कृषि-बागवानी में रसायनों और कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ने से मानव जीवन और पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ रहा है। किसानों में खेती-बाड़ी के प्रति रूचि को बढ़ाने और कृषि लागत को कम कर उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना को लागू कर एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। योजना को लागू करने के लिए महाराष्ट्र के कृषि वैज्ञानिक सुभाष पालेकर की कृषि विधि को प्रदेश के हर एक किसान-बागवान तक पहुंचाने के लिए मई 2018 से इस योजना की शुरुआत की गयी है।
प्राकृतिक खेती से सम्बंधित पुस्तकें PDF में आप सबके समक्ष प्रस्तुत हैं, आप इन किताबों को डाउनलोड कर पढ़ें और अपने दोस्तों, सम्बन्धियों के साथ शेयर कर प्राकृतिक खेती के अभियान को आगे ले जाने में सहयोग करें।
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रसायन मुक़्त,पर्यावरण और किसान हितैषी-प्राकृतिक खेती-2
1 year ago | [YT] | 124
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रसायन मुक़्त,पर्यावरण और किसान हितैषी-प्राकृतिक खेती
1 year ago | [YT] | 47
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… व्यवस्था परिवर्तन से आत्मनिर्भर बनता हिमाचल के नारे को चरितार्थ करते हुए
प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू,रसायन मुक़्त,पर्यावरण और किसान हितैषी-प्राकृतिक खेती पर विशेष बल दे रहे हैं ।
उन्होंने प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के उत्पाद की बिक्री हेतु एक नयी पहल शुरू की है।
हमारी सरकार ने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए मक्की और गेहूं के लिए पूरे देश में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का साहसिक निर्णय लिया है।
जो हिमाचल को समृद्ध किसान, समृद्ध हिमाचल के नारे के साथ किसानों को नई उम्मीद दे रही है।
इस पहल में पूरे देश में सबसे ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी msp,मक्की और गेहूं के लिए देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।
पहली बार प्रदेश में प्राकृतिक खेती से उगाई मक्की को तीस रुपये प्रति किलो MSP पर खरीदा गया!
प्रत्येक प्राकृतिक खेती किसान परिवार से बीस क्विंटल तक अनाज खरीदा गया है ।
प्रदेश में एक लाख अट्ठानबे हजार किसान-बागवान पैंतीस हजार हैक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती से जुड़ गए हैं।
एक लाख पचास हजार से अधिक किसान-बागवानों का निःशुल्क प्रमाणीकरण किया जा रहा है ।
इससे प्रकृतिक ख़ेती कर रहे हमारे किसान भाई-बहनों के बीच में खुशी की लहर दौड़ रही है और अब तो बाकी किसान-बागवान भी इस तरफ बढ़ रहे हैं।
अभी तक प्रदेश के दस जिलों में तीन सौ अट्ठानवे metric टन से भी ज्यादा मक्की प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से खरीदी जा चुकी है।
इसके लिए कृषि विभाग की आत्मा टीम और हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने मिलकर सत्ताईस केंद्र खोले थे।
इन केंद्रों पर प्राकृतिक खेती में प्रमाणित two स्टार और THREE स्टार किसानों से मक्की खरीदी गई।
और अब,राज्य सरकार इस प्राकृतिक मक्की को हिम-भोग brand के नाम से हिम मक्की आटा, बाज़ार में ला रही है।
इससे प्रदेश के लोगों को ये रसायन-मुक़्त,पौष्टिक मक्की का आटा आसानी से मिल जाएगा।
हमारी सरकार, प्राकृतिक खेती के ज़रिये इंसान और मिट्टी, दोनों को रसायनों के बुरे असर से बचाने के लिए अग्रसर है ।
इससे biodiversity बढ़ती है और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए साफ-सुथरा वातावरण भी सुनिश्चित होता है।
तो आइए, हम सब भी इस मुहिम में शामिल हों!
प्राकृतिक खेती अपनाएं, धरती माँ को बचाएं, और स्वस्थ जीवन की राह पर आगे बढ़ें।
1 year ago | [YT] | 15
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5 years ago | [YT] | 31
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5 years ago | [YT] | 17
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5 years ago | [YT] | 19
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