आज नजाने क्यों बस यूँही बैठे बैठे मेरे अंदर की आयशा याद आ गई!! काफ़ी दिनों बाद मिली वो मुझे, थोड़ा नाराज़ थी.. बोली, “भूल गई क्या मुझे” मैं मुस्कुरायी, एक कप चाय बनायी, नयी किताब को गहरी साँस भरकर सूंघा और कहा.. “कभी नहीं, बस ज़िंदगी की इस भाग दौड़ में तुझसे मिलना भूल जाती हूँ, लेकिन याद तु हमेशा रहती है.. खुदको कभी कोई भूलता है भला, हाँ बस भागते भागते खुदसे मिलना ज़रूर भूल जाते हैं हम”! आज जो मिली हूँ कोशिश करूँगी की टच में रहूँ..!!
Manasi S Umaanita
आज नजाने क्यों बस यूँही बैठे बैठे मेरे अंदर की आयशा याद आ गई!!
काफ़ी दिनों बाद मिली वो मुझे, थोड़ा नाराज़ थी.. बोली, “भूल गई क्या मुझे” मैं मुस्कुरायी, एक कप चाय बनायी, नयी किताब को गहरी साँस भरकर सूंघा और कहा.. “कभी नहीं, बस ज़िंदगी की इस भाग दौड़ में तुझसे मिलना भूल जाती हूँ, लेकिन याद तु हमेशा रहती है.. खुदको कभी कोई भूलता है भला, हाँ बस भागते भागते खुदसे मिलना ज़रूर भूल जाते हैं हम”! आज जो मिली हूँ कोशिश करूँगी की टच में रहूँ..!!
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1 year ago | [YT] | 1
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