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Himalayilog| e- Book of Himalayan Civilization | हिमालयीलोग । By Journalist Dr.Harish Chandra Lakhera, New Delhi, India /
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Himalayilog || हिमालयी संस्कृति, इतिहास, लोक, साहित्य और सरोकार आदि का चैनल || हिमालय को लेकर मेरा दृष्टिकोण अफगानिस्तान के हिंदुकुश से लेकर भारत, नेपाल, तिब्बत, भूटान और म्यांमार तक फैली हिमालय की ढलानों पर विकसित सभ्यता है। This YouTube channel is the voice of the Himalayan people | We want a stake in the history of India. Our history should be in the books of history of India.
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2 weeks ago | [YT] | 16

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2 weeks ago | [YT] | 12

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https://youtu.be/Q49jAUt-6UU?si=1naCa...
हिंदू: एक मरती हुई नस्ल?” — यू.एन. मुखर्जी से आज तक।
वर्ष 1914 में यू.एन. मुखर्जी ने एक छोटी-सी किंतु अत्यंत विचारोत्तेजक पुस्तक लिखी थी—**“Hindus: A Dying Race” (हिंदू: एक मरती हुई नस्ल)**। यह पुस्तक ब्रिटिश शासनकाल में प्रकाशित हुई थी, जब भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। मुखर्जी ने 1911 की जनगणना के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि यदि जनसंख्या, सामाजिक संगठन और राजनीतिक चेतना के स्तर पर हिंदू समाज ने आत्ममंथन नहीं किया, तो भविष्य में भारत का भूगोल और स्वरूप बदल सकता है। आश्चर्यजनक रूप से, उसी विश्लेषण के आधार पर उन्होंने आगे चलकर एक अलग मुस्लिम राष्ट्र के उभरने—अर्थात पाकिस्तान—की संभावना भी व्यक्त की थी। उस समय यह भविष्यवाणी अतिशयोक्ति लगती थी, किंतु 1947 में भारत का विभाजन मुखर्जी की चेतावनी को ऐतिहासिक यथार्थ में बदल गया। यह विभाजन केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि एक दीर्घ सांस्कृतिक और सभ्यतागत विघटन का परिणाम था। कभी भारतवर्ष या आर्यावर्त कहलाने वाला यह भूभाग—जिसमें आज का अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, तिब्बत, श्रीलंका, म्यांमार, ईरान, ताजिकिस्तान, सिंध और बलूचिस्तान तक शामिल थे—समय के साथ खंड-खंड होता चला गया।

इतिहास साक्षी है कि भारतीय सभ्यता और हिंदू संस्कृति का प्रभाव केवल उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं था। मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, कंबोडिया, दक्षिणी वियतनाम, फिलीपींस जैसे देशों में कभी हिंदू धर्म, दर्शन और प्रतीकों का व्यापक प्रभाव रहा। आज वहां केवल अवशेष बचे हैं, जबकि मूल भूमि भारत स्वयं सिमटती हुई प्रतीत होती है।
आधुनिक आंकड़े भी चिंतन को बाध्य करते हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, 1950 से 2015 के बीच भारत में हिंदुओं की जनसंख्या का अनुपात 7.82 प्रतिशत घटा, जबकि इसी अवधि में मुस्लिम जनसंख्या में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यही प्रवृत्ति पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में भी दिखाई देती है, जहां बहुसंख्यक आबादी बढ़ी और अल्पसंख्यक सिमटते चले गए। नेपाल में हिंदुओं और म्यांमार में बौद्धों की संख्या में गिरावट भी इसी वैश्विक पैटर्न की ओर संकेत करती है।

आज जब “हिंदू राष्ट्र” की बातें जोर-शोर से की जा रही हैं, तब केवल भावनात्मक नारों से काम नहीं चलेगा। प्रश्न यह है कि क्या हिंदू धर्म और समाज वास्तव में सुरक्षित है? यदि धर्म ही कमजोर होता चला गया, तो राष्ट्र का स्वरूप कैसे टिकेगा? साधु-संतों, आश्रमों और धार्मिक संस्थाओं की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे केवल प्रवचनों तक सीमित न रहें, बल्कि दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और गरीब वर्गों को शिक्षा, सेवा और सम्मान के माध्यम से हिंदू समाज से जोड़े रखें—वैसा ही संगठित प्रयास, जैसा अन्य धर्मों के प्रचारक करते हैं।

यू.एन. मुखर्जी की पुस्तक आज भी एक चेतावनी की तरह हमारे सामने है। **भारत तभी हिंदू राष्ट्र बन सकता है, जब हिंदू धर्म सुरक्षित रहेगा। और धर्म तभी बचेगा, जब समाज जागरूक, संगठित और आत्मावलोकन के लिए तैयार होगा।** धर्म बचेगा, तभी संस्कृति बचेगी—और संस्कृति बचेगी, तभी सभ्यता का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

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3 weeks ago | [YT] | 8

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https://youtu.be/Q49jAUt-6UU?si=TBrh7... आज जब “हिंदू राष्ट्र” की बातें जोर-शोर से की जा रही हैं, तब केवल भावनात्मक नारों से काम नहीं चलेगा। प्रश्न यह है कि क्या हिंदू धर्म और समाज वास्तव में सुरक्षित है? यदि धर्म ही कमजोर होता चला गया, तो राष्ट्र का स्वरूप कैसे टिकेगा? साधु-संतों, आश्रमों और धार्मिक संस्थाओं की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे केवल प्रवचनों तक सीमित न रहें, बल्कि दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और गरीब वर्गों को शिक्षा, सेवा और सम्मान के माध्यम से हिंदू समाज से जोड़े रखें—वैसा ही संगठित प्रयास, जैसा अन्य धर्मों के प्रचारक करते हैं।यू.एन. मुखर्जी की पुस्तक आज भी एक चेतावनी की तरह हमारे सामने है। **भारत तभी हिंदू राष्ट्र बन सकता है, जब हिंदू धर्म सुरक्षित रहेगा। और धर्म तभी बचेगा, जब समाज जागरूक, संगठित और आत्मावलोकन के लिए तैयार होगा।** धर्म बचेगा, तभी संस्कृति बचेगी—और संस्कृति बचेगी, तभी सभ्यता का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

3 weeks ago | [YT] | 6

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https://youtu.be/Q49jAUt-6UU?si=TBrh7... इतिहास साक्षी है कि भारतीय सभ्यता और हिंदू संस्कृति का प्रभाव केवल उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं था। मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, कंबोडिया, दक्षिणी वियतनाम, फिलीपींस जैसे देशों में कभी हिंदू धर्म, दर्शन और प्रतीकों का व्यापक प्रभाव रहा। आज वहां केवल अवशेष बचे हैं, जबकि मूल भूमि भारत स्वयं सिमटती हुई प्रतीत होती है।आधुनिक आंकड़े भी चिंतन को बाध्य करते हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, **1950 से 2015 के बीच भारत में हिंदुओं की जनसंख्या का अनुपात 7.82 प्रतिशत घटा**, जबकि इसी अवधि में **मुस्लिम जनसंख्या में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि** दर्ज की गई। यही प्रवृत्ति पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में भी दिखाई देती है, जहां बहुसंख्यक आबादी बढ़ी और अल्पसंख्यक सिमटते चले गए। नेपाल में हिंदुओं और म्यांमार में बौद्धों की संख्या में गिरावट भी इसी वैश्विक पैटर्न की ओर संकेत करती है।

3 weeks ago | [YT] | 8

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हिंदू: एक मरती हुई नस्ल?” — यू.एन. मुखर्जी से आज तक। https://youtu.be/Q49jAUt-6UU?si=TBrh7...
वर्ष 1914 में यू.एन. मुखर्जी ने एक छोटी-सी किंतु अत्यंत विचारोत्तेजक पुस्तक लिखी थी—**“Hindus: A Dying Race” (हिंदू: एक मरती हुई नस्ल)**। यह पुस्तक ब्रिटिश शासनकाल में प्रकाशित हुई थी, जब भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। मुखर्जी ने 1911 की जनगणना के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि यदि जनसंख्या, सामाजिक संगठन और राजनीतिक चेतना के स्तर पर हिंदू समाज ने आत्ममंथन नहीं किया, तो भविष्य में भारत का भूगोल और स्वरूप बदल सकता है। आश्चर्यजनक रूप से, उसी विश्लेषण के आधार पर उन्होंने आगे चलकर एक अलग मुस्लिम राष्ट्र के उभरने—अर्थात पाकिस्तान—की संभावना भी व्यक्त की थी।
उस समय यह भविष्यवाणी अतिशयोक्ति लगती थी, किंतु 1947 में भारत का विभाजन मुखर्जी की चेतावनी को ऐतिहासिक यथार्थ में बदल गया। यह विभाजन केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि एक दीर्घ सांस्कृतिक और सभ्यतागत विघटन का परिणाम था। कभी भारतवर्ष या आर्यावर्त कहलाने वाला यह भूभाग—जिसमें आज का अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, तिब्बत, श्रीलंका, म्यांमार, ईरान, ताजिकिस्तान, सिंध और बलूचिस्तान तक शामिल थे—समय के साथ खंड-खंड होता चला गया।

3 weeks ago | [YT] | 9

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क्या हिमालय बदल रहा है?

खतरे में हिमालय। बढ़ रहे हैं अब्राहिमी, डराता है भविष्य !-- यह वीडियो देखिए और हिमालय के खतरों को देखिए।
https://www.youtube.com/watch?v=SeB1-...

यह वही हिमालय है जिसने हजारों वर्षों तक भारतीय उप महाद्वीप की सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिकता की रक्षा की। पर आज, इसी हिमालय पर इब्राहिमी प्रभाव, जनसांख्यिक बदलाव, रोहिंग्या का घुसपैठ, और अवैध इस्लामी धार्मिक ढांचे—पहाड़ों के मूल चरित्र पर सबसे बड़ा खतरा बनकर खड़े हो गए हैं।
जम्मू–कश्मीर तो पहले ही डेमोग्राफिक बदलाव का बड़ा उदाहरण था, लेकिन अब यह आग हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, नेपाल, और अरुणाचल तक पहुँच चुकी है।
उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों में 500 से अधिक अवैध मज़ारें तोड़ी गईं, पर यह सिर्फ शुरुआत है। राज्य में अब मुस्लिम आबादी लगभग 22% तक पहुँच चुकी है।
हिमाचल—जो कभी “पूरी तरह सनातनी पहाड़” कहा जाता था—आज 5% से अधिक मुस्लिम अंकों की ओर बढ़ रहा है।
सीमा क्षेत्रों—उत्तराखंड–उत्तर प्रदेश–बिहार–नेपाल की पट्टी पर—तेजी से मस्जिदें और मदरसे खड़े हो चुके हैं।
जम्मू में रोहिंग्या बसाए जा चुके हैं, और खुफिया रिपोर्टें बताती हैं कि इनकी आवाजाही हिमालयी राज्यों तक पहुँच रही है।
सवाल बड़ा है—
क्या अगले 20 वर्षों में हिमालय अपना पारंपरिक सांस्कृतिक चरित्र खो देगा?
क्या यह बदलाव सिर्फ संयोग है, या किसी बड़े खेल की शुरुआत?
क्या पहाड़ों का भविष्य सुरक्षित है?
क्या आपने कभी सोचा है कि आने वाले 20–25 वर्षों में पूरा हिमालय—देवभूमि—अपनी मूल पहचान खो भी सकता है?
यह सिर्फ़ कल्पना नहीं… बल्कि बदलते आँकड़े, बढ़ता माइग्रेशन, और ज़मीन पर दिखते संकेत यह कह रहे हैं। जम्मू से लेकर अरुणाचल तक, इब्राहिमी धर्मों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। कहीं अवैध मज़ारें उग रही हैं, कहीं सीमावर्ती मस्जिदें अचानक खड़ी हो रही हैं, कहीं मिशनरी नेटवर्क गाँव-गाँव में फैल रहे हैं, और किसी जगह रोहिंग्या जैसी बाहरी आबादी बस रही है।
हिमालय का शांत, सांस्कृतिक और रक्षात्मक चरित्र अब दबाव में है।

1 month ago | [YT] | 8

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खतरे में हिमालय। बढ़ रहे हैं अब्राहिमी, डराता है भविष्य !-- यह वीडियो देखिए और हिमालय के खतरों को देखिए।
https://www.youtube.com/watch?v=SeB1-...

1 month ago | [YT] | 14

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खतरे में हिमालय। बढ़ रहे हैं अब्राहिमी, डराता है भविष्य !-- यह वीडियो देखिए और हिमालय के खतरों को देखिए।
https://www.youtube.com/watch?v=SeB1-...

1 month ago | [YT] | 6

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https://www.youtube.com/watch?v=PouXN...
गुलशन नंदा: वामपंथी साहित्य की कब्र पर खड़ा कोलोसस । अनसुनी कहानी। यह वीडियो देखी?

1 month ago | [YT] | 13