Welcome to Abhivyakti IAS by Sunil Sir – A Platform for Serious Civil Services Aspirants
Abhivyakti IAS is a dedicated educational platform designed for aspirants preparing for UPSC Civil Services Examination and State PCS. The channel aims to build conceptual clarity, analytical thinking, and effective exam strategy, which are essential for success in the Civil Services Examination.
Guided by Sunil Abhivyakti Sir – UPSC Civil Services Interview Appeared, Founder & Director of Abhivyakti IAS, Writer-Editor of Abhivyakti Civil Services Magazine (since 2012, now Advanced IQIP – Exam Hall Guide), former Professor at Mewar University, AI-Integrated Content Expert, and mentor of many successful civil servants, Associated with several reputed Civil Services coaching institutes in India.
A unique innovation of the channel is the Advance IQIP -Daily News Editorial & Current Affairs Analysis, delivered continuously for the last 10 years by Professor Sunil Abhivyakti.
Abhivyakti IAS by Sunil Sir
5 pm today
जुड़िए और जानिये क्या है सप्तधारा?
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4 days ago | [YT] | 71
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
Happy 😃 Independence Day
🇮🇳 15 अगस्त: केवल बधाई नहीं—एक नई शपथ
आज मैं आपको स्वतंत्रता दिवस की केवल बधाई नहीं देना चाहता।
आज हम स्वयं से एक असुविधाजनक प्रश्न पूछें—
1947 में हमने विदेशी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की थी, लेकिन आज हमें किन चीजों से आज़ादी चाहिए?
धूमिल ने अपनी कविता ‘बीस साल बाद’ में पूछा था—
“क्या आज़ादी सिर्फ़ तीन थके हुए रंगों का नाम है
जिन्हें एक पहिया ढोता है
या इसका कोई ख़ास मतलब होता है?”
यह प्रश्न तिरंगे के गौरव पर नहीं, बल्कि तिरंगे में निहित वचन को पूरा करने के हमारे दायित्व पर है।
आजादी का अर्थ केवल यह नहीं कि हमारे देश पर कोई विदेशी शासन न करे। आजादी का अर्थ यह भी है कि इस देश का कोई बच्चा भूख, गरीबी, जाति, लिंग, अशिक्षा, डिजिटल दूरी या अपने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण अपने सपनों को छोटा करने के लिए विवश न हो।
इन तस्वीरों में मैं दिल्ली के एक सर्वोदय कन्या विद्यालय में बच्चियों के साथ संवाद कर रहा हूँ। दिल्ली सरकार के Entrepreneurship Mindset Curriculum के अंतर्गत मुझे उन्हें उद्यमशीलता के गुण समझाने का अवसर मिला था।
मैं वहाँ व्यापार करना सिखाने नहीं गया था।
क्योंकि उद्यमशीलता का अर्थ केवल कोई दुकान या कंपनी खोलना नहीं है। उद्यमशीलता का अर्थ है—समस्या को पहचानना, प्रश्न पूछना, नया समाधान खोजना, जोखिम लेना, असफल होकर फिर खड़ा होना और अपनी परिस्थितियों को अपनी नियति मानने से इनकार करना।
उन बच्चियों की आँखों में मैंने जिज्ञासा, प्रतिभा और बड़े सपने देखे।
तब एक बात और स्पष्ट हुई—
सरकारी विद्यालयों के बच्चों को हमारी दया नहीं चाहिए। उन्हें भी वही श्रेष्ठ मार्गदर्शन, exposure, तकनीक, पुस्तकें, आत्मविश्वास और अवसर चाहिए, जो किसी सुविधासंपन्न परिवार के बच्चे को सहज रूप से मिल जाते हैं।
जरा रामू और श्यामू के दो काल्पनिक परिवारों की कहानी समझिए।
दोनों एक ही मोहल्ले में रहते हैं। दोनों मेहनत करते हैं। दोनों अपने बच्चों से बहुत प्रेम करते हैं। दोनों घरों में राशन पहुँच जाता है और दोनों परिवारों के बच्चे विद्यालय जाते हैं।
बाहर से देखने पर लगेगा—दोनों की मूल आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं।
लेकिन वास्तविक जीवन की कहानी इसके बाद शुरू होती है।
श्यामू की बेटी के पास पढ़ने के लिए अलग कमरा है। घर में पुस्तकें, लैपटॉप और तेज इंटरनेट है। परिवार में कोई छात्रवृत्ति, प्रवेश परीक्षा, अच्छे कॉलेज, इंटर्नशिप और करियर के विकल्पों की जानकारी रखने वाला भी है।
वह असफल होती है तो परिवार कहता है—
“कोई बात नहीं, फिर प्रयास करो। हम तुम्हारे साथ हैं।”
रामू की बेटी भी उतनी ही प्रतिभाशाली है। उसके माता-पिता भी उससे उतना ही प्रेम करते हैं, लेकिन एक मोबाइल पूरे परिवार के बीच साझा होता है। कभी इंटरनेट डेटा समाप्त हो जाता है, कभी आवेदन की अंतिम तारीख निकल जाती है। पढ़ने के लिए अलग स्थान नहीं और सही मार्गदर्शन देने वाला भी कोई नहीं।
वह असफल होती है तो परिस्थितियाँ उससे कहती हैं—
“शायद यह रास्ता तुम्हारे लिए बना ही नहीं है।”
श्यामू की बेटी पूछती है—
“मैं बड़ी होकर क्या बनूँगी?”
रामू की बेटी पूछती है—
“क्या मेरे लिए भी यह संभव है?”
उसके प्रश्न में जुड़ा हुआ यह छोटा-सा शब्द—“भी”—हमारी पूरी सामाजिक विषमता की कहानी कह देता है।
अंतर दोनों बच्चियों की बुद्धि, प्रतिभा या मेहनत में नहीं है। अंतर उन्हें मिली हुई उड़ान-पट्टी में है।
एक बच्ची दुनिया को संभावनाओं का खुला मैदान समझती है। दूसरी हर दरवाजे पर पहले यह जाँचती है कि उसे अंदर जाने की अनुमति है भी या नहीं।
यही वंचना का सबसे खतरनाक रूप है।
वंचना केवल जेब खाली नहीं करती; वह धीरे-धीरे मनुष्य का मनोबल भी खाली करने लगती है। परिस्थितियाँ जब किसी बच्चे के मन में यह विश्वास बैठा दें कि कुछ सपने “हमारे जैसे लोगों” के लिए नहीं बने हैं, तब गुलामी बाहर नहीं, उसके मन के भीतर जन्म ले चुकी होती है।
रोटी आवश्यक है, लेकिन रोटी ही मनुष्य की अंतिम मंजिल नहीं है।
खाद्यान्न से पेट की भूख मिट सकती है, लेकिन अवसर, शिक्षा, मार्गदर्शन, सम्मान और आत्मविश्वास के बिना उसकी संभावनाएँ भूखी रह जाती हैं।
इसलिए आज हमें—
भूख से ही नहीं, भूख के अपमान से भी आजादी चाहिए।
गरीबी से ही नहीं, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाले निर्धनता के कालचक्र से भी आजादी चाहिए।
विद्यालय से वंचित होने से ही नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित होने से भी आजादी चाहिए।
डिजिटल दूरी, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक पूर्वाग्रह और अवसरों की असमानता से आजादी चाहिए।
और सबसे बढ़कर उस मानसिक पराधीनता से आजादी चाहिए, जो किसी बच्चे से कहती है—
“तुम्हारा जन्म ही तुम्हारे भविष्य की सीमा है।”
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने ‘कुरुक्षेत्र’ में लिखा था—
“शान्ति नहीं तब तक; जब तक सुख-भाग न नर का सम हो,
नहीं किसी को बहुत अधिक हो, नहीं किसी को कम हो।”
लोकतंत्र केवल वोट देने का अधिकार नहीं हो सकता। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ तब प्रकट होगा, जब प्रत्येक बच्चे को अपने जीवन की दिशा चुनने की वास्तविक स्वतंत्रता और अवसर मिलेगा।
इस 15 अगस्त पर हम एक छोटी, लेकिन सच्ची शपथ लें—
हमने अपने जीवन में जो कुछ सीखा है, उसका कुछ हिस्सा किसी ऐसे व्यक्ति तक अवश्य पहुँचाएँगे, जिसकी वहाँ तक पहुँच नहीं है।
यदि हम शिक्षक हैं तो किसी जरूरतमंद बच्चे को अपना समय दें।
यदि हम किसी पेशे में हैं तो किसी बच्चे को सही करियर की जानकारी दें।
यदि हमारे पास पुस्तकें हैं तो उन्हें अलमारी में बंद रखने के बजाय किसी विद्यार्थी तक पहुँचाएँ।
यदि हमारे पास अनुभव या संपर्क हैं तो किसी योग्य व्यक्ति के लिए अवसर का एक दरवाजा खोलें।
किसी एक बच्चे को छात्रवृत्ति की सूचना देना, किसी का आवेदन भरवा देना, किसी को एक कौशल सिखा देना या केवल यह विश्वास दिलाना कि—
“हाँ, तुम भी कर सकते हो।”
शायद किसी के पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है।
किसी का हाथ दया से नहीं, बराबरी के भाव से थामिए।
उपकार नहीं—अवसर दीजिए।
सहानुभूति भर नहीं—साथ दीजिए।
भाषण नहीं—मार्गदर्शन दीजिए।
और अपने ज्ञान को केवल निजी पूँजी नहीं—सामाजिक विरासत बनाइए।
मैथिलीशरण गुप्त ने ‘भारत-भारती’ में लिखा था—
“हम कौन थे, क्या हो गए हैं और क्या होंगे अभी,
आओ, विचारें आज मिलकर ये समस्याएँ सभी।”
आज केवल विचार करने का नहीं, अपने हिस्से का उत्तरदायित्व स्वीकार करने का दिन है।
1947 ने हमें विदेशी शासन से स्वतंत्र किया था।
आज हमारा एक छोटा-सा प्रयास किसी बच्चे को विरासत में मिली वंचना, भय और हीनभावना से स्वतंत्र कर सकता है।
स्वतंत्रता का अगला अध्याय तभी लिखा जाएगा, जब किसी बच्चे का जन्म यह तय नहीं करेगा कि वह जीवन में कहाँ तक पहुँच सकता है।
इस 15 अगस्त पर मेरी प्रतिज्ञा है—
“जीवन ने मुझे जो कुछ सिखाया है, मैं उसे अपने तक सीमित नहीं रखूँगा। उसे उन लोगों तक पहुँचाऊँगा, जिन्हें सीखने की इच्छा तो मिली है, लेकिन अवसर नहीं।”
यह केवल स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना नहीं—हम सबकी साझा प्रतिज्ञा हो।
क्योंकि स्वतंत्रता केवल इतिहास से मिली उपलब्धि नहीं है;
स्वतंत्रता प्रत्येक पीढ़ी का सतत उत्तरदायित्व है।
जय हिंद। 🇮🇳
—सुनील अभिव्यक्ति
Upsc cse interview appeared
Director- founder Abhivyakti ias
5 days ago | [YT] | 158
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
समस्त देशवासियों और हमारे प्यारे परिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस की अनंत बधाई!
"कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है।
हम लहराएंगे हर जगह यह तिरंगा, नशा यह भारत के सम्मान का है।"
आज का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि हमारे वीर जवानों, स्वतंत्रता सेनानियों और उन अनगिनत नायकों के त्याग और बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।
आज का दिन हमें याद दिलाता है कि आज़ादी एक उपहार है, जिसे संजोकर रखना और बेहतर बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। 80 वर्षों की इस महान यात्रा में भारत ने दुनिया के पटल पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
आइए, इस ऐतिहासिक अवसर पर हम न केवल अपने अतीत के नायकों को नमन करें, बल्कि एक ऐसे भारत के निर्माण में अपना योगदान दें जो सशक्त, समृद्ध और सभी के लिए समावेशी हो। आपकी छोटी सी सकारात्मक पहल भी देश को आगे ले जाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
इस पावन अवसर पर आप सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
जय हिंद! जय भारत! वंदे मातरम! 🫡🧡🤍💚
5 days ago | [YT] | 40
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
youtube.com/live/W6MiYSKk0M0?si=89yZjgKrnyB3rt5y
2 weeks ago | [YT] | 68
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
महत्वपूर्ण सूचना: कल की IQIP एडिटोरियल क्लास के समय में परिवर्तन
प्यारे बच्चों,
अपरिहार्य कारणों से केवल कल (Monday) के लिए हमारी IQIP Editorial Analysis Class के समय में थोड़ा बदलाव किया गया है।
कल सुबह 9:30 AM के बजाय यह क्लास दोपहर 3:00 PM पर लाइव होगी।
कल का शेड्यूल:
🗓️ दिन: सोमवार (Tomorrow)
⏰ नया समय: दोपहर 3:00 PM (केवल कल के लिए)
📚 विषय: Daily Editorial Analysis (IQIP Approach)
परसों से क्लास पुनः अपने पूर्व निर्धारित समय (सुबह 9:30 AM) पर ही चलेगी।
समय के इस अस्थायी बदलाव के अनुसार अपनी तैयारी का शेड्यूल बना लें और दोपहर 3 बजे लाइव जुड़ना न भूलें!
Class link- youtube.com/live/0ZGPZoRzRpc?feature=share
धन्यवाद,
सुनील सर
अभिव्यक्ति IAS
2 weeks ago | [YT] | 14
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
🌿 IQIP Health Series — Sunday Reset Day 🌿
नमस्कार प्यारे बच्चों, स्वास्थ्य प्रणाम। 🙏
हर रविवार हमारी Health Series में विश्राम का दिन होगा।
लेकिन यह आराम करने का दिन नहीं…
यह स्वयं को देखने का दिन होगा।
यह स्वयं को सुधारने का दिन होगा।
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भारतीय ज्ञान परंपरा में आत्म-परीक्षण (Self-Audit) का बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
🪷 बौद्ध परंपरा में उपोसथ (Uposatha) के अवसर पर भिक्षु एकत्र होकर पातिमोक्ख (Pātimokkha) का पाठ करते थे और अपने आचरण की समीक्षा करते थे।
🕉️ जैन परंपरा में प्रतिक्रमण (Pratikraman) का उद्देश्य था—दिनभर या सप्ताहभर में हुई भूलों को स्वीकार करना, उनसे सीखना और स्वयं को बेहतर बनाना।
📖 भगवद्गीता भी हमें निरंतर स्वयं पर विजय और आत्म-अनुशासन का संदेश देती है।
इसी भावना को आधुनिक जीवन में अपनाते हुए…
अब से हर रविवार होगा—
Sunday Reset
Self-Audit • Recovery • Reset
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आज केवल तीन प्रश्न लिखिए—
1. Progress
इस सप्ताह Health और Studies के कितने लक्ष्य पूरे हुए?
2. Mistakes
कहाँ आलस हुआ?
कहाँ Routine टूटा?
कहाँ समय व्यर्थ गया?
3. Resolution
अगले 7 दिनों में मैं कौन-सी 3 आदतें सुधारूँगा?
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आज कोई बहाना नहीं…
कोई दिखावा नहीं…
सिर्फ ईमानदार Self-Audit।
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याद रखिए—
जो व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करता…
वह उन्हें दोहराता है।
जो व्यक्ति हर सप्ताह स्वयं का मूल्यांकन करता है…
वह हर सप्ताह स्वयं का बेहतर संस्करण बनता है।
⸻
और हाँ…
मैं केवल आपको सलाह नहीं दे रहा हूँ।
आज मैं भी अपने Teaching, Fitness, Diet, Discipline और Routine का पूरा Self-Audit करूँगा।
मैं भी अपनी कमियाँ लिखूँगा।
मैं भी अगले सप्ताह के लिए नया संकल्प लूँगा।
⸻
आज का Sunday Task
अपनी नोटबुक में लिखिए—
“इस सप्ताह मेरा सबसे बड़ा Realization क्या रहा?”
और Comment में केवल एक पंक्ति में अपनी सबसे बड़ी सीख लिखिए।
⸻
आज विश्राम नहीं…
आज आत्म-परीक्षण।
आज Reset।
कल से फिर नई ऊर्जा, नए अनुशासन और नए संकल्प के साथ। 💚
IQIP Health Series
Body • Mind • Soul
स्वास्थ्य प्रणाम।🙏🙏
2 weeks ago | [YT] | 89
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
3 weeks ago | [YT] | 88
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
स्वागत है आप सभी uppcs की तैयारी के लिए ।
uppcs को डेडिकेटेड (पूर्णतया समर्पित) एक महत्व से भरा प्रयास ।
हमारे प्रोग्राम
1- foundation
2- Mentorship
3- prelims- mains innovation se bhari test series
4- Customised plan
5- कॉपी चेकिंग का यूनिक तरीका (जो आपकी आंसर राइटिंग स्किल को दूसरो से अलग बनाएगा ।
3 weeks ago | [YT] | 98
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
3 weeks ago | [YT] | 69
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Abhivyakti IAS by Sunil Sir
🌿 प्यारे बच्चों,
IQIP Health Series का पहला सप्ताह पूरा हो गया। ❤️
इस एक सप्ताह में हमने शरीर, मस्तिष्क और प्रदर्शन (Performance) के बीच का वैज्ञानिक संबंध समझा।
अब Warm-up Phase समाप्त।
कल से शुरू होगा हमारा Practical Phase. 💪
🔥 Episode 6 – PUSH-UP CHALLENGE + BDNF (Brain Fertilizer)
🧠 अब केवल सुनना नहीं… करना भी है।
कल पूरा सेशन केवल Push-up पर रहेगा।
लेकिन घबराइए मत…
यह Challenge हर किसी के लिए है।
✔ अगर आपने जीवन में कभी Push-up नहीं किया है…
➡️ आपके लिए Wall Push-up।
✔ अगर आप Beginner हैं…
➡️ Knee Push-up।
✔ अगर आप Normal Fitness में हैं…
➡️ Regular Push-up।
✔ और अंत में मैं आपको Advanced Push-up भी करके दिखाऊँगा, ताकि आप जान सकें कि 45 वर्ष की उम्र में भी शरीर क्या-क्या कर सकता है, यदि वर्षों तक अनुशासन बनाए रखा जाए।
🎯 हम कुल 5 Sets करेंगे।
हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार करेगा—
* 5 × 5
* 8 × 5
* 10 × 5
कोई Competition नहीं।
कोई Comparison नहीं।
केवल Progress.
⸻
🧠 और सबसे महत्वपूर्ण…
कल हम समझेंगे कि Push-up केवल Chest Exercise नहीं है।
Exercise के दौरान हमारा Brain एक विशेष प्रोटीन बनाता है—
BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor)
जिसे कई वैज्ञानिक “Brain Fertilizer” भी कहते हैं।
यानी…
💪 मजबूत शरीर
➡️ 🧠 तेज़ दिमाग
➡️ 🎯 बेहतर Focus
➡️ 📚 बेहतर Performance
➡️ 🌟 बेहतर तैयारी
⸻
👕 कल क्या लेकर आएँ?
✅ ढीली (Comfortable) T-shirt
✅ पानी की बोतल
✅ एक छोटी चटाई/मैट (यदि हो)
और सबसे ज़रूरी…
सीखने का उत्साह।
🕗 कल सुबह ठीक 8:00 AM LIVE
IQIP Health Series – Episode 6
Push-up Challenge + BDNF (Brain Fertilizer)
याद रखिए—
Selection केवल किताबों से नहीं…
एक स्वस्थ शरीर, अनुशासित मन और निरंतर अभ्यास से बनता है।
स्वास्थ्य प्रणाम। 🌿💚
3 weeks ago | [YT] | 74
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