفتارتو.

इसका मतलब होता है कि अल्लाह मैंने तेरी राजा के लिए रोजा रखा भी और तेरे ही कहने पर रोजा खोल रहा हूं या रही हूं।

रोजा रखने का तरीका (Roza Rakhne Ka Tarika)
ramadan niyat
रोजा रखने के लिए एक पूरा प्रोसेस फॉलो करना पड़ता है। सबसे पहले फज्र यानी सुबह की नमाज से पहले सहरी खाई जाती है और अजान की आवाज आने से पहले तक नियत करके दुआ पढ़ी जाती है इसके बाद सुबह की नमाज अदा की जाती है।

रोजा खोलने का तरीका (Roza Kholne Ka Tarika)
जिस वक्त मुसलमान रोजा खोलते हैं उस वक्त को इफ्तार के नाम से जाना जाता है। यह वक्त सूरज ढलने के बाद से शुरू होता है। अजान से कुछ 5 मिनट पहले ही वुजु बना कर दस्तरखान के सामने बैठ कर तब तक दुआ की जाती है जब तक अजान ना हो जाए। अजान की आवाज सुनते ही दुआ पढ़ कर खजूर और पानी से रोजा खोलते हैं। इफ्तार के बाद मगरिब की नमाज अदा की जाती है।

हमें उम्मीद है कि आपको ये तमाम दुआएं समझ में आ गई होंगी। अगर हमारी स्टोरी से जुड़े आपके कुछ सवाल हैं, तो वो आप हमें आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। हम आप तक सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें अनीस ब्लॉग23 Aneesvlog23



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1 year ago | [YT] | 1