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Unnat Farming

क्या आपने कभी सोचा है 🤔
सफेद मक्खी (Whitefly) पीले कार्ड पर ही क्यों जाती है?
इस वीडियो में आप जानेंगे: 🟡 पीला स्टिकी ट्रैप कैसे काम करता है
🧠 सफेद मक्खी की आँखें रंग कैसे देखती हैं
🌱 क्यों पीला रंग उसे नई पत्तियों जैसा लगता है
🪤 और कैसे बिना ज़हर के कीट नियंत्रण संभव है
👉 ये कोई जादू नहीं है…
ये है साइंस से किया गया Vision Hack!
यह तरीका: ✔️ केमिकल-फ्री है
✔️ किसानों के लिए सुरक्षित है
✔️ वायरस फैलाने वाली सफेद मक्खी को कंट्रोल करता है

2 weeks ago | [YT] | 7

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धान मे कीट पतंगों का नियत्रण

खरपतवार नियंत्रण: 

धान के मेड़ों और आस-पास से खरपतवारों को नियमित रूप से हटाते रहें, क्योंकि ये कीटों के छिपने और पनपने का स्थान होते हैं। 

नीम केक का उपयोग: 

नर्सरी में 12.5 किलोग्राम नीम केक प्रति 10 मीटर वर्ग की दर से डालें, इससे कीटों का प्रकोप कम होता है। 

जैविक उपचार: 

स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस का उपयोग करके बीज उपचार करें और रोपाई के 45 दिनों बाद 10-दिवसीय अंतराल पर तीन बार खड़ी फसल पर छिड़काव करें। 

फसल चक्र: 

फसल चक्र अपनाना भी कीटों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करता है। 

रासायनिक तरीके

चूसक कीट (तेला/बग): 

यदि तेला या बग का प्रकोप अधिक हो, तो बुप्रोफेज़ीन (ट्रिब्यून 25 एस.सी.) की 330 मिली मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 

तना छेदक: 

तना छेदक से प्रभावित पत्तियों और तनों को नष्ट करें और अत्यधिक नाइट्रोजन युक्त उर्वरक का प्रयोग न करें, क्योंकि यह कीटों के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। 

अंतिम उपाय: 

रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग तभी करें जब जैविक और सांस्कृतिक तरीके प्रभावी न हों और विशेषज्ञों से परामर्श करें। 

4 months ago | [YT] | 6

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Leaf curl disease नियंत्रण के तरीके

स्वस्थ पौधों का चयन:

रोग से बचने के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें और ऐसे पौधे चुनें जो वायरस से मुक्त हों. 

खेत की सफाई:

खेत और उसके आसपास के खरपतवारों को साफ करें क्योंकि ये कीटों को पनपने का मौका देते हैं. 

कीट नियंत्रण:

नीम तेल: सफेद मक्खियों को नियंत्रित करने के लिए नीम तेल का छिड़काव करें. 

पीला स्टिकी जाल: खेत में पीले स्टिकी जाल लगाएं, जो सफेद मक्खी को फंसाकर उनकी संख्या कम करते हैं. 

प्राकृतिक शत्रु: लेडीबग और परजीवी ततैया जैसे प्राकृतिक शत्रुओं को बढ़ावा दें जो सफेद मक्खी पर नियंत्रण रखते हैं. 

संक्रमित पौधों को हटाना:

लीफ कर्ल रोग के लक्षण दिखने वाले पौधों को तुरंत हटा दें और नष्ट कर दें, ताकि वायरस फैलने से रोका जा सके. 

सही समय पर बुवाई:

समय पर बुवाई करके फसल को वायरस के प्रकोप से पहले स्थापित होने में मदद मिल सकती है. 

उचित जल निकासी और उर्वरक प्रबंधन:

पौधों के लिए पर्याप्त नमी बनाए रखें और नाइट्रोजन जैसे उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग करने से बचें, जबकि फास्फोरस की उचित मात्रा प्रदान करें. 

फसल चक्र:

एक ही खेत में बार-बार संवेदनशील फसलें लगाने से बचें. 

leaf curl of chilli: मिर्च के पर्णकुंचन/कुकड़ा रोग की संपूर्ण जानकारी

Conclusion | सारांश - मिर्च की फसल में पर्णकुंचन/कुकड़ा रोग leaf curl of chilli एक बड़ी बीमारी है जिसका कारण सफेद मक्खी है, जो वायरस को फैलाती है। यह रोग कई पौधों को प्रभावित करता है, और किसानों को नुकसान पहुंचा सकता है।

4 months ago | [YT] | 7

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धान की फसल में काई (हरी परत / नीली-हरी शैवाल) और खरपतवार बड़ी समस्या बन जाते हैं। ये पौधों की जड़ों तक हवा और पोषक तत्व पहुँचने में बाधा डालते हैं और पैदावार कम कर देते हैं।

### धान में काई एवं खरपतवार प्रबंधन (Management)

#### 1. **सांस्कृतिक (Cultural) उपाय**

* **सही जल प्रबंधन** – खेत में लगातार अधिक पानी भरकर न रखें। हल्की नमी और 2-5 से.मी. पानी बनाए रखना उचित है।
* **खेत की अच्छी जुताई** – गहरी जुताई करके काई और खरपतवारों के बीज नष्ट करें।
* **सही लेवलिंग (समतल खेत)** – समतल खेत होने से पानी एक जगह इकट्ठा नहीं होता और काई नहीं जमती।

#### 2. **यांत्रिक (Mechanical) उपाय**

* **हाथ से निराई/कोडाई** – छोटे खेतों में खरपतवार निकालने का यह सबसे आसान तरीका है।
* **कोनो वीडर / पावर वीडर** – धान की कतारों में चलाकर खरपतवार को नष्ट किया जा सकता है।

#### 3. **रासायनिक (Chemical) उपाय**

* धान रोपाई के **2-3 दिन के भीतर** (Pre-emergence) खरपतवारनाशी का प्रयोग करें।

* **ब्यूटाक्लोर 50% EC** – 1.5 लीटर/एकड़
* **प्रीटिलाक्लोर 50% EC (Sofit)** – 600 मिली/एकड़
* **पाइरीफोसेस-एथाइल** – काई नियंत्रण में प्रभावी
* यदि खरपतवार उग आए हों (Post-emergence stage, 15-20 दिन बाद)

* **बिस्पायरीबैक सोडियम (Nominee Gold 10% SC)** – 100 मिली/एकड़
* **पेनोक्सासल्फ्यूरॉन 4% SC** – 250 मिली/एकड़

#### 4. **जैविक उपाय**

* **धैंचा हरी खाद** या अन्य हरी खादों का प्रयोग करने से खरपतवार व काई की वृद्धि कम होती है।
* **नीली-हरी शैवाल (Blue Green Algae)** यदि अधिक हो तो खेत सूखने दें और हल्की जुताई करें।

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👉 संक्षेप में:

* खेत की **सही लेवलिंग और जल प्रबंधन** सबसे जरूरी है।
* शुरुआती दिनों में **प्री-इमर्जेंस खरपतवारनाशी** का छिड़काव करें।
* बाद में जरुरत हो तो **पोस्ट-इमर्जेंस दवाओं** का प्रयोग करें।
* छोटे खेतों में हाथ से निराई भी प्रभावी है।

4 months ago (edited) | [YT] | 11

Unnat Farming

ये ग्रीन प्लांट हॉपर्स है जो धान की फसल मे तुंगरो की बीमारी फैलाती है, ये बीमारी वायरस के द्वारा होती है
इस बीमारी से बचने और प्लांट हॉपर्स का कंट्रोल करने के लिए फिप्रॉनिल इनसीक्टिसीडे का प्रयोग कर सकते है

4 months ago (edited) | [YT] | 7

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यह धान का झुलसा रोग का लक्षण है।
यह बैक्टीरिया जनित होता है इसलिए इस बीमारी का कंट्रोल करने के लिए किसी फंगीसाइड का स्प्रे ना करें कॉपर रहित बैक्टेरसाइड या फिर एंटीबायोटिक के प्रयोग से ही इसको कंट्रोल किया जा सकता है

4 months ago | [YT] | 8

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4 months ago (edited) | [YT] | 8

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11 months ago | [YT] | 6