अगर फुटबॉल के खेल में कोई खिलाड़ी सामने खड़े 11 खिलाड़ियों के बारे में ही सोचता रहे,तो शायद कभी गोल नहीं कर पाए। गोल करने के लिए ज़रूरी होता है —गेंद पर नियंत्रण,सही समय पर तेज़ी, कभी धीमापन,ज़रूरत पड़ने पर टकराव,और साथ ही अपने साथियों के साथ साझेदारी।
फुटबॉल सिर्फ दौड़ नहीं है, यह निर्णयों का खेल है।
ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है।यहाँ विरोधी खिलाड़ी हमारी समस्याओं और चुनौतियों की तरह होते हैं। गेंद हमारे हाथ में नहीं,पर हमारे नियंत्रण में ज़रूर हो सकती है — अगर अभ्यास लगातार हो।
लक्ष्य,फुटबॉल के goal post की तरह होते हैं। उन्हें हासिल करने के लिए अकेलेपन से ज़्यादा लोगों की ज़रूरत होती है। कभी पास देना पड़ता है, कभी खुद आगे बढ़ना होता है। हर बार गोल नहीं होता —पर हर प्रयास हमें ज़्यादा skilled बनाता है।और एक बात जो सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ होती है —समय। हर मैच की एक time limit होती है। वैसे ही हर मक़सद की भीएक deadline होनी चाहिए। बिना deadline के लक्ष्य सिर्फ इरादे बनकर रह जाते हैं। प्रयास करते रहिए। हार से मत डरिए।
अगर गोल नहीं भी हुआ,तो भी आप खेल का स्तर ऊँचा कर चुके होंगे। क्योंकि ज़िंदगी में हर मैच जीतना ज़रूरी नहीं, लेकिन खेलना पूरे जुनून के साथ हमेशा ज़रूरी है। 🌿 Let’s Grow Together — with Hitesh Thaakuur
“हर साल ‘अच्छा या बुरा’ नहीं होता… कुछ साल हमें तोड़ते हैं, कुछ साल हमें गढ़ते हैं पर हर साल हमें बदल कर ही जाता है।”
✨️" हर बीतता साल — एक नया जीवन "
साल बीत जाता है, यादें छोड़ जाता हैं और इस दौड़ती–भागती ज़िंदगी में अच्छे–बुरे अनगिनत निशान छोड़ जाता है। कुछ यादें मुस्कुराहट बन जाती हैं, कुछ चुपचाप भीतर बैठ जाती हैं। पर हर साल कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर दे जाता है जो हमें थोड़ा और समझदार बना देता है।
दरअसल, साल दर साल गुजरना कुछ वैसा ही है जैसे एक परिवार में अलग–अलग प्रकृति और स्वभाव के लोग होना।
कोई शांत होता है, कोई नटखट, कोई कठोर, तो कोई बेहद सरल और सीधा।
मतभेद होते हैं, नज़रिए टकराते हैं, फिर भी हम सबको अपनाते हैं। अपने मन के भाव किसी न किसी रूप में सबके साथ साझा करते हैं।
हर साल भी कुछ ऐसा ही होता है। हर साल अलग चेहरे, अलग अनुभव और अलग–अलग भाव लेकर आता है।
कोई साल सिखाता है, कोई साल तोड़ता है, तो कोई साल चुपचाप हमारे भीतर कुछ जोड़ जाता है।
फिर सवाल उठता है इसमें अच्छा क्या, बुरा क्या?
शायद यह फर्क करना ही सबसे बड़ी भूल है। क्योंकि जो है, वही जीवन है।
उसी में आनंद है, उसी में सीख है, और उसी में आगे बढ़ने की शक्ति भी।
जो मिला है, उसे स्वीकार कीजिए। जो सीखा है, उसे साथ रखिए। और अपने काम को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की तैयारी कीजिए।
क्योंकि हर बीतता साल खुद में एक पूरा जीवन होता है — बस उसे जीने की दृष्टि चाहिए।
Life Unplugged: दो रास्तों में फँसोगे, तो कहीं नहीं पहुँचोगे !
हम में से ज़्यादातर लोग ज़िंदगीभर दो रास्तों के बीच फँसे रहते हैं। सोचते, तुलना करते, फिर उलझते… और मज़े की बात यह है कि इसे ही “समझदारी” का नाम दे दिया जाता है।
जितनी सैर किताबों की दुनिया में की है, एक बात हर बार दोहराई मिलती है – संतुलन,संयम और साहस।
हम में से अधिकांश लोग दो रास्तों के चुनाव में ही अटके रह जाते हैं। सोचते हैं, समझते हैं,तुलना करते हैं…और फिर वहीं खड़े रह जाते हैं। ख़ासकर एक ' स्त्री ' से तो यह “अनिवार्य गुण” माना जाता है कि वह हर परिस्थिति में हमेशा “सही रास्ता” चुने।
लेकिन अगर आपको किसी भी क्षेत्र में “नाम” और “काम” – दोनों चाहिए,तो सिर्फ रास्ता चुनने से ज़्यादा ज़रूरी है,अपने भीतर की आग को पहचानना।
आज एक सच साझा कर रहा हूँ, एक ऐसा सच, जिसे जिसने भी जीवन में उतार लिया, उसे फिर कोई नहीं रोक पाया।
🔥P – Pagalpan (Creative Madness)
रास्ता वहीं से बदलता है, जहाँ पागलपन शुरू होता है। थोड़ी-सी दीवानगी, थोड़ा-सा जुनून, थोड़ी-सी आग… यहीं से दिशा बदलती है और यहीं से इतिहास लिखा जाता है।
🔥P – Patience
पागलपन को भी चलने के लिए ज़मीन चाहिए। और patience उस ज़मीन का नाम है। जो इंतज़ार करना सीख गया, वह जीतना भी सीख गया।
🔥 P – Pyaar
और अंत में – काम से, दुनिया से, लोगों से और सबसे ज़्यादा,खुद से गहरा प्यार। यही प्यार मन, मस्तिष्क और अंतरात्मा को एक ही दिशा में जोड़ देता है।
ये तीनों मिलकर ही असली engine बनाते हैं।
जहाँ Pagalpan spark बनता है, Patience foundation बनता है, और Pyaar purpose बन जाता है।
इन तीनों के साथ चलो, फिर देखना –
असम्भव था जो, अब सम्भव होगा। भाग्य की लकीरों को भी खुद को बदलना होगा।
💬 एक सवाल आपसे Pagalpan, Patience और Pyaar – आपकी ज़िंदगी में इस समय कौन-सा “P” सबसे ज़्यादा कम है? Comments में ज़रूर लिखना। 💥Let’s Grow Together with Hitesh Thaakuur 💌
आज की Life Unplugged पोस्ट की शुरुआत एक मैसेज से हुई — एक 25 साल की छोटी बहन ने लिखा:
> “I’m a single child. I’ve learned to manage everything — alone.”
यही line अंदर तक छू गई।
बचपन में जब दो बच्चे होते हैं, तो वे लड़ते हैं, झगड़ते हैं, फिर एक-दूसरे को समझते भी हैं। वो एक-दूसरे के सहारे बन जाते हैं।
हर वक़्त माँ-बाप साथ नहीं हो सकते — लेकिन भाई या बहन अक्सर वो सहारा होते हैं, जो हर भावनात्मक खालीपन भर देते हैं।
लेकिन जब घर में एक ही बच्चा होता है, तो सचाई थोड़ी अलग होती है। शहरों में आज “एक बच्चे का चलन” बहुत बढ़ रहा है, और इसके अपने कई व्यावहारिक कारण हैं। (करियर, खर्चे, लाइफ़स्टाइल, समय आदि)
पर… पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है — हम एक नई पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जो साथ रहते हुए भी अकेली है।
आज के बच्चों में जो anxiety, depression और emotional instability देखी जा रही है, उसके कई कारणों में से एक — single child upbringing भी है।
क्योंकि जब कोई “हमउम्र साथी” नहीं होता, तो बच्चा अपने भावनात्मक संवाद खुद से करने लगता है। धीरे-धीरे वही संवाद चुप्पी में बदल जाता है।
हर चीज़ के अपने फायदे-नुकसान होते हैं, पर हमें ये समझना होगा कि मानव का विकास हमेशा “संबंधों” से हुआ है, अकेलेपन से नहीं।
अगर आप single child parent हैं — तो अपने बच्चे को दोस्त, संवाद और belongingness दीजिए। क्योंकि अकेलापन किसी भी उम्र में एक बच्चे का सबसे बड़ा डर होता है।
🎧 Life Unplugged – Episode 03: “Self Development is a Myth”
Because life isn’t a project — it’s a process.
Self development is a myth. ये उस गाजर घास की तरह है जो हर जगह उग आती है — बिना बुलाए, बिना वजह।
आजकल हर जगह “growth”, “improvement”, “better version of yourself” का शोर है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा — क्या इस दौड़ में हम खुद को खो नहीं रहे?
जब आप हर पल “आत्म-विकास” के lens से सोचते हैं, तो ज़िंदगी project बन जाती है। हर experience एक lesson बन जाता है, हर moment का meaning निकालने लगते हैं।
और इसी process में enjoyment गायब हो जाती है।
वो छोटी-छोटी खुशियाँ — जो ज़िंदगी का असली स्वाद देती हैं — वो development की किताबों में कहीं खो जाती हैं।
सच्चाई ये है कि growth is not a goal — it’s a by-product. जब आप जीते हैं, सीखते हैं, गिरते हैं, हँसते हैं — विकास अपने-आप होता है।
पर जब आप “develop” होने की कोशिश में जीते हैं, तो आप जीना भूल जाते हैं। हर चीज़ को सुधारने की कोशिश कभी-कभी चीज़ों की सादगी ही खत्म कर देती है।
कभी-कभी बस coffee पीना भी ज़रूरी है — उसके पीछे meaning ढूँढना नहीं। ☕
यह कोई विरोध नहीं है self-improvement का, बस एक नज़रिया है — कि हर चीज़ में सुधार जरूरी नहीं, कभी-कभी बस महसूस करना ही विकास होता है।
“Are limits protecting you — or holding you back?”
आज सुबह एक लाइन सुनी — “हर किसी को अपनी सीमाएँ तय करनी चाहिए।” सुनने में simple लगी… लेकिन सोचा तो लगा, ये तो life की philosophy है।
अब बात ये है — सीमाएँ हमेशा सही नहीं होतीं… और हमेशा गलत भी नहीं।
कई बार limits हमें बचाती हैं, तो कई बार वही limits हमें रोकती हैं।
देखो, इसे हम addiction से समझ सकते हैं — जिन्हें अपनी habits पर control नहीं होता, उनके लिए boundaries ज़रूरी हैं। वो बचाव करती हैं।
लेकिन जब खुद ज़िंदगी ही fix नहीं है, तो हम अपनी सीमाएँ fix क्यों करें?
क्योंकि चलना ही तो समय है, और बहना ही तो ज़िंदगी। 🌊
खुद पर नियंत्रण रखते हुए सीमाएँ तोड़ना कुछ लोगों को गलत लग सकता है, लेकिन मेरे नज़रिए से — सीमाएँ अनंत होनी चाहिए। बस शर्त ये कि उससे किसी और को नुकसान न पहुँचे।
क्योंकि अगर आपकी सीमाएँ आपके growth को रोक रही हैं, तो वो boundaries नहीं… वो पिंजरे हैं।
और अगर “सीमा में रहना” किसी और को चोट पहुँचा रहा है, तो शायद वो सीमा नैतिक नहीं, बस सामाजिक है।
इस मुद्दे पर सही या गलत कुछ नहीं होता, लेकिन इससे फर्क ज़रूर पड़ता है — कौन आगे बढ़ता है, और कौन वहीं रुक जाता है।
मैं अपने दोस्त के साथ बस चाय पी रहा था, रोज़ की तरह। तभी ऊपर से एक हल्की-सी चीख़ सुनाई दी — देखा तो एक सफ़ेद बिल्ली का बच्चा पहली मंज़िल से फिसल कर नीचे गिर गया। वो डर से काँपता हुआ भीड़ में जाकर छिप गया।
और फिर… जो हुआ वो देखने लायक था। उसकी माँ — वही बिल्ली — बिना एक पल गंवाए ऊपर से सीधा कूद पड़ी। ये छलांग डर की नहीं थी… ये ममता से भरी छलांग थी। 💛 वो इधर-उधर दौड़ती रही, पुकारती रही। हमने बच्चे को उठाने की कोशिश की, मगर वो कार के नीचे छिप गया।
लोग चारों ओर इकट्ठा हो गए। किसी ने धीरे से बच्चे को उठाया। और आखिरकार — माँ और बच्चा फिर से मिल गए। ❤️
सिर्फ 15 मिनट का वो scene किसी फिल्म से कम नहीं था। गिरना, डरना, तलाशना — और फिर प्यार की जीत।
💫 उस पल से मिला संदेश:
कभी-कभी ज़िंदगी में हम भी गिरते हैं, खो जाते हैं। लेकिन Universe हमेशा किसी न किसी रूप में हमारे लिए कूद पड़ता है। बस थोड़ा इंतज़ार करना होता है — प्यार, साहस और उम्मीद के मिलने का। 🕊️✨
👇 क्या आपके साथ भी कोई ऐसा moment आया है? Comment में share करें!
HiteshThaakuur24
ज़िंदगी फुटबॉल गेम की तरह है
अगर फुटबॉल के खेल में कोई खिलाड़ी सामने खड़े 11 खिलाड़ियों के बारे में ही सोचता रहे,तो शायद कभी गोल नहीं कर पाए।
गोल करने के लिए ज़रूरी होता है —गेंद पर नियंत्रण,सही समय पर तेज़ी, कभी धीमापन,ज़रूरत पड़ने पर टकराव,और साथ ही
अपने साथियों के साथ साझेदारी।
फुटबॉल सिर्फ दौड़ नहीं है,
यह निर्णयों का खेल है।
ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है।यहाँ विरोधी खिलाड़ी
हमारी समस्याओं और चुनौतियों की तरह होते हैं।
गेंद हमारे हाथ में नहीं,पर हमारे नियंत्रण में ज़रूर हो सकती है —
अगर अभ्यास लगातार हो।
लक्ष्य,फुटबॉल के goal post की तरह होते हैं।
उन्हें हासिल करने के लिए
अकेलेपन से ज़्यादा
लोगों की ज़रूरत होती है।
कभी पास देना पड़ता है,
कभी खुद आगे बढ़ना होता है।
हर बार गोल नहीं होता —पर हर प्रयास
हमें ज़्यादा skilled बनाता है।और एक बात जो सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ होती है —समय।
हर मैच की एक time limit होती है।
वैसे ही हर मक़सद की भीएक deadline होनी चाहिए।
बिना deadline के लक्ष्य सिर्फ इरादे बनकर रह जाते हैं।
प्रयास करते रहिए।
हार से मत डरिए।
अगर गोल नहीं भी हुआ,तो भी आप खेल का स्तर
ऊँचा कर चुके होंगे।
क्योंकि ज़िंदगी में हर मैच जीतना ज़रूरी नहीं,
लेकिन खेलना पूरे जुनून के साथ
हमेशा ज़रूरी है।
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#youtubecommunity #youtubecreator #motivation #motivation
1 week ago | [YT] | 3
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HiteshThaakuur24
“हर साल ‘अच्छा या बुरा’ नहीं होता…
कुछ साल हमें तोड़ते हैं, कुछ साल हमें गढ़ते हैं
पर हर साल हमें बदल कर ही जाता है।”
✨️" हर बीतता साल — एक नया जीवन "
साल बीत जाता है, यादें छोड़ जाता हैं
और इस दौड़ती–भागती ज़िंदगी में
अच्छे–बुरे अनगिनत निशान छोड़ जाता है।
कुछ यादें मुस्कुराहट बन जाती हैं,
कुछ चुपचाप भीतर बैठ जाती हैं।
पर हर साल कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर दे जाता है
जो हमें थोड़ा और समझदार बना देता है।
दरअसल, साल दर साल गुजरना
कुछ वैसा ही है
जैसे एक परिवार में
अलग–अलग प्रकृति और स्वभाव के लोग होना।
कोई शांत होता है,
कोई नटखट,
कोई कठोर,
तो कोई बेहद सरल और सीधा।
मतभेद होते हैं,
नज़रिए टकराते हैं,
फिर भी हम सबको अपनाते हैं।
अपने मन के भाव
किसी न किसी रूप में
सबके साथ साझा करते हैं।
हर साल भी कुछ ऐसा ही होता है।
हर साल अलग चेहरे,
अलग अनुभव
और अलग–अलग भाव लेकर आता है।
कोई साल सिखाता है,
कोई साल तोड़ता है,
तो कोई साल चुपचाप
हमारे भीतर कुछ जोड़ जाता है।
फिर सवाल उठता है
इसमें अच्छा क्या, बुरा क्या?
शायद यह फर्क करना ही
सबसे बड़ी भूल है।
क्योंकि जो है,
वही जीवन है।
उसी में आनंद है,
उसी में सीख है,
और उसी में आगे बढ़ने की शक्ति भी।
जो मिला है,
उसे स्वीकार कीजिए।
जो सीखा है,
उसे साथ रखिए।
और अपने काम को
नई ऊँचाइयों तक ले जाने की तैयारी कीजिए।
क्योंकि हर बीतता साल
खुद में एक पूरा जीवन होता है —
बस उसे जीने की दृष्टि चाहिए।
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2 weeks ago | [YT] | 8
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HiteshThaakuur24
बंदिशों के साथ रिश्ते नहीं, समझौते चलते हैं…
कल किसी ने मुझसे कहा —
रिश्ता व्यावहारिक होना चाहिए,
ताकि समय और कॉल्स का “दबाव” न रहे।
तर्क सही था,लेकिन अहसास अधूरा।
मुझे लगता है,हम आज स्थिरता (Stability) और भावनाओं (Emotions) की खींचतान में इतने उलझ गए हैं
कि प्रेम को ही बोझ समझने लगे हैं।
जबकि सच यह है —
ज़िम्मेदारी कोई बोझ नहीं, एक वादा है।
स्वतंत्रता कोई दूरी नहीं, एक-दूसरे पर भरोसा है।
अगर किसी रिश्ते की बुनियाद में ही डर बैठा हो,
तो उसकी इमारत प्रेम की नहीं,समझौतों की बनती है।
मैंने जो फैसला लिया,वह इसी सोच से लिया।
सही था या गलत —यह वक्त बताएगा।
लेकिन इतना तय है,मन शांत है।
अब सवाल किसी एक व्यक्ति से नहीं,
हम सब से है —
क्या आज के दौर में
‘बिना शर्त’ वाला प्रेम
वाकई मुश्किल होता जा रहा है?
आप क्या सोचते हैं?
क्या हम प्रेम को बंधन समझ बैठे हैं
या ज़िम्मेदारी को बोझ?
Aaj kal yeh common hai – Responsibility vs Freedom ka full battle.
Tum poll mein vote karo upar!
@youtubecreators @YouTubeIndia @YouTube
1 month ago | [YT] | 4
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HiteshThaakuur24
Life Unplugged: दो रास्तों में फँसोगे, तो कहीं नहीं पहुँचोगे !
हम में से ज़्यादातर लोग ज़िंदगीभर दो रास्तों के बीच फँसे रहते हैं।
सोचते, तुलना करते, फिर उलझते…
और मज़े की बात यह है कि इसे ही “समझदारी” का नाम दे दिया जाता है।
जितनी सैर किताबों की दुनिया में की है,
एक बात हर बार दोहराई मिलती है –
संतुलन,संयम और साहस।
हम में से अधिकांश लोग दो रास्तों के चुनाव में ही अटके रह जाते हैं।
सोचते हैं, समझते हैं,तुलना करते हैं…और फिर वहीं खड़े रह जाते हैं।
ख़ासकर एक ' स्त्री ' से तो यह “अनिवार्य गुण” माना जाता है कि वह हर परिस्थिति में हमेशा “सही रास्ता” चुने।
लेकिन अगर आपको किसी भी क्षेत्र में “नाम” और “काम” – दोनों चाहिए,तो सिर्फ रास्ता चुनने से ज़्यादा ज़रूरी है,अपने भीतर की आग को पहचानना।
आज एक सच साझा कर रहा हूँ,
एक ऐसा सच, जिसे जिसने भी जीवन में उतार लिया,
उसे फिर कोई नहीं रोक पाया।
🔥P – Pagalpan (Creative Madness)
रास्ता वहीं से बदलता है, जहाँ पागलपन शुरू होता है।
थोड़ी-सी दीवानगी, थोड़ा-सा जुनून, थोड़ी-सी आग…
यहीं से दिशा बदलती है और यहीं से इतिहास लिखा जाता है।
🔥P – Patience
पागलपन को भी चलने के लिए ज़मीन चाहिए।
और patience उस ज़मीन का नाम है।
जो इंतज़ार करना सीख गया,
वह जीतना भी सीख गया।
🔥 P – Pyaar
और अंत में – काम से, दुनिया से, लोगों से
और सबसे ज़्यादा,खुद से गहरा प्यार।
यही प्यार मन, मस्तिष्क और अंतरात्मा को
एक ही दिशा में जोड़ देता है।
ये तीनों मिलकर ही असली engine बनाते हैं।
जहाँ Pagalpan spark बनता है,
Patience foundation बनता है,
और Pyaar purpose बन जाता है।
इन तीनों के साथ चलो, फिर देखना –
असम्भव था जो, अब सम्भव होगा।
भाग्य की लकीरों को भी
खुद को बदलना होगा।
💬 एक सवाल आपसे
Pagalpan, Patience और Pyaar –
आपकी ज़िंदगी में इस समय कौन-सा “P” सबसे ज़्यादा कम है?
Comments में ज़रूर लिखना।
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#LifeUnplugged #HindiPost #Mindset #SelfImprovement #Motivation #youtubecommunity @YouTubeIndia
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1 month ago | [YT] | 6
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HiteshThaakuur24
नमस्कार मेरे यूट्यूब के साथियों 🔱
मुझे उम्मीद हैं आप सभी अपने तबीयत का ख्याल रख रहे होंगे..
आजकल मौसम बहुत उतार चढ़ाव से गुजर रहा हैं...
ठंड - गर्मी से भरा हुआ..
खुश रहिए
मुस्कराते रहिए ....
1 month ago | [YT] | 4
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HiteshThaakuur24
आज की Life Unplugged पोस्ट की शुरुआत एक मैसेज से हुई —
एक 25 साल की छोटी बहन ने लिखा:
> “I’m a single child. I’ve learned to manage everything — alone.”
यही line अंदर तक छू गई।
बचपन में जब दो बच्चे होते हैं,
तो वे लड़ते हैं, झगड़ते हैं,
फिर एक-दूसरे को समझते भी हैं।
वो एक-दूसरे के सहारे बन जाते हैं।
हर वक़्त माँ-बाप साथ नहीं हो सकते —
लेकिन भाई या बहन अक्सर वो सहारा होते हैं,
जो हर भावनात्मक खालीपन भर देते हैं।
लेकिन जब घर में एक ही बच्चा होता है,
तो सचाई थोड़ी अलग होती है।
शहरों में आज “एक बच्चे का चलन” बहुत बढ़ रहा है,
और इसके अपने कई व्यावहारिक कारण हैं।
(करियर, खर्चे, लाइफ़स्टाइल, समय आदि)
पर… पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है —
हम एक नई पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जो साथ रहते हुए भी अकेली है।
आज के बच्चों में जो anxiety, depression और emotional instability देखी जा रही है,
उसके कई कारणों में से एक —
single child upbringing भी है।
क्योंकि जब कोई “हमउम्र साथी” नहीं होता,
तो बच्चा अपने भावनात्मक संवाद खुद से करने लगता है।
धीरे-धीरे वही संवाद चुप्पी में बदल जाता है।
हर चीज़ के अपने फायदे-नुकसान होते हैं,
पर हमें ये समझना होगा कि
मानव का विकास हमेशा “संबंधों” से हुआ है, अकेलेपन से नहीं।
अगर आप single child parent हैं —
तो अपने बच्चे को दोस्त, संवाद और belongingness दीजिए।
क्योंकि अकेलापन किसी भी उम्र में
एक बच्चे का सबसे बड़ा डर होता है।
🌿 Let’s Grow Together — with Hitesh Thaakuur 24
#LifeUnplugged #HiteshThaakuur #ModernParenting #SingleChild #EmotionalHealth #UrbanLoneliness #MentalWellness #LifeThoughts #MotivationalPost #Reflection
2 months ago | [YT] | 3
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HiteshThaakuur24
🎧 Life Unplugged – Episode 03: “Self Development is a Myth”
Because life isn’t a project — it’s a process.
Self development is a myth.
ये उस गाजर घास की तरह है जो हर जगह उग आती है —
बिना बुलाए, बिना वजह।
आजकल हर जगह “growth”, “improvement”, “better version of yourself” का शोर है।
लेकिन क्या हमने कभी सोचा —
क्या इस दौड़ में हम खुद को खो नहीं रहे?
जब आप हर पल “आत्म-विकास” के lens से सोचते हैं,
तो ज़िंदगी project बन जाती है।
हर experience एक lesson बन जाता है,
हर moment का meaning निकालने लगते हैं।
और इसी process में
enjoyment गायब हो जाती है।
वो छोटी-छोटी खुशियाँ —
जो ज़िंदगी का असली स्वाद देती हैं —
वो development की किताबों में कहीं खो जाती हैं।
सच्चाई ये है कि
growth is not a goal — it’s a by-product.
जब आप जीते हैं, सीखते हैं, गिरते हैं, हँसते हैं —
विकास अपने-आप होता है।
पर जब आप “develop” होने की कोशिश में जीते हैं,
तो आप जीना भूल जाते हैं।
हर चीज़ को सुधारने की कोशिश
कभी-कभी चीज़ों की सादगी ही खत्म कर देती है।
कभी-कभी बस coffee पीना भी ज़रूरी है —
उसके पीछे meaning ढूँढना नहीं। ☕
यह कोई विरोध नहीं है self-improvement का,
बस एक नज़रिया है —
कि हर चीज़ में सुधार जरूरी नहीं,
कभी-कभी बस महसूस करना ही विकास होता है।
🎙Let's grow together with Hiteshthaakuur 🏪
2 months ago (edited) | [YT] | 3
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HiteshThaakuur24
🎧 Life Unplugged – Episode 02: “सीमाएं कहाँ तक?”
“Are limits protecting you — or holding you back?”
आज सुबह एक लाइन सुनी —
“हर किसी को अपनी सीमाएँ तय करनी चाहिए।”
सुनने में simple लगी…
लेकिन सोचा तो लगा, ये तो life की philosophy है।
अब बात ये है —
सीमाएँ हमेशा सही नहीं होतीं… और हमेशा गलत भी नहीं।
कई बार limits हमें बचाती हैं,
तो कई बार वही limits हमें रोकती हैं।
देखो, इसे हम addiction से समझ सकते हैं —
जिन्हें अपनी habits पर control नहीं होता,
उनके लिए boundaries ज़रूरी हैं।
वो बचाव करती हैं।
लेकिन जब खुद ज़िंदगी ही fix नहीं है,
तो हम अपनी सीमाएँ fix क्यों करें?
क्योंकि चलना ही तो समय है,
और बहना ही तो ज़िंदगी। 🌊
खुद पर नियंत्रण रखते हुए
सीमाएँ तोड़ना कुछ लोगों को गलत लग सकता है,
लेकिन मेरे नज़रिए से —
सीमाएँ अनंत होनी चाहिए।
बस शर्त ये कि उससे किसी और को नुकसान न पहुँचे।
क्योंकि अगर आपकी सीमाएँ
आपके growth को रोक रही हैं,
तो वो boundaries नहीं…
वो पिंजरे हैं।
और अगर “सीमा में रहना”
किसी और को चोट पहुँचा रहा है,
तो शायद वो सीमा नैतिक नहीं,
बस सामाजिक है।
इस मुद्दे पर सही या गलत कुछ नहीं होता,
लेकिन इससे फर्क ज़रूर पड़ता है —
कौन आगे बढ़ता है,
और कौन वहीं रुक जाता है।
2 months ago (edited) | [YT] | 4
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HiteshThaakuur24
Nowadays do you find hard on yourself now ?
2 months ago | [YT] | 2
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HiteshThaakuur24
✨ आज देखा — प्यार की छलांग कैसी होती है 🕊️
कल शाम लगभग 8 बजे की बात है।
मैं अपने दोस्त के साथ बस चाय पी रहा था, रोज़ की तरह।
तभी ऊपर से एक हल्की-सी चीख़ सुनाई दी —
देखा तो एक सफ़ेद बिल्ली का बच्चा पहली मंज़िल से फिसल कर नीचे गिर गया।
वो डर से काँपता हुआ भीड़ में जाकर छिप गया।
और फिर… जो हुआ वो देखने लायक था।
उसकी माँ — वही बिल्ली — बिना एक पल गंवाए ऊपर से सीधा कूद पड़ी।
ये छलांग डर की नहीं थी… ये ममता से भरी छलांग थी। 💛
वो इधर-उधर दौड़ती रही, पुकारती रही।
हमने बच्चे को उठाने की कोशिश की, मगर वो कार के नीचे छिप गया।
लोग चारों ओर इकट्ठा हो गए। किसी ने धीरे से बच्चे को उठाया।
और आखिरकार — माँ और बच्चा फिर से मिल गए। ❤️
सिर्फ 15 मिनट का वो scene किसी फिल्म से कम नहीं था।
गिरना, डरना, तलाशना — और फिर प्यार की जीत।
💫 उस पल से मिला संदेश:
कभी-कभी ज़िंदगी में हम भी गिरते हैं, खो जाते हैं।
लेकिन Universe हमेशा किसी न किसी रूप में हमारे लिए कूद पड़ता है।
बस थोड़ा इंतज़ार करना होता है —
प्यार, साहस और उम्मीद के मिलने का। 🕊️✨
👇 क्या आपके साथ भी कोई ऐसा moment आया है?
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#LifeLessons #RealLifeStory #EmotionalStory #Motivation #Inspiration #HindiStories #Storytelling #LifeExperience #Heartwarming #Positivity
2 months ago | [YT] | 6
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